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क्या नमक से ज़िंदा हो सकता है पानी में डूबकर मर चुका आदमी?

महाराष्ट्र के जलगांव से एक बड़ी अजीब सी खबर आ रही है. वहां के एक सरकारी हॉस्पिटल में दो शव नमक के ऊपर रखे गए. पता चला है कि उन्हें ज़िंदा करने के लिए ऐसा किया गया है. अब आप कहेंगे कि मरा हुआ आदमी जीवित नहीं हो सकता. होने को इस खबर की पुष्टि किसी एजेंसी या अख़बार ने नहीं की है, लेकिन एक चीज़ के बारे में हम पूरी तरह निश्चिंत हैं. वो ये कि ये नमक के ऊपर शव रखकर उन्हें जिलाने का कॉन्सेप्ट पहली और एकमात्र बार सुनने में नहीं आ रहा है.  ऐसे ही एक फेसबुक पर तैर रही पोस्ट डूब के मर रहे किसी व्यक्ति की ज़िंदगी बचाने का दावा करती है. आइए पढ़ते हैं कि इसमें क्या लिखा है –

अगर कभी कोई पानी में डूब के मर जाये और उसका शरीर 3 से 4 घंटे में मिल जाए तो उसकी जिंदगी वापस ला सकता हूं. अगर कभी किसी को ऐसी दुर्घटना दिखे या सुनाई दे तो तुरंत हमें बताएं. किसी की जान बच सकती है. हमारा मोबाइल नंबर – *****11111 और *****73001 है.

आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं. किसी एक की भी जान बचा सका तो अपना जीवन सफल महसूस करूंगा.

धन्यवाद!

इसके बाद पोस्ट में नमक से इलाज करने की विधि भी बताई गई है –

पानी में डूबे व्यक्ति का इलाज –

डेढ़ क्विंटल डले वाला खड़ा नमक, बिस्तर जैसा बिछाएं. मरीज़ को उस पर कपड़े कम करके लेटा दें. नमक धीरे-धीरे शरीर से पानी सोख लेगा. मरीज़ के होश आने पर अस्पताल ले जाएं.

यदि आप पहले ही मरीज़ को अस्पताल ले जा चुके हों और डॉक्टर उसे मृत घोषित कर चुका हो तो आप नमक वाला उपचार करें. प्रभु-कृपा से खुशी की लहर फैल जाएगी.

डॉक्टर के मृत घोषित कर चुकने के बाद दाह संस्कार करने में जल्दी ना करें.

जल्दी से जल्दी नमक का उपचार करने के लिए मरीज़ को किसी कार या जीप से शहर में ले जाएं जहां नमक की बोरियां रात में भी बाहर ही पड़ी रहती हैं. उन्हें खाली करके मरीज़ को जल्दी से उस नमक के बने बिस्तर पर सुला दें.

दुकानदार का हिसाब बाद में (सुबह या दिन में) भी किया जा सकता है.

नोट – डूबे हुए व्यक्ति को जितना कम समय हुआ होगा उसकी होश में आने की संभावना उतनी ही अधिक होगी. अतः हर कार्य युद्य स्तर पर करें.

कुछ लोग नमक लेने पहले ही चले जाएं तो परिणाम शीघ्र मिलेगा.

के. सी. रूपरा
नारायणगढ़ ,मन्दसौर म. प्र.
*****37548

कृपया मैसेज को आगे भेज देवें. शायद किसी की जान बचाने के काम आ जाए.

धन्यवाद.

हमने इसके बारे में कुछ डॉक्टर्स से बातें कीं, कुछ वेबसाइट्स  टटोलीं. किसी ने भी और कहीं पर भी हमें इस बात की पुष्टि नहीं मिली कि नमक से आदमी बच सकता है. बल्कि जिन विशेषज्ञों से संपर्क किया उन्होंने हमारे इस सवाल पर आश्चर्य व्यक्त किया साथ ही कुछ हिदायतें और दे डालीं. जो हिदायतें हमें मिलीं, वो हम जस की तस आपके साथ शेयर कर रहे हैं.

डूबते को तिनके या नमक का नहीं सीपीआर और कृतिम श्वास का सहारा होता है.
डूबते को तिनके या नमक का नहीं सीपीआर और कृतिम श्वास का सहारा होता है.

# डूबने के केस में ज़्यादातर मौतें फ़ेफड़ों में पानी भर जाने के चलते होती हैं. कुछ मामलों मेंमांसपेशियों की ऐंठन भी मृत्यु का कारण बनती है.

