Submit your post

Follow Us

पूर्व CJI रंजन गोगोई ने अयोध्या पर फैसला और राज्यसभा सांसद बनाए जाने पर अब क्या कहा?

फॉर्मर चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई की ऑटोबायोग्राफी आई है. किताब का नाम – Justice for The Judge. बुक लॉन्चिंग के मौके पर इंडिया टुडे टीवी और आज तक न्यूज चैनल के डायरेक्टर राहुल कंवल ने गोगोई से कई मुद्दों पर बात की. अयोध्या पर फैसला, गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप, राज्यसभा में एंट्री से लेकर तमाम राष्ट्रीय मुद्दों पर गोगोई ने अपनी बात रखी. सुप्रीम कोर्ट से जुड़े कुछ खुलासे भी किए. इंडिया टुडे के इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में पूर्व CJI ने क्या-क्या कहा, जानते हैं.

#अयोध्या जजमेंट-

पूर्व CJI रंजन गोगोई का कहना है,

मैंने अयोध्या मामले को फिर से जिंदा नहीं किया. मुझसे पहले CJI ने मुझे एक डेट दी थी. मेरे पास दो विकल्प थे, मैं मामले से भाग सकता था, छिप सकता था. जैसा कि जस्टिस बोबडे ने बताया कि मैं योद्धाओं के परिवार से आता हूं, इसलिए मैंने लड़ाई लड़ी. मैं सो कैसे सकता था? सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता और पांच जजों के वक़्त की बर्बादी की बात थी. मैंने ये बोझ अपने ऊपर ले लिया. अगर मैं इस जॉब को पूरा करने में सक्षम न होता तो मुझे नौकरी ही नहीं करनी चाहिए थी.

#कश्मीर मामलों पर-

उन्होंने बताया कि जब कश्मीर मामले आए, तब तक जजेज़ की बेंच अयोध्या मामले की आधी सुनवाई कर चुकी थी. अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान 1.5 महीने बाद, 30 सितंबर को, मैंने कश्मीर के मामलों को, मेरे बाद दूसरे सीनियर मोस्ट जज की बेंच को सौंप दिया. मैंने कश्मीर के मामलों को ठंडे बस्ते में नहीं जाने दिया. मीडिया का कहना है कि CJI के पास कश्मीर मामलों के लिए वक़्त नहीं है. मीडिया जो नहीं कहती है, वो ये है कि- CJI ने उसी दिन अगले अवेलेबल जज को कश्मीर के मामले सौंप दिए थे.

#सुप्रीम कोर्ट के जजों के मामलों में हस्तक्षेप पर-

जजों को रोज़ाना किस तरह से काम करना चाहिए, इसमें कोई मुख्य न्यायाधीश हस्तक्षेप नहीं करता है. सभी जज ‘सुप्रीम कोर्ट के जज’ होते हैं. आपको उनके साथ सम्मान के साथ पेश आना होगा. मान लीजिए CJI ने किसी केस को बेंच X को सौंपा. अब बेंच X  उस केस को कैसे हैंडल कर रही है, इसकी मॉनिटरिंग नहीं की जाती. बेंच से सवाल नहीं किये जाते. यह वैसा कुछ नहीं है जो ज्युडिशियरी में होता है. किसी मामले की सुनवाई कैसे की जाएगी ये बेंच डिसाइड करती है, जजेज़ को भी CJI का हस्तक्षेप पसंद नहीं है.

#यौन उत्पीड़न के आरोपों पर-

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट की ही एक कर्मचारी ने उस वक़्त CJI रहे रंजन गोगोई पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया था. इसके बाद जस्टिस गोगोई, जस्टिस बोबडे और एक अन्य जज की तीन सदस्यीय बेंच ने गोगोई पर लगे इस मामले की जांच की थी. गौरतलब ये है कि खुद गोगोई इस बेंच में शामिल थे. बेंच ने इस मामले में गोगोई को क्लीनचिट दे दी थी.

