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बस एक मैच जीतकर एयरपॉड्स खरीदने का प्लान करने वाली लड़की जो यूएस ओपन जीत गई

साल 2018. चंडीगढ़. साल 2019 पुणे. साल 2021 न्यू यॉर्क. तीन शहर, तीन टूर्नामेंट और एक विजेता. एमा रादुकानु. टेनिस लवर्स कई दिन से ये नाम जप रहे हैं. रादुकानु सिर्फ 18 साल की उम्र में टेनिस लेजेंड बन चुकी हैं. और कम ही लोग जानते हैं कि उनके इस सफर का सबसे अहम पड़ाव महाराष्ट्र का पुणे शहर है. साल 2021 का यूएस ओपन जीतने से पहले रादुकानु के करियर की सबसे बड़ी ट्रॉफी पुणे में ही उठी थी.

जूनियर लेवल पर कई दुनियाभर में कई ट्रॉफीज जीतने के बाद रादुकानु पहली बार चर्चा में आईं 2021 विम्बलडन में. लेकिन उससे पहले ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें भविष्य में क्या करना है. दो साल पहले यानी साल 2019 तक रादुकानु के गोल्स क्लियर थे. उन्होंने तय कर लिया था कि पहले कॉलेज और फिर फाइनांस सेक्टर में नौकरी. ठीक अपने माता-पिता की तरह.

# Finance वाली Emma Raducanu

अरे हां, माता-पिता का ज़िक्र आया तो बताते चलें कि एमा के पापा रोमानिया तो मम्मी चीन से हैं. और खुद एम कनाडा में पैदा हुईं. जब वह सिर्फ दो साल की थीं, तभी उनका परिवार ब्रिटेन शिफ्ट हो गया. वहां एमा गो-कार्टिंग, मोटोक्रॉस, बैले, हॉर्स राइडिंग, टैप डांसिंग जैसी एक्टिविटीज करती थीं. और साथ में हर साल नानी गांव जाने पर होने वाली टेबल-टेनिस की धमाचौकड़ी तो थी ही.

लेकिन इन सबके बीच भी एमा का ध्यान बचपन से ही पढ़ाई की ओर था. लोवर डिविजन के टूर्नामेंट्स खेलते हुए उन्होंने कॉलेज के लिए इंट्रेंस एग्जाम भी दे दिए थे. लेकिन फिर ऐसे ही टूर्नामेंट्स के जरिए उन्हें विम्बलडन का वाइल्ड कार्ड मिल गया और फिर सबकुछ हमेशा के लिए बदल गया. इस बारे में उन्होंने बीते विम्बलडन के दौरान एएफपी से कहा था,

‘सबको लगता है कि मैं अपने स्कूल रिजल्ट्स के बारे में एकदम कट्टर हूं. उन्हें लगता है कि मुझमें इसका घमंड है. लेकिन असल में मैं ये कहूंगी कि मैंने खुद के लिए ऊंचे स्टैंडर्ड सेट किए हैं. और इनकी मदद से ही मैं आज स्कूल और टेनिस रिजल्ट्स में यहां तक हूं.’

अब विम्बलडन का ज़िक्र आया है तो बता दें कि दुनिया में 338वें नंबर की प्लेयर के तौर पर इस साल विम्बलडन में उतरीं रादुकानु ने वहां भी कमाल किया था. चौथे राउंड में सांस लेने में हुई दिक्कत के चलते मैच से हटने से पहले रादुकानु ने कई दिग्गजों को मात दी थी. हालांकि इस प्रदर्शन के बाद भी वह अपने दूसरे ग्रैंडस्लैम में उतरते वक्त हवा में नहीं उड़ीं.

