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केजरीवाल के भाषण के पांच संकेत, जो दूसरी पार्टियों के लिए अलार्म की तरह हैं

अरविंद केजरीवाल एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए हैं. राजधानी के रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह के बाद अपने छोटे से भाषण के जरिए उन्होंने कुछ बड़े मैसेज दिए हैं. आगे इनके भाषण में छुपे संकेतों को पकड़ने की कोशिश की गई है.

दिल्ली के बाहर पांव पसारने की तैयारी

अरविंद केजरीवाल की स्पीच पर गौर कीजिए. यही पाएंगे कि उन्होंने इस जीत को केवल दिल्ली के दायरे में समेटने की बजाए पूरे देश से जोड़ने की कोशिश की. वे कहते हैं, पूरे देश में दिल्ली का डंका बज रहा है, कई राज्यों में दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक की तारीफ हो रही है, दिल्ली की सस्ती बिजली की तारीफ हो रही है. इसका इशारा साफ है.

दरअसल, दिल्ली में एक बार फिर प्रचंड बहुमत से सत्ता पर काबिज होने के बाद निश्चित तौर पर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की महत्वाकांक्षा हिलोरें मार रही होंगी. पार्टी इस बात को लेकर पहले से कहीं ज्यादा आश्वस्त होगी कि पब्लिक को जिन बातों से दिल्ली में लुभाया जा सकता है, उसी फॉर्मूले से दूसरे राज्यों को भी जीता जा सकता है.

उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अरविंद केजरीवाल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. फोटो: PTI
उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अरविंद केजरीवाल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. फोटो: PTI

इस बात को थोड़ा उल्टा करके सोचते हैं. क्या टीम केजरीवाल इस सवाल का जवाब तलाशने में नहीं जुट गई होगी कि आखिर वो कौन सा राज्य है, जहां के लोगों को फ्री बिजली, पानी या इलाज नहीं चाहिए? मतलब, आने वाले दिनों में अगर AAP बिहार और बंगाल के साथ बाकी जगहों पर भी चुनाव प्रचार करती नजर आए, तो ये कोई अचरज की बात नहीं होनी चाहिए.

‘सबका साथ’, मतलब हर पेशे के लोगों का साथ

AAP राजनीतिक पार्टी है. अन्ना आंदोलन के बाद अपने जन्म से लेकर अब तक तमाम सियासी दांव-पेच सीख चुकी है. चुनाव में कमोबेश वो सारे कार्ड आजमाती है, जो बाकी पार्टियां अपने फायदे के लिए चलती हैं. बस इसमें थोड़ा सा फर्क है. यही फर्क इसे दूसरी पार्टियों से अलग करता है.

जरा उनका भाषण देखिए. केजरीवाल किसी खास धर्म या जाति वालों का दिल जीतने की जगह आम आदमी पर पूरा फोकस रखते है. वो कहते हैं कि दिल्ली की जीत यहां रहने वालों की जीत है. इसे स्टूडेंट्स, टीचर, ऑटोवाले, रेहड़ीवाले, डॉक्टर, इंजीनियर, फैक्ट्री वाले, हर रोजगार देने वाले, रोजगार करने वाले की जीत बताते हैं. रामलीला मैदान के सजे हुए मंच पर हर तरह के पेशे के लोगों को जगह देते हैं.

केजरीवाल एक तरह से ये ऐलान कर रहे होते हैं कि समाज को भगवा या हरे रंग के चश्मे से देखने की जगह सतरंगी चश्मे से देखना कहीं ज्यादा मुफीद हो सकता है.

रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. फोटो: PTIring In Ceremony
रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. फोटो: PTI

‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ से परहेज़ नहीं

केजरीवाल ने स्पीच में फ्री वाली राजनीति को जायज ठहराते हुए बड़ी होशियारी से श्रवण कुमार की कथा भी सुना दी. बता दिया कि इतनी पौराणिक कथाएं वे भी जानते हैं, जितनी हिंदुत्व का झंडा उठाने वाले दूसरे लोग. इससे पहले हनुमान चालीसा और मंगलवार की महिमा (रिजल्ट वाला दिन) बता चुके हैं.

ये एक तरह का संकेत है कि पार्टी आने वाले दिनों में भी ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का कार्ड चलती रहेगी, लेकिन अपनी मर्ज़ी के दिन और अपनी मनचाही बिसात पर. इस मामले में किसी और पार्टी से होड़ लेने का उसका कोई इरादा नहीं है.

चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल ने खुद को हनुमान भक्त की तरह पेश किया. फोटो: PTI
चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल ने खुद को हनुमान भक्त की तरह पेश किया. फोटो: PTI

देशभक्ति बनाम ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ का नतीजा क्या?

स्पीच की शुरुआत और अंत में ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगवाकर केजरीवाल ने ये भी साफ कर दिया कि वो दूसरे के सियासी हथियार को अपने पक्ष में इस्तेमाल करने का हुनर आगे भी दिखाते रहेंगे. जब वे मंच से ये ऐलान करते हैं कि आपका बेटा CM बन गया, तो इसका केवल इतना ही मतलब नहीं है.

ये उन लोगों को जवाब हो सकता है, जो चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें आतंकवादी, अराजकतावादी या ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ के रहनुमा बताने की कोशिश कर रहे थे.

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान लोगों का अभिवादन स्वीकार करते अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया. फोटो: PTI
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान लोगों का अभिवादन स्वीकार करते अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया. फोटो: PTI

विकास की धुरी पर आम आदमी की राजनीति

अरविंद केजरीवाल का पूरा भाषण (जिसमें एक भाषणनुमा कविता भी शामिल है) शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, सड़क, पानी जैसी बुनयादी जरूरतों और विकास के मुद्दे के इर्द-गिर्द ही घूमता है. देश की तरक्की और खुशहाली के सपने दिखाते हुए वे यहां तक कह जाते हैं कि आने वाले दिनों में भारत का डंका लंदन, टोक्यो, अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक बजेगा.

किसी के अंदर जोश की कमी न रह जाए, इसके लिए ‘हम होंगे कामयाब’ जोर से दोहराने को भी कहते हैं. साफ है कि पार्टी जीत के अपने फॉर्मूले को आने वाले वक्त में भी कस कर पकड़े रखना चाहेगी. खासकर तब, जब चुनावी बिसात पर पत्ते सही बैठ रहे हों और कामयाबी भी गले लगाने को तैयार नज़र आ रही हो.


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