उन्होंने कहा,

आख़िरी में शायद मुझे बेंच में शामिल नहीं होना चाहिए था. लेकिन आप क्या करेंगे?  अगर आपकी 45 वर्षों से ज्यादा की मेहनत से कमाई प्रतिष्ठा को रातों-रात डिस्ट्रॉय करने की कोशिश की जाए, तो क्या लॉजिकल और रेशनल रहकर काम करने , नियमों पर चलने की उम्मीद की जाएगी?  ‘क्या CJI इंसान नहीं हैं’ और बेंच ने क्या ऑर्डर दिया था? बस इतना कि हम उम्मीद करते हैं कि प्रेस सतर्क रहे. और मीडिया कह रहा है कि जस्टिस गोगोई खुद बेंच में बैठ गए और खुद को क्लीन चिट दे दी. हम सभी गलतियां करते हैं. आखिर में,  मुझे बेंच में नहीं होना चाहिए था.

जस्टिस गोगोई और PM मोदी (फोटो सोर्स -Narendra Modi Twitter)
जस्टिस गोगोई और PM मोदी (फोटो सोर्स -Narendra Modi Twitter)

#कोर्ट के अंदर की इन-हाउस इन्क्वायरी पर-

उन्होंने कहा कि हम सभी ज्युडिशियरी की आज़ादी की बात करते हैं और हम इसमें भरोसा भी रखते हैं. न्यायपालिका के स्वतंत्र होने के लिए ज़रूरी है कि न्यायाधीश भी स्वतंत्र हों. इन-हाउस इन्क्वायरी प्रोसीजर 1999 से चलन में है. यह जजेज़ के लिए अपनी आज़ादी बनाए रखने की प्रक्रिया है. कोई भी टॉम, डिक और हैरी जजेज़ पर आरोप लगा दे तो किसी आउटसाइडर्स से इन्वेस्टीगेशन नहीं कराई जाती है.  इन-हाउस पूछताछ इन्क्वायरी बिना अथॉरिटी के होने वाली प्रक्रिया नहीं है. प्रथम दृष्टया निष्कर्ष के लिए जज को इस्तीफा देना होता है. और अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो मामला राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास महाभियोग शुरू करने के लिए जाता है. इसका विकल्प है – ICC, इन्टर्नल कम्प्लेंट्स कमिटी.आप जानते हैं कि ICC का प्रमुख कौन है? एडिशनल रजिस्ट्रार.

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुझे खुशी होती अगर मुद्दे की सुनवाई एडिशनल रजिस्ट्रार द्वारा होती. मुझे जो कहना था, एडिशनल रजिस्ट्रार सुन लेता. मैंने खुद को मुश्किल में डाल दिया. जस्टिस बोबडे मुझे दोषी ठहराकर खुश होते. उन्हें CJI के रूप में 7 महीने का एडिशनल टेन्योर मिलता. अगर कोई एडिशनल रजिस्ट्रार कमिटी को लीड कर रहा होता, तो मैं उसे चैंबर में बुलाता और कहता कि मेरे पक्ष में ऑर्डर पास करो.

उन्होंने आगे कहा,

महिला मेरे कार्यकाल के बाद नहीं उसी दौरान बहाल हुई. उन्होंने मानवीय आधार पर जस्टिस बोबडे को लेटर लिखकर अपनी नौकरी वापस करने की रिक्वेस्ट की. जस्टिस बोबडे ने मुझे लेटर भेजा. मैंने जस्टिस बोबडे से कहा कि मैं निर्णय नहीं ले सकता,  आप ही इस मामले को देखें. जस्टिस बोबडे एक दयालु व्यक्ति हैं. उन्होंने उस महिला को बहाल कर दिया. जस्टिस बोबडे एक दयालु व्यक्ति हैं.(दोबारा कहा) उन्होंने दो और ऑफिसर्स को बहाल कर दिया जिन्हें मैंने जुडिशियल ऑर्डर की जालसाजी के आरोप में हटा दिया था. क्या मैंने कभी पूछा कि ऐसा क्यों किया? आपको क्या लगता है आपके साथ किसने साजिश की? मैं कल्पनाएं नहीं करता, सबूतों के हिसाब से चलता हूं. मैं अंदाज़े नहीं लगाता. आप मेरे मुंह में अपने शब्द डाल रहे हो.

