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लुकाकू, हज़ार्ड, डे ब्रुएन... अबकी बार कमाल कर पाएगी बेल्जियम की गोल्डेन जनरेशन?

EURO2020 बस शुरू ही होने वाला है. अपने महाद्वीप की इस सबसे बड़ी फुटबॉल ट्रॉफी को उठाने के लिए यूरोप की 24 टीमें तैयार हैं. हमारी EURO2020 की कवरेज शुरू हो चुकी है. सबसे पहले हमने आपको बताया ग्रुप A के बारे में. अब बारी ग्रुप B की. क्लास की पिछली बेंच जैसे इस ग्रुप का दादा तो बेल्जियम ही है. अपनी गोल्डेन जेनरेशन के साथ 2018 वर्ल्ड कप में नाकाम होने के बाद रॉबर्टो मार्टिनेज़ की ये टीम इस बार कसर पूरी करने उतरेगी. लेकिन उनके लिए चीजें आसान नहीं रहेंगी.

# Squads का हाल

जैसा कि हमने बताया, बेल्जियम की टीम इस ग्रुप में सबसे मजबूत है. हर मामले में यह टीम बाकी टीमों पर भारी है. लेकिन ये मजबूती तो 2018 वर्ल्ड कप में भी थी. और वहां टीम रिजल्ट नहीं दे पाई. सेमीफाइनल में ज्यादातर वक्त तक फ्रांस को दबोचने के बाद भी बेल्जियम की टीम हार गई. इस बार उन्हें बेहतर करने की शुरुआत अपने ग्रुप मुकाबलों से करनी होंगी. ग्रुप B में बेल्जियम के साथ डेनमार्क, रूस और फिनलैंड हैं.

आगे बढ़ने से पहले देख लेते हैं इस ग्रुप में शामिल देशों की स्क्वॉड

डेनमार्क

फॉरवर्ड्स

मार्टिन ब्रैथवेट, आंद्रेआस कोर्नेलिउस, आंद्रेआस स्काव ओल्सन, युसुफ पॉउलसन, कैस्पे डॉल्बा और योनास विंड.

मिडफील्डर्स

मैथियस येनसन, क्रिस्चियन नेरगोर, पिएरे एमिल हॉयबीयर, थॉमस डेलनी, एंडर्स क्रिस्टियनसन, क्रिस्चियन एरिकसन, मिकेल डैमस्गार, रॉबर्ट स्काव.

डिफेंडर्स

येंस ट्रिगर लारसन, सिमन कया, आंद्रेआस क्रिस्टंसन, योआकीम एंडरसन, डैनिएल वास, मैथियस यर्गनसन, योआकिम मेल, यानिक वेस्टरगा, निकोलाइ बोइलेसन

गोलकीपर्स

कैस्पर श्माइकल, योनास लूसल, फ्रेडेरिक रोनो.

मैनेजर- कैस्पर युलमन.

फिनलैंड

फॉरवर्ड्स

जोएल पोहनपालो, मार्कस फॉर्स,  टेमु पुकी.

मिडफील्डर्स

ग्लेन कमारा, रॉबर्ट टेलर, रोबिन लड, जोनी कुको, ओनी वलाकरी, रासमस शुलर, थॉमस लाम, टिम स्पार, फ्रेडरिक जेनसन, लासी लैपपलाइनेन.

डिफेंडर्स

पॉलस अराजुरी, डैनिएल ओ शुनेसी, जूना टोवो, लियो वेसनेन, सूली वेसनेन, रॉबर्ट इवानोव, जेरे उरुनेन, निकोलाइ अलो, जुक्का रताला, पेरि सोरी.

गोलकीपर्स

लुकस राडेकी, जेसे जोरोनेन, अनसी जाकोला.

मैनेजर- मार्क कनेरवा.

