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क्रिप्टोकरेंसी को लेकर दुनिया भर में क्या क़ानून है?

क्रिप्टोकरेंसी: पार्ट- 7

हमारे ‘देश’ में कहा जाता है ‘वसुधैव कुटुंबकम’. देखिए न एक ही वाक्य में ‘देश’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’. यानी पैराडॉक्स शुरू में ही आ गया. साफ़ है कि पावर, पॉलिटिक्स, अर्थव्यवस्था, प्रतिस्पर्धा और सांस्कृतिक मूल्यों का टकराव: ये सब दुनिया भर के देशों और सभ्यताओं के बीच सदियों से अलगाव की जड़ बने हुए हैं. लेकिन फिर ओलंपिक्स जैसी कुछ नेमतें ऐसी भी हैं जो इस दुनिया को एक परिवार जैसा महसूस करने के मौके देती रहती हैं. तमाम दुनियादारी के बीच ऐसी ही एक और शय है जिसमें ‘वसुधैव कुटुंबकम’ वाला कीवर्ड भी चस्पा किया जा सकता है. क्या है वो शय?

ये हमारी खास सीरीज ‘एक नया पैसा.’ का सातवां पार्ट है, इसमें जानेंगे क्रिप्टो से जुड़ी जियो पॉलिटिक्स. मतलब दुनिया भर के देश इस एक नए पैसे को कैसे देखते हैं. आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि ये एपिसोड करेंट अफ़ेयर्स से जुड़ा है, और हालांकि हमने सबसे लेटेस्ट जानकारी डालने का पूरा प्रयास किया है, लेकिन 190+ देश और उससे ज़्यादा संस्थाएँ हैं तो भविष्य में इन जानकारियों में परिवर्तन होने के पूरे चांस हैं.

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग तरह के क़ानून हैं (प्रतीकात्मक फोटो - gettyimages)
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग तरह के क़ानून हैं (प्रतीकात्मक फोटो – gettyimages)

# एक नया पैसा, एक नया क़ानून-

सबसे पहले बात करेंगे सेंट्रल अपमेरिका के एक छोटे से देश अल सल्वाडोर की. अल सल्वाडोर दुनिया का पहला और एकमात्र देश बन गया है जहां पर वैध तरीक़े से बिटकॉइन से लेनदेन और ख़रीदारी की जा सकती है. यानी बिटकॉइन यहां पर लीगल टेंडर है. 05 जून, 2021 कोबुकेले सरकार का यह महत्वाकांक्षी बिल कांग्रेस में पेश किए जाने के 24 घंटे के भीतर ही अप्रूव हो गया था.देश के राष्ट्रपति नईब बुकेले ने 06 सितंबर, 2021 को ट्वीट करके हुए कहा था, “कल इतिहास में पहली बार सारी दुनिया की नजरें अल सल्वाडोर पर होंगी.” और फिर अगले दिन यानी 07 सितंबर से ये लॉन्च हो गया. सरकार द्वारा प्रमोट किया जा रहा ‘चिवो’ नाम का एक एप, इस डिजिटल करेंसी का वॉलेट है. यानी अल सल्वाडोर वासी अपनी बिटकॉइन इसमें रख सकेंगे.

हालांकि अल सल्वाडोर में अमेरिकी डॉलर पहले की तरह ही वैध मुद्रा बनी रहेगी और बिटकॉइन का उपयोग सिर्फ एक विकल्प की तरह किया जाएगा.

अल-सल्वाडोर के प्रेजिडेंट नाइब बुकेले (प्रतीकात्मक तस्वीर - बिज़नेस टुडे)
अल-सल्वाडोर के प्रेजिडेंट नाइब बुकेले (प्रतीकात्मक तस्वीर – बिज़नेस टुडे)