# डूबे हुए आदमी को रेसक्यू कर चुकने के बाद उसकी सबसे पहली ज़रूरत ऑक्सीजन है. मुंह से मुंह में सांस फूंकना सबसे ज़ल्दी और सबसे आसानी से ऑक्सीजन की भरपाई का ज़रिया है. मुंह से मुंह में सांस फूंकने की सबसे बेहतरीन विधि यूं है –

डूबने वाले व्यक्ति के सिर को एक तरफ मोड़ें जिससे कि उसके मुंह और नाक के भीतर का पानी निकल जाए. इसके बाद सर फिर से ऊपर मोड़कर मुंह से मुंह में सांस फूंकना शुरू करें. उसकी नाक को उंगलियों से बंद करके मुंह में चार बार तेज़-तेज़ सांस फूंकें. ऐसा करने से फेफड़े और उसके रास्तों में अटका हुआ पानी निकल जाता है. अब अपना कान मुंह के पास रखें और छाती को गौर से देखें कि क्या दिल धड़क रहा है. इस दौरान उसकी नब्ज़ की जांच भी करते रहें. और ऐसा बार-बार दोहराएं.

# दूसरी तरीके का फर्स्ट एड है सीपीआर. सीपीआर में डूबे हुए की छाती को ऊपर और नीचे दबाना शामिल है. लेकिन सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट के बारे में लखनऊ में गठिया-रोग-विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत स्कंद शुक्लने एक बार हमें बताया था कि वह बेसिक लाइफ़ सपोर्ट है, पूरा अलग विषय है. और अधूरे ज्ञान से लोग कहीं नुकसान न कर बैठें. उसका इंस्ट्रक्टर-कोर्स होता है. हैंड्स ऑन. वह लेख से नहीं सिखाया जा सकता. एम्स और पीजीआई-जैसे संस्थान उसे कराते हैं. पंजीकरण कराकर जाना होता है. वह प्रैक्टिकल है. ये वीडियो डीएमसीएच लुधियाना के डॉ. अनुज ग्रेवल और डॉ. विवेक गुप्ताद्वारा बनाया गया है:

साथ ही कई लोग ‘हेम्लिच मनूवर’ करने को कहते हैं, लेकिन इसका कोई ख़ास फायदा नहीं होता. ऊपरी एब्डोमेन को ज़ोर-ज़ोर से शरीर के ऊपरी भाग की ओर दबाने को ‘हेम्लिच मनूवर’ कहा जाता है. अगर खाने का कोई कौर अटक जाए तो ये लाभदायक है लेकिन किसी डूबने वाले का जीवन बचाने के भी ये लाभदायक है, इसका कोई सबूत नहीं है. मने, अगर किसी के फेफड़ों में पानी भरा है तो ये लाभदायक नहीं है.

इस सब के अलावा, यदि पानी फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है तो जलन होती है. कई जानलेवा प्रक्रियाएं या जटिलताएं कुछ देरी से शुरू हो सकती हैं. इनमें सांस लेने में कठिनाई होना, निमोनिया, हार्ट फेल, संक्रमण आदि शामिल हैं. यूं डूबे हुए व्यक्ति के लिए अगले 48 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. इसलिए एक बार फर्स्ट एड दे चुकने के बाद तुंरत चिकित्सकीय सहायता के लिए दौड़ना चाहिए.

रही बात नमक वाले बिस्तर की, तो ये बेशक सत्य है कि नमक पानी या नमी का अच्छा अवशोषक है, लेकिन वो शरीर के भीतर की नमी को कैसे सोख लेगा ये प्रश्न अनुत्तरित रह जाता है. और यूं ये पोस्ट और इस पोस्ट में दी गई राय अक्षरशः मिसलीडिंग है, ग़लत है.

और बताने की ज़रूरत नहीं कि एक मर चुके आदमी को जिलाने की टेक्निक मेडिकल साइंस ने अभी तक डेवेलॉप नहीं की है. हां रेड विमेन शायद इस मामले में आपकी कोई सहायता कर सके.

गेम ऑफ़ थ्रोंस की रेड विमेन जिसने जॉन स्नो को जिलाया था. (bagogames.com)
गेम ऑफ़ थ्रोंस की रेड विमेन जिसने जॉन स्नो को जिलाया था. (bagogames.com)

 

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