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इस दशक के वो पांच मौके जिन्होंने क्रिकेट को जेन्टलमेन्स गेम बनाए रखा

भारत और बांग्लादेश के बीच अंडर 19 विश्वकप फाइनल खेल से ज्यादा विवाद के लिए याद किया जा रहा है. मैच के बाद बांग्लादेश और भारत के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए थे. जिसकी खूब आलोचना हो रही है. अब क्रिकेट के दिग्गज कपिल देव ने अंडर 19 फाइनल में खिलाड़ियों के व्यवहार को भयानक बताया है. कपिल ने साथ ही ये भी कहा कि अब क्रिकेट जेन्टलमेन्स का गेम नहीं रहा. कपिल ने BCCI से इन खिलाड़ियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की है.

13वीं सदी से चर्चा में आए इस खेल को जेन्टलमेन्स का खेल कहा जाता है. जिसमें न किसी की स्लेजिंग हो, न बेईमानी हो, न बेमतलब के टैंट्रम्स हों, न ही बेमतलब की अपील हो. और यहां तक कि अगर कोई खिलाड़ी आउट है तो अंपायर के फैसले से पहले ही वो जेन्टलमेन स्पिरिट दिखाते हुए मैदान से विदा हो जाए.

क्रिकेट के मैदान पर कई मौकों पर अब अग्रेसिव क्रिकेट देखने को मिलता है. बाकी खेलों की तरह ही इसमें भी छींटाकशी दिखती है. कुछ लोग इसे स्पिरिट ऑफ गेम कहते हैं. जबकि कुछ जानकारों का मानना है कि ये खेल की असली पहचान के लिए सही नहीं है.

कपिल देव ने भारत और बांग्लादेश के युवा खिलाड़ियों पर सवाल उठाए हैं. तो ऐसे में हम आपको इस दशक के भारतीय क्रिकेट से जुड़े पांच ऐसे मौके याद दिलाते हैं. जिन्होंने ये साबित किया है कि भले ही क्रिकेट के मैदान पर ऐसी घटनाएं नज़र आती रही हो. लेकिन अब भी जेन्टलमेन्स क्रिकेट नज़र आता है.

1. जब फाफ डू प्लेसिस के लिए फीज़ियो बने एमएस धोनी:
साल 2015 में दक्षिण अफ्रीकी टीम भारत दौरे पर थी. सीरीज़ का मुकाबला मुंबई के वानखेड़े में खेला जा रहा था. दक्षिण अफ्रीकी टीम पहले बल्लेबाज़ी कर रही थी. लेकिन भारत की गर्मी की वजह से उनके खिलाड़ी मैदान पर परेशानी में थे. डू प्लेसिस ने अपना शतक पूरा किया और उनके पैर में क्रैम्प आ गया. वो दर्द से कराहने लगे. उनकी मांसपेशियों में खिंचाव की वजह से वो लंगड़ाकर बल्लेबाज़ी कर रहे थे. इसके बाद धोनी ने उन्हें परेशानी में देखा तो फीज़ियो के आने से पहले खुद ही फाफ को उपचार देना शुरू कर दिया. उन्होंने फाफ को स्ट्रेच करवाने की कोशिश की. बाद में मेडिकल टीम आई और उन्हें उपचार दिया.

2. बेल को आउट करने के बाद फिर से बल्लेबाज़ी के लिए बुलाया:
कैप्टन कूल ने मैदान पर अपने जेन्टलमेन रवैये के साथ क्रिकेट की खूबसूरती को ज़िंदा रखा. ऐसी ही एक घटना हुई थी 2011 की भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ में. दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड की दूसरी पारी में इओन बेल ने 137 के स्कोर पर बाउंड्री की तरफ एक शॉट खेला. प्रवीण कुमार ने बाउंड्री पर गेंद को रोका और सीधे धोनी के हाथों में थ्रो फेंक दी. बेल को लगा ये गेंद चार रन के लिए गई है. इसलिए वो आराम से क्रीज़ के बाहर खड़े थे. धोनी ने स्टम्पस उड़ा दिए और टीम ने रन-आउट की अपील कर दी. थर्ड अंपायर ने जब देखा तो बेल रन-आउट थे. लेकिन धोनी ने इस कॉन्ट्रोवर्शियल रन-आउट के बाद क्रिकेट के स्पिरिट को ज़िंदा रखते हुए बेल को फिर से बल्लेबाज़ी के लिए बुला लिया.

