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क्या वो सच में आदमखोर है या 2019 के चुनावों की साजिश का मोहरा भर?

हमने पिछले एपिसोड में पढ़ा कि किस तरह एक बाघिन और एक प्रोजेक्ट को लेकर लोगों के बीच ही दो गुट बन गए थे. अब हम आपको सिलसिलेवार इसके आगे की घटना और आज तक जो हुआ वो बताते हैं.


सुंदरी – भाग 2 (अंतिम भाग)

15 सितंबर, 2018

सांकेतिक इमेज (ये तस्वीर मछली नाम की बाघिन की है. ‘रणथम्भौर की रानी’ के नाम से फेमस इस बाघिन ने एक चौदह फीट लंबे मगरमच्छ को युद्ध में पछाड़ डाला था.)
सांकेतिक इमेज (ये तस्वीर मछली नाम की बाघिन की है. ‘रणथम्भौर की रानी’ के नाम से फेमस इस बाघिन ने एक चौदह फीट लंबे मगरमच्छ को युद्ध में पछाड़ डाला था.)
पढ़ें पहला भाग: कहानी आदमखोर बाघिन की, जिसने राजनीति से लेकर सेव टाइगर प्रोजेक्ट तक में हंगामा मचा दिया है!

अभी तक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं आई थी. शव की पीठ का घाव बहुत गहरा और चिकना था, और ऐसा नहीं लगता था कि ये बाघ के हमले के चलते हुआ था.

इस बीच, डब्ल्यूसीसीबी और अपराध शाखा के विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीमों ने उस स्थान का दौरा किया जहां महिला को हाथीबाड़ी गांव के पास मृत पाया गया था.

कुछ लोगों का मत था कि सुंदरी की आड़ में कोई न कोई राजनितिक उल्लू सीधा किया जा रहा है. 2005-2007 के दौरान जब सतकोसिया में एक दर्जन से अधिक बाघ थे तब गांववाले कोई विरोध नहीं करते थे. तब भी पालतू जानवर मारे जाते थे, तब भी लोगों में एक डर था, लेकिन सुंदरी को लेकर जो विरोध अब था तब किसी बाघ को लेकर नहीं था.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार ये आशंका भी जताई गई कि ‘सतकोसिया प्रजा सूर्य समिति’ में भाजपा के नेताओं का प्रभुत्व है. और कथित तौर पर ये लोग 2019 के चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए लोगों की भावनाओं को इस दिशा की और मोड़ रहे हैं. जुलाई में बाघ के आने से कहीं पहले जब इस समिति ने अनुगुल कलेक्टरेट के सामने प्रदर्शन किया तब भी जिले के सभी शीर्ष भाजपा नेता वहां मौज़ूद थे.

हालांकि, समिति ने इस बात का खंडन करते हुए कहा कि समिति में सभी राजनीतिक दलों के नेता हैं और इसका उपयोग किसी भी राजनितिक लाभ के लिए नहीं किया जा रहा.

एक खबर ये भी आई कि एनटीसीए ने राय दी थी कि बाघों को मॉनसून या गर्मी के मौसम में शिफ्ट नहीं करना चाहिए और सुंदरी और कान्हा द्वारा बाड़े में बिताए केवल दो महीने, दरअसल एडजस्ट होने के लिए बहुत कम समय था.


17 सितंबर, 2018

कैलाशी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि वो ‘एक जंगली पशु’ के हमले में मारी गई थी. किसी जानवर के काटने पर हुए एसफिक्सिया (खून में ऑक्सीजन की कमी) के चलते उसकी मृत्यु हुई थी. रिपोर्ट में ये साफ़ तौर पर नहीं बताया गया था कि ये एक बाघ ही था.

उधर डब्ल्यूआईआई की एक टीम ने कहा कि बाघ को सकोसिया टाइगर रिजर्व से कहीं और स्थानांतरित नहीं किया जाएगा. डब्ल्यूआईआई विशेषज्ञ डॉ रमेश ने कहा –
चूंकि ये (अंतर्राज्यीय स्थानांतरण प्रोग्राम) देश में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है और चूंकि इस परियोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है इसलिए निर्णय में कोई बदलाव और परिवर्तन बहुत मुश्किल होगा.

हमने इस परियोजना के कई पहलुओं का विस्तार से अध्ययन किया है और किसी भी समस्या को सुलझाकर धीरे-धीरे आगे बढ़ा जाएगा.

