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सचिन की वो फैन जिसने अपना करियर लियोनल मेसी की तरह शुरू किया और अब दुनिया जीत रही है

‘क्या संजीव भाई, आपकी बेटी ने तो महिलाओं का क्रिकेट देखने पर मजबूर कर दिया’

भारत जैसे देश में किसी पिता के लिए यह सुनना कितना सुकून भरा हो सकता है, इसे बस महसूस किया जा सकता है. इंडियन ओपनर शेफाली वर्मा के पिता ने सोचा नहीं होगा कि घर से ‘पापा, एक सेंचुरी तो लगा के आना ही है.’ बोलकर वर्ल्ड कप खेलने निकली उनकी बेटी इस कदर चर्चा में आ जाएगी.

लेकिन शेफाली तो इसे पहले से ही सोचकर बैठी थीं. तभी तो जयपुर में हुए T20 चैलेंज के दौरान उन्होंने ESPN क्रिकइंफो से कहा था,

‘जब मैं इंडिया के लिए खेलूं तब पापा को प्राउड फील कराना है. और शायद जब मैं अपना पहला वर्ल्ड कप खेलूं, तो वह मेरे साथ रहें.’

# पावरप्ले की क्वीन

जब शेफाली ने यह बात कही थी तब उनकी उम्र सिर्फ 15 साल थी. उन्होंने भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेला था. इस उम्र में ऐसे लक्ष्य वही बना सकता है जिसे खुद पर हद से ज्यादा यकीन हो. और शेफाली को खुद पर कितना यकीन है यह मैदान पर खेले गए उनके हर शॉट में दिखता है.

पांच फुट से थोड़ी लंबी शेफाली के यकीन पर सवार टीम इंडिया फाइनल तक पहुंच चुकी है. और शेफाली बन चुकी हैं दुनिया की नंबर वन T20 बैट्सवुमन. इंडिया इस पूरे टूर्नामेंट में अभी तक एक भी मैच नहीं हारी है. वैसे तो भारत का हर मैच T20 के लिहाज से लो-स्कोरिंग रहा है. लेकिन अगर ग्रुप स्टेज के दौरान पावरप्ले की बैटिंग देखें तो बाकी टीमें बहुत पीछे हैं. चार पारियों में भारत ने 8.25 के रेट से रन बनाए हैं. इसमें शेफाली का बड़ा योगदान है.

# MESSY नहीं MESSI ♥

शुरुआती जीवन चाहे जितना उलझा (Messy) रहे, लेकिन दिग्गज प्लेयर्स पहले अच्छे मौके के साथ ही अपनी चमक बिखेर देते हैं. 1 मई, 2005 को 18 साल से भी कम उम्र के लियोनल मेसी ने जो कमाल किया था, वही 15 साल की शेफाली ने 9 नवंबर, 2019 को किया. मेसी के पहले गोल में जहां रोनाल्डीनियो का बड़ा रोल था वहीं शेफाली के बेस्ट स्कोर में स्मृति मंधाना का.

टीम इंडिया वेस्ट इंडीज़ टूर पर थी. सीरीज का पहला T20 मैच होना था. हाल ही में टीम में शामिल हुईं शेफाली का यह पहला इंटरनैशनल टूर था. अपने डेब्यू मैच में ज़ीरो पर आउट हुईं शेफाली ने विदेशी धरती पर पहले ही मैच में बाजा फाड़ दिया.

स्मृति मंधाना के साथ मिलकर उन्होंने 15.3 ओवर्स में 143 रन कूट दिए. उस दिन यूनिवर्स बॉस क्रिस गेल के देश में एक भारतीय बच्ची ने ऐसी बैटिंग कर डाली कि रिकॉर्ड्स टूटते चले गए. शेफाली ने उस दिन 73 रन बनाए. भारत ने वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ 184 रन कूटे. यह विंडीज के खिलाफ क्रिकेट के इस फॉर्मेट में सबसे बड़ा स्कोर है.

Shafali Verma Vs West Indies 800
West Indies के खिलाफ धूम मचाने के बाद फैंस से मुखातिब Shafali Verma (फोटो BCCI)

इंडियन ओपनर स्मृति मंधाना अपने बेस्ट पर नहीं हैं. लेकिन शेफाली ने लोगों को उनकी कमी नहीं खलने दी है. शेफाली के बारे में स्मृति कहती हैं,

‘पिछले दो-तीन साल में मैंने खूब सारे रन बनाए हैं, खासतौर से पावरप्ले में. लेकिन अब शेफाली के आने के बाद, वह ठीक मेरी तरह से रन बना रही हैं. उन्होंने टीम पर काफी प्रभाव डाला है और अब उनके चलते टीम काफी बैलेंस हो गई है.’