# लीगल टेंडर मतलब-

कई देशों, जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया में, क्रिप्टोकरेंसी लीगल तो है पर लीगल टेंडर नहीं है. अब आप पूछेंगे कि दोनों में अंतर क्या है. तो, क्रिप्टोकरेंसी के ‘लीगल टेंडर’ होने का मतलब है कि आप इसे उस हर तरह से यूज़ कर सकते हैं जिस तरह से आप अपने स्पेसिफ़िक देश में पारंपरिक मुद्राएं जैसे डॉलर, रुपया, यूरो वग़ैरह का यूज़ करते आए हैं. माने लीगल टेंडर घोषित होने के बाद किसी भी लेनदेन या खरीद-फरोख्त में कोई भी उस मुद्रा को लेने से मना नहीं कर सकता जिसे लीगल टेंडर घोषित कर दिया गया हो. अपने यहाँ 10 रुपये के सिक्के वाला विवाद तो आपने सुना ही होगा. जब लोग इसे लेने से मना कर रहे थे. लेकिन फिर पता चला कि ऐसा करना ग़ैरक़ानूनी है. ये किस्सा नहीं याद तो मोदी जी की नोटबंदी वाली घोषणा तो याद ही होगी कि “आज रात से पांच सौ और हज़ार रुपये के नोट ‘लीगल टेंडर’ नहीं रहेंगे.”

8 नवंबर 2016 की रात PM मोदी ने अचानक से राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी (फोटो सोर्स - आज तक)
8 नवंबर 2016 की रात PM मोदी ने अचानक से राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी (फोटो सोर्स – आज तक)

ये तो हुआ लीगल टेंडर. जबकि सिर्फ़ ‘लीगल’ मतलब आप उस करेंसी या वस्तु को लेन-देन के लिए यूज़ नहीं कर सकते, लेकिन इसमें इन्वेस्ट कर सकते हो. हालांकि अल साल्वाडोर, जिसकी बात हमने सबसे पहले की, ने कहा है कुछ समय बाद यह लोगों पर निर्भर होगा कि वह बिटकॉइन एक्सेप्ट करना चाहते हैं या नहीं.

अच्छा एक और इंट्रेस्टिंग बात, अपने देश में बिटकॉइन को लीगर टेंडर घोषित करने के बाद अल सल्वाडोर नें वर्ल्ड बैंक को भी बिटकॉइन को एक वैश्विक मुद्रा के रूप में अपनाने की गुजारिश की थी. हालांकि वर्ल्ड बैंक ने इस रिक्वेस्ट को रिजेक्ट कर दिया था.

# एराउंड दी वर्ल्ड- 

चलिए अब चलते हैं कुछ और देशों के नियम क़ानूनों की तरफ़.

# तुर्की की बात करें तो यहाँ पिछले कुछ महीनों से क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज़ेस पर नियम कड़े किये जा रहे थे. और हाल ही में यहाँ की सेंट्रल बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी पेमेंट्स पर बैन लगा दिया है.

# नाइजीरिया में क्रिप्टो पर प्रतिबंध है लेकिन अमेरिका के बाद ये दूसरा ऐसा देश है, जहां सबसे ज़्यादा क्रिप्टोकरेंसी की ख़रीद-फ़रोख़्त होती है.

# 2018 में अल्जीरिया ने क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया था. यहाँ बाकायदा एक क़ानून बनाया गया था, जिसके हिसाब से यहाँ किसी भी वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल दंडनीय अपराध है.

# मोरक्को में भी 2017 से क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करने पर हर्जाना लगाए जाने का प्रावधान है. यहाँ की ‘बैंक अल-मगरिब’ के मुताबिक़ यहाँ सिर्फ उन करेंसीज़ में लेनदेन किया जा सकता है जो इस बैंक ने लिस्टेड यानी सूचीबद्ध की हैं.

# नार्थ मैसेडोनिया अकेला यूरोपीय देश है जहां बिटकॉइन, इथेरियम या अन्य किसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल पूरी तरह बैन है. यहाँ न क्रिप्टो लेनदेन कर सकते हैं न ही इनमें इन्वेस्ट. इसे क्रिमिनल एक्टिविटी करार दिया गया है.

# 2017 में एक नोटिस के तहत नेपाल ने भी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया था. इस नोटिस के तुरंत बाद क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कर रहे सात लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.

# मिस्र में क्रिप्टोकरेंसी सीधे तौर पर प्रतिबंधित नहीं है लेकिन यहां 2017 में शरिया कानून के तहत क्रिप्टोकरेंसी से किए गए लेनदेन को हराम (निषिद्ध) घोषित किया गया था.

