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कौन था इंद्रपाल, जो पुलिस एनकाउंटर में मारा गया

यूपी में 2017 में जब चुनाव होने वाले थे, तो उस वक्त बीजेपी का एक चुनावी नारा था. न गुंडाराज न भ्रष्टाचार, अबकी बार बीजेपी सरकार. बीजेपी सरकार बनी और सरकार बदलते ही सरकारी तंत्र और उसका तेवर भी बदल गया. पुलिस विभाग के भी तेवर बदले और शुरू हुआ एनकाउंटर का दौर, जिसमें बड़े-बड़े अपराधी मार दिए गए. दिसंबर 2017 में जब यूपी के डीजीपी सुलखान सिंह रिटायर होने वाले थे, तो उससे पहले डीजीपी ऑफिस से एक आंकड़ा जारी किया गया. ये आंकड़ा यूपी में एनकाउंटर का था. इसमें बताया गया था कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से यूपी में कुल 895 पुलिस एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें 26 अपराधियों को मार दिया गया है. वहीं एनकाउंटर में 196 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है. इन 26 अपराधियों में से अकेले मेरठ जोन में ही 17 अपराधी मारे गए थे. आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2017 में नई सरकार के गठन के बाद से दिसंबर 2017 तक कुल 2,186 अपराधी गिरफ्तार किए गए जिनमें 1,680 के सिर पर इनाम था. सरकार की ओर से 123 गैंगस्टरों की 123 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी.

बीजेपी सरकार के आने के बाद ही अपराधियों पर सख्ती शुरू हो गई है.

इन ताबड़तोड़ एनकाउंटरों के पीछे है सरकार की मंशा और यूपीएसटीएफ का बढ़ा हुआ मनोबल. एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश बताते हैं-

‘कुछ साल पहले तक पुलिस बड़े अपराधियों से घबराती थी और भागती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. कितना भी बड़ा अपराधी क्यों न हो, अब एसटीएफ मजबूत कार्रवाई के लिए तैयार है. इसके पीछे ऊपर के अधिकारियों का भी हाथ है. मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी, आईजी एलओ, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह तक ने अपराधियों के खिलाफ सख्ती के लिए आदेश दिए हैं.’

मुख्यमंत्री बनने के बाद खुद योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अपराधी जेल चले जाएं या फिर प्रदेश छोड़कर चले जाएं. अगर वो ऐसा नहीं करते तो मार दिए जाएंगे. यही हो रहा है. आईजी एसटीएफ बताते हैं कि अपराधियों को सरेंडर करने के लिए कहा गया है. बड़े अपराधियों की संपत्ति तक कुर्क की जा चुकी है. लेकिन जब पुलिस या एसटीएफ उन्हें मुठभेड़ में गिरफ्तार करने की कोशिश करती है, तो वो गोली चला देते हैं. ऐसे में एसटीएफ कार्रवाई होती है. कई बार अपराधी घायल हो जाते हैं और कई बार मार दिए जाते हैं.

अपराधियों के पास विदेशी हथियार और कार्बाइन जैसे हथियार होने के सवाल पर अमिताभ यश कहते हैं-

अमिताभ यश फिलहाल एसटीएफ के आईजी हैं.

‘फिलहाल एसटीएफ के पास अपराधियों कई गुना अच्छे हथियार हैं. यूपी में 100 से ज्यादा ऐसे अधिकारी हैं, जिनके पास ऐसे अपराधियों को ठिकाने लगाने का माद्दा है. वो ऐसा कर भी रहे हैं, क्योंकि अब उनके ऊपर किसी तरह का दवाब नहीं हैं. अब हर अपराधी को पुलिस की निगाह में आना ही होगा. जो भी बचे हुए अपराधी हैं, वो सलाखों के पीछे होंगे. अगर वो ऐसा नहीं करते और एसटीएफ के साथ उनकी मुठभेड़ होती है, तो एसटीएफ मजबूत कार्रवाई करेगी.’