15 साल पहले रोनाल्डीनियो ने लगभग ऐसी ही बातें मेसी के लिए कही थीं. हाल ही में एक हेलिकॉप्टर क्रैश में जान गंवाने वाले बास्केटबॉल सुपरस्टार कोबी ब्रायंट से रोनाल्डीनियो ने कहा था,

‘कोबी, मैं तुम्हें एक ऐसे इंसान से मिलाने जा रहा हूं जो फुटबॉल इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्लेयर बनेगा.’

यह सुनकर कोबी ने रोनाल्डीनियो से कहा,

‘तुम क्या? तुम बेस्ट हो.’

जवाब में रोनाल्डीनियो बोले,

‘नहीं, नहीं. यहां खड़ा ये बच्चा बेस्ट बनेगा.’

# सचिन की फैन

शेफाली के बारे में आज पूरी दुनिया ऐसी ही बातें करती है. पूरी दुनिया में अपने फैंस बना चुकी शेफाली के लिए चीजें शुरू से इतनी आसान नहीं थीं. उनके पापा बताते हैं,

‘एक वक्त था जब लोग कहते थे कि मैं अपनी बेटी को क्रिकेट खिलाकर उसका जीवन बर्बाद कर रहा हूं. वे लड़कियों से खेलने की उम्मीद नहीं करते. बस, घर का काम करवाओ, तो ही तुम अच्छे बाप हो, वर्ना बिगाड़ रहे हो बेटी को.’

शेफाली की क्रिकेट में दिलचस्पी भी एक मजेदार घटना से शुरू हुई थी. साल था 2013. रोहतक का लाहली स्थित बंसीलाल स्टेडियम. सचिन तेंडुलकर अपने करियर का आखिरी रणजी ट्रॉफी मैच खेल रहे थे. भारत में सचिन खेलें और भीड़ न जुटे, ऐसा हो नहीं सकता.

भीड़ जुटी, खूब जुटी. इसी भीड़ में अपनी बेटी के साथ बैठे थे संजीव वर्मा. नौ साल की शेफाली ने पहली बार सचिन को देखा. पापा से सचिन के बारे में सुन-सुनकर पगलाई शेफाली ने सचिन की बैटिंग देखी. और तय कर लिया कि उन्हें भी बल्लेबाज ही बनना है. शेफाली कहती हैं,

‘पापा, सचिन तेंडुलकर के बारे में काफी बातें करते थे. जब मैंने पहली बार उन्हें बैटिंग करते देखा, मुझे पता चल गया कि मुझे यह ट्राई करना ही है.’

मैच के दौरान सचिन जब तक गेस्टहाउस में रहे. यह बाप-बेटी किसी न किसी बहाने से वहां के चक्कर काटते रहे. वहां मिली सचिन की हर झलक ने शेफाली को बड़ा क्रिकेटर बनने की प्रेरणा दी. सचिन की झलक पाकर प्रेरित हुईं शेफाली को अब सचिन के क्लोन कहे गए विरेंदर सहवाग जैसा बताया जा रहा है. लेकिन दी लल्लनटॉप ऐसा नहीं करता, हमारे लिए शेफाली, शेफाली ही हैं. क्रिकेट की दुनिया का एक उभरता सितारा. किसी दूसरे सितारे की कॉपी नहीं.

# पूरे होते सपने

शेफाली के पापा हरियाणा के रोहतक शहर में गहनों की रिपेयरिंग का काम करते हैं. वैसे तो पूरा भारत ही रूढ़िवादी है. लेकिन इसमें हरियाणा की अपनी अलग इमेज है. हरियाणा में प्रति 1000 पुरुषों पर सिर्फ 879 महिलाएं हैं. इस रूढ़िवादी समाज में संजीव ने तमाम ताने झेल अपनी बेटी को इंटरनेशनल क्रिकेटर बनाया.

Shafali Verma 800
बीती जनवरी में ही 16 साल की हुई हैं Shafali Verma

अब उनकी बेटी अपना पहला वर्ल्ड कप फाइनल खेलने जा रही है. संजीव इस फाइनल को देखने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंच चुके हैं. रोहतक से ऑस्ट्रेलिया तक का उनका सफर आसान नहीं रहा. इसमें उन्होंने अपनी बेटी से कम संघर्ष नहीं किए. क्रिकइंफो के मुताबिक संजीव ने अपने जानने वालों और हरियाणा क्रिकेट असोसिएशन से पैसे जुटाकर ऑस्ट्रेलिया की टिकट कराई है. क्योंकि संजीव चाहते थे कि जब उनकी बेटी इस रूढ़िवादी समाज को एक बार फिर से गलत साबित करे तो उसके कानों में पड़ने वाली आवाजों में उनकी आवाज भी शामिल रहे.


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