#प्रेस कांफ्रेंस के पीछे सोच-

गोगोई से राहुल कंवल का अगला सवाल था, प्रेस कांफ्रेंस में आप कहते हैं कि आप पूरी तरह से नहीं जानते थे कि आप क्या कर रहे हैं?

इस पर गोगोई कहते हैं ये कहना बहुत आसान है कि मुझे नहीं पता था कि मैं क्या कर रहा हूं. ये कोई भी कह सकता है, लेकिन ये काफ़ी नहीं है. हमने प्रेस को संबोधित किया, और यही मेरा आइडिया था. मुझे लगा कि हम उन कुछ पत्रकारों से मिलने जा रहे हैं जिन्हें हम रोज़ देखते हैं. हम चाहते थे कि तत्कालीन CJI मिश्रा की एप्रोच उस तरह की हो जो हम चार जजेज़ के हिसाब से सही थी. लेकिन हमारी कोशिश नाकाम रही. CJI मिश्रा अच्छी और बुरी कुछ वजहों से ऐसा करने को तैयार नहीं हुए. तब हमें ये प्रेस कांफ्रेंस करनी पड़ी. ये पहली बार था और उम्मीद है कि आखिरी हो जब जजेज़ ने किसी प्रेस कांफ्रेंस कों एड्रेस किया हो.

भारत के इतिहास में ये पहला मौक़ा था जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने प्रेस कांफ्रेंस की हो (फोटो सोर्स - reuters)
भारत के इतिहास में ये पहला मौक़ा था जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने प्रेस कांफ्रेंस की हो (फोटो सोर्स – reuters)

# हेडलाइन थी कि लोकतंत्र खतरे में है-

मैं इस बारे में बहुत कम आश्वस्त हूं कि लोकतंत्र खतरे में है. ये बात उतनी ही सही है जितना कि ये कि मेरा राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन अयोध्या मामले में फैसला देने के बदले हुआ. ये सब बकवास है. आपको अखबारों को बेचना होता है.

#ज्युडिशियरी में हस्तक्षेप-

गोगोई बोले, कोई आएगा और रंजन गोगोई को बताएगा कि क्या करना है? सबसे पहले मैं अपने वारियर स्किल्स दिखाऊंगा. दूसरी चीज जो मैं करूंगा वो ये कि मैं ऑल इंडिया रेडियो को कॉल करूंगा. वास्तव में CJI के ऑफिस में PMO, होममिनिस्टर और लॉ मिनिस्टर से बात करने के लिए एक हॉटलाइन फोन था. मैंने हॉटलाइन हटा दी. एग्जीक्यूटिव लेवल पर हस्तक्षेप कई तरह होता है, इसपर भी निर्भर करता है कि पोस्ट क्या है. मैं पीएम से तब मिला जब वो सुप्रीम कोर्ट आए थे. मुझे किसी ऐसे व्यक्ति का फोन आया जो पीएम की तरह लग रहा था. मैंने कॉल का जवाब नहीं दिया. और जब IB के डायरेक्टर से जांच करने को कहा, उन्होंने बताया कि ये कॉल PM के ऑफिस से नहीं थी. तब के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद मेरे अच्छे दोस्त हैं. हमने साथ में चाय समोसा किया. क्या कानून मंत्री से मिलना गुनाह है? और मैं कानून मंत्री से नहीं मिला, बल्कि अपने दोस्त रविशंकर प्रसाद से मिला. और हां, राष्ट्रपति ने मेरे पूरे परिवार को बुलाया और हमने साथ में एक प्राइवेट डिनर किया. उसमें कोई दिक्कत नहीं है.

रंजन गोगोई बाएं (फोटो सोर्स -ट्विटर)
रंजन गोगोई बाएं (फोटो सोर्स -ट्विटर)

#रफाएल जजमेंट से पहले PM मोदी की सुप्रीम कोर्ट विजिट-

गोगोई कहते हैं कि 26 नवंबर को पीएम आए थे, यानी संविधान दिवस, कानून दिवस की छुट्टी के दिन. बिम्सटेक(BIMSTEC) देश यानी बांग्लादेश, नेपाल, इंडिया, भूटान, श्रीलंका के  मुख्य न्यायाधीशों को आमंत्रित किया गया था. और प्रधानमंत्री डिनर पर आए. कुछ जज जो तब PM के साथ सेल्फी ले रहे थे, वे आज एक्टिविस्ट जज हैं और PM की आलोचना करते हैं.