वीडियो में देखिए जब अमिताभ यश और के. विजय कुमार आए थे लल्लनटॉप शो:

 

साल 2018 की अभी शुरुआत है और एसटीएफ के साथ ही यूपी पुलिस ने लखीमपुर खीरी के बग्गा, हापुड़ के मोहन पासी और गाजियाबाद के इंद्रपाल को मारने में सफलता हासिल की है. बग्गा पर एक लाख रुपये, मोहन पासी पर 50 हजार रुपये और इंद्रपाल पर 25 हजार रुपये का इनाम था. इंद्रपाल उस शख्स का था, जो पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए खौफ बना हुआ था. था इसलिए क्योंकि अब उसका खौफ खत्म हो गया है. उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ के साथ 2 जनवरी को हुई मुठभेड़ के दौरान उसे गोली लगी और उसकी मौत हो गई. इस मौत के साथ ही मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, बुलंदशहर, बागपत, सहारनपुर के साथ ही उत्तराखंड के हरिद्वार और नई दिल्ली में भी आतंक का एक नाम कम हो गया. खुद यूपी पुलिस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. 

इस इंद्रपाल की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं है. इंद्रपाल गाजियाबाद के मंसूरी इलाके के नूरपुर का रहने वाला था. अपराध की दुनिया में इसका नाम 1996 में आया था. उस वक्त उसकी उम्र महज 13 साल थी. मारपीट में उसका नाम आया था. नाबालिग था, तो पुलिस ने भी उसपर कोई खास सख्ती नहीं की. इससे इंद्रपाल का मन बढ़ गया. उसका अपने पड़ोसी सोहन वीर से प्रापर्टी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. विवाद जब खत्म नहीं हुआ तो इंद्रपाल ने विवाद की जड़ को ही खत्म करने का फैसला लिया. उसने 2004 में अपने पड़ोसी सोहन की उत्तराखंड के मसूरी में गोली मारकर हत्या कर दी. इस विवाद को इंद्रपाल का आपसी विवाद करार दिया जा रहा था, लेकिन इसके अगले ही साल इंद्रपाल ने जो किया, उसने उसकी दहशत को पश्चिमी यूपी में कायम कर दिया.

 

एनकाउंटर के दौरान कई बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है.

उसका गांव के ही लोगों के साथ आम के बागीचे को लेकर विवाद हो गया. इस विवाद से इंद्रपाल इतना चिढ़ गया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अपने ही गांव नूरपुर में चार महिलाओं की दिनदहाड़े हत्या कर दी. इन हत्याओं के साथ ही पूरे गाजियाबाद के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसके नाम का आतंक हो गया. इन चार हत्याओं के आरोप में पुलिस ने पहली बार इंद्रपाल को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट में इंद्रपाल के खिलाफ मुकदमा चला, जहां से कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई. इंद्रपाल को हाई कोर्ट से भी राहत नहीं मिली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया. इसके बाद इंद्रपाल ने पेरोल के लिए कोर्ट में अपील की. कोर्ट ने उसकी पेरोल मंजूर कर ली. वो बाहर तो आया, लेकिन वापस जेल नहीं गया. वो फरार हो गया और फिर से अपराध की दुनिया में कदम रख दिया.

यूपी पुलिस और एसटीएफ का मनोबल इस वक्त ऊंचा है और वो अपराधियों पर शिकंजा कसने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है.

जेल से बाहर आने के बाद उसने 2008 में बागपत में फिर से एक हत्या की. ये हत्या उपेंद्र नाम के शख्स की थी. इस हत्या ने बागपत में भी उसके खौफ को साबित कर दिया. इसके बाद तो वो लूट, हत्या, डकैती और फिरौती के जरिए पश्चिमी यूपी में पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया. 2013 में इंद्रपाल ने उत्तराखंड के हरिद्वार में डकैती डाली. भागने के दौरान दो पुलिसवालों से उसकी मुठभेड़ हो गई. इस मुठभेड़ के दौरान इंद्रपाल ने एक पुलिसवाले की गोली मारकर हत्या कर दी और उसकी रिवाल्वर लेकर फरार हो गया. 2015 में गाजियाबाद की जारचा पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था. इस दौरान पुलिस को ये नहीं पता था कि ये तीनों कौन हैं. गिरफ्तारी के बाद तीनों ने फर्जी नाम और पते बताए, जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया. इन तीनों के असली नाम फिरोज पव्वा, टिल्लू और इंद्रपाल जाट थे. तीनों को जमानत मिल गई और बाहर आ गए. बाद में पुलिस को पता चला कि जिसे उसने गिरफ्तार किया था, वो मोस्ट वांटेड इंद्रपाल था, तो उसने नोएडा पुलिस से संपर्क किया. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, क्योंकि इंद्रपाल जमानत पर बाहर आ गया था और उसके बाद से फरार हो गया था. फिरोज पव्वा को तो बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन इंद्रपाल उसके बाद कभी पुलिस के हाथ नहीं लगा. पुलिस के मुताबिक इंद्रपाल पर गाजियााबाद में 15, मेरठ में तीन, गौतमबुद्ध नगर, बागपत और सहारनपुर में दो-दो, बुलंदशहर में चार, हरिद्वार में तीन और दिल्ली की स्पेशल सेल में एक केस दर्ज किया गया था. इस तरह से इंद्रपाल के खिलाफ कुल 29 मुकदमे दर्ज थे. यूपी पुलिस की ओर से इंद्रपाल पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था.

