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भारत में कोरोना के लगभग आधे मरीज़ ठीक हो गए, लेकिन अभी ख़ुशी मनाना जल्दबाज़ी है!

भारत में 10 जून तक कोरोना के 2.76 लाख मामले सामने आए हैं. 1,35,205 लोग ठीक हो चुके हैं. वहीं एक्टिव केस की संख्या 1,33,632 है. 7745 लोगों की मौत हुई है. यह पहली बार है, जब भारत में ठीक होने वालों की संख्या एक्टिव केस से ज्यादा हो गई है. ओवर ऑल भारत का रिकवरी रेट लगभग 49 प्रतिशत के आसपास है. महाराष्ट्र. कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य. यहां कोरोना के 90 हजार मामले सामने आए हैं. वहीं 47 प्रतिशत लोग रिकवर हो चुके हैं. रिकवरी रेट के मामले में पंजाब सबसे आगे है. यहां 80 प्रतिशत लोग रिकवर हो चुके हैं.

लोग इस बात की खुशी मना रहे हैं. लेकिन क्या कोरोना से रिकवर हुए लोगों की संख्या पर खुश होना अभी सही है?

हेल्थ मिनिस्ट्री की वेबसाइट पर मौजूद डाला का स्क्रीन शॉर्ट
हेल्थ मिनिस्ट्री की वेबसाइट पर मौजूद डाला का स्क्रीन शॉर्ट

उसके बारे में बात करेंगे लेकिन उससे पहले इन दो उदाहरण के बारे में बात करते हैं.

# भारत में कोरोना वायरस का पहला केस चीन के वुहान से केरल लौटे एक मेडिकल छात्र में मिला. उसने एक सरकारी अस्पताल में आइसोलेशन में 25 दिन बिताए.

# केरल के पठानमथिट्टा की एक 62 वर्षीय महिला ने 42 दिन अस्पताल में बिताए. इस दौरान उनके 22 टेस्ट हुए. आखिरकार 22 अप्रैल को उनका टेस्ट निगेटिव आया.

आमतौर पर किसी बीमारी के इलाज के लिए पूरी दुनिया में इलाज का प्रोटोकॉल एक ही होता है. लेकिन कोरोना को लेकर सर्वमान्य प्रोटोकॉल नहीं बना है. यह बीमारी चीन से निकली थी. तो चीन ने जो तरीके अपनाए, उन्हीं को अधिकांश देशों ने अपना लिया.

चीन ने क्या तरीका अपनाया?

अस्पताल में भर्ती मरीज को डिस्चार्ज करने के लिए ये जरूरी था कि उसे लगातार तीन दिन तक बुखार न आए, सांस लेने में सुधार हो, सांस की नली में सूजन न हो और 24 घंटे में दो बार टेस्ट नेगेटिव आए. इसके बाद चीन में कोरोना मरीजों को छुट्टी दे जाती.

चीन में एक महिला के कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्यकर्मी. (Photo: Reuters)
चीन में एक महिला के कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्यकर्मी. (Photo: Reuters)

चीन सरकार, कोरोना से ठीक शख्स को छुट्टी मिलने के 14 दिन बाद फिर से अस्पताल बुलाती. इसमें उसकी फिर से चेकिंग होती. इसमें सही रहने पर एक महीने बाद फिर जांच होती. चीन में ठीक हुए मरीजों की जांच के लिए अलग से अस्पताल भी बनाए गए.

दुनिया के बाकी देशों में भी कोरोना से ठीक हुए शख्स के लिए यही नियम अपनाए जाते हैं. कुछ देशों ने इसमें अपने हिसाब से घटत-बढ़त की, लेकिन मोटामोटी सब जगह चीनी प्रोटोकॉल ही मान्य है.

भारत में पहले क्या नियम थे?

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति कोरोना पॉजीटिव पाया जाता तो उसे ठीक होने तक अस्पताल में रखा जाता. इस दौरान हर तीन दिन बाद उसका टेस्ट किया जाता, ताकि देखा जा सके कि वह ठीक हुआ या नहीं. 24 घंटे में लगातार दो टेस्ट नेगेटिव आने पर उसे ठीक माना जाता. लेकिन इसके साथ ही देखा जाता कि उसे बुखार, सांस लेने में दिक्कत और खांसी तो नहीं. साथ ही उसकी छाती का एक्सरे भी लिया जाता. सब सही आने पर उसे छुट्टी दे दी जाती. अस्पताल से छुट्टी के बाद घर पर 14 दिन के आइसोलेशन में रहने को कहा जाता.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

फिर 8 मई को नियम बदल दिया?

