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मनोज तिवारी: वो खिलाड़ी, जिससे ज़्यादा ‘बदकिस्मत’ डेब्यू किसी को नहीं मिला!

3 फरवरी 2008 की तारीख़. देश- ऑस्ट्रेलिया. शहर- ब्रिसबेन. मैदान- दि गाबा. वही गाबा, जिसके लिए एक ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर और कप्तान कह गए हैं –

“Can’t wait to see you at The Gabba.”

गाबा, जो ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट का गढ़ है. वहां भारत और ऑस्ट्रेलिया की भिड़ंत. टीम इंडिया ने 91 रन पर 3 विकेट गंवा दिए तो मैदान पर उतरा एक डेब्यूटंट. बंगाल का दाएं हाथ का बल्लेबाज. नाम- मनोज तिवारी. दिलकश क्रिकेट स्ट्रोक्स लगाने वाले की साख. पहली 15 गेंदें नज़रें जमाने के लिए ले लीं. बल्ले से निकले 2 रन. 16वीं गेंद पर सामने थे ब्रेट ली. ली ने ये गेंद करीब 145 की स्पीड से टखना-तोड़ इनस्विंगिंग यॉर्कर फेंकी. मनोज तिवारी क्लीन बोल्ड हो चुके थे.

ली की ये गेंद पहला मैच खेल रहे एक बल्लेबाज के लिए ज़्यादती थी. घनघोर ज़्यादती. तिवारी की जगह कोई अनुभवी बल्लेबाज होता तो शायद उसके स्टम्प भी इसी तरह छितराए पड़े होते. उस वक्त शायद मेरी तरह जिसने भी मनोज तिवारी को आउट होते देखा होगा, सबके दिल से एक बार तो पहला मैच खेल रहे इस बल्लेबाज के लिए ‘आह’ निकल ही गई होगी. पहले ही मैच में ब्रेट ली की ड्रीम डिलिवरी की ‘बलि’ चढ़ना क्या कम था कि मनोज तिवारी के साथ डेब्यू पर एक और बदकिस्मती जुड़ गई. अगले मैच से पहले वे चोटिल होकर सीरीज़ से बाहर हो गए.

इससे ज़्यादा बदकिस्मत डेब्यू शायद ही किसी का रहा हो.

13 साल बाद फरवरी के ही महीने में एक और ख़बर आती है. तारीख़ के खाने में दर्ज संख्या- 24. ख़बर मनोज तिवारी के एक और डेब्यू की. खेल में नहीं, राजनीति में. मनोज तिवारी ने पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) जॉइन कर ली. आज बात मनोज तिवारी की.

बंगाल क्रिकेट के ‘छोटे दादा’

बंगाल क्या, पूरे देश के क्रिकेट सर्किल में ‘दादा’ कौन हैं, ये बताने की ज़रूरत हम नहीं समझते. लेकिन बंगाल में ‘छोटे दादा’ कहकर बुलाया जाता है मनोज तिवारी को. मनोज तिवारी ने 125 फर्स्ट क्लास मैच में करीब 51 की औसत से 8965 रन बनाए. इसमें 27 शतक और 37 अर्धशतक शामिल हैं. टीम इंडिया के लिए मनोज ने 3 टी20 में 15 रन, 12 वनडे में 287 रन बनाए. वनडे में उनके नाम एक शतक, एक अर्धशतक भी है. इसके अलावा IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स और राइज़िंग पुणे सुपरजायंट्स की तरफ से मनोज ने अच्छा प्रदर्शन किया.

तिवारी ने कहा- 10 साल खेलूंगा, और फिर चौंका दिया

ऐसा नहीं है कि खेल, फॉर्म और फिटनेस ने मनोज तिवारी का साथ छोड़ दिया है. जनवरी 2020 में एक रणजी मैच में उन्होंने बंगाल की तरफ से खेलते हुए हैदराबाद के ख़िलाफ अपने करिअर का पहला तिहरा शतक जड़ा था. ये उनके करिअर का 27वां फर्स्ट क्लास शतक था. तिवारी ने 414 बॉल्स पर 303 रन की पारी खेली. इसमें 30 चौके और पांच छक्के शामिल थे. मैच के बाद तिवारी ने कहा था कि वे अभी 10 साल और क्रिकेट खेल सकते हैं. लेकिन साल भर बाद ही चौंकाते हुए राजनीति में एंट्री ले ली.

कई दिन से तैयार हो रही थी ज़मीन

मनोज तिवारी के राजनीति में आने के संकेत कई दिन से मिल रहे थे. उनकी सोशल मीडिया एक्टिविटीज़ से ही. पिछले दिनों पेट्रोल के बढ़ते दामों पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा था –

“पेट्रोल की तरफ से कमाल की पारी. मुश्किल हालातों में शतक लगाया. जब इसने पहली बॉल खेली, तभी लगा था कि बड़ी पारी खेलेगा. डीज़ल ने भी अच्छा साथ निभाया. दोनों की साझेदारी जोरदार रही. आम लोगों के ख़िलाफ खेलना आसान नहीं था, लेकिन आप दोनों ने कर दिखाया.”

किसान आंदोलन के वक्त भी मनोज तिवारी ने एक ट्वीट किया था. इसमें उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन ट्वीट अपने छिपे हुए राजनीतिक मायनों के कारण चर्चा में रहा था. उन्होंने किसान आंदोलन पर रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग के ट्वीट के विरोध में भारतीय हस्तियों द्वारा एक जैसे ट्वीट किए जाने पर ये बात कही थी.

आख़िरकार कयासों के बीच मनोज तिवारी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में TMC का झंडा थाम ही लिया. पार्टी जॉइन करते ही कहा- मैं एक क्रिकेटर हूं. मुझे जो प्यार मिला, उसमें हिंदू-मुस्लिम जैसा कुछ नहीं था. सभी भारतीयों से प्यार मिला. लेकिन BJP देश को तोड़ना चाह रही है. ममता बनर्जी इसके ख़िलाफ सेक्युलर तरीके से लड़ रही हैं. छोटे दादा मनोज तिवारी की ये राजनीतिक पारी कितना आगे जाती है, ये आने वाला समय ही बताएगा.


पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने ममता बनर्जी की पार्टी जॉइन की

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