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दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसानों की मांगें मानने के अलावा नरेंद्र मोदी ने सब कर लिया

धरने पर बैठे किसान (दाएं) और गुरुद्वारा रक़ाबगंज में हाल में पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)

कई हफ्तों से दिल्ली के बाहर हरियाणा, पंजाब और दूसरे राज्यों के किसान डेरा डालकर बैठे हुए हैं. सरकार से मांग कर रहे हैं कि सरकार नए कृषि क़ानूनों को वापिस ले. मांग तो ये भी उठती सुनाई दे रही है कि मौजूदा क़ानूनों में सरकार ऐसे संशोधन करे कि किसानों से कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP छीन न सके. सरकार के साथ कई दौर की मीटिंग हुई, कई प्रस्ताव आए, लेकिन किसानों ने कहा कि हमारी मांगों से कम पर कुछ मंज़ूर नहीं.

तो सरकार ने इधर बीच में किया क्या? ट्रेंड देखें तो सरकार ने धरनारत किसानों की मूलभूत समस्याओं को सुलझाने की कोशिशों के बीच सिख समुदाय से क़रीबी बढ़ाने में समय लगाया. पीएम मोदी कभी गुरुद्वारा गए तो कभी दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसानों को छोड़कर गुजरात के कच्छ चले गए. सिलसिलेवार देखिए.

सिख समुदाय से नज़दीकी का बुकलेट

30 नवंबर. केंद्र सरकार ने इस दिन एक बुकलेट रिलीज़ किया. शीर्षक था ‘पीएम मोदी एंड हिज़ गवर्न्मेंट्स स्पेशल रिलेशन विद सिख्स’. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर की मानें तो केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर और हरदीप सिंह पुरी ने गुरुनानक देव जयंती पर इस बुकलेट को रिलीज़ किया. क्या था इसमें? लिखा था कि नरेंद्र मोदी ने सिख गुरुओं को हमेशा सम्मान दिया है. सिखों की बहादुरी और हिम्मत की हमेशा तारीफ़ की है. ये भी लिखा था कि ऐसा प्रधानमंत्री केंद्र में है, तभी सरकार ने सिख समुदाय के लिए कई सारी योजनाएं संचालित की हैं.

करतारपुर कॉरिडोर की ओपनिंग और गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर सिक्के का जारी किया जाना इसमें शामिल था. 44 पेज की बुकलेट में 13 चैप्टर थे, और नरेंद्र मोदी की 30 तस्वीरें. 84 के सिख दंगों का ज़िक्र भी था. लिखा था कि कैसे इसके गुनाहगारों को बचाया जाता रहा, और SIT के जरिए फिर से जांच कराकर न्याय दिलाया जा सका.

2 करोड़ ईमेल, आपने सही पढ़ा …2 करोड़ ईमेल

इसी झंझावात के बीच ख़बर आयी कि 8 दिसंबर से 12 दिसंबर के बीच IRCTC ने 2 करोड़ ईमेल भेजे. किन लोगों को? अपने ग्राहकों को. इन लोगों को ईमेल के माध्यम से नरेंद्र मोदी सरकार और सिख समुदाय की क़रीबी के बारे में बताया गया. सिख समुदाय को समर्थन देने वाले नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लिए गए 13 फ़ैसलों का भी ज़िक्र किया गया. इस ईमेल में कुछ दिनों पहले जारी किया गया बुकलेट भी था, ऐसा भी लोग बताते हैं.

ये भी सवाल उठे थे कि IRCTC ने ये ईमेल केवल सिख समुदाय से जुड़े ग्राहकों को भेजे थे. लेकिन मिंट में छपी ख़बर बताती है कि ऐसा नहीं है. वहीं IRCTC ने अपने आधिकारिक बयान में दावा किया कि ऐसा पहली बार नहीं है. सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों का IRCTC पहले भी ऐसे ही प्रसार करती रही है.

किसान दिल्ली में बैठे थे, मोदी पहुंच गए कच्छ

15 दिसंबर 2020. नरेंद्र मोदी इस दिन पहुंचे गुजरात के कच्छ में. यहां पर बरसों से रह रहे सिख किसानों से नरेंद्र मोदी मिले. फ़ोटो वग़ैरह वायरल हुई. नरेंद्र मोदी ने किसानों से कहा कि ये जो कृषि क़ानूनों में बदलाव किए गए हैं, वो वही बदलाव हैं, जो बरसों से किसान संगठन और विपक्षी भी मांग करते रहे हैं. सरकार किसानों के हित के लिए कटिबद्ध है. नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि उनकी सरकार किसानों की दिक्कतों को सुन रही है, जबकि विपक्ष उन्हें गुमराह कर रहा है.

