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2019 के वो पांच मौके, जिन्हें जीते जी फिर कभी नहीं देखना चाहेंगे फैंस

छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी
नए दौर में लिखेंगे, हम मिलकर नई कहानी

1960 में आई फिल्म ‘हम हिन्दुस्तानी’ का ये गीत साल 2019 में बिल्कुल सही बैठता है. साल 2019 में जो बीत गया सो बीत गया. अब एक नया साल होगा. नई सुबह होगी. जहां पर क्रिकेट के चाहने वालों को भी नई-नई चीज़ें मिलेंगी. बात की शुरुआत हमने इस लाइन के साथ इसलिए की है, क्योंकि साल 2019 में एक नहीं, बल्कि कई ऐसे मौके आए जब क्रिकेट फैंस की धड़कनें बढ़ गईं. आंखों से आंसू निकल आए या फिर खुशी के पल पास आते-आते दूर चले गए. साल 2019 में क्रिकेट फैंस के साथ ऐसा सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई बार हुआ. उन मौकों में से ही हम आपके लिए चुनकर लाए हैं पांच मौके, जिन्हें कोई भी क्रिकेटप्रेमी फिर से जीना नहीं चाहेगा.

2019 के वो पांच मौके, जो जीते-जी फिर कभी नहीं देखना चाहेंगे फैंस:

1. IND vs NZ 2019 विश्वकप सेमीफाइनल:
10 जुलाई 2019. इंग्लैंड का मेनचेस्टर शहर. मौसम ऐसा कि ऊंट कब किस करवट बैठ जाए, कुछ नहीं पता. विश्वकप खत्म होने में अब सिर्फ तीन दिन का समय बचा था. भारतीय टीम ऐसे विजयरथ पर सवार थी कि लगने लगा था अब कपिल देव, एमएस धोनी की तरह ही विराट कोहली का नाम भी विश्व कप विजेता कप्तानों की सूची में जुड़ने वाला है.

मैच की शुरुआत भी कुछ ऐसा ही हुई. पहली पारी में न्यूजीलैंड को 239 रनों पर रोककर, जीत की खुशबू आने लगी थी. लेकिन पहले बारिश और फिर अगले दिन के खेल में वो हुआ, जिसे याद नहीं किया जाना चाहिए. भारतीय टीम ने 239 रनों के जवाब में एक के बाद एक 92 रनों के स्कोर पर छह विकेट गंवा दिए.

Dhoni Run Out
विश्वकप सेमीफाइनल में भारतीय टीम के दिग्गज महेन्द्र सिंह धोनी. (फोटो: ICC Facebook)

लेकिन क्रीज़ पर अब भी वो खड़ा था, जिसके मैदान पर रहते हिन्दुस्तानियों की उम्मीद नहीं टूट सकती. नाम है महेन्द्र सिंह धोनी. जडेजा के साथ मिलकर माही टीम को जीत के दरवाज़े पर ले गए. आखिरी 10 गेंदें बचीं. जीतने के लिए चाहिए 25 रन. स्ट्राइक पर इंडिया के मैजिकल माही. जब तक धोनी है नाउम्मीदी का ख़याल तक पाप था.

फर्ग्युसन के बाउंसर को धोनी ने स्क्वेयर के पीछे खेला. और सोचा कि दौड़ के दो रन ले लूं. सीन में एंट्री मार्टिन गप्टिल की. उनका वो बाज़ की तरफ गेंद पर झपट्टा मारना और तेज़ रफ़्तार थ्रो स्टंप्स पर दे मारना, बरसों तलक इंडियन फैन्स को डराता रहेगा. भयानक याद बनकर. बॉल सीधी स्टंप्स पर जा लगी. धोनी कुछ इंच दूर रह गए थे.

उन कुछ इंच की दूरी ने विश्वकप का सपना अगले चार सालों के लिए तोड़ दिया. सवा अरब से ज़्यादा लोगों के लिए गप्टिल रातोंरात खलनायक बन गए. क्रीज़ में पहुंचने की जी-जान से कोशिश करते धोनी की तस्वीर गप्टिल का गोल्ड मेडल है, ऑस्कर अवॉर्ड है, नोबेल प्राइज़ है. और उसके बाद हताश होकर वापस होते माही की वो तस्वीर विश्वकप के पांच महीने बाद भी भारतीयों के ज़ेहन में कील की तरह चुभ रही है.