बेल्जियम

फॉरवर्ड्स

मिची बत्शुआई, क्रिस्टियन बेंटेके, जेरेमी डोकु, ईडन हज़ार्ड, रोमेलु लुकाकू, ड्रीस मर्टेंस, लिएंड्रो ट्रोसार्ड

मिडफील्डर्स

टिमोथी कास्टान्ये, नासेर चैडलि, यानिक करास्को, केविन डि ब्रुएन, लिएंडर डेंडोनकर, थॉर्गन हज़ार्ड, थॉमस मुनिए, डेनिस प्रैट, यूरी टिलेमंस, हैंस वानाकन, एक्सेल विटसल.

डिफेंडर्स

टोबी अल्डरवीरल्ड, डेडरिक बोयाटा, जेसन डिनेयर, थॉमस वर्माइलन, यान वर्टोन्घन

गोलकीपर्स

थिबॉट कोर्टवा, सिमन मिन्योले, मैट्स सेल्ज़

मैनेजर- रॉबर्टो मार्टिनेज़

रूस

फॉरवर्ड्स

अर्तेम ज़ुबा, अंतोन ज़ैबोलोटनि, अलेक्सांदर सोबोलेव

मिडफील्डर्स

दिमित्री बेरिनोव, रिफत झेमालेतदिनोव, मैकसिम मुखिन, अलेक्सांदर गोलोविन,  डैनिल फोमिन, रोमन ज़ोबनिन, अलेक्सी ओनोव, दलेर कुज़ियेव, आंद्रेइ मोस्तोवोय, मैगोमेद ओज़दोव, डेनिस माकरोव, अलेक्सी मिरानचुक, डेनिस चेरिशेव.

डिफेंडर्स

जॉर्जी झिकिया, इगोर दिवीव, युरी झिरकोव, याचेस्लाव कारावाव, फेदोर कुदरियाशोव, आंद्रेइ सेमेनोव, मारियो फर्नांडेस.

गोलकीपर्स

युरी डुपिन,  मैटवी सोफोनोव, अंतोन शुनिन.

मैनेजर- स्टैनिस्लाव चेरचेसोव

# किसका चलेगा सिक्का?

स्क्वॉड्स की बात करने के बाद अब बारी इन टीमों के पिछले प्रदर्शन की. अगर पिछले यूरो में इन टीमों के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो रूस यूरो 2016 को याद नहीं करना चाहेगा. टीम सिर्फ एक पॉइंट लेकर ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी. जबकि फिनलैंड और डेनमार्क तो यूरो 2016 के लिए क्वॉलिफाई भी नहीं कर पाए थे.इस ग्रुप की सबसे दमदार टीम बेल्जियम ने यूरोप 2016 में क्वॉर्टरफाइनल तक का सफर तय किया था. यहां उन्हें वेल्स से मात मिली थी.

फिनलैंड और डेनमार्क इस बार यूरो में अपनी छाप छोड़ने के लिए बेताब होंगे. और इस बेताबी का हल उनके दो स्टार्स टेमु पुकी और क्रिस्चियन एरिकसन के पास होगा. पुकी ने हाल में प्रीमियर लीग में कमाल का प्रदर्शन किया है. साथ ही वह फिनलैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने से भी बस तीन गोल दूर हैं. अगर वह पूरी तरह से फिट और लय में रहे तो फिनलैंड निश्चित तौर पर उलटफेर कर सकता है.

दूसरी ओर डेनमार्क के पास युवा प्लेयर्स का अच्छा पूल है. और उनके साथ एरिकसन का विजन मिल जाए तो क्या ही बात हो. एरिकसन के कमाल के पास पर गोल करने के लिए डेनमार्क के अटैक में युसुफ पॉउलसन, कैस्पे डॉल्बा और ब्रैथवेट जैसे प्लेयर्स हैं. जबकि होल्ड करने के लिए इनके पास होजे मोरीनियो के फेवरेट पिएरे एमिल हॉयबीयर. कुल मिलाकर यह टीम ग्रुप के टॉप टू में आने का दम रखती है.

