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रूस की सिंगल डोज़ वैक्सीन के बारे में वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

भारत में Corona Virus के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. हर रोज़ Covid 19 संक्रमण के चार लाख से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं. वायरस की बढ़ती स्पीड पर लगाम के लिए ज़रूरी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस वायरस से सुरक्षित हो जाए. ये सुरक्षा मिलेगी वैक्सीन से. भारत में इस वक्त डबल डोज़ वैक्सीन्स लगाई जा रही हैं. वैक्सीनेशन की प्रोसेस महीने डेढ़ महीने की है. यानी वायरस से प्रोटेक्शन मिलने में वक्त लग रहा है.

तो क्या कोई ऐसी वैक्सीन नहीं बन सकती, जिसका एक डोज़ ही आपको कोरोना वायरस से इम्युनिटी दे दे? कुछ ऐसा ही सोचा रूस की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी गामालेया इंस्टीट्यूट ने, और बना दी सिंगल डोज़ वैक्सीन. इसे नाम दिया स्पूतनिक लाइट. अब रूस ने इस वैक्सीन को इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है. गामलेया इंस्टीट्यूट का दावा है कि ये वैक्सीन करीब 80 प्रतिशत तक असरदार है.

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वैक्सीन लगाने की तैयारी करतीं एक हेल्थ वर्कर. फोटो- PTI

7 मई को नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल से पूछा गया कि क्या भारत में इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाएगा. उन्होंने कहा,

“स्पूतनिक लाइट के डेवलपर्स कह रहे हैं कि इसका एक ही डोज़ काफी है. हम उनके दावों की जांच कर रहे हैं. इसके बारे में थोड़ी और जानकारी आने दीजिए, तब देखेंगे.”

उन्होंने ये भी कहा कि कंपनी के दावे बेहद आकर्षक हैं. अगर ये सही साबित होते हैं तो भारत में वैक्सीनेशन की स्पीड दोगुनी हो जाएगी. हालांकि, उन्होंने कहा कि साइंटिफिक डेटा और पूरी जानकारी आने के बाद ही इस वैक्सीन के इस्तेमाल पर फैसला किया जाएगा.

तो भारत में ये वैक्सीन कब आएगी, आएगी भी या नहीं. इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है. पर इस वैक्सीन को लेकर लोगों में जिज्ञासा ज़रूर बढ़ गई है. तो चलिए, उन्हीं कुछ सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं जो इस वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में आ रहे हैं.

Sputnik V Vaccine
भारत ने हाल ही में कुछ शर्तों के साथ स्पूतनिक V के इस्तेमाल की इजाज़त दी है. (तस्वीर: एपी)

कैसे तैयार हुई है स्पूतनिक लाइट?

स्पूतनिक लाइट वैक्सीन कैसे बनी ये समझने के लिए हमें समझना होगा कि स्पूतनिक V कैसे बनी. कोरोना वायरस की तरह ही वायरस का एक और परिवार होता है. एडेनोवायरस. Adenovirus. इस वायरस के अंतर्गत वो तमाम वायरस आते हैं जो सर्दी-खांसी और सांस संबंधी बीमारियां पैदा करते हैं.

गामलेया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने एडेनोवायरस फैमिली के दो वायरस लिए. Ad 5 और Ad26. दोनों को लैब में निष्क्रिय किया गया. अब जब एक व्यक्ति को वैक्सीन की पहली डोज़ के रूप में निष्क्रिय Ad26 और दूसरी डोज़ के रूप में निष्क्रिय Ad5 दिया गया तो देखा गया कि ये दोनों निष्क्रिय वायरस मिलकर शरीर में वो स्पाइक प्रोटीन बनाने में कामयाब हुए, जो कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ सके. या संक्रमण के ख़िलाफ एंटीबॉडी तैयार कर सके. यानी स्पूतनिक V के दोनों डोज़ में एक ही वैक्सीन नहीं दी जाती. दोनों डोज़ अलग-अलग होते हैं. इसमें Ad26 मेन वैक्सीन है और Ad5 बूस्टर डोज़. इन दोनों का कॉम्बिनेशन कोरोना वायरस के खिलाफ मामला दुरुस्त कर देता है. रूस के वैज्ञानिकों ने अप्रैल में दावा किया था कि स्पूतनिक  V कोरोना वायरस के खिलाफ 97.6 प्रतिशत असरदार है. स्पूतनिक  V कोरोना वायरस के लिए बनी दुनिया की पहली रजिस्टर्ड वैक्सीन है.