डब्ल्यूआईआई की टीम ने वन विभाग से भी ग्रामीणों के सहयोग की मांग करने और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए भी कहा.


सितंबर 18, 2018

फिर से प्रदर्शन और हिंसा! वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) ने कल ही तो कहा था कि सुंदरी सतकोसी में ही रहेगी. और आज सुंदरी एक लेहेडी गांव की एक गाय मारकर खा गई. फॉरेस्ट ऑफिसर ने कहा कि अभी तक श्योर नहीं है कि शेर ने गाय खाई लेकिन फिर भी मुआवज़ा दे दिया गया है.

गांव वालों ने कहा कि अगर गाय को किसी और ने मारा होता तो वन विभाग ने हमें मुआवज़ा न दिया होता.

डब्ल्यूआईआई के अनुसार अभी बाघिन अथमलिक वाले एरिया में ही घूम रही थी. और अभी तक उसके अपनी टेरिटरी नहीं मार्क की थी. आप ज़रा मैप भी देख लीजिए जिससे एरिया का थोड़ी बहुत आईडिया हो पाए.

बाकी के मैप को देखने के लिए आप गूगल मैप और गूगल अर्थ भी चेक कीजिएगा. पिक्चर और क्लियर होगी. (स्क्रीनशॉट - गूगल मैप्स)
बाकी के मैप को देखने के लिए आप गूगल मैप और गूगल अर्थ भी चेक कीजिएगा. पिक्चर और क्लियर होगी. (स्क्रीनशॉट – गूगल मैप्स)

19 सितंबर, 2018

अनुगुल के पुलिस अधिकारी हरिहर पानी और ढेनकनाल की एक फोरेंसिक टीम ने कैलाशी गरनायक की मौत की जांच शुरू की.

इस टीम ने उस तालाब का निरीक्षण किया जहां महिला मृत होने से पहले स्नान कर रही थी. मिट्टी में बने संदिग्ध पंजे के निशान भी स्कैन किए. सभी सबूतों की फ़ोटोज़ भी ली गईं.

ये टीम बाद में उन जगहों पर भी गई जहां भीड़ ने उत्पात मचाया था और ऑफिस और नावें वगैरह जलाई थीं.

पुलिस ने हिंसा फ़ैलाने के अपराध में 240 लोगों के खिलाफ चार मामले भी दर्ज किए. इस हिंसा के दौरान 2.5 करोड़ रुपये की संपत्ति के नुकसान होने का अनुमान लगाया गया.


23 सितंबर, 2018

सुंदरी की निगरानी रखने वाली फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम को सुंदरी नज़र आई. उनकी गाड़ी को कुछ देर तक घूरने के बाद सुंदरी थोड़ी देर रुकी और फिर जंगली में भाग गई.

इस घटना की तस्वीर सोशल मीडिया में जंगल में आग की तरह  फ़ैल गई. मने काफी वायरल हो गई और इसके चलते आसपास के गांवों में भय का माहौल पसर गया.

इस बार सुंदरी को शहर के क्षेत्र से केवल तीन किलोमीटर की दूरी पर देखा गया था. दरअसल वन अधिकारी लगातार सुंदरी की निगरानी कर रहे थे और उसे जंगल के बफर ज़ोन से वापस कोर ज़ोन में भेजने की कोशिश कर रहे थे.

बफ़र ज़ोन जंगल और शहर के बीच का इलाका होता है. यहां पर जंगलों के बीच में कुछ मानव बस्तियां भी होती हैं.

सुंदरी पिछले कई दिनों से इसी बफ़र ज़ोन में विचरण कर रही थी और उसका बार-बार इंसानों या पालतू पशुओं से आमना-सामना हो रहा था. दो दिन तक रंगपुर गांव के पास रहने के बाद वो जादूपुर के बाहरी इलाकों और खंबेश्वरपल्ली, नुगादा और सिद्धपुर के आसपास के गांवों में देखी गई थी. लेकिन अब खबरें आ रही थीं वो अथमलिक शहर से लगभग 3 किमी दूर जंगल के अंदर जा रही थी.


26 सितंबर, 2018

जब इतने दिनों के गुज़रने के बाद भी सुंदरी अनुगुल जिले की मानव बस्तियों को छोड़ने का नाम नहीं ले रही थी तो राज्य के वन विभाग और देहरादून से आई वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की विशेषज्ञ टीम ने उसे पकड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी.

