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अगर 2010 में बिना फैंस के होता ग्वालियर वनडे, तो सचिन 200 रन नहीं बना पाते!

कोरोना वायरस महामारी की वजह से खेल जगत पर भी संकट छाया है. दुनियाभर में इस महामारी से ऐसा लगने लगा है कि अब लंबे वक्त तक क्रिकेट के मैदान पर फैंस नहीं दिखेंगे. अब जब फिर से क्रिकेट शुरू होगा, तो भले ही इससे मेहमान टीम को ज़्यादा फ़र्क न पड़े, लेकिन मेज़बान टीम को बहुत सी कमी महसूस होगी. क्योंकि टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि मैदान पर कई डिसीज़न पर भी फैंस का असर दिखता है.

हाल में डेल स्टेन ने एक बयान दिया है. स्टेन ने कहा-

”तेंडुलकर ने हमारे के खिलाफ 200 रन बनाए थे. मुझे लगता है कि मैंने उन्हें 190 के पास LBW किया था. लेकिन गोल्ड ने उन्हें नॉट-आउट दिया. और मैं उस वक्त सोच रहा था कि आखिर क्यों नॉट-आउट दिया. शायद वो ये सोच रहे थे कि मैदान में चारों तरफ देखो, अगर मैंने आउट दिया, तो शायद वापस होटल ना पहुंच पाऊं.”

साउथ अफ्रीका के खिलाफ साल 2010 में ग्वालियर वनडे में सचिन ने महज़ 147 गेंदों में दोहरा शतक बनाया था. सचिन वनडे में पहले ऐसे बल्लेबाज़ बने थे, जिन्होंने वनडे क्रिकेट में 200 रन पूरे किए थे.

डेल स्टेन की ये बात पूरी तरह से इसलिए सही नहीं है, क्योंकि मैदान पर मौजूद अंपायर सिर्फ इस कारण से फैसला नहीं सुनाते कि वो किस देश के मैदान पर अंपायरिंग कर रहे हैं. बल्कि उनके ज़हन में आईसीसी के नियमों के अलावा एक दबाव भी होता है, जिसे होम क्राउड का दबाव का माना जा सकता है. भले ही उस मुकाबले में स्टेन को सचिन का विकेट नहीं मिला, लेकिन ऐसा नहीं है कि क्रिकेट मैदान पर वो सिर्फ एक बार हुआ.

वैसे तो अंपायर भी इंसान होते हैं और उनसे भी गलतियां हो सकती हैं. लेकिन क्रिकेट के मैदान पर कई ऐसे मौके आए, जब अंपायर्स ने होम टीम के लिए ऐसे फैसले दिए, जिसके बाद क्रिकेट के जानकारों को लगा कि ये फैसले होम टीम के पक्ष में हैं.

1. एंड्र्यू सायमंड्स vs इंडिया, सिडनी टेस्ट, 2008

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऑस्ट्रेलिया में खेली गई 2008 सीरीज़ के सिडनी टेस्ट को वैसे तो 11 विवादित फैसलों के लिए याद किया जाता है, जिनमें आठ भारत के खिलाफ गए. लेकिन सिडनी टेस्ट में अंपायरिंग के स्तर और ऑस्ट्रेलियंस ने अपने होमड्राउंड पर सारी हदें पार कर दीं.

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2008 सिडनी टेस्ट में एंड्र्यू सायमंड्स. फोटो: Reuters

एंड्र्यू सायमंड्स उस मैच में कई बार कॉन्ट्रोवर्सी के शिकार हुए. लेकिन उन्हें अंपायर ने एक ऐसा जीवनदान दिया कि लगने लगा मैच ईमानदारी से ही नहीं खेला जा रहा. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 134 के स्कोर पर 6 विकेट गंवा दिए थे. लेकिन इसके बाद साइमंड्स और ब्रैड हॉग के बीच पार्टनरशिप हुई. दोनों टीम को 193 के स्कोर तक ले गए. ईशांत शर्मा ने पारी के 47वें ओवर साइमंड्स को एक बाहर जाती गेंद फेंकी. गेंद बल्ले का किनारा लेकर धोनी के हाथों में थी.