स्पूतनिक V के पहले कम्पोनेंट यानी निष्क्रीय Ad26 को ही स्पूतनिक लाइट के तौर पर उतारा गया है. गामलेया इंस्टीट्यूट का दावा है कि इस वैक्सीन के एक डोज़ में ही करीब 80 प्रतिशत, (79.4 प्रतिशत टू बी स्पेसिफिक) लोग वायरस से सुरक्षित हो जाएंगे. उनका ये भी दावा है कि इसकी एफिकेसी कई दो डोज़ वाली वैक्सीन्स से ज्यादा है.

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स्पूतनिक वैक्सीन के हवाले से हम देश में लगायी जा रही दोनों वैक्सीन का तुलनात्मक अध्ययन भी करेंगे. तस्वीर सांकेतिक है.

किस आधार पर ये दावा किया जा रहा है?

रूस के डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) की तरफ से एक बयान में जानकारी दी गई कि 5 दिसंबर, 2020 से 15 अप्रैल, 2021 के बीच रूस में मास वैक्सीनेश प्रोग्राम चलाया गया था. वैक्सीनेशन के 28 दिन बाद लोगों का टेस्ट किया गया, नतीज़ों को एनालाइज़ करने के बाद ये पाया गया कि इस वैक्सीन की एफिकेसी 79.4 प्रतिशत है.

अगर कोई ऐसा व्यक्ति Sputnik Light लगवा ले जो कोरोना वायरस से इन्फेक्ट होकर ठीक हो चुका हो, तो?

गामालेया सेंटर की स्टडी में ऐसे लोगों पर वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट नहीं देखा गया है.

क्या भारत में फैले दूसरे स्ट्रेन पर ये वैक्सीन असर करेगी?

RDIF ने दावा किया है कि गामालेया सेंटर में किए गए लैब टेस्ट्स से पता चला है कि ये वैक्सीन कोरोना वायरस के सभी नए-पुराने स्ट्रेन्स पर असर करती है.

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भारत में फिलहाल कोविशील्ड और कोवैक्सीन लगाई जा रही है. (फ़ोटो: PTI)

कितनी महंगी होगी ये वैक्सीन?

डेवलपर्स का दावा है कि ये वैक्सीन पूरी दुनिया में 10 डॉलर यानी करीब 733 रुपये से कम में मिलेगी. दूसरी तरफ, स्पूतनिक V के एक डोज़ की कीमत भी लगभग इतनी ही है. यानी स्पूतनिक V के कम्प्लीट वैक्सीनेशन की कीमत स्पूतनिक लाइटट से दोगुनी पड़ेगी.

क्या ये वैक्सीन लगनी शुरू हो गई है?

इस वैक्सीन को 6 मई को रूस ने इस्तेमाल के लिए ऑथोराइज़ किया है. उनके अलावा 60 और देशों में इस वैक्सीन के इस्तेमाल को अप्रूवल मिल गया है. हालांकि, यूरोपियन मेडिकल एजेंसी और अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने फिलहाल इसे अप्रूवल नहीं दिया है.

पर रूस तो कह रहा है कि मेन वैक्सीन दो डोज़ वाली ही रहेगी, तो लाइट क्यों?

RDIF चीफ किरिल दिमित्री ने कहा कि रूस में वैक्सीनेशन मुख्य रूप से दो डोज़ वाली वैक्सीन्स से लगाया जाएगा. वजह है स्पूतनिक V की एफिकेसी ज्यादा होना. हालांकि, उन्होंने कहा कि कम समय में एक बड़े समूह को इम्यून करने के लिए सिंगल डोज़ वैक्सीन ज्यादा मददगार होगी. इससे कोरोना वायरस का फैलाव रुकेगा और हर्ड इम्युनिटी हासिल की जा सकेगी. वैक्सीन को डेवलप करने वाली गामालेया रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर एलेक्ज़ेंडर जिंट्सबर्ग ने भी यही बात कही.


स्पूतनिक V: 1 मई को भारत आ सकती है रूस से आ रही कोरोना वैक्सीन

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