2. ENG vs NZ 2019 विश्वकप फाइनल:
क्रिकेट के 142 सालों के इतिहास में, या फिर यूं कहें कि वनडे क्रिकेट के 48 सालों के इतिहास में या ये भी कह सकते हैं कि क्रिकेट विश्वकप के 44 सालों के इतिहास में इतना रोमांचक फाइनल शायद ही कभी देखा गया होगा. 14 जुलाई,  2019 इतिहास के उन पन्नों में दर्ज हो गया. जो चीज़ दशकों में नहीं, बल्कि सदियों में एक बार होती है.

आईसीसी क्रिकेट विश्वकप फाइनल. भारत को हराकर न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को हराकर इंग्लैंड खिताब के सबसे करीब पहुंचा. मैच हुआ भी बिल्कुल वैसा ही. जैसा चैम्पियन टीमों के बीच होना चाहिए. न्यूज़ीलैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 50 ओवरों में 241 रन बनाए. इसके जवाब में इंग्लैंड की टीम खेलने उतरी. और विकेट गंवाते-गंवाते भी आखिरी तक मैच में बनी रही.

आखिरी ओवर में इंग्लैंड को जीतने के लिए 15 रनों की दरकार थी. इंग्लैंड के लिए स्ट्राइक पर थे बेन स्टोक्स. केन विलियमसन ने गेंद ट्रेंट बोल्ट को दी. बोल्ट ने ओवर की पहली दोनों गेंदों पर स्टोक्स को छका दिया. पहली दोनों गेंदे खाली गई. अब न्यूज़ीलैंड मैच में हावी हो गई. लेकिन अगली गेंद को छह रनों के लिए भेजकर स्टोक्स ने मैच का रुख मोड़ दिया.

Ben Stokes
विश्वकप 2019 फाइनल में इंग्लैंड के ऑलराउंडर बेन स्टोक्स. (फोटो: ICC Facebook)

ओवर की चौथी गेंद आनी थी. इंग्लैंड को चाहिए थे नौ रन. बोल्ट के फुल टॉस को बेन स्टोक्स ने डीप मिडविकेट की तरफ खेला. और दो रनों के लिए दौड़ पड़े. फिर से गप्टिल सीन में. फिर से धोनी मोमेंट की संभावना. लेकिन यहां कुदरत ने हिसाब बराबर कर दिया. जो गेंद स्टंप्स पर जा लगनी थी या कीपर के हाथों में जा टिकनी थी, वो डाइव लगाते स्टोक्स के बल्ले से जा लगी. और बाउंड्री से बाहर चली गई. एक्स्ट्रा चार रन. जिन्होंने इंग्लैंड को टाई तक पहुंचाया. वरना मैच न्यूज़ीलैंड का था. कप न्यूज़ीलैंड का था.

इसके बाद सुपरओवर भी टाई हुआ. और इंग्लैंड ने मैच को बाउंड्री काउंट के आधार पर जीत लिया. इस मैच के बाद न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ियों की मायूसी साफ दिख रही थी. न्यूज़ीलैंड के साथ-साथ दुनिया का हर वो इंसान उस दिन मन ही मन में रो रहा था, जो कमज़ोर के साथ होता है.

3. MI vs CSK 2019 IPL फाइनल:
जब भारतीय क्रिकेट की गाथा लिखी जाएगी, तो उसमें सुनहरे अक्षरों में सबसे ऊपर जिन खिलाड़ियों का नाम होगा उनमें महेन्द्र सिंह धोनी ज़रूर होंगे. आखिरी दम तक, बड़े मुकाबले में मैच को कैसे बनाना और कैसे बचाना है, ये महेन्द्र सिंह धोनी से बेहतर कोई और नहीं जानता. लेकिन साल 2019 में उनके साथ एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार ऐसा हुआ जिसे देखकर फैंस अपनी आंख बंद करना चाहेंगे.

