Submit your post

Follow Us

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019: आपकी ख़ातिर धोनी-अमिताभ जैसे ब्रांड एंबैसडर्स क़ानून की रडार में

जागो ग्राहक जागो.

सालों से दिखाई और सुनाई दे रही इस एक टैग लाइन की स्थिति ऐसी है, जैसे किसी प्रोडक्ट के साथ मिलने वाले यूज़र मैन्यूअल की. मतलब दिख लगभग रोज़ ज़ाता है, और बनाने वाले इसे बहुत उपयोगी भी मानते हैं. लेकिन जिनके लिए ये बना है, यानी हम-आप जैसे उपभोक्ताओं के लिए, उनके लिए ये कितना उपयोगी है, ये हम-आप जानते हैं.

आज इस टैग लाइन की बात इसलिए, क्यूंकि आज उपभोक्ताओं की बात. और आज उपभोक्ताओं की बात इसलिए क्यूंकि सरकार का दावा है कि 20 जुलाई, 2020 से उपभोक्ताओं के लिए बहुत कुछ बदल जाएगा. क्यूं बदल जाएगा? क्यूंकि इस तारीख़ से लागू हो गया है ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’. जो कि ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986’ की जगह लेगा. 2018 में एक बार ये बिल लैप्स हो चुकने के बाद फिर से लोकसभा और राज्य सभा में पारित हुआ और 09 अगस्त, 2019 को राष्ट्रपति के सिग्नेचर के बाद बन गया अधिनियम. तो क्या, ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’, का हिसाब किताब, नई बोतल में पुरानी शराब वाला है, जैसा कि सरकार की ज़्यादातर योजनाओं पर कटाक्ष किया जाता है?

अगर एक शब्द में उत्तर दें तो- नहीं. क्यूंकि सारी चीज़ों में आमूल-चूल परिवर्तन हो गए हैं. ‘सो मच सो’ कि हमें इसे समझने के लिए ज़रूरत पड़ी है एक ‘एक्सप्लेनर’ की. और यक़ीन कीजिए ये ‘एक्सप्लेनर’ अब किसी प्रोडक्ट के साथ मिलने वाले यूज़र मैन्यूअल से कहीं ज़्यादा आवश्यक हो गया है. हर एक के लिए. क्यूंकि हर एक उपभोक्ता है, जन्म से लेकर मृत्यु तक. तो जैसा कि रिवाज़ है, आइए इसे समझने के लिए बिलकुल बेसिक से शुरू करते हैं.

# गुड्स एंड सर्विसेज़-

सामान्य परिभाषा के अनुसार तो गुड्स वो सब हैं, जो ख़रीद चुकने के बाद हमेशा के लिए आपके हो जाते हैं, जबकि सर्विसेज़ कुछ समय के लिए ही आपके पास रहती हैं. जैसे अगर आप कार ख़रीदते हैं तो वो गुड्स और अगर आप ओला-ऊबर हायर करते हैं तो वो सर्विस. लेकिन ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ के अनुसार-

कोई भी ‘मूवेबल प्रॉपर्टी’ गुड्स कहलाएगी. (तस्वीर: PTI)
कोई भी ‘मूवेबल प्रॉपर्टी’ गुड्स कहलाएगी. (तस्वीर: PTI)

कोई भी ‘मूवेबल प्रॉपर्टी’, यानी चल संपत्ति, गुड्स की कैटेगरी में आती है. और ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ में इसमें ‘खाद्य पदार्थ’ भी इंक्लूड कर लिए गए हैं. और खाद्य पदार्थ की डेफ़िनेशन में चूंकि एल्कोहॉल और पीने का पानी भी आते हैं तो ये भी अब ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ में गुड्स की श्रेणी में आते हैं.

‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ में सर्विसेज़ में ढेर सारी चीज़ें शामिल की गई हैं. जैसे – बैंकिंग, फ़ाइनेंस, इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्ट, बिजली, टेलीकॉम, एम्यूजमेंट पार्क, मल्टीप्लेक्स वग़ैरह-वग़ैरह. टीवी चैनल, OTT और न्यूज़ चैनल भी इसके अंदर आएंगे. रियल स्टेट, जिसमें उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए ‘रेरा’ पहले ही लाया जा चुका है, वो भी ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ में सर्विसेज़ की कैटेगरी में आएगा.