इसी दिन पीएम मोदी ने कहा

“साज़िश के तहत दिल्ली के पास बैठे किसानों को गुमराह किया जा रहा है. उनसे कहा जा रहा है कि अगर नए क़ानून लागू कर दिए जाएं तो दूसरे लोग उनकी ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लेंगे. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप अपनी गाय का दूध डेयरी वाले को देते हैं, इस वजह से डेयरी का मालिक आपसे आपकी गाय ले लेता है क्या?”

इस मौक़े पर पीएम मोदी ने कृषि क़ानूनों को ऐतिहासिक बताया, और विपक्ष को कई बातों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा,

“जब विपक्षी सत्ता में थे, तब वो कृषि क्षेत्र में बदलाव की बात करते थे. लेकिन उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया. अब जब देश ने निर्णय ले लिया है कि इस बदलाव को अपनाया जाए, तो वो झूठी बातें फैलाकर किसानों को गुमराह कर रहे हैं. मैं फिर से कहना चाहता हूं कि मेरी सरकार 24 घंटे आपकी शंकाओं का समाधान करने के लिए मौजूद है.”

नरेंद्र मोदी पहुंचे गुरुद्वारे

20 दिसम्बर 2020. नरेंद्र मोदी इस दिन बिना किसी पूर्व सूचना और कार्यक्रम के दिल्ली के गुरुद्वारा रक़ाबगंज साहिब पहुंच गए. क्यों? पीएम ने ट्वीट करके इस बारे में बताया.

पीएम ने ट्वीट में लिखा, मैंने आज सुबह ऐतिहासिक गुरुद्वारा रक़ाबगंज साहिब में, जहां गुरु तेग बहादुर का अंतिम संस्कार हुआ था, वहां प्रार्थना की. आगे उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की विशेष कृपा है कि गुरु तेग बहादुर का 400वां प्रकाश पर्व का विशेष उत्सव हमारी सरकार के कार्यकाल में पड़ा है. 

वहीं एक्सप्रेस में छपी ख़बर ये भी बताती है कि दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर धरनारत किसानों ने भी तेगबहादुर की पुण्यतिथि पर दिन भर लंगर, अरदास और पाठ किया. मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि गुरुद्वारे में नरेंद्र मोदी का जाना एकदम औचक विज़िट थी. कोई भी पुलिस बंदोबस्त नहीं किया गया था. आम आदमी के लिए ट्रैफ़िक पर भी कोई रोकटोक नहीं थी. 

18 हज़ार करोड़ की पीएम किसान सम्मान निधि

अब तक के प्रयास सिख समुदाय से जुड़े नज़र आ रहे थे. प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO की एक हालिया घोषणा में बताया गया कि 9 करोड़ किसान परिवारों को 18 हज़ार करोड़ रुपए दिए जायेंगे. किस मद में? पीएम किसान सम्मान निधि के मद में. ये राशि 25 दिसम्बर को रिलीज़ की जाएगी. 

इसके साथ ही PMO ने ये भी बताया कि नरेंद्र मोदी 6 राज्यों के किसानों के साथ संवाद करेंगे. किसान नरेंद्र मोदी से किसान सम्मान निधि से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे. साथ ही सरकार द्वारा किसानों के लिए किए गए कामों पर भी चर्चा होगी. प्रधानमंत्री कार्यालय ने ये भी बताया कि इस संवाद में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद होंगे.

बिज़नेस टुडे में छपी ख़बर बताती है कि नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि सभी भाजपा सांसद, मंत्री और राज्यों की इकाइयों को देखने वाले पदाधिकारी ब्लॉक लेवल के किसानों से मिलें, अपने क्षेत्रों में जाएं, किसानों की समस्याओं को समझें और कृषि बिलों के बारे में समझाएं. 

और किसानों से मिलने का अगला प्रयास?

कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने धरनारत किसानों को पत्र लिखा. कहा कि मुद्दों पर बात करने के लिए सरकार हमेशा तैयार थी, और आगे भी तैयार रहेगी.

पत्र में किसानों से दिन और समय मांगा गया है, ताकि दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों के साथ चर्चा की जा सके.

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