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चीन के कोरोना वायरस की वजह से भारतीयों की जेब ढीली होने वाली है

20 फरवरी तक चीन में 72 हज़ार से ज़्यादा लोगों में नोवेल कोरोना वायरस (2019-ncov- Corona Virus) की पुष्टि हो चुकी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीन में अबतक क़रीब 1900 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि, चीन के विदेश मंत्रालय का दावा है कि कोरोना वायरस के मामलों में कमी आ रही है.

चीन के अलावा जापान के योकोहामा में तट पर खड़े क्रूज़ शिप में मौजूद 2404 लोगों में से 542 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है. कोरोना वायरस का असर प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. अर्थव्यवस्था पर बुरे असर की बातें तमाम बड़े विश्लेषक कर रहे हैं. लेकिन इन सब के बीच एक बात तो तय है- बड़ी कंपनियों की वित्तीय सेहत पर जो भी असर पड़ेगा, वो आखिर में आम ग्राहकों पर ही ट्रांसफर होना है.

जापान के योकोहामा तट पर खड़ा डायमंड प्रिंसेस क्रूज.
जापान के योकोहामा तट पर खड़ा डायमंड प्रिंसेस क्रूज.

जनवरी महीने से ही कोरोना वायरस के कारण चीन के कुछ बड़े शहरों, खासतौर पर वुहान में फैक्टरियां बंद हैं. चीन की सरकारी फैक्टरियों में कर्मचारियों की कमी हो गई है. चीन के पब्लिसिटी ब्यूरो के निदेशक शिया क्विंगफेंग के मुताबिक,

“सरकारी कंपनियों ने 2020 में अपना कोर्स पूरा करने वाले यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को लूनर नव वर्ष से पहले ही रिक्रूट करना शुरू कर दिया है. “

चीन की एक फैक्ट्री में सुरक्षा सूट बनाते कर्मचारी. (फोटो-रॉयटर्स)
चीन की एक फैक्ट्री में सुरक्षा सूट बनाते कर्मचारी. (फोटो-रॉयटर्स)

#भारत पर इसका क्या असर होगा?

भारत में बहुत सारी ऐसी वस्तुएं हैं जो सीधे चीन से आती हैं. जैसे- इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन के पुर्जे, कपड़ा, केमिकल और दवाइयों के घटक.

पहले बात दवाइयों की करते हैं.

दवाइयां– भारत दुनिया में जेनरिक दवाइयों का बड़ा उत्पादक है. लेकिन भारत में बन रही दवाइयों में इस्तेमाल होने वाले- एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट (API) की 70 फीसदी सप्लाई चीन से होती है. API को यूं समझें कि किसी भी पेनकिलर टेबलेट में जो घटक दर्द दूर करता है उसे API कहते हैं. ये गोली की कुल साइज़ के मुकाबले काफी छोटा होता है. चीन में कोरोना वायरस से API की सप्लाई प्रभावित हुई है. बुखार और दर्द में इस्तेमाल होने वाली पेरासिटामोल दवाई की क़ीमत 40 फीसदी तक बढ़ गई है. यानी जो पैरासिटामोल का पत्ता पहले 20 रुपये का मिलता था, वो अब 28-30 रुपये का मिलेगा. इसके अलावा

-अज़िथ्रोमाइसिन
-डॉक्सीसाइक्लिन
-अमिकासिन
-अमॉक्सीस्लिन

जैसी एंटीबायोटिक्स की क़ीमत भी 13 से 18 फीसदी तक बढ़ गई है.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में ज़ाएडस कैडिला के चेयरमैन पंकज पटेल से बातचीत के हवाले से कहा गया है कि

अगर मार्च के पहले हफ्ते तक चीन से API की सप्लाई दुरुस्त नहीं होती, तो अप्रैल से भारत में कुछ दवाइयों की कमी हो सकती है.