अब ट्रांसपोटेशन भी सर्विसेज़ का हिस्सा है. (तस्वीर: PTI)
अब ट्रांसपोटेशन भी सर्विसेज़ का हिस्सा है. (तस्वीर: PTI)

# उपभोक्ता-

जैसा कि हमने पहले ही कहा कि दुनिया में कोई भी इंसान ऐसा नहीं होगा जो उपभोक्ता न हो. लेकिन चूंकि आज हम ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ की बात कर रहे हैं, तो आइए इसी के हिसाब से उपभोक्ता भी समझते हैं-

उपभोक्ता ऐसा कोई भी व्यक्ति होगा, जो सामान ख़रीद रहा है, या सर्विस ले रहा है. फिर चाहे उस बंदे ने गुड्स या सर्विसेज़ के लिए आधे ही पैसे दिए हों, या पैसे बाद में देने का कॉन्ट्रैक्ट किया हो, या EMI बांधी हो. बस सामान या सर्विस फ़्री में न ली हो. जैसे लंगर में खाना खाने वाला इस परिभाषा के हिसाब से उपभोक्ता नहीं है, लेकिन रेस्टोरेंट में खाने वाला है.

रेस्टोरेंट और भोजन, एक सर्विस और दूसरा गुड्स. दोनों की ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ के दायरे में आ गए हैं. (तस्वीर: PTI)
रेस्टोरेंट और भोजन, एक सर्विस और दूसरा गुड्स. दोनों की ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ के दायरे में आ गए हैं. (तस्वीर: PTI)

ऑनलाइन ख़रीददारी, मल्टीलेवल मार्केटिंग के माध्यम से की गई ख़रीददारी, ऑफ़लाइन (यानी दुकान या शोरूम से की गई) ख़रीददारी, टेलीशॉपिंग, डायरेक्ट सेलिंग के माध्यम से की गई ख़रीददारी और ऐसे सभी माध्यमों से किराए में ली गई चीज़ें या सर्विसेज़ आपको उपभोक्ता बनाती हैं.

कोई भी यूज़र, जो ख़रीददार की मर्ज़ी से उस सामान या सर्विस का उपयोग कर रहा है, उपभोक्ता ठहरा. जैसे माना कोई अपने बच्चों के लिए टॉय ख़रीदे, या अपने पति के लिए घड़ी तो क्रमशः उसके बच्चे या पति भी उपभोक्ता कहलाए गए. सोचिए न उपभोग से ही उपभोक्ता शब्द बना.

और अगर आपने कोई प्रोडक्ट किसी दूसरे को बेचने के वास्ते ख़रीदा है तो आप ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ के अंतर्गत उपभोक्ता नहीं कहलाए जाएंगे. जैसे आपकी चप्पलों की दुकान है, चप्पलों को बेचने से पहले आपको उन्हें थोक में ख़रीदना होगा, तो आप वस्तु ख़रीद तो रहे हो लेकिन उपभोक्ता नहीं हो.

सामान इसलिए ख़रीद रहे हैं ताकि उसे आगे बेच सकें? तो फिर आप उपभोक्ता नहीं हुए. (तस्वीर: PTI)
सामान इसलिए ख़रीद रहे हैं ताकि उसे आगे बेच सकें? तो फिर आप उपभोक्ता नहीं हुए. (तस्वीर: PTI)

# उपभोक्ता के अधिकार-

‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ मेंउपभोक्ता के 6 अधिकार स्पेसिफ़ाई किए गए हैं-

# संरक्षण- उन प्रोडक्ट्स या सर्विसेज़ से उपभोक्ता को संरक्षण मिले जो उसके लिए जान का ख़तरा बन सकती हैं.

# सूचना- उपभोक्ता द्वारा ख़रीदे गए सामान या प्रयोग में लाई गई सर्विसेज़ की क्वालिटी, मात्रा, शुद्धता, प्रभाव, मूल्य जैसी चीजें उससे न छुपाईं गई हों. मतलब उपभोक्ता का अधिकार है कि उसे गुड्स और सर्विसेज़ से जुड़ी इन सभी चीज़ों की जानकारी मिले. और जानकारियां ग़लत न हों. यानी ‘अनफ़ेयर ट्रेड प्रैक्टिस’ न हो.