इशांत समेत पूरी टीम अपील करती है. लेकिन अंपायर स्टीव बकनर इसे सिरे से नकार देते हैं. ऑस्ट्रेलियन फैंस ज़ोर से चिल्लाने लगते हैं. बाद में स्निको मीटर में भी बल्ले का किनारा साफ दिखता है.

2. कुमार संगाकारा vs ऑस्ट्रेलिया, होबार्ड टेस्ट, 2007

एक बार फिर से ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज़ थी. दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका के सामने 506 रन का टारगेट रखती है. लेकिन 507 रन के जवाब में श्रीलंकाई टीम 300 रन से पहले ही आठ विकेट गंवा बैठती है. लेकिन तीसरे नंबर पर खेलने उतरे संगाकारा क्रीज़ पर जम जाते हैं.

संगाकारा एक छोर संभालते हुए टीम के स्कोर को आगे बढ़ाते हैं. इस दौरान संगा अपना शतक भी पूरा करते हैं. वो मलिंगा के साथ मिलकर नौवें विकेट के लिए 74 रन जोड़ लेते हैं. श्रीलंकाई टीम जीत से 153 रन दूर रहती है और संगाकारा अपने दोहरे शतक से सिर्फ आठ रन. लेकिन ऑस्ट्रेलियन स्टुअर्ट क्लार्क एक बाउंसर फेंकते हैं. गेंद संगा के बाएं कंधे पर लगकर पोन्टिंग के हाथों में जाती है. पूरी ऑस्ट्रेलियन टीम ज़ोरदार अपील करती है. उनके साथ ही होबार्ड का क्राउड भी इतनी ज़ोर से अपील करता है कि रूडी कर्टज़न बिना कुछ सोचे संगाकार को आउट दे देते हैं. बाद में श्रीलंका इस मैच को सिर्फ 96 रनों से गंवाती है.

3. एबी डीविलियर्स vs इंडिया, 2007 फ्यूचर कप, बेलफास्ट

आयरलैंड में खेली जा रही इस सीरीज़ में डीविलियर्स को अंपायर ऐसा जीवनदान देते हैं कि इंडियन फैंस ही नहीं, सचिन तेंडुलकर तक नाराज़ हो जाते है. सीरीज़ के तीसरे वनडे में डीविलियर्स, मॉर्ने वेन विक के साथ पारी शुरू करने उतरते हैं. लेकिन साउथ अफ्रीका की शुरुआत बेहद खराब होती है. अगरकर शुरुआती तीन ओवरों में दो विकेट झटक लेते हैं.

डीविलियर्स अभी सिर्फ आठ रन बनाकर खेल रहे होते हैं. पारी के चौथे ओवर में ही ज़हीर की गेंद डीविलियर्स के बल्ले का किनारा लेकर सीधे पहले स्लिप में खड़े सचिन तेंडुलकर हाथों चली जाती है. लेकिन ये क्या, अंपायर आलिम डार इसे सिरे से नकार देते हैं. दर्शकों में मौजूद साउथ अफ्रीकी फैंस खुशी से झूम उठते हैं.

रीप्ले में भी साफ दिखता है कि गेंद डीविलियर्स के बल्ले के निचले हिस्से का किनारा लेकर गई है. लेकिन अंपायर इसे नॉट-आउट देते हैं.

4. एंड्र्यू फ्लिटॉफ vs न्यूज़ीलैंड, ऑकलैंड तीसरा टेस्ट, 200

साल 2002 में इंग्लैंड की टीम तीन मैच की सीरीज़ का पहला टेस्ट जीत चुकी थी. दूसरा टेस्ट ड्रॉ हो गया. लेकिन न्यूज़ीलैंड की टीम ने तीसरे टेस्ट में वापसी कर ली. फिर भी क्रिकेट के मैदान की सबसे ईमानदार टीमों में से एक मानी जाने वाली किवी टीम ने उस मैच में एक विवादास्पद अपील की.