रादुकानु ने यूएस ओपन से वापसी का हवाई टिकट क्वॉलिफिकेशन राउंड्स खत्म होने के तुरंत बाद का कराया था. हालांकि धूम-2 वाले ऋतिक रौशन की तरह वह भी इस कंफर्म टिकट पर वापस नहीं जा पाईं. उन्हें दो हफ्ते ज्यादा रुकना पड़ा. और इसके साथ ही वह ग्रैंड स्लैम टाइटल जीतने वाली पहली क्वॉलिफायर भी बन गईं. क्वॉलिफिकेशन के जरिए यूएस ओपन में एंट्री लेने वाली रादुकानु ने चैंपियन बनने तक एक भी सेट नहीं गंवाया. यानी पूरा टूर्नामेंट सीधे सेटों में अपने नाम किया.

# Raducanu Ranking 150 से 23

अब रादुकानु यूएस ओपन जीतने वाली सबसे कम रैंक की प्लेयर भी हैं. इस टूर्नामेंट में आते वक्त उनकी वर्ल्ड रैंकिंग 150 थी. जो अब अपडेट होकर 23 हो गई है. अब इससे पहले आप 2009 वाली किम क्लिस्टर्स का ज़िक्र करें, हम बता देते हैं कि वह अनरैंक्ड प्लेयर के तौर पर यूएस ओपन की विजेता बनी थीं. यानी जब उन्होंने टूर्नामेंट जीता तो वह रैंकिंग में थी ही नहीं.

और हां, ज्यादा दुखी मत होइए. रादुकानु के टिकट के पैसे भले वेस्ट हो गए लेकिन उन्हें इसका फल भी तो मिला. यूएस ओपन जीतकर उन्हें 25 लाख अमेरिकी डॉलर बोले तो लगभग साढ़े 18 करोड़ रुपये मिले. और ब्रैंडिंग एक्सपर्ट्स की मानें तो वह अगले महीने तक 25 मिलियन ब्रिटिश पौंड यानी ढाई अरब से ज्यादा रुपये सिर्फ विज्ञापनों से कमा सकती हैं.

अरे हां, ये भी तो जान लीजिए कि इससे पहले उनकी कुल कमाई तीन लाख अमेरिकी डॉलर, लगभग सवा दो करोड़ रुपये ही थी. मजेदार बात ये है कि पिछले 44 साल में ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली ब्रिटिश महिला रादुकानु ने इस टूर्नामेंट से बस उतने पैसे कमाने का लक्ष्य बनाया था जितने में उनके नए एयरपॉड्स आ जाएं. यूएस ओपन चैंपियन बनने के बाद उन्होंने इस बारे में कहा,

‘मेरी टीम खूब मजे ले रही है. क्योंकि मेरे पहले राउंड के क्वॉलिफाइंग मैच से ठीक तीन मिनट पहले मेरे एयरपॉड्स गुम हो गए थे. और मैं उनके चक्कर में पूरे चेंजिंग रूम में पगलाई घूम रही थी. और इस दौरान मैं सिर्फ एक बात सोच रही थी- अगर मैं ये मैच जीत गई तो खुद के लिए एयरपॉड्स ले पाऊंगी. उस वक्त मेरा लक्ष्य सिर्फ इतनी ही कमाई करने का था. और अब ये बात एक चलता-फिरता मजाक बन चुकी है.’

अब यूएस ओपन जीतने के बाद रादुकानु जितने चाहें उतने एयरपॉड्स खरीद सकती हैं. दिसंबर 2019 में सोलापुर और पुणे में खेलने आईं रादुकानु अब ग्लोबल सुपरस्टार हैं. पुणे के सिर्फ 25,000 डॉलर ईनामी राशि वाले टूर्नामेंट के लिए भी क्वॉलिफायर्स से गुजरने वाली रादुकानु सिर्फ 22 महीने में ब्रिटेन और दुनिया में अपना नाम बना चुकी हैं. और उनकी इस उपलब्धि की सबसे कमाल बात ये है कि ये उन दिनों में आई, जब ब्रिटेन रिफ्यूजियों को लेकर आने वाली नावों को फ्रांस की ओर भगा देने की धमकी दे रहा है.


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