#राज्य सभा में नामांकन पर-

आप मुझे क्या स्वीकार करना पसंद करेंगे? गवर्नरशिप? या मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष? या कानून आयोग का अध्यक्ष? ये वे पद हैं जो रिटायर्ड जजों के लिए खुले हैं. डेढ़ साल से मैंने राज्यसभा से एक पैसा भी नहीं लिया है. मैं अपनी जेब से ऑफिस को मदद भी दे रहा हूं. यह राष्ट्रपति द्वारा आर्टिकल 80 के तहत किया गया नॉमिनेशन है. अनुच्छेद 80 पर संविधान सभा की डिबेट देखिए. इसमें 12 मनोनीत सदस्य हैं. जिनमें से 9 पॉलिटिकल पार्टीज़ में शामिल हो गए हैं. जो तीन नहीं शामिल हुए वो हैं- मैरी कॉम, नरेंद्र यादव और मैं. मैंने किसी के द्वारा गवर्न न होने के अपने राइट को मेंटेन रखा है. मैं सरकार के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार व्यक्त करने के लिए आज़ाद हूं. जब मेरे मन में सरकार के खिलाफ़ विचार आए, तो शोर मचा जिसने मुझे और मज़बूत किया. मैं इस तरह की गैर-संवैधानिक चीज़ो के आगे नहीं झुकूंगा. ज्युडिशियरी में हस्तक्षेप कोई नियमित बात नहीं है. क्या आपको लगता है कि कार्यपालिका, न्यायपालिका को रखने में कोई दिलचस्पी नहीं रखती?  इंडिपेंडेंट ज्युडिशियरी एक नेशनल एसेट है.5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी के लिए एक एफेक्टिव ज्युडिशियरी की जरूरत है. कार्यपालिका, इंडिपेंडेंट ज्युडिशियरी क्यों नहीं चाहेगी?

#एनआरसी(NRC) पर-

गोगोई ने कहा, आपसे किसने कहा कि सरकार NRC को आगे बढ़ाना चाहती है? मेरी किताब की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति यह है कि जो सही है वह कहा नहीं गया और जो कहा गया वह सही नहीं है. मेरा विचार NRC के चैप्टर में है. कोई भी NRC नहीं चाहता था, लेकिन NRC एक संवैधानिक दायित्व है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा किया.

#Armed Force Special Powers Act (AFSPA) पर-

AFSPA को खत्म करने की मांग 40 साल से चल रही है. सेना और अर्धसैनिक बलों को सख्त पावर्स दी जाती हैं, जिनके चलते दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होती हैं. नागालैंड का इंसिडेंट दुर्भाग्यपूर्ण है, ये एक भूल थी. मेरा विचार जल्दबाजी में निर्णय लेने का नहीं, बल्कि संतुलन बनाने का है. यह कार्यपालिका का काम है.  कभी आप AFSPA की ज़रूरत महसूस करते हैं, तो कभी इसे वापस लेने की.

#कॉलेजियम प्रणाली और न्यायाधीशों की नियुक्ति-

गोगोई कहते हैं ये सबसे मुश्किल सवाल है. कॉलेजियम में बतौर CJI  मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई. कॉलेजियम ने 14 सुप्रीम कोर्ट जजों के अलावा 27 चीफ़ जस्टिस की नियुक्ति की. लंबी चर्चा के बाद सहमति बनी. और जैसा किस्मत में हो, हमने हर नाम पर आम सहमति बनाने का प्रबंधन किया. हर सिस्टम के अपने प्लस और माइनस होते हैं. सब कुछ बैलेंस्ड होना चाहिए. मैं गुवाहाटी हाई कोर्ट को मेंशन करना चाहूंगा. ये अकेला हाई कोर्ट है जो पूरी ताकत से काम कर रहा है. बाकी आधी क्षमता से काम कर रहे हैं. क्यों? क्योंकि CJI के रूप में, मैंने अपने हाईकोर्ट (गुवाहाटी) के चीफ़ जस्टिस को क्लियर कर दिया था कि आपको मेरे पास प्रायर अप्रूवल के लिए नहीं आना चाहिए. मेरा मानना ​​है कि जस्टिस हृषिकेश रॉय भी ऐसा ही कर रहे हैं. गुवाहाटी हाईकोर्ट एक मॉडल है. आप किसी जज से छुटकारा कैसे पाते हैं? ये प्रक्रिया राजनीतिक है. जजेज़ को हटाने का अधिकार जजेज़ को नहीं है. राज्यसभा और लोकसभा को है जो इसे तय करती है.