सुंदरी की निगरानी रखने के लिए डब्ल्यूआईआई, सतकोसिया वन विभाग, मध्यप्रदेश कान्हा टाइगर रिजर्व और नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क की चार टीमें बनाई गईं. अधिकारियों ने बाघिन को पकड़ने के लिए दो पिंजरों की भी व्यवस्था की. इन पिंजरों को अथमलिक फॉरेस्ट रेंज क्षेत्र के गांवों के पास रखा गया जहां कुछ दिनों पहले ही सुंदरी को देखा गया था. यह निर्णय लिया गया कि उसे सतकोसिया टाइगर रिजर्व के बफर एरिया से पकड़कर कोर या मुख्य जंगल में छोड़ दिया जाएगा.

दूसरी तरफ स्थानीय लोगों ने इस रिलोकेशन का विरोध करना शुरू कर दिया. उनका कहना था कि सुंदरी को बफर से कोर ज़ोन में नहीं बल्कि वहीं भेजा जाए जहां से इसे लाया गया है. मने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पार्क में.


28 सितंबर 2018

वन विभाग ने बाघ को पिंजरे में डालने की किसी योजना से इंकार कर दिया है. उनके अनुसार बाघिन अब हाथिधारा रिज़र्व फ़ॉरेस्ट के हिल-टॉप में है और अच्छी दशा में है. हाथिधारा रिज़र्व फ़ॉरेस्ट, अथमलिक फ़ॉरेस्ट डिवीज़न के अंडर आता है. उनका कहना है कि फ़ॉरेस्ट टीम, ट्रांक्विलाइज़र टीम, डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के साथ चौबीसों घंटे बाघ को ट्रैक कर रही है. सुंदरी 21 सितंबर से जंगल में है और कभी उस सीमा रेखा पार करने की कोशिश नहीं की है.

वन विभाग ने कहा कि कुछ दिनों पहले ही जंगल में एक गाय का शिकार करने के बाद बाघिन ने किसी भी पालतू जानवर का शिकार नहीं किया है.


05 अक्टूबर 2018

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सुंदरी जंगल के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है.

पीसीसीएफ सुदर्शन पांडा ने कहा कि बेशक सुंदरी को बलपूर्वक जंगल में भेजने की पूरी तैयारी थी (फिर चाहे वो ट्रेंकवलाइज़रों की टीम और जाल का उपयोग करके उसे रिलोकेट करना ही विकल्प क्यूं न रहा हो) लेकिन इसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ी क्यूंकि सुंदरी खुद ही जंगल के कोर एरिया में चली गई.

पांडा ने आगे कहा कि सुंदरी नर बाघ कान्हा के साथ भी मेलजोल बढ़ा रही है. एसटीआर (सतकोसी टाइगर रिज़र्व) में इन दो बाघों के स्थिरीकरण के बाद मध्य प्रदेश से चार अन्य बाघों के रिलोकेशन के प्रयास किए जाएंगे.

खबर आई कि सुंदरी अभी तक अपनी टेरीटरी को मार्क नहीं कर पाई है. हां लेकिन दो पुरानी बाघिनों का सुंदरी के प्रति कोई शत्रुतापूर्ण रवैया नहीं देखा गया है.


15 अक्टूबर, 2018

कुछ दिनों की शांति के बाद फिर से एक ग्रामीण रघु सोया ने आरोप लगाया कि सुंदरी ने उसके बैल को मार दिया. इसके बाद सतकोसिया में फिर से पहले भय और उसके बाद अराजकता का माहौल पसर गया.

लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के कर्मचारी बाघों का ट्रैक नहीं रख रहे हैं, यही कारण है कि उनका अक्सर ही इंसानों से आमना-सामना हो जा रहा है.

दूसरी तरफ वन विभाग ने कहा कि बाघ की निगरानी चौबीसों घंटे की जा रही है. जैसे ही सुंदरी गांवों या बफ़र एरिया का रुख करती है रेंजर उस पर नज़र रखने के लिए दौड़ पड़ते हैं. इस ट्रैकिंग टीम में लगभग 40 से 50 लोग हैं. वन विभाग ग्रामीणों की सुरक्षा के बारे में चिंतित है और लोगों को किसी भी तरह से डरना नहीं चाहिए. वन विभाग ने ये भी कहा कि रघु सोया को मुआवजा दे दिया गया है.