आईपीएल फाइनल 2019, चेन्नई की टीम लगातार दूसरी बार आईपीएल फाइनल में पहुंची. मुंबई ने पहले खेलते हुए 20 ओवरों में 149 रन बनाए. जवाब में सबसे उम्रदराज खिलाड़ियों वाली चेन्नई की टीम शेन वॉटसन के कंधो पर लक्ष्य पार करने की कोशिश कर रही थी. धोनी फाइनल में फ्लॉप हो गए. महज़ 2 रन बनाकर रनआउट. लेकिन फिर घुटने में चोट और खून बहते हुए भी वाटसन ने चेन्नई को लक्ष्य के पास पहुंचा दिया.

Malinga
आईपीएल 2019 फाइनल में लसिथ मलिंगा. (फोटो IPL Facebook)

आखिरी ओवर में चेन्नई को जीत के लिए 6 गेंदों में 9 रनों की दरकार थी. वाटसन मलिंगा के सामने स्ट्राइक पर थे. उन्होंने पहली गेंद पर एक रन लिया. अगली गेंद पर जडेजा ने भी एक रन लेकर स्ट्राइक बदल ली. मलिंगा की तीसरी गेंद पर दो रन और आ गए. लेकिन वाटसन आखिरी ओवर की चौथी गेंद पर दो रन लेने की कोशिश में रनआउट हुए.

अब चेन्नई को जीत के लिए दो गेंदों में चार रनों की ज़रूरत थी. आखिरी गेंद पर चेन्नई को जीत के लिए दो रनों की जरूरत थी, लेकिन मलिंगा ने शार्दुल ठाकुर को एलबीडब्ल्यू करके चेन्नई की जीत का सपना तोड़ दिया. मुंबई की टीम एक रन से जीतकर चैम्पियन बन गई.

इस मैच के बाद एक बार फिर से वो करोड़ों दिल टूट गए जो धोनी की जीत में ही देश की जीत महसूस करते हैं.

4. NZ vs WI 2019 विश्वकप:
2019 में एक या दो नहीं, बल्कि दिल को सदमा देने वाले तीन-तीन मुकाबलों में न्यूज़ीलैंड की टीम शामिल रही. ऐसा ही मुकाबला खेला गया. वेस्टइंडीज़ और न्यूज़ीलैंड के बीच. 22 जून. विश्वकप 2019 का 29वां मैच. न्यूज़ीलैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए कप्तान केन विलियमसन के शतक की मदद से विशाल 291 रन बनाए.

अब वेस्टइंडीज की टीम खेलने उतरी. क्रिस गेल और शिमरोन हेटमायर ने टीम को संभालने की कोशिश की. लेकिन एक के बाद एक विकेट गिरते रहे. 142 के स्कोर पर जब जेसन होल्डर के रूप में वेस्टइंडीज़ ने पांचवां विकेट खोया, तो लगने लगा कि अब सिर्फ औपचारिकता बची है.

इसके बाद 152 पर गेल, 162 पर लुइस गए और न्यूज़ीलैंड को जीत के ख्वाब आने लगे. लेकिन न्यूज़ीलैंड की टीम ये भूल गई थी कि मैदान पर अब भी ऐसा खिलाड़ी खड़ा है जो मैच को पलक झपकते ही बदल सकता है. हुआ भी बिल्कुल वैसा ही. कार्लोस ब्रैथववेट मैदान पर डटे रहे और पारी के साथ-साथ टीम को खींचते-खींचते जीत की दहलीज़ तक ले गए.

एक वक्त पर 164/7 विकेट गंवाने वाली वेस्टइंडीज की टीम अब 48.5 ओवरों में 286/9 हो गई थी. जीत के लिए 7 गेंदों में महज़ 6 रनों की दरकार. स्ट्राइक पर ब्रैथवेट और मैदान पर मायूस विलियमसन.

Carlos Braithwaite
वेस्टइंडीज़ के बल्लेबाज़ कार्लोस ब्रैथवेट विश्वकप मैच के दौरान.फोटो: (ICC Facebook)

लेकिन 23वें ओवर से आखिर तक खुद पर काबू पाए खड़े ब्रैथवेट का सब्र छह रन पहले जवाब दे गया. 49वें ओवर की आखिरी गेंद को बाउंड्री पार पहुंचाने की कोशिश में ब्रैथवेट को बाउंड्री पर ट्रेंट बोल्ट ने लपक लिया. ब्रैथवेट निराशा के साथ मैदान पर बिल्कुल वैसे ही बैठे गए, जैसे जीने की आखिरी उम्मीद टूट जाने के बाद कोई शख्स.