# सुनिश्चितता- इस बात को सुनिश्चित किया जाए कि, जहां कहीं भी संभव हो उपभोक्ता को चुनने का विकल्प मिले. किसी विशिष्ट कंपनी का प्रोडक्ट ख़रीदने की मजबूरी न हो. मतलब, ये नहीं कि उपभोक्ता ने अगर किसी स्पेसिफ़िक ब्रांड का फ़ाउंटेन पेन ख़रीदा है, तो उसके लिए उसी ब्रांड की इंक ख़रीदनी आवश्यक हो जाए.

जागो ग्राहक जागो
जागो ग्राहक जागो

# सुनवाई- अगर उपभोक्ता कोई शिकायत करता है या फ़ीडबैक देता है तो उसे सुना जाए.

# निवारण/निपटान- शिकायत या फ़ीडबैक का कोई उचित हल या काउंटर फ़ीडबैक उपभोक्ता को मिले.

# जागरूकता- जागरूकता एक कर्तव्य नहीं, उपभोक्ता का अधिकार है. मतलब एक तरह से ये संबंधित सरकार, या संस्था का दायित्व है कि विज्ञापनों से लेकर अन्य सभी माध्यमों से उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों की जानकारी दी जाए. यूं मिनिस्ट्री ऑफ़ कंज़्यूमर अफ़ेयर्स का ‘जागो ग्राहक जागो’ विज्ञापन अब पहले से ज़्यादा सुनाई दे जाए तो आश्चर्य न कीजिएगा.

# कंप्लेन (शिकायत)-

‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ के अनुसार, उपभोक्ता का ऐसा कोई भी लिखित आरोप शिकायत माना जाएगा, जो अनुचित व्यापार, अनुचित कॉन्ट्रैक्ट या प्रतिबंधित व्यापार को लेकर हो.

– अनुचित कॉन्ट्रैक्ट, जैसे रैपर में कहा गया कि एक किलो घी, लेकिन अंदर निकला 900 ग्राम.

– अनुचित व्यापार, जैसे किसी मूवी शो के टिकट अभी पूरे बिके नहीं लेकिन बाहर हाउसफुल का बोर्ड लगा दिया, ताकि बाद में ब्लैक में बेचकर दुगना मुनाफ़ा कमाया जाए.

– प्रतिबंधित व्यापार, जैसे उपभोक्ता तक कोई विशेष प्रोडक्ट या ब्रांड पहुंचने ही न देना, या सिर्फ़ एक ब्रांड तक ही उपभोक्ता की पहुंच बनाए रखना.

साथ ही अगर किसी प्रोडक्ट में कोई ख़ामी (डिफ़ेक्ट) निकल जाती है, या सर्विस में कोई कमी (डिफ़िसेंसी) निकल जाती है तो उसको लेकर लगाया गया लिखित आरोप भी शिकायत माना जाएगा.

अगर कोई प्रोडक्ट या सर्विस अधिक दाम पर बेची जाती है, तो उसको लेकर लगाया गया उपभोक्ता का लिखित आरोप भी शिकायत माना जाएगा. अब आप पूछेंगे कैसे तय होगा कि ‘अधिक दाम’ लिया जा रहा है. कई तरीक़े हैं. जैसे हो सकता है सरकार ने ही किसी चीज़ के दाम तय किए हों, लेकिन उत्पादनकर्ता या विक्रेता उससे ज़्यादा चार्ज कर रहा हो. हो सकता है कोई दाम तय नहीं हो लेकिन उत्पादनकर्ता ने जो पैकिंग या कवर पर MRP लिखी है, विक्रेता उससे ज़्यादा दाम ले रहा हो.

मार्केट में उपभोक्ता का दर्जा सबसे ऊपर होना चाहिए. (सांकेतिक तस्वीर: PTI)
मार्केट में उपभोक्ता का दर्जा सबसे ऊपर होना चाहिए. (सांकेतिक तस्वीर: PTI)

किसी जानलेवा प्रोडक्ट या सर्विस को लेकर लगाया गया उपभोक्ता का लिखित आरोप भी, ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ के अनुसार शिकायत की कैटेगरी में आएगा.

उपभोक्ता ये शिकायतें किनके ख़िलाफ़ कर सकता है? सर्विस प्रोवाइडर, सामान के उत्पादनकर्ता और सामान के विक्रेता के ख़िलाफ़.

