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भारतीय दिग्गज समेत वो पांच क्रिकेटर जिन्होंने अंपायरिंग में लोहा मनवाया

21 अप्रैल को जन्मदिन होता है श्रीनिवासन वेंकटराघवन का. वेंकट सिर्फ टीम इंडिया के खिलाड़ी नहीं रहे. बल्कि इंडियन टीम से विदाई के बाद उन्होंने सलेक्टर, एडमिनिस्ट्रेटर, मैनेजर, आईसीसी रैफरी, आईसीसी इंटरनेशनल अंपायर, स्पोर्ट्स राइटर और टीवी एक्सपर्ट तक की ना जाने कितनी ज़िम्मेदारियां निभाईं.

लेकिन इनमें जो दो सबसे अहम रोल रहे वो उनका एक सफल क्रिकेटर और एक सफल क्रिकेट अंपायर होना रहा.

वेंकट का क्रिकेटिंग करियर:
वेंकटराघवन ने साल 1965 में 20 साल से भी कम उम्र में इंडियन टीम के लिए अपना डेब्यू कर लिया. न्यूज़ीलैंड के खिलाफ सीरीज़ में उन्हें मौका मिला. पहली सीरीज़ में ही उन्होंने वर्ल्ड-क्लास स्पिनर होने का तमगा हासिल कर लिया. दिल्ली टेस्ट में उन्होंने 12 विकेट चटकाकर दुनिया को इंटरनैशनल क्रिकेट में अपनी एंट्री के बारे में बता दिया. उनकी कसी हुई गेंदबाज़ी पर क्लाइव लॉयड, गैरी सोबर्स और इयान चैपल जैसे बल्लेबाज़ मुश्किल में पड़ जाते थे.

धीरे-धीरे वेंकट ने भगवत चंद्रशेखर, बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली प्रसन्ना वाले स्पिन अटैक के बीच अपनी जगह बनाई. वो वनडे टीम का भी चेहरा बन गए. उन्होंने 1975 और 1979 में टीम इंडिया का कप्तान बनाकर भेजा गया. हालांकि इंडियन टीम उस विश्वकप में कुछ खास नहीं कर सकी थी. उन्होंने टेस्ट में 156 और वनडे में सिर्फ पांच विकेट चटकाए. साल 1983 आते-आते वेंकट ने टेस्ट और वनडे दोनों क्रिकेट को अलविदा कहकर अपने लिए एक नया रास्ता चुन लिया था.

‘सम्मानित’ अंपायर वेंकटराघवन: 

S Venkataraghvan
श्रीनिवास वेंकटराघवन. फोटो: ICC

वेंकटराघवन को क्रिकेट जगत की तरह ही अंपारिंग में भी खूब सम्मान मिला. उन्होंने आईसीसी के लिए पहली बार 1993 में टेस्ट मैच में अंपायरिंग की. मैच इंडिया और इंग्लैंड के बीच जयपुर में खेला गया था. साल 1994 में जब इंटरनेशनल अंपायरों का पैनल बना तो वैंकट को उसमें भी जगह मिली. वेंकट ने इसके बाद अपनी अंपायरिंग से इतना प्रभावित किया कि उन्हें आईसीसी बड़े मैचों में अंपायरिंग का जिम्मा सौंपने लगा.

आईसीसी ने उन्हें छह एशेज़ और तीन क्रिकेट विश्वकप में अपॉइंट किया. वो साल 1996, 1999 और 2003 क्रिकेट विश्वकप में बड़े अंपायर थे.

साल 2002 में जब आईसीसी ने सर्वश्रेष्ठ आठ अंपायरों का पैनल बनाया तो वेंकट उसमें भी शामिल थे. 2004 में अंपायरिंग करियर से संन्यास लेने तक वो उस पैनल का हिस्सा रहे. वेंकट ने संन्यास से पहले 73 टेस्ट और 52 वनडे मैचों में शानदार अंपायरिंग की.

वेंकट की बात हो गई, अब थोड़ा आगे बढ़ते हैं. वेंकट के अलावा भी कई ऐसे क्रिकेटर रहे जिन्होंने बाद में अंपायरिंग की. उनमें से चार के बारे में जान लीजिए.

1. मार्क बेन्सन:
मार्क बेन्सन का नाम आज के समय में क्रिकेट देखने वालों के सामने लिया जाए. तो उनकी इमेज एक लूज़ जैकेट और स्टाइलिश कैप पहने अंपायर की दिखेगी. लेकिन मार्क बैन्सन अंपायर बनने से पहले क्रिकेटर भी रहे. इंग्लैंड की डॉमेस्टिक टीम केन्ट के लिए मार्क 15 सीज़न तक खेले. जिसमें उन्होंने 292 मैचों में 18387 रन बनाए. साल 1986 में उन्होंने इंडिया के खिलाफ डेब्यू किया. जिसमें उन्होंने 30 और 21 रनों की पारी खेली. इंग्लैंड के लिए उनके नाम ये इकलौता टेस्ट मैच रहा.