मौजूदा वक्त में देश की बड़ी फार्मा कंपनियों के पास पर्याप्त मात्रा में API है. हालांकि छोटी फार्मा यूनिटों में API की कमी होने की छिटपुट ख़बरें ज़रूर आ रही हैं. आम लोगों पर सीधा असर बताएं तो यही है कि कोरोना वायरस की वजह से अगर चीन में दवा फैक्टरियां नहीं खुलीं, तो जेनरिक दवाएं महंगी हो सकती हैं.

चीन के रिहाइशी इलाकों में कीटाणुनाशकों का छिड़काव करते कर्मचारी.
चीन के रिहाइशी इलाकों में कीटाणुनाशकों का छिड़काव करते कर्मचारी.

इलेक्ट्रॉनिक्स– गली-मोहल्ले में बजने वाले स्पीकर्स, रंगीन लड़ियों से लेकर आपके हाथ में मौजूद मोबाइल तक. इन सबमें चीन का कुछ न कुछ माल चाइना का लगा हुआ है. मोबाइल फोन तो खासकर. कोरोना वायरस के मामले सामने आने के बाद चीन की सरकार ने चीनी नववर्ष पर होने वाली सालाना छुट्टियों को बढ़ा दिया है. फैक्टरियों में काम काज बंद है. ये छुट्टियां हर साल होती हैं. इसलिए कंपनियां हर साल पहले से ही स्टॉक जमा कर लेती हैं. लेकिन इस बार छुट्टियां बड़ा दी गई हैं. कई कंपनियों में काम दोबारा शुरू भी हुआ है, लेकिन मोबाइल निर्माता कंपनियों में काम शुरू नहीं हो पाया है.

जानकारों का मानना है कि अगले 20 दिनों में मोबाइल फोन की कीमत 6-7% बढ़ सकती है.

मिंट पेपर से बातचीत में रिसर्च एनालिस्ट अद्वैत मरडीकर का मानना है कि

“सस्ते दाम पर मिलने वाले स्मार्टफोन की कीमतों बढ़ेंगी. लेकिन प्रीमियम फोन महंगे नहीं होंगे, क्योंकि उनकी डिमांड पहले से ही कम चल रही है. हां, आइफोन जैसे फोन जो पूरी तरह चीन में ही बन रहे हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.”

अद्वैत की बात को पुख्ता करती है एप्पल की ओर से जारी चेतावनी. एप्पल ने 17 फरवरी को कहा,

“पूरी दुनिया में आइफोन की सप्लाई अस्थाई तौर पर कम हो जाएगी. इसकी वजह से कंपनी का पूरी दुनिया में रिवेन्यू कम हो जाएगा.”

मोबाइल विक्रेताओं का मानना है कि वीवो और ओप्पो जैसे चीनी ब्रांड्स के मोबाइल्स की मार्केट में कमी है. इसलिए सैमसंग जैसे चोटी के ब्रांड्स खूब बिक रहे हैं. हां, वो महंगे तो हैं ही.

चीन से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की थर्मल स्कैनिंग समेत ज़रूरी टेस्ट किए जा रहे हैं.
चीन से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की थर्मल स्कैनिंग समेत ज़रूरी टेस्ट किए जा रहे हैं.

खिलौने और प्लास्टिक-इंडिया टुडे की ग्राउंड रिपोर्ट से पता चला है कि चीन में कोरोना वायरस फैलने से पूरी खिलौना इंडस्ट्री पर बुरा असर हुआ है. टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष विपिन निझावन के मुताबिक,

“चीन की फैक्टरियां जनवरी 2020 के पहले हफ्ते से बंद हैं. चीन से खिलौने और आम सामान का आखिरी कंटेनर 15 जनवरी के आसपास लोड हुआ था. जो भारत में पहुंच चुका होगा. उसके बाद से कोई भी चीज़ भारत तक नहीं पहुंची है. 70 फीसदी माल बिक चुका है. खिलौने बेचने के लिए वेराइटी की ज़रूरत होती है. अगर सबकुछ ठीक भी रहा तब भी, अगला माल अप्रैल के आखिरी हफ्ते या मई के पहले हफ्ते तक आ पाएगा.”

