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मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी वोट, कांग्रेस-बीजेपी में से किसे जिताने वाले हैं?

मध्य प्रदेश के दतिया में 10 मई को चुनाव आयोग गढ़िया कॉलोनी की खाक छान रहा था. वो इसलिए, क्योंकि दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने आरोप लगाया था कि दतिया की वोटर लिस्ट में 500 से ज़्यादा नाम फर्ज़ी हैं. भारती के मुताबिक इनमें से 288 लोगों का पता एक ही दिखाया गया है- मकान नंबर 0, गढ़िया कॉलोनी, दतिया.

भारती की शिकायत पर चुनाव आयोग ने जब अपनी एक टीम को जांच के लिए भेजा, तो पता चला कि गढ़िया कॉलोनी में 0 नंबर का कोई मकान है ही नहीं. भारती ने अपनी शिकायत में ज्योति नगर के भी एक ऐसे मकान का ज़िक्र किया था, जिसे 250 वोटर्स के पते के तौर पर दिखाया गया था. आयोग ने वहां भी जांच कराई, लेकिन वहां कोई भी वोटर मिला ही नहीं.

दतिया में कई वोटर्स का पता एक ही घर बताया गया, जबकि उस नंबर का कोई घर था ही नहीं.
दतिया में कई वोटर्स का पता एक ही घर बताया गया, जबकि उस नंबर का कोई घर था ही नहीं.

ये पहला मौका था, जब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की वोटर लिस्ट्स में फर्जी वोटर्स के मुद्दे को कायदे से उठाया. उसने चुनाव आयोग को याचिका दी, कार्रवाई की मांग की और बीजेपी पर आरोप लगाया कि इस गड़बड़ी के पीछे सत्ताधारी पार्टी है. बीजेपी ने जवाब में कहा कि वोटर लिस्ट तैयार कराना चुनाव आयोग का काम है और इस गड़बड़ी में बीजेपी की कोई भूमिका नहीं है.

पर फर्जी वोटर्स का मामला ऐसा है कि हमेशा सुस्ताने वाली मुद्रा में दिखने वाली कांग्रेस अपनी चिर-परिचित मुद्रा छोड़कर इतवार के दिन एक्टिव हो गई. 3 जून को एमपी कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने न सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस की, बल्कि चुनाव आयोग का दरवाज़ा भी खटखटा आए.

कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर
कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर

क्या है एमपी में फर्जी वोटर्स का मामला

मध्य प्रदेश में पिछले दो महीने में करीब सात लाख फर्जी वोटर्स पाए जा चुके हैं. पहला खुलासा अप्रैल 2018 में हुआ, जब चुनाव आयोग ने सभी जिलों से वोटर लिस्ट में हुई गड़बड़ियों की लिस्ट मांगी थी. जब सूबे के 51 जिलों के डीएम ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक ये लिस्ट पहुंचाईं, तो पता चला कि राज्य की वोटिंग लिस्ट में सात लाख से ज़्यादा फर्जी वोटर्स हैं. इनमें से 1,02,114 वोटर्स तो मर चुके हैं, लेकिन वोटिंग लिस्ट में अब भी ज़िंदा हैं. अकेले भोपाल में 35,248 फर्जी वोटर्स हैं, जिनमें 7,076 मर चुके हैं. सबसे ज़्यादा फर्जी नाम सागर की लिस्ट में हैं, जहां 60,424 वोटर्स की जानकारी में गड़बड़ी है. इनमें से 25,114 मर चुके हैं.

कांग्रेस के प्रेजेंटेशन की एक तस्वीर, जिसमें बताया गया कि एक ही तस्वीर पर अलग नामों से वोटर कार्ड जारी किए गए.
कांग्रेस के प्रेजेंटेशन की एक तस्वीर, जिसमें बताया गया कि एक ही तस्वीर पर अलग नामों से वोटर कार्ड जारी किए गए.

फिर कमलनाथ और ज्योतिरादित्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की

मई में दतिया का मामला सामने आने पर कांग्रेस ने बीजेपी पर खूब हमले किए. आरोप लगाया कि ‘बीजेपी फर्जीवाड़े से चुनाव जीतना चाहती है.’ दतिया से पहले मुंगावली और कोलारस में हुए उपचुनावों में भी कांग्रेस ने फर्जी वोटर्स के नाम चुनाव आयोग को दिए थे. फिर 3 जून को कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने एक प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें दिखाया कि एक व्यक्ति की तस्वीर पर अलग-अलग नाम और पते से कई वोटर कार्ड जारी किए गए हैं.

