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रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजिए, लेकिन पहले इन पांच सवालों के जवाब दीजिए

सरनागत कहुं जे तजहिं निज अनहित अनुमानि ।
ते नर पावंर पापमय तिन्हहि बिलोकत हानि ॥43॥

– रामचरित मानस

भावार्थः जो मनुष्य अपने अहित का अनुमान करके शरण में आए हुए का त्याग कर देते हैं, वे पामर (क्षुद्र) हैं, पापमय हैं, उन्हें देखने में भी हानि है.

भारत सरकार चाहती है कि म्यांमार से जान बचाकर हिंदुस्तान आए रोहिंग्या मुसलमान वापस चले जाएं. कारण बता रहे हैं कि कुछ 40 हज़ार रोहिंग्या देश के संसाधनों पर बोझ बनेंगे. ये सुरक्षा के लिए खतरा भी हो सकते हैं. अभी तक किसी को वापस भेजा नहीं गया है, लेकिन सरकार अपनी मंशा साफ कर चुकी है. उसके लिए रोहिंग्या रेफ्यूजी नहीं, अवैध घुसपैठिए हैं.

रोहिंग्या मुसलमानों को उनके देश म्यांमार में नागरिक नहीं समझा जाता. वहां सिलसिलेवार तरीके से उन्हें मारा जा रहा है. जान बचा कर वो यहां-वहां भागते फिर रहे हैं. रोहिंग्या मुसलमानों और उनकी तकलीफ के बारे में तफसील से जानने के लिए यहां क्लिक करें.

सरकार ज़हीन लोग चलाते हैं. मुझसे ज़्यादा दिमाग वाले. बावजूद इसके मेरे कुछ सवाल हैं जो मैं सरकार से पूछना चाहता हूं.

 

रोहिंग्या रेफ्यूजियों की एक बड़ी तादाद दिल्ली एनसीआर में भी रहती है (फोटोःरॉयटर्स)
रोहिंग्या रेफ्यूजियों की एक बड़ी तादाद दिल्ली एनसीआर में भी रहती है (फोटोःरॉयटर्स)

 

#1. कितना बोझ बन सकते हैं रोहिंग्या?

भारत की आबादी फिलहाल लगभग 1 अरब 34 करोड़ है. हिंदुस्तान में रोहिंग्या कुछ 40 हज़ार के करीब हैं. ये हमारी आबादी का 0.00002985% है. क्या हमारा महान देश 0.00002985% का भार नहीं सह सकता?

#2. सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा हैं?

रोहिंग्या उग्रवाद एक सच्चाई है. लेकिन वो म्यांमार में हैं. हो सकता है हिंदुस्तान में रह रहे कुछ रोहिंग्या सुरक्षा के लिए खतरा हों. तो क्या इसके लिए उन सभी लोगों को वापिस उसी कुएं में धकेला जा सकता है जिससे वो किसी तरह बच के निकले हैं. क्या भैंसों को खोज रही पुलिस इन कुछ रोहिंग्या बदमाशों को पकड़ने नहीं भेजी जा सकती?

 

Migrants believed to be Rohingya rest inside a shelter after being rescued from boats at Lhoksukon in Indonesia's Aceh Province May 11, 2015. Nearly 600 migrants thought to be Rohingya refugees from Myanmar were rescued from two wooden boats stranded off the coast of Indonesia's northern Aceh province, authorities said on Sunday. The overcrowded boats, which were carrying nearly 100 women and dozens of children among the refugees, were towed to shore by fishermen after running out of fuel. REUTERS/Roni Bintang TPX IMAGES OF THE DAY
कई रोहिंग्या अपना देश छोड़कर नावों में इंडोनेशिया भी गए हैं. इनमें से कई नावें डूब गईं. इस तस्वीर में एक ऐसी ही नाव से बचाए रोहिंग्या नज़र आ रहे हैं. (फोटोःरॉयटर्स)

 

#3. सरकार घुसपैठिए और रेफ्यूजी में फर्क क्यों नहीं कर पा रही?

यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर रेफ्यूजीज़ (UNHCR) ने मई 2017 तक भारत में रह रहे 16,500 रोहिंग्या लोगों को आइडेंटिटी कार्ड दे दिए थे. इस पर किरण रिजिजू ने रॉयटर्स से कहा,

भारत ने रेफ्यूजी कन्वेन्शन (1951) पर दस्तखत नहीं किए हैं. UNHCR का रजिस्ट्रेशन मायने नहीं रखता. हमारे लिए वो अवैध घुसपैठिए ही हैं. रोहिंग्या नहीं रह सकते. सभी अवैध घुसपैठिए वापस भेजे जाएंगे.