बात रूस की करें तो 2018 के वर्ल्ड कप के बाद टीम फिर से अपनी जमीन पर बड़ा टूर्नामेंट खेलेगी. वर्ल्ड कप में स्पेन को हराकर सबको चौंकाने वाला रूस क्वॉर्टर-फाइनल में बेहद क़रीबी अंतर से क्रोएशिया से हार गया था. हालांकि इस हार के बाद भी टीम ने अपने प्रदर्शन से लोगों को काफी प्रभावित किया था.

अपने घर में खेलने वाले रूस के लिए दर्शकों का सपोर्ट भी एक बड़ा फैक्टर होगा. रिपोर्ट्स हैं कि 68 हजार दर्शकों की क्षमता वाले गज़प्रोम अरेना में 50 परसेंट लोगों को आने की परमिशन दी जा सकती है. रूस अपने घर में बेल्जियम और फिनलैंड से खेलेगा. जबकि उनका तीसरा ग्रुप मैच डेनमार्क के खिलाफ उन्हीं के घर में होगा.

पिछले वर्ल्ड कप से उभरे अलेक्सांदर गोलोविन के साथ रिफत झेमालेतदिनोव और अलेक्सांदर सोबोलेव की तिकड़ी को रोकना किसी भी डिफेंस के लिए आसान नहीं रहने वाला. वेटरन स्ट्राइकर अर्तेम ज़ुबा का अनुभव भी टीम के काफी काम आएगा.

इन तीनों टीमों को इस ग्रुप में सबसे बड़ी चुनौती बेल्जियम से मिलेगी. कम से कम कागज़ों पर तो सुपरस्टार्स से भरी इस टीम को रोकना किसी के बस का नहीं दिखता. लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि यही टीम 2018 वर्ल्ड कप और उससे पहले 2016 यूरो में नाकाम हो चुकी है. बेल्जियम की इस गोल्डेन जेनरेशन के नाम अभी तक कोई ट्रॉफी नहीं है. और वे निश्चित तौर पर इस बार ये कलंक मिटाना चाहेंगे.

# फिर ना फिसले Belgium!

रोमेलु लुकाकू, इटैलियन लीग के मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर. केविन डे ब्रुएन, मैनचेस्टर सिटी और इंग्लिश प्रीमियर लीग के जादूगर. थिबॉट कोर्टवा और ईडन हज़ार्ड, रियल मैड्रिड के सुपरस्टार्स. इस टीम के प्लेयर्स पूरी दुनिया में फेमस हैं. इनके खेल के चर्चों से डेली के डेली हजारों पन्ने रंगे जाते हैं. इनके सामने पूरे 90 मिनट कोई टीम चैन की सांस नहीं ले सकती.

लेकिन इन 90 मिनट्स में होने वाली एक गलती भी आपको मैच हरा सकती है. अक्सर देखा गया है कि बेल्जियम की टीम शुरुआत में बेहतरीन खेल दिखाती है, लेकिन नॉकआउट्स तक आते-आते इनसे कोई ना कोई गलती हो ही जाती है. उम्मीद है कि इस बार मार्टिनेज़ की टीम ऐसा कुछ नहीं करेगी और गोल्डेन जनरेशन के नाम उनकी पहली ट्रॉफी आ ही जाएगी.

प्रेडिक्शन

इस ग्रुप से बेल्जियम का आगे जाना लगभग तय है. यह टीम हर मोर्चे पर ग्रुप की बाकी टीमों से बेहतर है. ग्रुप से आगे जाने वाली दूसरी टीम डेनमार्क हो सकती है. डेनमार्क की मिडफील्ड और अटैक ग्रुप की बाकी बची दो टीमें से काफी अच्छी है. बाकी दो टीमों में से रूस के तीसरे स्थान पर आने के चांसेज ज्यादा हैं. हालांकि फिनलैंड के तालिस्मान पुकी चल गए तो कुछ भी हो सकता है.


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