भारत में साल 2018-19 के दौरान क़रीब 2200 करोड़ के खिलौने आयात किए गए थे. इसमें से 90 फीसदी चीन से आए थे. भारत ने 2020-21 के बजट में खिलौनों के आयात पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 200 फीसदी तक बढ़ा दिया है. कोरोना वायरस और आयातित खिलौनों पर लगने वाला टैक्स की वजह से खिलौनों के दाम में 30 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. और काम कम होने की वजह से लोगों की नौकरियां जाएंगी सो अलग.

ये तस्वीर मुंबई में खिलौना विक्रेताओं के एक प्रदर्शन की है. मुंबई समेत देश के कई हिस्सों में खिलौनों पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का विरोध हुआ था.
ये तस्वीर मुंबई में खिलौना विक्रेताओं के एक प्रदर्शन की है. मुंबई समेत देश के कई हिस्सों में खिलौनों पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का विरोध हुआ था.

सरकार ने क्या कदम उठाए

18 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 200 से ज्यादा व्यवसायियों से मुलाक़ात की. भरोसा दिलाया कि सरकार कोरोना वायरस से हो रहे आर्थिक नुकसान को रोकने के लिए जल्द ही कदम उठाएगी. लेकिन क्या कदम उठाएगी, वो वित्त मंत्री ने नहीं बताया.

बहरहाल, व्यवसायी चाहते हैं कि

सरकार उन आयातित उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करे, जो ज्यादतर चीन से मंगाए जाते हैं और फिलहाल कई देशों में उपलब्ध हैं. साथ ही चाहते हैं कि सरकार ऐसी कंपनियों को शॉर्ट टर्म लोन दे, जो घरेलू बाज़ार को तत्काल उत्पाद बनाकर दे सकें.

वित्त मंत्रालय ने अभी तक किसी भी तरह की राहत की ख़बर नहीं दी है. उम्मीद की जा रही है कि बाकी मंत्रालयों और प्रधानमंत्री कार्यालय से बातचीत के बाद ही कोरोना वायरस से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कुछ कदम उठाए जाएंगे.

बाज़ार को सरकार से राहत की उम्मीद है. (फाइल फोटो- ANI)
बाज़ार को सरकार से राहत की उम्मीद है. (फाइल फोटो- ANI)

बाज़ार का क्या रुख है?

स्टॉक मार्केट में भी उथल-पुथल मची हुई है. 17 और 18 फरवरी को सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखने को मिली. लेकिन 18 फरवरी की शाम वित्त मंत्री से हुई मुलाक़ात ने मार्केट पर अच्छा असर डाला. 19 फरवरी को सेंसेक्स 428 अंकों का उछाल के साथ बंद हुआ, वहीं निफ्टी में 133 अंकों की बढ़ोतरी हुई. लेकिन अगले ही दिन यानी 20 फरवरी शेयर बाज़ार फिर लुढ़क गया. सेंसेक्स क़रीब 152 अंक लुढ़का और निफ्टी में 45 अंको की गिरवाट आई.

स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव पर नजर गड़ाए बैठे ब्रोकर्स की सांकेतिक तस्वीर.
स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव पर नजर गड़ाए बैठे ब्रोकर्स की सांकेतिक तस्वीर.

रिलायंस सिक्योरिटीज़ के नवीन कुलकर्णी के मुताबिक,

अगर कोरोना वायरस का खतरा कम होता है तो शेयर बाज़ार में दोबारा उछाल देखने को मिल सकता है. कॉर्पोरेट्स की कमाई में (कोरोना वायरस की वजह से) कमी आई है. बैंकों के पास पूंजी का संकट है और लंबे समय के लिए समस्याएं और गहरी हो रही हैं.

भारत के लोगों की सेहत पर तो कोरोना वायरस का कोई खास बुरा प्रभाव अबतक नहीं दिखा है. लेकिन अर्थव्यवस्था की सेहत कोरोना वायरस ने ज़रूर बिगाड़ दी है.


क्या चीन से भारत आ रहे पैकेज अपने साथ कोरोना वायरस ला रहे हैं?

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