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विश्वकप 2011 में सचिन और रवि रामपॉल की तस्वीर. फोटो: AP

3. रामपॉल की गेंद पर सचिन का विकेट:
विश्वकप 2011 का भारत-वेस्टइंडीज़ मैच. टीम इंडिया की पहले बल्लेबाज़ी. स्ट्राइक पर सचिन तेंडुलकर. पारी का पहला ओवर. रवि रामपॉल के हाथ में गेंद. रामपॉल की शानदार गेंद सचिन के बल्ले का किनारा लेकर सीधे विकेटकीपर के हाथों में. लेकिन मैदान पर इतना शोर था कि अंपायर को कुछ समझ नहीं आया कि क्या हुआ. वेस्टइंडीज़ के खिलाड़ियों ने अपील की लेकिन अंपायर ने बिना देर किए तुरंत इनकार कर दिया. सचिन को क्रिकेट का सबसे अव्वल स्टूडेंड ऐसे ही नहीं कहते. सचिन बिना पीछे पलटे पिच से चलते बने. वेस्टइंडीज़ टीम के खिलाड़ी खुशी से जश्न मनाने लगे, और कॉमेंटेटर्स समेत सभी सचिन की इस स्पिरिट की तारीफ करने लगे. मैच के बाद रामपॉल ने इस गेंद को अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंद भी बताया.

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विश्वकप 2019 में भारतीय कप्तान विराट कोहली और स्टीव स्मिथ. फोटो: Twitter

4. स्टीव स्मिथ के बचाव में विराट कोहली:
क्रिकेट विश्वकप 2019. भारत और ऑस्ट्रेलिया का मैच. विराट और स्टीव स्मिथ, दोनों ही धुरंधर मैदान पर खेलने उतरे. मैच के बीच में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एरॉन फिंच ने स्मिथ को डीप में बाउंड्री लाइन के पास फील्डिंग करने के लिए कहा. लेकिन वहां पर मौजूद कई फैंस ने स्मिथ को देखकर हूटिंग करना शुरू कर दिया. यहां तक कि लोग उन्हें चीटर भी बुलाने लगे. ये शोर या आवाज़ इतनी तेज़ थी कि विराट के कानों तक भी पहुंच गई. ओवर के बीच में विराट मैदान के उस छोर की ओर बढ़े और दर्शकों से हूटिंग करने की बजाए स्मिथ के लिए ताली बजाने के लिए कहा. इसके बाद खुद स्मिथ ने भी विराट को शुक्रिया अदा किया.

5. मोर्ने मोर्कल के साथ विराट कोहली:
भारत का दक्षिण अफ्रीका दौरा. छह मैचों की वनडे सीरीज़ का चौथा वनडे. भारतीय पारी का 22वां ओवर. कप्तान विराट कोहली बेहद शानदार फॉर्म में. विराट ने पिछली ही गेंद पर चौके के साथ अपना अर्धशतक पूरा किया था. अगली गेंद पर मॉर्कल ने शॉर्ट गेंद फेंकी. गेंद हवा में उछली. मोर्कल कैच पकड़ने के लिए कूदे. मॉर्कल का डाइव के साथ बेहतरीन एफर्ट लेकिन कैच नहीं लपक पाए. मोर्कल की कमर में चोट लगी. इसके बाद कप्तान विराट कोहली ने बेहतरीन स्पिरिट दिखाई. विराट आगे बढ़े और मोर्कल को हाथ देकर उठाया. और उन्हें सांतवना दी.

भले ही अंडर 19 क्रिकेट में भारत और बांग्लादेश के खिलाड़ी भूल गए हों कि क्रिकेट एक जेन्टलमेन्स गेम है. लेकिन भारतीय टीम और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कई मौजूदा खिलाड़ी इस बात को ध्यान में रखकर ही खेल खेलते हैं.


U19 क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल में इंडिया और बांग्लादेश के क्रिकेटर्स आपस में उलझ गए

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