# 2017 से बांग्लादेश ने भी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. बांग्लादेश की सरकार ने अपने नागरिकों से ‘वित्तीय और कानूनी क्षति से बचने के लिए बिटकॉइन जैसी आभासी मुद्राओं में ‘लेनदेन से परहेज करने’ के लिए कहा है.

# सऊदी अरब की मोनेटरी अथॉरिटी (SAMA) ने भी क्रिप्टोकरेंसी के डीसेंट्रलाइज्ड होने की बात कहते हुए इसके इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई है.

अब बात करते हैं कुछ बड़े देशों और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की. वो देश, जो क्रिप्टो के बड़े बाज़ार में अपना ठीक-ठाक मार्केट शेयर भी रखते हैं.

# अमेरिकन ब्यूटी-

US क्रिप्टो बाजार में आधे से अधिक क्रिप्टो-उपभोक्ता, महिलाएं हैं. जिनकी औसत आयु 44 वर्ष है. 14% अमेरिकी वयस्क यानी लगभग 2.1 करोड़ अमेरिकी क्रिप्टोकरेंसी रखते हैं.

रेग्युलेशन की बात करें तो बिडेन प्रशासन टैक्स चोरी पर नकेल कसना चाहता है और क्रिप्टोकरेंसी को इस मामले में एक बड़ी दिक्कत बता रहा है. बिडेन प्रशासन ने अगस्त 2021 में एक टैक्स कंप्लायंस एजेंडा जारी किया था, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी के बारे में भी कुछ नए प्रस्ताव शामिल थे. अमेरिकी ट्रेजरी के एक प्रपोजल में कहा गया है कि अब $ 10,000 या उससे ज्यादा के किसी भी क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन को रिपोर्ट करना होगा. कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रेजरी की तरफ़ से विनियमन की दिशा में ये कदम अंतिम नहीं है.

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन ने कहा भी-

संयुक्त राज्य में क्रिप्टोकरेंसी विनियमन से निपटने के लिए अभी तक एक ‘पर्याप्त ढांचा’ नहीं है. मुझे लगता है कि हम अभी और ज्यादा एन्फोर्समेंट्स देखेंगे, उम्मीद है कि कुछ और स्पष्टता भी आएगी.

अमेरिका की पहली विदेश मंत्री जेनेट येलेन (फोटो सोर्स -आज तक)
अमेरिका की पहली विदेश मंत्री जेनेट येलेन (फोटो सोर्स -आज तक)

फ़िलहाल अमेरिका में टैक्स चोरी रोकने को लेके क्रिप्टो इन्वेस्टर्स से सारे लेनदेन का डाटा रखने को बोला गया है, 2015 में अमेरिका ने क्रिप्टोकरेंसीज़ को कमोडिटी माना था लेकिन स्पष्ट तौर पर क्रिप्टो लेनदेन और पेमेंट्स को लेके अमेरिका में कोई क़ानून नहीं है.

वैसे यूएस में Paypal उपयोगकर्ता अपने व्यक्तिगत या प्रीमियर Paypal खाते का उपयोग करके सीधे क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से लेन-देन कर सकते हैं. हालांकि अभी ये सर्विस अमेरिका तक ही सीमित रहेगी. उधर  डिजिटल भुगतान की दिग्गज कंपनी वीज़ा इंक ने भी अपने नेटवर्क पर लेनदेन के वास्ते क्रिप्टोकरेंसी और यूएसडी कॉइन के उपयोग की अनुमति दी है. आपको अगर तीसरा एपिसोड याद हो तो हमने आपको स्टेबलकॉइन के बारे में बताया था. यूएसडी कॉइन (यूएसडीसी) भी वही है जिसकी अंडरलाइंग वैल्यू यूएस डॉलर है. इनके अलावा डिश नेटवर्क, माइक्रोसॉफ्ट, सबवे और ओवरस्‍टॉक ने भी बिटकॉइन  को पेमेंट मैथेड में शामिल कर लिया है.

