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दाऊद इब्राहिम को पकड़ने के लिए किए गए 'ऑपरेशन मुच्छड़' की कहानी

दाउद इब्राहीम. देश का दुश्मन. अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित हो रखा है. 1993 के मुंबई धमाकों का मुख्य आरोपी होने के कारण भारत की खुफिया एजेंसियां उसकी खोज में हैं. खोज का क्या, पता है कि वो पाकिस्तान में है. ओसामा बिन लादेन की तरह दुबका हुआ है. लेकिन पाकिस्तान कभी ये नहीं मानता. दूसरी तरफ भारत में हर पांच साल में जो लोकसभा चुनाव होते हैं उनमें पार्टियों का एक मुख्य वादा होता है, कि वो दाउद को पकड़कर भारत लाएंगे. 27 दिसंबर 1955 को पैदा हुए दाउद के पीछे भारत का एक आदमी काफी समय से पड़ा हुआ है. नाम है अजीत डोवाल. भारतीय सुरक्षा सलाहकार की कुर्सी पर जब डोवाल बैठे तो सत्ता और विपक्ष दोनों को खुशी हुई. अजीत डोवाल ने कई मौकों पर खुद को साबित किया है. इस लेख में आप पहले अजीत डोवाल के काम पढ़ेंगे. फिर पढ़ेंगे कि दाउद हाथ आते आते कैसे बच गया.

अजीत डोवाल का 1968 में केरल कैडर से IPS में सेलेक्सन हुआ. 1972 में हुई एंट्री इंटेलिजेंस ब्यूरो में. ये अपने देश की इंटरनल खुफिया एजेंसी है. इसके चीफ थे 2005 में जब रिटायर हुए. पंजाब, मिजोरम और कश्मीर में काबिले तारीफ काम किया.

खालिस्तानी आतंकियों से निपटने के लिए चला था ऑपरेशन ब्लू स्टार. और ऑपरेशन ब्लैक थंडर. उनकी सक्सेस के पीछे इनका हाथ था. सीक्रेट एजेंट थे उस पूरे ऑपरेशन में. 1991 में पंजाबी मिलिटैंट ने रोम के एक नेता को किडनैप कर लिया था दिल्ली से. नाम था लीवियू राडू. उसको छुड़ाने के लिए बड़ी मेहनत की थी डोभाल ने. तब जाकर कामयाबी मिली थी.

अजीत डोवाल
अजीत डोवाल

80 के दशक में नॉर्थ ईस्ट के बवाल को संभाला. ललडेंगा के सिपाही लोग घनघोर बमचक मचाए थे. तब डोवाल ने उसके 6 कमांडर्स को अपने भरोसे में लिया. उसके पास बचा एक. तिली लिली धुप्प हो गया. सफेद झंडा उठा कर आ गए. 1999 में कंधार प्लेन हाईजैक मामला. उस केस में डोवाल भारत की तरफ से बात कर रहे थे.

जून 2015 में मणिपुर में नक्सलियों ने हमला कर दिया था. चुप्पे से घात लगाकर. 18 फौजी शहीद हुए थे. तब डोवाल ने जो ऑपरेशन शुरू कराया. म्यांमार में छप कर कैंप चला रहे थे आतंकी. उन कैंपों को धूल में मिला दिया भारतीय आर्मी ने.

अब दाऊद की धरपकड़ वाला कांफिडेसियल किस्सा  

2005 में होने वाला था ऑपरेशन मुच्छड़. जिसमें भारत के दुश्मन दाऊद इब्राहिम को जहन्नुम पहुंचाने की तैयारी थी. लेकिन मुंबई में उसके चेले चपाटे मौजूद थे. जिन्होंने प्लान चौपट कर दिया.

दाउद की बेटी महरुख का निकार
दाउद की बेटी महरुख का निकार

9 मई 2005 को वो खास दिन था. जब दाऊद की बेटी माहरुख का निकाह होने वाला था. पाक क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे जुनैद से. उसके बाद 23 जुलाई को दुबई के ग्रैंड हयात होटल में रिसेप्शन होना था. भारतीय खुफिया एजेंसियों को पता चल गया था कि दाऊद इस पार्टी में आएगा. वो कितने वक्त किस जगह होगा इसकी पूरी इन्फॉर्मेशन जुटा ली गई थी. सबको पता था कि इससे अच्छा मौका अब नहीं मिलेगा दाऊद को टपकाने का.

जावेद मियांदाद के बेटा जुनैद
जावेद मियांदाद के बेटा जुनैद

1993 मुंबई ब्लास्ट के बाद छोटा राजन दाऊद की डी कंपनी छोड़ चुका था. अपना अलग गैंग खड़ा करके दाऊद का दुश्मन नंबर वन बन गया. इस ऑपरेशन में उसकी मदद ली गई. उसके भरोसेमंद दो शार्प शूटर थे. विकी मल्होत्रा और फरीद तनाशाह. पश्चिम बंगाल के 24 परगना इलाके से भारत में उनकी एंट्री कराई गई. फिर ट्रेनिंग दी गई. प्लान बताया गया. कि 23 जुलाई 2005 को दाऊद आखिरी सांस लेगा.

शूटर्स के कागजात तैयार किए गए. दुबई की टिकट बुक कर दी गई. IB का ये पूरा ऑपरेशन खुफिया था. दिल्ली के कुछ जिम्मेदार लोगों के अलावा इसकी खबर किसी को नहीं थी.

dawood ibrahim

प्लान आखिरी दौर में था. दिल्ली में एक शाम अजीत डोभाल उन शार्प शूटर्स के साथ मीटिंग में थे. उनसे होटल की लोकेशन डिस्कस कर रहे थे. कि किसकी तैनाती कहां होगी. उसी वक्त मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम वहां पहुंच गई. राजन गैंग के दोनों आदमी अरेस्ट. अजीत डोभाल ने पुलिस वालों को समझाया, पुचकारा, गुस्साए. लेकिन डिप्टी कमिश्नर धनंजय कमलाकर जिद पकड़े थे. अरेस्ट करके मुंबई ले गए दोनों को.

इस तरह से मुंबई पुलिस में जमे दाऊद के कारगुजारों और डोभाल के बंधे हाथों की वजह से दाऊद बच गया.

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