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केरल के बाद देश के इन तीन राज्यों में तबाही मचा रही है बाढ़

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केरल की बाढ़ को पूरा देश देख चुका है. वहां 400 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं और करीब 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. लेकिन अब देश के तीनऔर राज्य हैं, जो बाढ़ की चपेट में हैं. ये राज्य हैं उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और असम. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक इन राज्यों में बाढ़ की वजह से करीब 600 लोगों की मौत हो चुकी है. इन चारों राज्यों में 70 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 17 लाख लोग राहत कैंपों में रह रहे हैं. उत्तर प्रदेश में कुल 16 जिले, पश्चिम बंगाल के 23 जिले, कर्नाटक के 11 जिले और आसाम के 23 जिले भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं.

केरल में बाढ़ से बचाव कार्य की एक तस्वीर
केरल में बाढ़ से बचाव कार्य की एक तस्वीर

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के कुल 16 जिले भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं. इन बाढ़ प्रभावित जिलों में फर्रूखाबाद, कानपुर देहात, कानपुर नगर, गोंडा, बाराबंकी, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, आजमगढ़, वाराणसी, बलिया, बलरामपुर, झांसी, ललितपुर, जालौन और उन्नाव जिले शामिल हैं.

कितनी हुई तबाही?

एनडीआरएफ के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक उत्तर प्रदेश में कुल 250 लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 5,000 मकान ढह गए हैं और 50,000 लोगों को बचाया गया है. इसके अलावा यूपी में कुल 100 से भी ज्यादा राहत कैंप बनाए गए हैं, जिनमें करीब 15,000 लोग रह रहे हैं. करीब 60,000 हेक्टेयर फसल बाढ़ की वजह से प्रभावित हुई है.

बुंदेलखंड में बेतवा नदी ने तबाही मचानी शुरू कर दी है.
बुंदेलखंड में बेतवा नदी ने तबाही मचानी शुरू कर दी है.

यूपी में क्यों आई बाढ़?

यूपी में मुख्य रूप में गंगा और घाघरा नदी की वजह से बाढ़ आई है. गंगा नदी में जो पानी बढ़ा है, उसकी वजह बारिश है. बारिश का पूरा पानी गंगा में आ गया है, जिसकी वजह से गंगा में बाढ़ जैसी स्थिति है. गंगा के पानी की वजह से बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, उन्नाव और कानपुर नगर प्रभावित हैं. इनमें भी सबसे ज्यादा प्रभाव उन्नाव और फर्रूखाबाद में है, जहां तटीय इलाकों में पानी भर गया है. वाराणसी में गंगा के पानी में बढ़ोतरी से घाट डूब गए हैं. वहीं तराई इलाकों जैसे गोंडा, बहराइच, बाराबंकी, सीतापुर और लखीमपुर खीरी में बाढ़ की असली वजह घाघरा नदी है. घाघरा नदी हिमालय से निकलती है, जो नेपाल के पहाड़ी इलाके से होते हुए भारत में दाखिल होती है. घाघरा नदी के भारत में घुसने से पहले उसपर दो बांध हैं, जो नेपाल में हैं. ये बांध हैं शारदा बैराज और गिरिजा बैराज. नेपाल में घाघरा का पानी यही दोनों बांध नियंत्रित करते हैं. लेकिन जब नेपाल में पानी की मात्रा बढ़ जाती है तो इन दोनों बैराजों के गेट खोल दिए जाते हैं. घाघरा में बाढ़ की मुख्य वजह यही दोनों बैराज और उनसे आने वाला पानी है. पहाड़ों पर हुई बारिश ने घाघरा में इतना पानी भर दिया कि नेपाल के दोनों बैराज पानी को संभाल नहीं पाए. स्थिति ये है कि हर दो दिन पर नेपाल इन दोनों बैराजों से दो से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ रहा है और यही पानी घाघरा में आ रहा है, जिसकी वजह से तटीय जिलों लखीमपुर, बाराबंकी, बहराइच, सीतापुर और गोंडा में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है.

इसके अलावा बुंदेलखंड में जिन नदियों ने तबाही मचाई है, उनमें केन, बेतवा, चंबल, बगेन और चंद्रावल हैं. ये सारी नदियां मध्यप्रदेश से निकलती हैं. बुंदेलखंड में अब भी सामान्य से कम ही बारिश हो रही है, लेकिन मध्यप्रदेश में खूब बारिश हुई है. वहां के बारिश का पानी केन, बेतवा, चंबल, बगेन और चंद्रावल में आ रहा है, जिसकी वजह से बुंदेलखंड के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं. झांसी में तो एरच के पास टेहरका गांव के लोग अपने खेतों में खेती के लिए गए थे. 2 अगस्त की सुबह जब वो अपने खेतों की ओर निकले थे, तो सबकुछ सामान्य था. अचानक से बेतवा नदी में पानी का जलस्तर बढ़ गया जिसकी वजह से राजघाट बांध के सभी गेट खोलने पड़े. गेट खोले जाने की वजह से अचानक से पानी खेतों में आ गया और खेती के लिए निकले छह लोग टापू जैसी जगह पर फंस गए. बाद में सेना के हेलिकॉप्टर की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया. वहीं बेतवा नदी के किनारे मछली मारने गए लोग भी पानी बढ़ने की वजह से टापू जैसी जगह पर फंस गए. बाद में उन्हें भी सेना के हेलिकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू किया गया.

