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वैक्सीन लगवाकर आईं लल्लनटॉप टीम मेंबर की बातें आपके बहुत काम आने वाली हैं!

कुछ समय पहले खबर आई थी कि 1 मई से 18 से 44 साल की उम्र के लोगों के वैक्सिनेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है. 28 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू हुए. और 1 मई से कुछ स्लॉट खोल दिए गए. 18 से 44 के एज ग्रुप में आने वाले आपमें से कुछ लोग शायद वैक्सीन लगवा भी चुके हों. हमारी साथी प्रतीक्षा ने भी वैक्सीन की पहली डोज़ लगवा ली है. उन्होंने अपने ‘वैक्सीन एक्सपीरियंस’ हमारे-आपके साथ शेयर किए हैं. अब यहां से आप जो भी पढ़ेंगे, वो प्रतीक्षा की ज़ुबानी.


जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है उनके मन में कई सवाल आ रहे हैं. चूंकि मैं दिल्ली के एक सरकारी वैक्सिनेशन सेंटर में जाकर वैक्सीन लगवा चुकी हूं, मैं कोशिश कर रही हूं कि उन छोटे छोटे सवालों के जवाब आपको दे सकूं. जो मेरे दोस्त या आस पास के लोग मुझसे पूछ रहे हैं.

सबसे पहला सवाल, कैसे पता करें कि आपके आस पास वैक्सीन लग रही है या नहीं. उपलब्धता पता करने के लिए cowin.gov.in साइट पर जाएं. वहां आपको रजिस्टर करने का ऑप्शन दिखेगा. यूं तो आप बिना रजिस्टर किए भी  वैक्सीन की उपलब्धता चेक कर सकते हैं. लेकिन चूंकि आपका लक्ष्य वैक्सीन लगवाना है, बेहतर है आप खुद को रजिस्टर कर लें.

रजिस्टर पर क्लिक करने के बाद लॉगइन करें. जिसके लिए एक महज़ एक ओटीपी लगेगा. जिसके लिए आपको अपना फ़ोन नंबर डालना होगा.

अपने अलावा आप तीन और, यानी कुल चार लोगों को रजिस्टर कर सकते हैं. याद रहे, रजिस्टर करते समय एक सरकारी फोटो आईडी होना जरूरी है. इसके लिए आप अपना पैन कार्ड, आधार कार्ड या वोटर्स कार्ड तैयार रखें. ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट का इस्तेमाल भी आप कर सकते हैं.

आप चारों व्यक्तियों के लिए अलग अलग आईडी ऑप्शन भी चुन सकते हैं. जैसे किसी से पास आधार हो, किसी के पास पैन, तो कोई दिक्कत नहीं है.

रजिस्टर करने के बाद नाम के नीचे ही आपको ऑप्शन दिखेगा अपॉइंटमेंट शेड्यूल करने का. उसपर क्लिक करें.

फिर आपको वैक्सिनेशन स्लॉट चेक करने का ऑप्शन मिलेगा. जिसमें आप अपना पिन कोड डालकर सर्च कर सकते हैं. या फिर सर्च बाय डिस्ट्रिक्ट में जाकर अपना राज्य और डिस्ट्रिक्ट सेलेक्ट कर सकते हैं.

अगर स्लॉट का रंग लाल दिख रहा तो इसका मतलब है कि स्लॉट भर चुका है. अगर पीला दिख रहा है तो उसमें एक संख्या भी लिखी होगी. उदाहरण के लिए, अगर उसमें 6 लिखा है तो इसका अर्थ है कि इस जगह 6 लोगों की बुकिंग की जगह खाली है.

अपने मन का सेंटर सेलेक्ट करने आप आपसे प्रिफर्ड टाइम स्लॉट पूछा जाएगा. अपने मन का स्लॉट सेलेक्ट कर आप बुकिंग फाइनल कर सकते हैं.

ये तो हो गई सरकारी जानकारी. अब आते हैं असली बात पर. यानी सुनने में आसान सा लगने वाला ये प्रोसेस असल में कितना आसान है.

– रजिस्ट्रेशन के बाद असली दिक्कत शुरू होती है. यूं तो बहुत से स्लॉट दिखते हैं. लेकिन जैसे ही 18 से 45 साल वाला फ़िल्टर लगाओ,  स्लॉट ही उड़ जाते हैं.  कई बार तो पूरे सेंटर उड़ जाते हैं. कुल मिलाकर ये कि 45 साल से ऊपर वालों के लिए वैक्सीन बची हैं, लेकिन 18 साल से ऊपर वालों को लगाने के लिए अभी स्टॉक नहीं है.

– मुझे स्लॉट कैसे मिला? किस्मत से. कुछ और लोग भी हैं जिन्हें कोविन की साइट से ही स्लॉट मिल गया. स्लॉट कब खुलते हैं, इसकी जानकारी नहीं मिलती. इनमें सरकारी स्लॉट भी हैं और प्राइवेट भी. प्राइवेट अस्पतालों के आगे ‘पेड’ लिखा होगा. साथ ही अस्पताल वैक्सीन कितने की दे रहा है, ये भी लिखा होगा.