# शिकायतकर्ता-

ज़रूरी नहीं कि शिकायतकर्ता ही उपभोक्ता या ख़रीददार ही हो. माइनर की दशा में, उसके माता-पिता या लीगल गार्जन शिकायतकर्ता हो सकते हैं. अगर उपभोक्ता की मृत्यु हो जाती है तो उसका वारिस भी शिकायतकर्ता हो सकता है. कोई ‘रजिस्टर्ड’ एसोसिएशन या NGO भी उपभोक्ता के बिहाफ में शिकायत कर सकती है. मतलब अब प्रोडक्ट का निर्माता ये नहीं कह सकता कि तुम कैसे केस लड़ रहे हो, तुमने तो प्रोडक्ट यूज़ ही नहीं किया. केंद्र सरकार, राज्य सरकार भी शिकायतकर्ता हो सकते हैं, तब भी जबकि वो उपभोक्ता न हों. यानी जैसे रजिस्टर्ड एसोसीशन, उपभोक्ता के बिहाफ में शिकायत कर सकती है, वैसे ही केंद्र और राज्य की सरकारें भी कर सकती हैं.

इन सबके अलावा ‘सेंट्रल अथॉरिटी’ भी स्वतः संज्ञान लेकर शिकायतकर्ता बन सकती है. ‘सेंट्रल अथॉरिटी’ क्या है और ये स्वतः संज्ञान का क्या मतलब? इसे हम आगे समझेंगे.

# एक्ट की तीन लेयर्स-

एक्ट की सबसे बड़ी विशेषता है, इसका स्ट्रक्चर. ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ को तीन भागों में बांट सकते हैं-

# काउंसिल (उपभोक्ता संरक्षण परिषद)- सरकार को एडवाइज़ दिया करेंगी. कि उपभोक्ता संरक्षण को ऐसे-ऐसे बढ़ावा दिया जा सकता है. ठीक जैसे नीति आयोग, भारत सरकार की आर्थिक सलाहकार है वैसे ही इस काउंसिल को भारत सरकार की ‘उपभोक्ता संरक्षण’ सलाहकार मानिए. काउंसिल तीन स्तर की होंगी. ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय.

# केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA)- ये एक एक ‘सेंट्रल अथॉरिटी’ है. रेगुलेटरी. विनियामक. इसका काम है, नज़र रखना. उत्पादक, सर्विस प्रोवाइडर और विक्रेताओं पर. और भ्रामक विज्ञापनों पर भी. जैसे RBI बैंक्स पर रखती है. सीसीपीए की एक इन्वेस्टिगेशन विंग भी होगी. तो वो अलग-अलग केसेज़ की इन्वेस्टिगेशन और इंकवारी भी करेगी और स्वतः संज्ञान लेकर शिकायतकर्ता भी बन सकती है. जैसा हमने आपको ‘शिकायतकर्ता’ वाले सब हेड में लास्ट में बताया था.

तो, CCPA ने किसकी जगह ली? किसी की नहीं. यानी पहले उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी कोई विनियामक संस्था थी ही नहीं.

# उपभोक्ता विवाद निवारण कमीशन (CDRC)- एक्ट के आ जाने से बाद कस्टमर अब सिविल कोर्ट न जाकर, कमीशन में ही शिकायतें दर्ज किया करेंगे. यानी कमीशन का कार्य उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुनना और उनका निपटारा करना है.

गौर करिए काउंसिल का संपर्क सरकार से, सेंट्रल अथॉरिटी का संपर्क उत्पादक, सर्विस प्रोवाइडर और विक्रेताओं से और ‘कमीशन’ का डायरेक्ट संपर्क उपभोक्ताओं से हो रहा है.

# पुराने एक्ट और नए एक्ट में अंतर-

आपको पहले बताया था कि ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ और ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986’ के बीच बहुत सारे अंतर आ गए हैं. जिससे, ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ काफ़ी स्ट्रॉन्ग हो गया है. दोनों एक्ट में तुलना करने से नए एक्ट की वो सारी बातें भी कवर हो जाएंगी जो हमने रिपीट हो जाने के भय से जानबूझकर अभी तक नहीं की थी.

