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गांजा तो इंसान को 'अंतरिक्ष' भेजता है, तो फिर साइंटिस्ट उसे क्यों स्पेस भेज रहे हैं?

एलन मस्क. टेक्नॉलोजी आंत्रप्रेन्योर हैं. इनकी कंपनी को नासा से कॉन्ट्रैक्ट मिलता है. साल भर पहले लाइव शो में गांजे के कश लगाते दिखे थे. काफी फजीहत हुई थी. नासा ने इसे अनुचित व्यवहार बताया, चेतावनी दी कि नासा के के कॉन्ट्रैक्टर पब्लिक में ऐसे क्वेश्चनेबल व्यवहार करते नहीं दिखने चाहिए. अब एक साल बाद. उन्हीं एलन मस्क की कंपनी स्पेस-एक्स अंतरिक्ष में गांजा भेजने की तैयारी में है. मार्च, 2020 में कंपनी का ड्रैगन नाम का स्पेस कैप्सूल ये डिलिवरी करेगा.

ये खबर आई और लोग सवाल पूछने लगे, कि ‘भई गांजा तो हमें स्पेस में भेजता है, फिर उसे स्पेस में क्यों भेजा जा रहा है? वो भी इतने पैसे खर्च करके.’

एलन मस्क के उस विडियो का स्क्रीनशॉट जिसमें वह गांजा पीते नज़र आए थे.
एलन मस्क के उस विडियो का स्क्रीनशॉट जिसमें वह गांजा पीते नज़र आए थे.

#बड़ा एक्सपेरिमेंट हो रहा है

दरअसल अंतरिक्ष में गांजा ही नहीं 480 प्रकार के पौधों के सेल्स भेजे जा रहे हैं. एक एक्सपेरिमेंट के लिए. जिसे कर रही है फ्रंट रेंज बायोसाइंसेज. ये कंपनी कोलोराडो यूनिवर्सिटी के साथ एक रिसर्च प्रोजेक्ट कर रही है. जो प्लांट सेल्स भेजे जा रहे हैं उनमें गांजे की हेम्प प्रजाति और कॉफी की कई प्रजातियां शामिल हैं. इस एक्सपेरिमेंट में देखा जाएगा कि इन प्लांट सेल्स पर जीरो ग्रैविटी और कॉस्मिक रेज़ का क्या असर होता है. धरती पर न ज़ीरो ग्रैविटी है और न ही कॉस्मिक रेज़. तो ये एक्सपेरिमेंट स्पेस में ही हो सकता है.

#एक्सपेरिमेंट से क्या पता चलेगा?

साइंटिस्ट लोग कह रहे हैं कि स्पेस में जाने के बाद इन प्लांट सेल्स का म्युटेशन हो जाएगा. यानी उनके डीएनए में बदलाव आ जाएगा. लेकिन धरती पर वापस आने के बाद भी क्या ये बदलाव लंबे समय तक देखे जा सकेंगे? वहीं, इन बदलावों के बाद जो नया प्लांट सेल बनेगा, क्या उससे कमर्शियल फायदा मिल सकता है? इस प्रयोग के बाद फ्रंट रेंज बायोसाइंसेज के पास इन सारे सवालों के जवाब होंगे.

गांजे की जो प्रजाति स्पेस भेजी जा रही है उसे हेम्प कहते हैं.
गांजे की जो प्रजाति स्पेस भेजी जा रही है उसे हेम्प कहते हैं.

#कैसे होगा ये एक्सपेरिमेंट?

अंतरिक्ष में एक स्पेस स्टेशन है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS). वहां एक इनक्यूबेटर में प्लांट सेल्स को 30 दिन तक रखा जाएगा. इनक्यूबेटर एक चारों तरफ से बंद मशीन होती है. इसमें वैज्ञानिक जितनी चाहें उतनी हीट दे सकतें हैं. एक्सपेरिमेंट के दौरान यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक उस इनक्यूबेटर में हो रहे बदलावों पर नजर रखेंगे. इसके बाद उन प्लांट सेल्स को वापस धरती पर भेजा जाएगा. वापस आने के बाद प्लांट सेल्स की जांच की जाएगी, उनके डीएनए में आए बदलावों को चेक किया जाएगा.

#क्या साइंटिस्ट इस गांजे से चोरी-चोरी चुपके-चुपके हाई हो सकते हैं?

हाई होने के लिए एक केमिकल ज़िम्मेदार होता है. उसका नाम है टेट्रा हाइड्रो कैन्नाबिनोल (THC). गांजे का कश लेने के बाद यही केमिकल दिमाग में हिट करता है और आप कहते हैं कि ‘चढ़ गई है’ या ‘हाई हो रहे हैं’. गांजे की जो प्रजाति अंतरिक्ष भेजी जा रही है, उसे हेम्प कहते हैं. हेम्प में THC की मात्रा बेहद कम होती है. इतनी कम कि हाई होने के चांसेज़ न के बराबर हैं.


ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे रूपक ने की है.


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