– इन्हें बुक करना दिवाली के समय दिल्ली से घर की तत्काल ट्रेन टिकेट बुक करने जैसा है. कई बार स्लॉट में उपलब्धता दिखती है. मगर जैसे ही बुक पर क्लिक करो, मैसेज लिखा आता है कि सेंटर फुल हो चुका है.

– असलियत ये भी है कि प्राइवेट अस्पताल कम से कम 31 मई तक फुल दिखा रहे हैं. और सरकारी सेंटर की बुकिंग कब खुलकर बंद भी हो जा रही है, किसी को पता नहीं चल रहा है.

– मेरा आपको यही सुझाव रहेगा कि लगातार ऐप पर चेक करते रहें. इसके अलावा कोई उपाय नहीं दिखता. हां, कुछ ऐप ज़रूर हैं जो ये सुविधा दे रहे हैं कि आपके इलाके में जैसे ही वैक्सीन उपलब्ध होगी, वो आपके ईमेल से एक अलर्ट भेज देंगे.

Vaccination Center
वैक्सीनेशन सेंटर पर आपको लंबी लाइन मिलना करीब-करीब तय है. ऐसे में डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करें. (सांकेतिक फोटो- PTI)

– अगर आपको स्लॉट दिख रहा हो तो आप अपने अलावा किन्हीं तीन करीबियों की भी बुकिंग तुरंत ही कर लें. इससे उन्हें रजिस्ट्रेशन के लंबे प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा. चूंकि स्लॉट बहुत जल्दी भर रहे हैं, आप ऐसा कर अपने तीन करीबियों का भला करेंगे. ज़रूरी नहीं बाकी लोग आपके परिवार के हों. आपके दोस्त, पड़ोसी, कोई भी हो सकते हैं.

– अगर आप किस्मत वाले निकले तो आपको स्लॉट मिल आएगा. अब करते हैं आगे की बात.

– रजिस्ट्रेशन के समय आपको टाइम स्लॉट मिला होगा. हो सकता है आपने दोपहर का या शाम का टाइम चुना हो. अगर ऐसा किया है तो उसके भरोसे देर से मत जाइए. आई रिपीट, अपने टाइम स्लॉट के भरोसे मत रहिए. क्योंकि ये बस ‘प्रिफर्ड’ टाइम स्लॉट हैं. वैक्सीन सेंटर पर मामला फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व बेसिस पर है. यानी पहले आओ, पहले पाओ. बेहतर है कि आप सुबह ही जाकर लाइन में लग जाएं.

– मुझे लाइन में खड़े कुछ ऐसे लोग भी दिखे जो पिछले दिन आए थे लेकिन उनको वैक्सीन नहीं मिली.

– एक और बात,  बिना टाइम स्लॉट बुक किए आप जाएंगे तो बहुत मुमकिन है कि आपको वापस लौटा दिया जाएगा.

– वैक्सीन के लिए जाते समय ये जरूर ध्यान रखें कि वहां आपके जैसे सैकड़ों लोग आएंगे. यानी वहां भीड़ होगी. और ये भीड़ में जाने का सही वक़्त नहीं है. तो आप क्या करें? एक डिस्पोजेबल मास्क लगाएं, उसके ऊपर एक बिना वॉल्व (जो छोटी सी कटोरी लगी होती है) वाला N95 मास्क लगाएं. पूरी तरह सेफ़ रहना है तो चेहरे पर फेस शील्ड, हाथों में ग्लव्स और सर पर हेड कवर लगाएं. गर्मी बहुत है और आपको बेहद पसीना होना वाला है. लेकिन इससे बुरा क्या होगा कि जिस बीमारी कि वैक्सीन लेने जाएं उसी बीमारी को ले आएं.

– लाइन में खड़े हों. अगर आप झुण्ड बनाकर खड़े होंगे तो ये आपकी सेहत और रोज़ हजारों लोगों को वैक्सीन लगवाने का काम कर रहे पुलिस और हेल्थ केयर वर्कर्स के लिए ठीक नहीं है. बेहतर है कि आप हेल्थ केयर वर्कर्स और पुलिस वालों के काम में बाधा डालकर, उनसे बेवजह बहस कर उनका पेशेंस न टेस्ट करें. क्योंकि आप एक दिन के लिए निकले हैं. वो अपना परिवार छोड़ रोज़ यही काम कर रहे हैं.

– सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करें. दो वजहों से. एक बड़ी वजह तो ये कि ये आपको कोविड इन्फेक्शन से बचाएगा. दूसरी वजह ये कि सिक्योरिटी में तैनात पुलिस आपको अरेस्ट कर सकती है. महामारी को बढ़ावा देने के आरोप में. हालांकि दूसरी वाली बात इसपर डिपेंड करेगी कि आपके सेंटर पर मैनेजमेंट कैसा है.

– आशंका ये भी है कि वैक्सीन समय पर सेंटर पर न पहुंचे. मेरे साथ ऐसा ही कुछ हुआ था. दिल्ली के जिस सेंटर पर मैं पहुंची वहां वैक्सीन ही 9.30 बजे आई. जबकि वैक्सीन लगवाने का टाइम 9 बजे से था.