16 अक्टूबर, 2018

मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) संदीप त्रिपाठी ने कहा –

सतकोसिया के बाद दूसरे चरण में बाघों को महानदी वन्यजीव प्रभाग के अंडर आने वाले वनों में छोड़ा जाएगा.

कान्हा और सुंदरी एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं और जल्द ही एक अच्छी खबर मिल सकती है. यदि आने वाले समय में सुंदरी इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं बनती तो वन विभाग दूसरे चरण की स्थानान्तरण प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाएगा.

सतकोसिया जंगल के बफर और मुख्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच बाघ के डर को देखते हुए और बाघों के मुक्त विचरण को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से विभाग ग्रामीणों को अन्य जगहों में स्थानांतरित करने की योजना बना रहा है. इसके अलावा बाघ जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किया जा रहा है और ग्रामीणों के स्थानांतरण और जंगल के निर्माण पर प्राथमिकता दी जा रही है. इस पूरी प्रोसेस में दो साल लग जाएंगे.


अक्टूबर, 21 2018

एक अच्छी और एक बुरी खबर का सिलसिला जारी है. अब सुंदरी ने फिर से एक इंसान को मार डाला. मृतक की पहचान तनेसी गांव के तृणथ साहू के रूप में हुई थी.

तृणथ साहू मछली पकड़ने के लिए पास के तालाब में गया था जब सुंदरी ने उसपर झपट्टा मारा और उसे जंगल की तरफ ले गई.

अब इस घटना के चलते अंगुल जिले के सतकोसिया इलाके में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं, जो आज इस स्टोरी के किए जाने यानी 23 अक्टूबर, 2018 तक जारी हैं.

काफी पहले से सतकोसिया से बाघों को स्थानांतरित करने की मांग कर रहे लोगों का गुस्सा अबकी उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. इन लोगों ने स्थिति का जायजा लेने पहुंचे सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) को बंदी बना लिया. लोगों ने वन और पुलिस अधिकारियों के वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया.

बाघ ने मीडियाकर्मी रघुनाथ साहू और एक और आदमी भगवान साहू पर भी हमला किया. अनुगुल एसपी मित्रभानु ने लोगों को शांत करने की कोशिश की. लेकिन तनेसी गांव के लोग सुंदरी को देखते ही गोली मार देने की ज़िद पर अड़े रहे.
ग्राम प्रधान रमाकांत प्रधान ने मृत परिवार को मुआवज़े के रूप में 75 लाख रुपए दिए जाने की मांग की और साथ ही ओडिशा के वन मंत्री बीजेश्वरी रूत्रे के इस्तीफे की भी मांग की.

स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि गांव वाले मृतक के शरीर के साथ ही सड़क पर धरने पर बैठ गए जिनको तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठी-चार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. भीड़ ने भी पुलिस पर पत्थरबाजी की और एसपी सहित तीन पुलिस वाहनों को आग लगा दी. इस संघर्ष में कई गांववाले और पुलिसकर्मी घायल हो गए.

सिटी एक्शन फोरम (सीएएफ) ने ओडिशा के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को एक पत्र भी लिखा. इसमें सुंदरी से सतकोसिया के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए उसे एक आदमखोर बाघिन घोषित करने की मांग की गई. कहा गया कि सुप्रीमकोर्ट के एक कानून के अनुसार उसे जीवित या मृत पकड़े जाने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं.

सीएएफ ने कहा कि एक औरत की मौत के बावज़ूद इतने दिनों तक भी वन्य-जीव विभाग ने अपने वादे को पूरा नहीं किया और इस अनहोनी का इंतज़ार करती रही. अधिकारियों ने इस घटना को कवर करने की कोशिश की है और इन्होंने ही सुंदरी को दूसरे का जीवन लेने की इजाज़त दी है. इन लोगों ने मांग की कि इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की जाए.

[…समाप्त]


अब सवाल ये है कि गलती किसकी और कहां हुई भूल. हमने आपको पूरी तरह तटस्थ होकर पूरी कहानी का हर पहलू बता दिया है. आप खुद निर्णय लें. हां मगर ये ज़रूर है कि जिस तरह से संसाधनों की कमी होती जा रही है और जिस तरह से जंगल खत्म होते जा रहे हैं ये सारी घटनाएं अपरिहार्य सी लगती हैं. जंगल से लेकर हवा पानी तक में अतिक्रमण हमें कहां लेकर जाएगा, ये कोई नहीं जानता…
…या शायद हर कोई जानता है!


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