# टेस्ला का फ़ैसला-

इलेक्ट्रिक कारें बनाने वाली कम्पनी ‘टेस्ला’ ने मार्च 2021 में घोषणा की थी कि वो क्रिप्टोकरेंसी को स्वीकार करेगी. मतलब आप बिटकॉइन देकर भी टेस्ला की कार  ख़रीद सकते थे. टेस्ला ने इससे पहले एक बड़ा खुलासा ये भी किया था कि उसने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी ‘बिटकॉइन’ की खरीदारी की है. थोड़ी बहुत नहीं क़रीब-क़रीब डेढ़ अरब डॉलर की. हालांकि बाद में टेस्ला ने अपनी कार बिटकॉइन में बेचने वाला अपना निर्णय खुद वापस ले लिया. इसके पीछे वजह बताई क्लाइमेट चेंज की चिंता. क्लाइमेट चेंज माने वही कॉइन माइनिंग की वजह से पेश आ रही कार्बन फुटप्रिंट की दिक्कत जिसके बारे में हम आपको पिछले एपिसोड में बता चुके हैं. लेकिन टेस्ला सीईओ एलन मस्क ने साथ में ये भी कहा था कि टेस्ला अपना एक भी बिटकॉइन बेचेगी नहीं और जैसे ही कॉइन माइनिंग में सस्टेनेबल एनर्जी का यूज़ होना शुरू हुआ टेस्ला फिर से बिटकॉइन में लेनदेन शुरू कर देगी. जुलाई में टेस्ला के हवाले से एक और ऐसा ही अपडेट आया जिसमें भी यही बात कही गयी.

एलन मस्क के बयानों से क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों पर कई बार फर्क पड़ा है (फोटो साभार - बिज़नेस टुडे)
एलन मस्क के बयानों से क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों पर कई बार फर्क पड़ा है (फोटो साभार – बिज़नेस टुडे)

# मेड इन चाइना-

क्रिप्टोकरेंसी को लेके चीन में मामला थोड़ा दोतरफ़ा सा है. चीन सरकार अपनी नेशनल करेंसी को लेके बहुत सजग रहती है. ऐसे में चीन में सालों से बिटकॉइन के लीगल ट्रांजैक्शन की अनुमति नहीं है, ये अलग बात है कि यहीं के लोग बिटकॉइन प्रोडक्शन में सबसे आगे हैं. ये लोग चीनी सरकार से छिपते-छिपाते बिटकॉइन माइनिंग का काम कर रहे हैं. पहाड़ों पर अड्डे बनाए गए हैं, जहां रात-दिन क्रिप्टो लेनदेन के जटिल सवालों को सुलझाकर बिटकॉइन बनाए जाते हैं. किसी सेण्टर से एक दिन में 50 बिटकॉइन निकलते हैं तो कहीं इससे भी ज्यादा.

पहले भी बीजिंग 2013 और 2017 में क्रिप्टो-संबंधित वित्तीय लेनदेन और पेमेंट सर्विसेज पर बैन लगा चुका है. बहुत से चीनी लोग अलीबाबा की अलीपे या वीचैट वॉलेट नाम की ऑनलाइन करेंसी इस्तेमाल करते हैं. चीनियों के लिए बिटकॉइन और बाकी क्रिप्टोकरेंसी खरीदना और ‘बिनेंस’ जैसे विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों पर इनकी ट्रेडिंग करना अभी भी संभव है. संभव है कि इन खरीदारियों के लिए चीनी मुद्रा ‘युआन’ में भुगतान किया जाता हो.

क्रिप्टोकरेंसी चीन में अवैध है लेकिन बड़े पैमाने पर चीन के लोग इसके बिज़नेस में हैं (प्रतीकात्मक फोटो सोर्स- reuters )
क्रिप्टोकरेंसी चीन में अवैध है लेकिन बड़े पैमाने पर चीन के लोग इसके बिज़नेस में हैं (प्रतीकात्मक फोटो सोर्स- reuters )

# नमस्ते लंडन-

यूके के क्रिप्टोकरेंसी नियम यूज़र्स को क्रिप्टोकरेंसी खरीदने और बेचने की अनुमति तो देते हैं. लेकिन यहां के वित्तीय नियामक FCA ने क्रिप्टो के व्यापार पर एक तरह से बैन लगा दिया है. 2021 की शुरुआत में FCA को ज़िम्मेदारी मिली थी कि वो क्रिप्टो-फर्मों की मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर-फंडिंग में संलिप्तता की जांच करे, जिसके बाद से FCA  क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर बारीक नज़र बनाए है.