क्या कर रही है सरकार

यूपी में बाढ़ राहत के लिए एनडीआरएफ की 9 टीमें तैनात की गई हैं. 100 से ज्यादा राहत कैंप लगाए गए हैं, जिनमें 13,000 से ज्यादा लोग हैं. एनडीआरएफ की 21 नावें तैनात की गई हैं. इसके अलावा स्थानीय प्रशासन की ओर से 700 नावें तैनात की गई हैं. पुलिस और पीएसी की सात बटालियनें राहत कार्य में लगी हुई हैं.

असम

असम के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं. और ये स्थिति करीब हर साल आ चुकी है.
असम के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं. और ये स्थिति करीब हर साल आ चुकी है.

असम में कुल 25 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं. इन जिलों में धीमाजी, लखीमपुर, विश्वनाथ, सोनीतपुर, उदालगुरी, दारांग, नालबारी, बारपेटा, चिरांग, कोकराझजार, नगांव, होजाई, कार्बी एंगलॉन्ग ईस्ट, कार्बी एंगलॉन्ग वेस्ट, गोलाघाट, जोरहाट, माजुली, सिवासनगर, चराईदेव, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, करीमगंज, हैलाकांडी, कचर और दीमा हसाओ शामिल हैं.

कितनी हुई तबाही

असम में बाढ़ की वजह से करीब 12 लाख लोग प्रभावित हैं. अब तक असम में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 6 हजार घरों को नुकसान पहुंचा है. 50,000 से ज्यादा लोगों को अब तक बाढ़ में फंसने के बाद बचाया जा चुका है. 350 से ज्यादा राहत कैंपों में 2.5 लाख लोग रह रहे हैं. करीब 30,000 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है.

क्यों आई बाढ़?

असम में करीब 12 लाख लोग बाढ़ की वजह से प्रभावित हुए हैं.

असम में मूल रूप से दो नदियां हैं, जिनमें हर साल बाढ़ आती है. ये नदियां हैं ब्रह्मपुत्र और बाराक. ब्रह्मपुत्र हिमालय से निकलने वाली नदी है. पहाड़ों पर हुई बारिश की वजह से ब्रह्मपुत्र का पानी बढ़ गया है, जिसकी वजह से उसमें बाढ़ आ गई है. हिमालय से निकलकर ब्रह्मपुत्र का पानी जैसे-जैसे नीचे आता है, उसकी धारा तेज होती जाती है और इसका नतीजा बाढ़ के तौर पर सामने आता है. वहीं बाराक नदी मणिपुर से निकलती है. बारिश का पानी इस नदी में आता है और नदी का प्रवाह तेज हो जाता है. इसकी वजह से असम में बाढ़ आ जाती है. और ये पहली बार नहीं है कि असम में बाढ़ आई है. असम ऐसा राज्य है, जहां कमोबेश हर साल ऐसी ही बाढ़ आती है और सैकड़ों लोग मारे जाते हैं.

क्या कर रही है सरकार?

केंद्र सरकार की ओर से एनडीआरएफ की 13 टीमें लगाई गई हैं. इन 13 टीमों के 355 लोग 37 बोटों के सहारे राहत और बचाव कार्य कर रहे हैं. वहीं राज्य सरकार की ओर से 30 जगहों पर प्रशासन राहत और बचाव कार्य कर रहा है.

कर्नाटक

कर्नाटक के 11 जिले बाढ़ की चपेट में हैं.

कर्नाटक के 11 जिले बाढ़ की चपेट में हैं. इन जिलों में उडूपी, उत्तर कन्नड़, दक्षिण कन्नड़, कोडागू, चिकमंगलूर, हसन, मैसूर, शिवमोगा, बेल्लारी, दवनागिरी और रायचूर शामिल हैं.

कितनी हुई तबाही?

इन 11 जिलों के करीब 275 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. इन 275 गांवों की करीब 3 लाख 50,000 आबादी बाढ़ की वजह से प्रभावित है. कर्नाटक में अब तक कुल 170 लोगों की मौत हो चुकी है, करीब 15,000 घर पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं. कुल 124 राहत कैंपों में करीब 6,000 लोगों को रखा गया है. अभी तक कुल 14,000 लोगों को बाढ़ से बचाया गया है. करीब 3600 एकड़ फसलों को पानी की वजह से नुकसान हुआ है.

क्यों आई बाढ़?

कर्नाटक में साढे़ तीन लाख लोग सीधे तौर पर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.

कर्नाटक में बाढ़ की मुख्य वजह बारिश ही है. पश्चिमी घाट से लगे हुए पहाड़ों पर हुई बारिश का असर कर्नाटक पर पड़ा है. बारिश की वजह से कर्नाटक के कई इलाकों में भूस्खलन हो गया है, सड़कें टूट गई हैं और घरों में पानी भर गया है. बारिश की वजह से आई बाढ़ ने कर्नाटक के कॉफी बागानों को खासा नुकसान पहुंचाया है.

क्या कर रही है सरकार?

केंद्र सरकार की ओर से एनडीआरएफ की दो टीमों के 65 जवान कर्नाटक में तैनात हैं. इसके अलावा स्थानीय प्रशासन की ओर से पुलिस, फायर ब्रिगेड और नावें तैनात की गई हैं.


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