लेकिन आठ मई को सरकार ने गाइडलाइंस बदल दी. कहा कि अब गंभीर रूप से बीमार मरीजों का ही डिस्चार्ज से पहले टेस्ट होगा. और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आने का इंतजार किया जाएगा. बाकी मरीजों को बिना टेस्ट के छुट्टी दे दी जाएगी. साथ ही छुट्टी मिलने के बाद घर पर केवल सात दिन आइसोलेशन में रहना होगा. इससे पहले तक नियम था कि कोरोना पॉजीटिव व्यक्ति की जब तक 24 घंटे में दो रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आती थी. उसे डिस्चार्ज नहीं करते थे.

मरीजों के हिसाब से सरकार ने अपनी गाइडलाइंस को तीन कैटेगरी में बांटा

बहुत हल्के, हल्के या संक्रमण से पहले के लक्षणों वाले मरीज

# ऐसे मरीजों को कोविड केयर फैसिलिटी में भर्ती किया जाता है.
# 10 दिन बाद इस तरह के मरीजों को छुट्टी दे दी जाती है, बशर्तें उन्हें लगातार तीन दिन तक बुखार न आए.
# छुट्टी देते समय कोई जांच नहीं होती.
# छुट्टी देने से पहले अगर किसी मरीज का ऑक्सीजन लेवल 95 प्रतिशत से नीचे रहता है तो उसे डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर भेजा जाता है.

मॉडरेट लक्षणों वाले मरीज

# बदले हुए नियमों के मुताबिक ऐसे मरीजों को डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर में भर्ती किया जाता है, इन्हें ऑक्सीजन बेड दिया जाता है.
# अगर तीन दिन बुखार नहीं आता है, अगले चार दिन तक ऑक्सीजन लेवल 95 प्रतिशत तक ही रहता है तो मरीज को 10 दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाता है.
# इन्हें भी छुट्टी देने से पहले टेस्ट की जरूरत नहीं होगी.
# जिन मरीजों का तीन दिन में बुखार नहीं उतरता और जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत होती, उन्हें बीमारी के लक्षण हटने पर ही छुट्टी दी जाती है.

गंभीर रूप से बीमार

# ऐसे मरीजों को पूरी तरह से ठीक होने पर ही छुट्टी दी जाती है.
# बीमारी के लक्षण समाप्त होने के अलावा RT-PCR टेस्ट एक बार नेगेटिव आने पर छुट्टी दी जाती है.

जैसा कि हमने ऊपर एक महिला का उदाहरण दिया कि कैसे उसके 22 टेस्ट किए गए. लेकिन बाद में सरकार ने नियम बदल दिए. आठ मई को डिस्चार्ज गाइडलाइंस में बदलाव के समय ही कहा गया था कि आने वाले हफ्तों में सक्रिय केसों के आधिकारिक आंकड़े में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है.

तो क्या यही एक वजह है कि भारत में रिकवरी रेट तेजी से सुधरा है? इंडियन मेडिकल असोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रहे डॉक्टर के.के अग्रवाल का कहना है,

भारत में कोरोना का मोर्टिलिटी रेट दो से तीन प्रतिशत है. इसका मतलब है कि 97 प्रतिशत लोगों को बचना ही है. रिकवर होना ही है. अगर हम रिकवरी की डेफिनेशन ये रखेंगे कि जब तक रिपोर्ट निगेटिव नहीं हो जाता, तो हमारा रिकवरी रेट कम हो जाएगा. साइंस कहती है कि 9 दिन के बाद वायरस इंफेक्शियस नहीं रहता है. अब जो नया क्राइटेरिया है कि 10 दिन आपके हो गए और तीन दिन आपको बुखार नहीं है तो आप रिकवर हो गए. क्योंकि हमारा क्राइटेरिया बदल गया है, जो लोग कोरोना से डायग्नोस हुए, 10 दिन के बाद से उनको रिकवर माना जाएगा तो रिकवरी रेट बढ़ता जाएगा.


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