गंभीर बात ये है कि इनकी तादाद बहुत ज़्यादा है. सात लाख की बात तो चुनाव आयोग स्वीकार कर ही चुका है, वहीं कांग्रेस 60 लाख फर्जी वोटर्स रजिस्टर्ड होने का दावा कर रहे हैं. बाद में यही प्रेजेंटेशन प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सामने दिखाया गया. कांग्रेस का दावा है कि उसने 100 विधानसभा सीटों पर छानबीन कराई, जहां से 60 लाख फर्जी वोटर्स के बारे में पता चला.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंधिया और कमलनाथ
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंधिया और कमलनाथ

कौन से तर्क गड़बड़ी की तरफ इशारा करते हैं

एमपी में पिछले 10 साल में जनसंख्या के अनुपात में वोटर ज़्यादा बढ़े हैं. 2013 विधानसभा चुनाव में एमपी में करीब 26% नए वोटर्स जुड़े, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है. आमतौर पर राज्यों की वोटर लिस्ट में 10% का इज़ाफा होता है. कमलनाथ का दावा है कि पिछले दो चुनावों से एमपी की आबादी 24% बढ़ी है, लेकिन वोटर्स 40% बढ़े हैं. कुछ वोटर्स ऐसे भी हैं, जिनके नाम एमपी के साथ-साथ यूपी की वोटर लिस्ट में भी हैं. कांग्रेस का सबसे बड़ा तर्क यही है कि ये सब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और अधिकारियों की सांठ-गांठ से हुआ है, वरना सत्ताधारी बीजेपी पहले ही इसकी शिकायत चुनाव आयोग से करती.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जो इस समय किसानों के विरोध की आंच झेल रहे हैं.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जो इस समय किसानों के विरोध की आंच झेल रहे हैं.

चुनाव आयोग क्या कर रहा है

फर्जी वोटर्स का मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने भोपाल और नर्मदापुरम (होशंगाबाद) संभाग के लिए टीम बनाकर जांच के आदेश दिए हैं. इसके बाद नरेला, होशंगाबाद भोजपुर और सिवनी (मालवा) में जांच के लिए भी टीमें बनाई गई हैं. भोपाल में जांच शुरू भी हो गई है और इन सारी टीमों की आखिरी रिपोर्ट आयोग के सामने 7 जून को पेश की जाएगी.

चुनाव आयोग का लेटर
चुनाव आयोग का लेटर

क्या ये वोटर चुनाव प्रभावित कर सकते हैं?

ये सबसे महत्वपूर्ण सवाल है और इसका जवाब है, ‘हां’. एमपी में कुल 5,07,80,373 वोटर्स हैं, जिनके लिए 65,200 पोलिंग बूथ हैं. हर बूथ पर 900 से ज़्यादा वोटर वोट डालते हैं. कांग्रेस 60 लाख वोटर्स यानी कुल वोटर्स के करीब 12% वोटर्स के फर्जी होने का आरोप लगा रही है.

अब दूसरी सूरत देखिए. 2008 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 37.64% वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 32.39% वोट मिले थे. यानी दोनों पार्टियों के बीच वोटों का अंतर करीब 5% था. वहीं 2013 के चुनाव में बीजेपी को 44.88% और कांग्रेस को 36.38% वोट मिले, यानी दोनों पार्टियों के बीच वोटों का अंतर 8% था.

एक ही तस्वीर, पर कई वोटर.
एक ही तस्वीर, पर कई वोटर.

यानी जिस राज्य में 5 और 8% के अंतर से सत्ता की किस्मत तय होती है, वहां अगर 12% या उससे कम भी वोटर्स फर्जी मिलते हैं, तो ये चुनाव को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं.

और कांग्रेस की बात को एक किनारे रख भी दिया जाए, तो खुद चुनाव आयोग 7 लाख फर्जी वोटर्स की बात स्वीकार कर चुका है. मुख्य चुनाव अधिकारी सलीना सिंह बता चुकी हैं कि अब तक 3.86 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए भी जा चुके हैं. जहां कुछ सौ या कुछ हज़ार वोटों से चुनाव दूसरे पाले में जा सकता है, वहां कितनी भी तादाद में फर्जी वोटर चुनाव प्रभावित कर सकते हैं.


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