# Caveat Emptor (केविट एंपटर) का मतलब है, जो सामान ख़रीद रहे हो उसे देखभाल के ख़रीदो फिर बाद में न कहना. वो कहते हैं न आदमी घड़ा भी ख़रीदता है तो ठोक बजाकर ख़रीदता है. क्यूं? क्यूंकि अगर घड़ा ख़राब निकला, उसमें कहीं छेद निकला, या लाते ही टूट गया, तो आप उसे वापस नहीं करवा सकते. क्यूंकि दुकानदार कहेगा, ‘मैंने तो आपसे पहले ही कहा था, अच्छी तरह से देख लो.’ तो ये हुआ Caveat Emptor.

लेकिन नए एक्ट में विक्रेताओं के इस बच निकलने के रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया है. मतलब ये, कि, Caveat Emptor को पूरी तरह नकार दिया गया है. अब ये विक्रेता, सर्विस प्रोवाइडर या उत्पादक की ज़िम्मेदारी है कि वो ख़रीददार को एजुकेट करे.

# अगर कोई सेलिब्रेटी किसी प्रोडक्ट को इंडोर्स करता है और उस प्रोडक्ट के ख़िलाफ़ भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत सही पाई जाती है, तो मैन्यूफैक्चरर ही नहीं इन सेलिब्रेटीज़ के ऊपर भी 10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है. या/और 2 वर्ष का कारावास भी हो सकता है. दूसरी बार दोषी पाए जाने पर जुर्माना 50 लाख तक का और दंड 5 वर्ष तक का हो सकता है.

तो क्या अब सड़ी सब्ज़ियों की ज़िम्मेदारी सब्ज़ी विक्रेता की होगी? Caveat Emptor (केविट एंपटर) के अस्तित्व को नकारना तो यही दर्शाता है, बाक़ी तो समय बताएगा. (तस्वीर: PTI)
तो क्या अब सड़ी सब्ज़ियों की ज़िम्मेदारी सब्ज़ी विक्रेता की होगी? Caveat Emptor (केविट एंपटर) के अस्तित्व को नकारना तो यही दर्शाता है, बाक़ी तो समय बताएगा. (तस्वीर: PTI)

जाने माने पत्रकार, और आर्थिक मामलों के जानकर आलोक पुराणिक एक यू ट्यूब वीडियो में बताते हैं-

अमिताभ बच्चन, महेंद्र सिंह धोनी या विराट कोहली जैसे चर्चित लोग, अगर किसी वस्तु या सेवा के इश्तहारों में ग़लत बयानी करते हुए पाए जाएंगे तो उन्हें दंड मिल सकता है.

# प्रोडक्ट लायबिल्टी- इसे उदाहरण से समझिए. आपकी वॉशिंग मशीन ख़राब निकलती है. अगर पहले वाला एक्ट होता तो आपको सिर्फ़ वॉशिंग मशीन के मूल्य के बराबर हर्जाना या नई वॉशिंग मशीन प्लस ऊपर से कुछ सौ रूपये कंपनसेशन के रूप में मिल जाते. लेकिन अब वॉशिंग मशीन के हर्ज़ाने के अलावा, जो कपड़े उससे ख़राब हुए हैं, या अगर किसी को करेंट लगा है और उसके इलाज में कुछ खर्च हुआ है, तो वो सब भी आपको साथ में मिलेगा. ये ठहरी प्रोडक्ट लायबिल्टी.

# नए एक्ट (2019) के चलते अब शिकायत उस जगह दर्ज हो सकती है, जहां का उपभोक्ता है, न कि जहां का सर्विस प्रोवाइडर, मैन्यूफेक्चरर या विक्रेता है. पुराने (1986) वाले में स्थिति उल्टी थी.

# पुराने एक्ट में कोई ‘सेंट्रल अथॉरिटी’ या रेगुलेटरी बॉडी नहीं थी. यानी कोई क्लास मॉनिटर नहीं था. शिकायत भी उपभोक्ता को ख़ुद ही करनी होती थी. लेकिन अब CCPA भी नज़र रखेगी और ‘कमीशन’ में जाकर शिकायत करेगी, जैसा कि, क्लास मॉनिटर करता है.

# कई नई चीज़ें शामिल की गई हैं जिससे उपभोक्ता अधिकारों का दायरा बढ़ गया है. जैसे-

पहले विक्रेता, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत नहीं आते थे, अब आएंगे. और इंट्रेस्टिंग बात ये कि विक्रेता के दायरे में ई कॉमर्स (ऐमेजॉन, फ़्लिपकार्ट) कंपनियां भी आएंगी.