Mark Benson
मार्क बेन्सन. फोटो: ICC

साल 1995 में क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने भी अंपायरिंग की दुनिया में कदम रख लिया. वो आईसीसी के एलीट पैनल में भी रहे. साथ ही 27 टेस्ट, 72 वनडे और 19 टी20 मैचों में अंपायरिंग भी की.

2. इयान गोल्ड
इयान गोल्ड को क्रिकेट का प्रतिष्ठित अंपायर माना जाता है. साल 2018 में जिस वक्त मैदान पर सेंडपेपर कांड हुआ तब भी इयान गोल्ड ही अंपायर थे. लेकिन क्रिकेट के मैदान पर अपनी अंपायरिंग की कला दिखाने से पहले इयान एक शानदार विकेटकीपर बल्लेबाज़ भी रहे हैं. गोल्ड ने इंग्लैंड के लिए लगभग दो दशकों तक फर्स्ट-क्लास और लिस्ट ए क्रिकेट खेला. उन्होंने इंग्लैंड के लिए कुल 18 वनडे मुकाबले खेले. जिसमें से कुछ तो साल 1983 क्रिकेट विश्वकप में ही रहे.

Ian Gould
इयान गोल्ड. फोटो: ICC

गोल्ड लाजवाब विकेटकीपर थे. फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उनके नाम 603 डिस्मिसल्स हैं. जबकि लिस्ट ए में उन्होंने 279 शिकार किए हैं. बल्ले से भी इयान ने खूब रन बनाए. फर्स्ट-क्लास में उन्होंने 8756, जबकि लिस्ट ए में 4377 रन बनाए.

क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने कुल 65 टेस्ट, 125 वनडे और 37 टी20 मैचों में अंपायरिंग की है.

3. अशोका डि सिल्वा:
2003 क्रिकेट विश्वकप हो या फिर 2007. ना जाने कितने ही मौकों पर हमने अशोका डीसिल्वा को अंपायरिंग करते देखा है. लेकिन क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ियों को आउट देने से पहले उन्होंने खुद भी खिलाड़ियों को आउट किया. वो श्रीलंकाई टीम के खिलाड़ी रहे हैं. उन्होंने श्रीलंका के लिए 1985 से 1992 के बीच कुल 10 टेस्ट और 28 वनडे मैच खेले. बतौर लोअर ऑर्डर बैट्समैन और लेग स्पिनर उन्होंने 25 विकेट लिये और 323 रन बनाए.

Ashoka De Silva
अशोका डि सिल्वा. फोटो: ICC

लेकिन क्रिकेट में कुछ खास सफलता नहीं मिल पाने की वजह से 1999 से वो अंपायरिंग की दुनिया में आ गए. साल 2012 तक वो आईसीसी के अंपायरिंग पैनल का हिस्सा रहे. उन्होंने 49 टेस्ट, 122 वनडे और 11 टी20 मैचों में अंपायरिंग की.

4. कुमार धर्मसेना:
साल 1993 से 2004 तक स्पिनर कुमार धर्मसेना श्रीलंकन टीम का हिस्सा रहे. धर्मसेना ने श्रीलंका के लिए कुल 31 टेस्ट और 144 वनडे मुकाबले खेले. लेकिन मुरलीधरन वाले दौर में टीम का हिस्सा रहे धर्मसेना को  प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनने का मौका कम ही मिला. उन्होंने अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाज़ी से 69 टेस्ट और 138 वनडे विकेट लिए. साथ ही साथ उन्होंने बल्ले से भी 2000 से ज्यादा इंटरनेशनल रन बनाए. लेकिन फिर भी क्रिकेट के मैदान पर वो बात बनती नहीं दिख रही थी.

Kumar Dharamsena
कुमार धर्मसेना. फोटो: ICC

साल 2006 में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेकर उन्होंने अंपायरिंग का रुख कर लिया. क्रिकेट के मैदान पर गेंद से ज्यादा कामयाबी उन्हें अंपायरिंग में मिली. वो साल 2011, 2015 और 2019 विश्वकप में अहम अंपायर रहे. साल 2015 और 2019 विश्वकप के फाइनल का जिम्मा भी धर्मसेना पर ही था.

इतना ही नहीं वो इकलौते ऐसे क्रिकेट से अंपायर बने खिलाड़ी हैं, जिन्हें अंपायरों की लिए सम्मानित आईसीसी डेविड शेफर्ड ट्रॉफी से सम्मानित किया गया.


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