पुलिस एनकाउंर में अब तक कई इनामी अपराधी मारे जा चुके हैं.

आखिरकार 2 जनवरी को एसटीएफ को इंद्रपाल के बारे में सूचना मिली थी कि वो मुजफ्फरनगर के मीरापुर में कोई वारदात करने जा रहा है. इसके बाद एसटीएफ एसपी राजीव नारायण सिंह, सीओ जानसठ एसकेएस प्रताप, मीरापुर इंस्पेक्टर अरविंद सिंह, जानसठ इंस्पेक्टर अनिल सिंह और लोकल पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची, जहां मुठभेड़ शुरू हो गई. इस दौरान इंद्रपाल की ओर से चली गोली एसटीएफ के दरोगा योगेंज्र सिंह को लगी. उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे वो बच गए. वहीं पुलिस की दो गोली इंद्रपाल को लगी. सिर में गोली लगने की वजह से इंद्रपाल की मौत हो गई. पुलिस को उसके पास से विदेशी हथियार भी बरामद हुए हैं.

मोहन पासी पर 50 हजार का इनाम था, जिसे पुलिस ने मार गिराया है.

इसी तरह 29 जनवरी को यूपी पुलिस और एसटीएफ ने 50 हजार के इनामी बदमाश मोहन पासी को हापुड़ में मुठभेड़ में मार गिराया था. मोहन पासी 18 दिसंबर को पेशी से लौटते समय फरार हो गया था. मोहन पासी आजमगढ़ के जहानागंज इलाके के समसुद्दीनपुर गांव रहने वाला था, जो शिवबचन यादव गैंग का मेंबर था. वो 25 अप्रैल 2008 को जहानागंज इलाके के डीहा गांव में ही हुई चार हत्याओं का मुख्य आरोपी था, जिसे पुलिस ने 24 दिसंबर 2008 को दिल्ली से गिरफ्तार किया था. 2015 में इस मामले में मोहन पासी को उम्रकैद की सजा हुई थी. बाद में उसे 19 फरवरी 2017 को गोरखपुर जेल भेज दिया गया था. गोरखपुर से मोहन 15 अक्तूबर 2017 को कोर्ट के आदेश पर आजमगढ़ जिला जेल आ गया था. निजामाबाद इलाके में हुई लूट के मामले में जब 18 दिसंबर को उसे कोर्ट ले जाया जा रहा था, तो वापसी में वो पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया. आखिरकार 29 जनवरी को पुलिस और एसटीएफ ने हापुड़ में उसे मार गिराया.

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यूपी पुलिस के लिए बग्गा सिरदर्द बना हुआ था. उसपर एक लाख रुपये का इनाम था, जिसे पुलिस ने मार गिराया है.

इससे पहले 17 जनवरी को भी यूपी पुलिस और एसटीएफ ने एक लाख रुपये के इनामी बदमाश बग्गा को लखीमपुर खीरी के निघासन में मार गिराया था. बग्गा सिंह पूरी यूपी पुलिस के लिए सिरदर्द था, जो 10 सितम्बर 2013 को पुलिस हिरासस से दो सिपाहियों की हत्या कर भाग गया था. नेपाल से ही वो अपना गैंग चलाता था. उसके एक फोन पर लखीमपुर-खीरी के बड़े-बड़े लोग पैसा पहुंचाते थे. योगी सरकार में जब एनकाउंटर शुरू हुए तो बग्गा भी उस लिस्ट में शामिल था.


वीडियो में देखिए उस पुलिसवाले की कहानी, जो गाना गाकर एनकाउंटर करता है

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