खाद्य पदार्थों को गुड्स की श्रेणी में अब (2019 वाले एक्ट में) शामिल किया गया है, पहले शामिल नहीं थे.

टेलीमार्केटिंग, मल्टी लेवल मार्केटिंग और डायरेक्ट सेल्स भी ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ शामिल किए गए हैं.

'दंगल' फ़ेम सानिया मल्होत्रा, ऐमेजॉन के 'हर पल फेशनेबल' कैंपेन का प्रमोशन करती हुईं. अब फ़्लिपकार्ट और ऐमेजॉन जैसी ई कॉमर्स कंपनियां भी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आएंगी. (तस्वीर: PTI)
‘दंगल’ फ़ेम सानिया मल्होत्रा, ऐमेजॉन के ‘हर पल फेशनेबल’ कैंपेन का प्रमोशन करती हुईं. अब फ़्लिपकार्ट और ऐमेजॉन जैसी ई कॉमर्स कंपनियां भी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आएंगी. (तस्वीर: PTI)

#मिडिएशन- कमीशन का एक काम मिडिएशन का भी है. मतलब ये लीगल और पारदर्शी तरीक़े से अपनी देखरेख में कमीशन के बाहर भी शिकायतों को सुलझाने का कार्य करेगी. आउट ऑफ़ कोर्ट सेटेलमेंट की तर्ज़ पर आउट ऑफ़ कमीशन सेटेलमेंट.

लेकिन ये मिडिएशन जैसा कोई कॉन्सेप्ट पहले वाले ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ में नहीं था.

# अब सिविल कोर्ट की ‘तारीख़ पे तारीख़, तारीख़ पे तारीख़’ वाली स्थिति नहीं रहने वाली. निश्चित दिन में कमशीन को केस निपटाना होगा. गुड्स के केस में ये निश्चित दिन 90 हैं. वकील से लेकर कोर्ट फ़ीस तक, शिकायतकर्ता को, किसी को भी, और कहीं भी, एक पैसा नहीं देना. बस फ़ॉर्म वग़ैरह की एक नॉमिनल राशि को छोड़कर. शिकायतकर्ता अपनी शिकायत 2 साल तक करवा सकता है. प्रोडक्ट की ख़रीद से दो साल के भीतर नहीं, प्रोडक्ट से आई परेशानी वाले क्षण से दो साल के भीतर. जैसे अगर आपने कोई प्रोडक्ट 1 जनवरी, 2020 को ख़रीदा है और वो 1 जुलाई, 2020 को ख़राब हो जाता है, तो आपके पास कंप्लेन करने के लिए 30 जून, 2022 तक का समय होगा.

# कंज़्यूमर कोर्ट के मेंबर्स जहां न्यायिक अनुभव वाले होते थे, अब कमशीन के मेंबर्स लॉ के इतर क्षेत्रों से भी हो सकते हैं. और पहले इनकी नियुक्तियां जजों की ‘नियुक्ति समिति’ द्वारा होती थी, अब केंद्र सरकार द्वारा हुआ करेगी.

# पिक्यूनेरी ज्यूरिस्डिक्शन- जो काम पहले सिविल कोर्ट का था अब कमीशन का है. इस तरह से, जैसे पहले तीन सिविल कोर्ट थे- डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल वैसे ही अब तीन कमीशन होंगे. ऑफ़ कोर्स- डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल. लेकिन जहां-

डिस्ट्रिक्ट सिविल कोर्ट में सिर्फ़ 20 लाख तक के क्लेम्स की सुनवाई होती थी, वहीं अब डिस्ट्रिक्ट कमीशन में 1 करोड़ तक के क्लेम्स और शिकायतों की सुनवाई होगी.

स्टेट सिविल कोर्ट में सिर्फ़ 20 लाख से 1 करोड़ तक के क्लेम्स की सुनवाई होती थी, वहीं अब स्टेट कमीशन में 1 करोड़ से 10 करोड़ तक के क्लेम्स और शिकायतों की सुनवाई होगी.

नेशनल सिविल कोर्ट में 1 करोड़ से ऊपर के क्लेम्स की सुनवाई होती थी, वहीं अब नेशनल कमीशन में 10 करोड़ से ऊपर क्लेम्स और शिकायतों की सुनवाई होगी.