इस तस्वीर ने करोड़ों फैंस के दिल तोड़ दिए. इस दिन कई भारतीय फैंस ने पाकिस्तान पर टीम इंडिया की जीत का जश्न नहीं बल्कि वेस्टइंडीज़ की हार का मातम मनाया था.

5. युवराज सिंह का संन्यास:
23 मार्च, पोर्ट ऑफ स्पेन, साल 2007. टीम इंडिया VS श्रीलंका विश्वकप का करो या मरो वाला मैच. पहले युवराज सिंह रनआउट हुए. फिर एमएस धोनी 0 रन बनाकर चलते बने. टीम इंडिया द्रविड़ की कोशिश के बावजूद हारी और विश्वकप से पहले राउंड में ही बाहर हो गई. इसके बाद निराश होकर लौटी टीम के दो युवा जोशीले खिलाड़ियों ने कुछ और ही सोचा था. सोचा होगा कि नहीं अब और नहीं. 1983 का इंतज़ार और ज्यादा लंबा नहीं होगा. साल 2007 में ही इस हार का बदला लिया जाएगा.

2007 की जीत की ट्रॉफी उठाते धोनी की उस तस्वीर से ज्यादा जिस तस्वीर को लोग गूगल पर खोजते हैं. वो है लगातार छह गेंदों पर छह छक्के लगाते युवराज की तस्वीर. 2007 टी20 विश्वकप में ब्रॉड की गेंद पर उन छह छक्कों ने पूरे देश को रातभर सड़कों पर नचवाया था.

फिर आया साल 2011. 2007 की हार का बदला लेने का सबसे सुनहरा मौका. इस विश्वकप में धोनी और युवराज ठान के उतरे थे. 2007 का बदला पूरा करने के लिए. युवराज सिंह ने इस विश्वकप में बल्ले और गेंद दोनों से एक बार नहीं, कई बार ऐसा खेल दिखाया. कि फिर 1983 को दोहराकर ही दम लिया.

1999 में डेब्यू वाली शानदार पारी, नेटवेस्ट सीरीज़ में कमाल का प्रदर्शन, 2003 विश्वकप में अहम भूमिका, लगातार छह गेंदो पर छह छक्के. 2007 विश्वकप में सबसे बड़ा मैच विनर. 2011 विश्वकप में कैंसर के बावजूद जीत का सबसे बड़ा हीरो. कैंसर से वापसी करते हुए मैदान पर वापसी करने वाला खिलाड़ी. युवराज के कितने रूपों को याद करेंगे आप.

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भारतीय दिग्गज युवराज सिंह की संन्यास प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर. (फोटो: Facebook)

10 जून 2019 का दिन. किसी को कानों-कान खबर नहीं थी कि क्या होने वाला है. अचानक से मुंबई के साउथ होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस का बुलावा आया. प्रेस कॉन्फ्रेंस थी युवराज सिंह की. कॉन्फ्रेंस के बुलावे और कॉन्फ्रेंस शुरू होने के बीच का ये वही वक्त था जो दुआ और दवा के असर के बीच का होता है.

युवराज के क्रिकेट को करीब से देखने वाले न जाने कितने ही फैंस ये चाहते थे कि नहीं अभी युवराज जैसा चैम्पियन खिलाड़ी क्रिकेट को इस तरह से अलविदा नहीं कह सकता. वो भी इस तरह से.

लेकिन युवराज ने अपनी ज़िंदगी की एक फिल्म चलाकर संन्यास का ऐलान कर दिया. इस ऐलान के साथ ही उस पीढ़ी का अंत हो गया, जिसे सौरव गांगुली ने बड़े चाव से सजाया था. अब न दादा खुद थे और न ही उनके सिपहसालार.

न जानें उस एक पल ने कितने ही क्रिकेटप्रेमियों के दिल तोड़ दिए…


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