यूके की फिनांशियल कंडक्ट अथॉरिटी (FCA), बैंक ऑफ़ इंग्लैंड और ट्रेज़री ने संयुक्त रूप से ‘क्रिप्टो-एसेट्स टास्क फ़ोर्स’ का गठन किया है. जिसका काम ये निर्धारित करना है कि क्रिप्टो एसेट्स को कब और कैसे रेगुलेट करना है. ये टास्क फ़ोर्स कहती है कि चूंकि क्रिप्टो से जुड़े बिज़नेस मॉडल्स और क्रिप्टो एसेट्स की तादात इतनी ज्यादा है कि हमें क्रिप्टो एसेट्स और ब्लॉकचेन बेस्ड इन बिज़नेसेज से एप्रोच करना ज़रूरी है. ये एप्रोच इस फाइनेंशियल मार्केट में हाई रेगुलेटरी मानकों को सुनिश्चित करती है. कंज्यूमर्स को प्रोटेक्ट करती है और आर्थिक स्थायित्व को भविष्य के खतरों से बचाती है.

एफसीए ने क्रिप्टो फर्मों को इंग्लैंड में काम करने से पहले रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा है. पिछले छह महीनों में, ब्रिटिश नियामक ने केवल छह फर्मों को रजिस्टर किया है, कुछ हफ्ते पहले एफसीए ने बिनेंस को भी नोटिस दिया कि उसके पास यूके में रेगुलेटेड एक्टिविटीज करने का अधिकार नहीं है.

ब्रिटेन के वित्त मंत्रीभारतीय मूल के ऋषि सुनक हैं (फोटो सोर्स - बिज़नेस टुडे)
ब्रिटेन के वित्त मंत्रीभारतीय मूल के ऋषि सुनक हैं (फोटो सोर्स – बिज़नेस टुडे)

# यूरोप-

यूरोपियन यूनियन में आने वाले देशों में क्रिप्टो को लेके नियमों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन इन देशों को यूरोपियन बैंकिंग अथॉरिटी (EBA), यूरोपियन कमीशन(EC), यूरोपियन सेंट्रल बैंक(ECB), यूरोपियन इन्श्योरेन्स एंड पेंशन(EIOPA) की नीतियों का अनुपालन करना होता है. व्यापक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसीज़ यूरोपियन यूनियन में लीगल हैं लेकिन क्रिप्टो के लेनदेन इसके मेम्बर स्टेट यानी सदस्य देशों के इंडिविजुअल नियमों पर निर्भर हैं. इन देशों में  क्रिप्टो पर टैक्स भी अलग-अलग हैं.

यूरोपियन यूनियन में क्रिप्टोकरेंसी और क्रिप्टो-एसेट्स को QFI यानी क्वालिफाइड फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट के बतौर क्लासीफ़ाई किया गया है. EU के नियम बैंकों या इन्वेस्टमेंट फर्म्स को क्रिप्टो एसेट्स में डील करने से नहीं रोकते. लेकिन ये सारे लेनदेन  QFI लाइसेंस के बिना संभव नहीं हैं.

जनवरी 2020 में EU की 5th AMLD यानी ‘एंटी-मनी लौन्डरिंग डायरेक्टिव’ प्रभाव में आई. जिसके मुताबिक़ क्रिप्टो फर्म्स को अपने कस्टमर्स के लिए KYC पूरी करना और उनकी सरकार को रिपोर्टिंग करना ज़रूरी होगा. 2016 के 6th AMLD में मनी लौन्डरिंग क्राइम्स में साइबर क्राइम को भी ऐड कर दिया गया.