क्या इतने सारे अफसर-मंत्रियों में से एक को भी नहीं मालूम कि अवैध घुसपैठिए वो होते हैं, जो अपने फायदे के लिए किसी दूसरे देश का कानून तोड़ते हैं और रेफ्यूजी वो सताए हुए लोग होते हैं जो मजबूरी में, जान बचाकर किसी दूसरे देश में छत की आस करते हैं?

 

पिछले दिनों में रोहिंग्या के म्यांमार छोड़ने की रफ्तरा बढ़ी है. बांग्लादेश बॉर्डर पर कैंप में लिए जाने का इंतज़ार करते रोहिंग्या (फोटोःरॉयटर्स)
पिछले दिनों में रोहिंग्या के म्यांमार छोड़ने की रफ्तार बढ़ी है. बांग्लादेश बॉर्डर पर कैंप में लिए जाने का इंतज़ार करते रोहिंग्या (फोटोःरॉयटर्स)

#4. क्या सच में ‘सारे’ ‘अवैध घुसपैठिए’ वापस भेजे जाएंगे?

भारत सरकार की डिक्शनरी में रेफ्यूजी शब्द नहीं है, सिर्फ ‘अवैध घुसपैठिया’ है. तो क्या सरकार राजस्थान में रह रहे पाकिस्तानी रेफ्यूजियों को भी वापिस भेज देगी? ये रेफ्यूजी धर्म से हिंदू हैं. क्या सरकार उन्हें भी अवैध घुसपैठिया ही मानती है? और तिब्बतियों का क्या होगा? उन्हें ‘स्पेशल केस’ माना जाएगा? हां तो क्यों, नहीं तो क्यों?

#5. एक बोनस सवाल कश्मीर में स्वायत्त शासन की राजनीति करने वालों से भी

कश्मीर में स्वायत्त शासन और अनुच्छेद 370 पर बहुत शोर मचता है. इसके तहत जम्मू कश्मीर से बाहर का कोई भी राज्य का स्थाई रहवासी नहीं बन सकता. रोहिंग्या लोगों की एक बड़ी संख्या जम्मू और लद्दाख में भी रहती है. स्वायत्त शासन के ठेकेदार क्या रोहिंग्या को भी बाहरी समझते हैं? क्या बहस ‘तेरा रेफ्यूजी’, ‘मेरा रेफ्यूजी’ में होने लगेगी?

 

रोहिंग्या अपने देश में मूलभूत सुविधाओं से बहुत दूर हैं. इंडोनेशिया में रोहिंग्या लोगों को मेडिकल सप्लाई उपलब्ध कराता एक वॉलेंटियर (फोटोःरॉयटर्स)
रोहिंग्या अपने देश में मूलभूत सुविधाओं से बहुत दूर हैं. इंडोनेशिया में रोहिंग्या लोगों को मेडिकल सप्लाई उपलब्ध कराता एक वॉलेंटियर (फोटोःरॉयटर्स)

 

ये सरकार जैसे बनी है, उसमें राम के नाम का बड़ा रोल रहा है. ये सरकार राम को मानती है, लेकिन राम की नहीं मानती. ज़िम्मेदारों को रामचरित मानस का वो वाकया याद करना चाहिए जब धर्म और अधर्म की लड़ाई में राम और रावण आमने-सामने होते हैं. विभीषण एक मुश्किल चुनाव करते हैं. वो राम की शरण में आना चाहते हैं. लेकिन लक्ष्मण आशंकित हैं. रावण के सगे भाई को अपने करीब रखने में खतरा हो सकता है. तब राम वही कहते हैं, जो आपने इस लेख के ऊपर पढ़ा. जाने क्यों सरकार राम के कहे पर ध्यान नहीं देना चाहती.

 

गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू कह चुके हैं कि 'सभी' अवैध घुसपैठिए वापस भेजे जाएंगे (फोटोःरॉयटर्स)
गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू कह चुके हैं कि ‘सभी’ अवैध घुसपैठिए वापस भेजे जाएंगे (फोटोःरॉयटर्स)

 

वापस भगाए जाने के खिलाफ दो रोहिंग्या मुसलमानों ने भारत की सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगी है. उनका केस प्रशांत भूषण लड़ रहे हैं. अदालत ने भारत सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है. सरकार जवाब देगी और अदालत अपना फैसला सुनाएगी. ये सब हो, उस से पहले सरकार और उसके समर्थकों को इन सवालों पर गौर करना चाहिए. शरणागत को शरण देना राम ने शुरू नहीं किया था, न उनके बाद ये प्रथा बंद हो गई थी. ये भारत की परंपरा है. न जाने क्यों सरकार इसे तोड़ने पर आमादा है और ज़्यादातर लोग इसे लेकर चुप हैं.

ये चुप्पी टूटे तो बेहतर है.


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