इस तरह के बंटवारे को पिक्यूनेरी ज्यूरिस्डिक्शन कहते हैं. पहले पिक्यूनेरी ज्यूरिस्डिक्शन को डिसाइड करने के लिए वैल्यू ऑफ़ गुड्स/सर्विसेज़ में कंपनसेशन अमाउंट को भी जोड़ा जाता था. इससे कई बार डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की भसड़ कम करने के वास्ते कंपनसेशन अमाउंट को बढ़ाकर इतना कर दिया जाता कि टोटल क्लेम अमाउंट बढ़ जाता था. लेकिन अब ‘वैल्यू + कंपनसेशन’ वाली फ़ाइन लाइन की जगह ‘वैल्यू’ की मज़बूत दीवार बन गई है और केस का ज्यूरिस्डिक्शन तय करना आसान हुआ है.

# क्लास एक्शन सूट- आपने देखा या सुना होगा कि अमेरिका में अगर अलग-अलग उपभोक्ताओं की किसी एक ही प्रोडक्ट को लेकर लगभग समान शिकायतें आती हैं तो उन सभी को क्लब करके एक साथ प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी के ख़िलाफ़ सूट किया जा सकता है. इसे क्लास एक्शन सूट कहा जाता है. आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किसी बड़ी कंपनी के ख़िलाफ़ अकेले व्यक्ति के केस से ज़्यादा मज़बूत होगा ये क्लास एक्शन सूट. वो विज्ञापन याद है, जिसमें एक लकड़ी आसानी से टूट जाती थी लेकिन लकड़ी का गट्ठर नहीं. बस ‘क्लास एक्शन सूट’ वही लकड़ी का गट्ठर ठहरा. पहले इंडिया में नहीं था ये विकल्प. लेकिन थैंक्स टू ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’, अब बड़ी-बड़ी कंपनियों को भारत में भी क्लास एक्शन सूट से डरना होगा.

# ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ का सबसे बड़ा ड्रॉबैक-

हालांकि इस अधिनियम के ढेरों ड्रॉबैक होंगे, लेकिन हम सिर्फ़ उस इकलौते ड्रॉबैक की बात कर रहे हैं, जो ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986’ को ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ में बदलने से हुआ. और वो है ‘कॉन्फ़्लिक्ट ऑफ़ इंट्रेस्ट’.

जैसा कि आपको पता है कि अब सरकार कमीशन के मेंबर्स चुनेगी. तो अगर सरकार के किसी प्रोडक्ट या सर्विस के ख़िलाफ़ शिकायत की जाएगी तो जजमेंट के तराज़ू का पाला प्रतिवादी की ओर झुका पाया जा सकता है.

# मंत्रिजी कहिन-

केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने वीडियो क्रॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि यह नया अधिनियम उपभोक्ताओं को सशक्त बनायेगा और इसके विभिन्न अधिसूचित नियमों व उपभोक्ता संरक्षण परिषदों, उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों, मध्यस्थता, उत्पाद दायित्व तथा मिलावटी/ नकली सामान वाले उत्पादों के निर्माण या बिक्री के लिए सजा जैसे प्रावधानों के माध्यम से उनके अधिकारों की रक्षा करने में मदद करेगा.

(प्रेस रिलीज़ का एक अंश. साभार: https://pib.gov.in/)

# और अंत में गीत-

किसी क्रिकेट कमेंट्री की तर्ज़ पर अंत में यही कहना है कि ये सारा ताम-झाम ऑन पेपर्स तो बड़ा मज़बूत लगता है, लेकिन देखना है कि फ़ील्ड पर इसका कैसा प्रदर्शन रहता है. आप फ़िलहाल सुनिए ग्राहक जागरूकता से जुड़ा शायद सबसे पहला हिंदी गीत. मुहम्मद रफ़ी की आवाज़ में, साहिर लुधियानवी के बोल. धुन है रवि की और फ़िल्म का नाम है नील कमल. –

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

QUIZ: देश के सबसे महान स्पोर्टसमैन को कितना जानते हैं आप?

आज इस जादूगर की बरसी है.

इन नौ सवालों का जवाब दे दिया, तब मानेंगे आप ऐश्वर्या के सच्चे फैन हैं

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.