यूनियन के कुछ सदस्य देशों में क्रिप्टो लेनदेन के लिये सम्बंधित देश के नियामकों के साथ रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है. जैसे कि जर्मनी में फाइनेंशियल सुपरवाइजरी अथॉरिटी(BaFin), फ्रांसे में AMF और इटली में मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस के साथ क्रिप्टो फर्म्स को रजिस्ट्रेशन करवाना होता है. जबकि यूरोपियन बैंकिंग अथॉरिटी चाहती है कि सभी सदस्य देश एक सिंगल रूल बुक अपनायें. यूरोपियन कमीशन(EC) की तरफ़ से सितम्बर 2020 में एक प्रस्ताव भी आया था. जिसको नाम दिया गया ‘मार्केट्स इन क्रिप्टो एसेट्स रेगुलेशन’(MiCA). इस प्रस्ताव में क्रिप्टो को लेकर नए लाइसेंसिंग सिस्टम का प्रावधान है. वहीं यूरोपियन सेन्ट्रल बैंक अपनी खुद की डिजिटल करेंसी लाने पर भी  विचार कर रही है.

बर्लिन में यूरोपीय देशों के फाइनेंस मिनिस्टर्स की मीटिंग (फोटो सोर्स - reuters)
बर्लिन में यूरोपीय देशों के फाइनेंस मिनिस्टर्स की मीटिंग (फोटो सोर्स – reuters)

# ऑस्ट्रेलिया-

2017 में, ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल मुद्राएं और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज ऑस्ट्रेलिया में कानूनी हैं. लेकिन 2006 का ‘एंटी मनी-लांड्रिंग और काउंटर- टेररिज्म फाइनेंशियल एक्ट ‘इनपे भी लागू होगा. ये भी कहा गया कि बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टोकरेंसीज़ को प्रॉपर्टी के बतौर कैपिटल गेंस टैक्स(CGT) के अधीन रहेंगीं. 2018 में ऑस्ट्रेलिया में फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की एनेलिसिस करने वाली संस्था AUSTRAC ने क्रिप्टोकरेंसी को लेके ज्यादा सख्त नियम लागू कर दिए. इंग्लैंड की ही तर्ज़ पर यहाँ भी नियम हो गया कि क्रिप्टो बिज़नेसेज को AUSTRAC के साथ रजिस्टर करना होगा. इस नियम में ये भी कहा गया कि क्रिप्टो फर्म्स को अपने यूजर्स का वेरिफिकेशन करना होगा, रिकार्ड्स मेंटेन करने होंगे और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा.

मई 2019 में ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी एंड इन्वेस्टमेंट कमीशन ने नियमों को और अपडेट कर दिया. इसी तरह अगस्त 2020 में ऑस्ट्रेलियाई नियामकों ने कई एक्सचेंजों को प्राइवेसी वाले कॉइन हटाने को कहा.

सर्वे कहते हैं कि हर चार में से एक यानी 25 फ़ीसद ऑस्ट्रेलियाई क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट कर रहे हैं या करने का प्लान कर रहे हैं. संख्या में बोलें तो क़रीब 50 लाख लोग.

ऑस्ट्रेलिया के नए Treasurer जॉश फ्राइडेनबर्ग (फोटो साभार - reuters)
ऑस्ट्रेलिया के नए Treasurer जॉश फ्राइडेनबर्ग (फोटो साभार – reuters)

# एंड लास्ट बट नॉट लीस्ट ये मेरा इंडिया-

भारत में क्रिप्टो का क्या और कैसा हिसाब है और भविष्य को लेकर इसकी क्या संभावनाएँ हैं, इस बारे में हमने इंडिया टुडे हिंदी के एडिटर अंशुमन तिवारी से बात की. उनके मुताबिक़ क्रिप्टोकरेंसी न ही कोई एसेट है और न कमोडिटी. कमोडिटी इसलिए नहीं क्योंकि ये तेल, खाद्यान्न कुछ भी नहीं है. और एसेट इसलिए नहीं क्योंकि बाकी एसेट या निवेश के अन्य तरीकों की तरह पारंपरिक मुद्रा में इसकी कोई तय कीमत नहीं है. पूरी तरह डिसेंट्रलाइज्ड होने के कारण इसको लेकर शंकाएं बनी हुई हैं, क्रिप्टो में इन्वेस्ट करना या इससे खरीदारी करना अभी तक सरकारी तौर पर वैध नहीं है और जल्द ही सरकार इस बारे में कुछ क़ानून ला सकती है.


पिछला वीडियो देखें: नए निवेशक एक्सपर्ट से जानें क्रिप्टो में निवेश करने के ‘रामबाण’ सूत्र!

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