– मेरा एक्सपीरियंस कहता है कि एक बार वैक्सीन लगनी शुरू हो जाए तो काम जल्दी जल्दी होता है. अगर आप किस्मत वाले हैं तो एक घंटे में आपका पूरा काम हो जाएगा. ऑब्जरवेशन का समय मिलाकर.

– मैं खुद 9 बजे लाइन में लगी थी. महिलाओं की क्यू में मेरा नंबर 25वां था. 9:30 बजे वैक्सीन आई. और मुझे वैक्सीन लगने का टाइम 10:30 था. आप अपने हिसाब से अपना टाइम तय कर सकते हैं.

– सेंटर पर आपसे फोन नंबर मांगा जाएगा. यहां आपको वो फोन नंबर बताना है जिससे आपका रजिस्ट्रेशन हुआ है. अगर आपके लिए किसी और ने रजिस्ट्रेशन करवाया है तो उनका नंबर नोट करवाएं.

– जिस आईडी से आपने रजिस्ट्रेशन करवाया है, वो जरूर लेकर जाएं. ऐसा न हो कि रजिस्ट्रेशन के लिए आपने पैन यूज किया हो और आप आधार लेकर चले गए. या बिना आईडी के ही चले गए.

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वैक्सीन लगवाने जाएं तो आईडी प्रूफ ज़रूर ले जाएं. (सांकेतिक फोटो- PTI)

– ऑब्जरवेशन टाइम मतलब वैक्सीन के बाद आपको मेडिकल स्टाफ की निगरानी में आधे घंटे के लिए बैठाया जाएगा. कोई दिक्कत हो तो आप उन्हें बता सकते हैं. वैक्सीन लगवाने के बाद एक सेकंड के लिए चक्कर सा आना आम है. लेकिन अगर आपको ज्यादा दिक्कत हो तो आप सही व्यक्ति को बता दें.

– ऑब्जरवेशन ख़त्म होने तक आपके रजिस्ट्रेशन वाले नंबर पर आपके वैक्सीन सर्टिफिकेट का लिंक आएगा. उसे अपने पास सेव जरूर कर लें. क्योंकि उसमें ये लिखा होता कि आपको अगली डोज किस डेट के बाद लगवानी है. साथ ही, ये आपके वैक्सिनेशन का प्रूफ भी है.

– ऐसा नहीं है कि आप उत्तर प्रदेश के नागरिक हैं तो आप दिल्ली में वैक्सीन नहीं लगवा सकते. आप अगर सरकार की कोई भी फोटो आईडी रखते हैं तो आप किसी भी राज्य में कोई भी डोज ले सकते हैं. इसलिए अगर आपको अपने पिन कोड से अलग कोई स्लॉट मिल रहा है तो निराश होने की जरूरत नहीं है. आप वहां भी टीका लगवा सकते हैं.

– बस याद रखना होगा कि जो वैक्सीन पहली बार में लगी वही दूसरी बार में लगनी होगी. यानी पहली बार कोविशील्ड लगी तो दूसरी डोज भी उसी की लगनी है.

– वैक्सीन लगवाने के बाद मुझे पूरे दिन प्यास लगती रही, औसत से अधिक. इसकी वजह धूप में खड़े होकर लाइन में लगना भी हो सकता है. ज़रूरी नहीं ये वैक्सीन से हुआ हो. इसलिए आप अपने साथ एक पानी की बोतल जरूर ले जाएं.  बिस्किट वगैरह भी रख लें.

– अपने साथ स्प्रे वाला सैनीटाइजर ले जाना बेहतर होगा. कोई भी ऑब्जेक्ट छूने या कहीं भी बैठने के पहले ऑब्जेक्ट या जगह को सैनीटाइज ज़रूर करें.

– मुमकिन है दिन के अंत तक सबकुछ नॉर्मल हो और रात अचानक 10 मिनट के अंदर आपको कमजोरी महसूस होने लगे, तेज़ बुखार चढ़ जाए, और वैक्सीन लगने की जगह यानी कंधे के आसपास दर्द हो. ऐसे में बिलकुल टेंशन न लें. मुझे पहली रात 102 बुखार आया था. और अगली सुबह हरारत थी. बदन में दर्द भी था. मगर 48 घंटे पूरे होते होते सबकुछ छू हो चुका था. डॉक्टर्स कहते हैं कि हलके साइड इफ़ेक्ट कुछ दिन रहें तो दिक्कत नहीं है. लेकिन एक हफ्ते से ज्यादा रह जाएं तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं. ये भी मुमकिन है कि आपको कोई भी साइड इफेक्ट न हों.

और फिर अगली डोज़ की बुकिंग की तैयारी करें.


 

तो ये था प्रतीक्षा का वैक्सीन एक्सपीरियंस. अगर आप भी 18 से 44 की उम्र के बीच के हैं तो जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाएं. अब तो प्रोसेस भी आपको पता है. और हां, वैक्सीन लगवाने के पहले और बाद में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना जारी रखें.


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