रंजन गोगोई (फोटो सोर्स -पीटीआई)
रंजन गोगोई (फोटो सोर्स -पीटीआई)

#राज्यसभा में कार्यकाल कैसा गुज़र रहा?

टेन्योर को एन्जॉय कर रहे हैं या नहीं, इस पर गोगोई कहते हैं मुझे नहीं पता कि मैं राज्यसभा में अपने टेन्योर को एन्जॉय कर रहा हूं या नहीं, लेकिन मैं निश्चित रूप से आपसे बातचीत को एन्जॉय कर रहा हूं. आज मैं जो कुछ बता रहा हूं वो मेरी उस मेमोरी को रिफ्लेक्ट कर रहा है जो प्रासंगिक और समसामयिक घटनाओं के नरेटिव  में व्यवस्थित है. मैंने अपने नरेटिव को ज्यादा फैक्चुअल रखने की कोशिश की है, बजाय जस्टीकेशन को ज्यादा स्पेस देने के. हायर पब्लिक ऑफिसेज़ के बारे में बातचीत ज्यादातर काल्पनिक ही होती है. जबतक आप खुद ऐसे किसी ऊंचे पद पर नहीं होते, इन्हें समझना मुश्किल है हायर पब्लिक ऑफिसेज़ जिन डिसिजंस के लिए ज़िम्मेदार होते हैं कई बार वो डिसिजंस ऑफिस होल्ड करने वाले के न होकर संस्था की चॉइसेज़ का रिजल्ट भी हो सकते हैं.

आख़िरी में गोगोई कहते है कि मेरे नैरेटिव के साथ ये फैक्ट भी जुड़ा हुआ है कि मैं औपनिवेशिक उत्पीड़न (अंग्रेजों का उत्पीड़न) से आज़ाद हुए भारत में जन्म लेने वाली पहली इंडियन जनरेशन से हूं. हम राष्ट्र निर्माण के प्रति कर्तव्य की गहरी और जबरदस्त भावना के साथ बड़े हुए हैं. मुझे इस बात का बहुत संतोष है कि मैंने एक पुरानी सभ्यता की शानदार यात्रा में अपना योगदान देकर संविधान की सेवा की है.मुझे खुशी होगी अगर मेरी यादों का ये कलेक्शन (मेरी किताब) कन्वर्सेशन को गति दे.


पिछला वीडियो देखें: केंद्र सरकार महुआ मोइत्रा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन मोशन ला सकती है, लेकिन इससे होगा क्या?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

धान खरीद के मुद्दे पर बीजेपी की नाक में दम करने वाले KCR की कहानी

धान खरीद के मुद्दे पर बीजेपी की नाक में दम करने वाले KCR की कहानी

KCR की बीजेपी से खुन्नस की वजह क्या है?

कौन हैं सीवान के खान ब्रदर्स, जिनसे शहाबुद्दीन की पत्नी को डर लगता है?

कौन हैं सीवान के खान ब्रदर्स, जिनसे शहाबुद्दीन की पत्नी को डर लगता है?

सीवान के खान बंधुओं की कहानी, जिन्हें शहाबुद्दीन जैसा दबदबा चाहिए था.

'द्रविड़ ने बहुत नाजुक शब्दों से मुझे धराशायी कर दिया था'

'द्रविड़ ने बहुत नाजुक शब्दों से मुझे धराशायी कर दिया था'

रामचंद्र गुहा की किताब 'क्रिकेट का कॉमनवेल्थ' के कुछ अंश.

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

पहले स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर की कहानी, जिनका सबसे हिट रोल उनके लिए शाप बन गया

शुद्ध और असली स्पाइडरमैन टोबी मैग्वायर करियर ग्राफ़ बाद में गिरता ही चला गया.

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.