Andrew Flintoff
फ्लिंटॉफ. फाइल फोटो

किवी टीम ने पहली पारी में 202 रन बनाए. जवाब में इंग्लैंड की टीम पहली पारी में पिछड़ गई. इंग्लैंड की टीम ने इस स्कोर के जवाब में 75 रन पर ही पांच विकेट गंवा दिए थे. इंग्लैंड के ऑल-राउंडर एंड्र्यू फ्लिटॉफ ने जेम्स फोस्टर के साथ मिलकर टीम को आगे बढ़ाने की कोशिश की. लेकिन 53 रनों की पार्टनरशिप के बाद एंड्र्यू एडम्स ने एक गेंद फेंकी. ये गेंद फ्लिटॉफ के बल्ले के बहुत दूर से गई और सीधे कीपर एडम परेरा ने लपक ली. किवी टीम ज़ोर से अपील करने लगी. उनके साथ पूरा मैदान भी ज़ोश में चिल्लाने लगा. हालांकि गेंदबाज़ एडम्स बिल्कुल शांत थे. लेकिन अंपायर ने सीधे अपनी उंगली उठाकर होम टीम के लिए ये डिसीज़न दे दिया.

बाद में इंग्लैंड की टीम ये मैच हार गई और सीरीज़ 1-1 से ड्रॉ रही.

5. स्टुअर्ट ब्रॉड vs ऑस्ट्रेलिया, 2013 पहला टेस्ट, नॉटिंघम

2013 में एशेज़ खेलने इंग्लैंड पहुंची ऑस्ट्रेलियाई टीम पहले टेस्ट में मजबूत स्थिति में थी. उसने इंग्लैंड पर पहली पारी के आधार पर बढ़त ले ली थी, जबकि इंग्लैंड की टीम दूसरी पारी में भी लड़खड़ा चुकी थी. इयान बेल, स्टुअर्ट ब्रॉड के साथ मिलकर टीम को संभाल रहे थे. दोनों मिलकर टीम को एक अच्छे स्कोर तक पहुंचाने के लिए साझेदारी कर रहे थे.

मैदान पर मौजूद दर्शक हर एक रन के साथ इन दोनों बल्लेबाज़ों को तालियों के साथ चियर कर रहे थे. लेकिन एशटन एगर की एक गेंद स्टुअर्ट के बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर के ग्लव से टकराकर सीधे पहले स्लिप पर माइकल क्लार्क के हाथों में चली गई. पूरे मैदान पर सन्नाटा और ऑस्ट्रेलियन जश्न मनाने लगे. लेकिन अंपायर आलिम डार अपनी जगह से बिल्कुल भी नहीं हिले.

डार ने फैसला होम टीम के पक्ष में सुनाया, ब्रॉड नाट-आउट रहे. पूरा मैदान ज़ोर से चिल्लाने लगा. इसके बाद ब्रॉड ने अपनी पारी में 28 रन और जोड़े और कुल 65 रन बनाकर आउट हुए. ऑस्ट्रेलिया की टीम जब 311 रनों का लक्ष्य चेज़ करने उतरी तो सिर्फ 296 रन ही बना सकी और जीत से 14 रनों से चूक गई. ब्रॉड के वो 28 रन ऑस्ट्रेलिया पर भारी पड़े.

Stuart Broad
स्टुअर्ट ब्रॉड. फाइल फोटो.

क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कितने ही विवादास्पद फैसला मिल जाएंगे. हालांकि अब डीआरएस के दौर में इन्हें कम करने की कोशिश की गई है.

अब कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बाद की नई दुनिया क्रिकेट के लिए भी बिल्कुल अलग होगी. हो सकता है लंबे वक्त तक क्रिकेट के मैदान पर दर्शक भी न हों. तो ऐसे में होम टीम या अवे टीम का कोई फर्क नहीं रहे. साथ ही शायद फैंस के दबाव में क्रिकेट अंपायर्स भी मैदान पर अब कम गलतियां करें.


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