Submit your post

Follow Us

'तेरा बाप अभी मरा नहीं, तू क्यूं चिंता करता है?'

‘पापा क्या हो पा’ ये वाक्यांश किसी भी भाषा में नहीं है, पर ये अपने आप गढ़ा हुआ भी नहीं. बस इतना जान लीजिये कि इसका अर्थ ‘पापा क्या होते हैं? बोलो तो ज़रा?’ होता है या हो सकता है. दरअसल शब्द और मौन की सत्ता से ठीक ऊपर एक सत्ता है जिसे अपने को व्यक्त करने के लिए अगर शब्दों की आवश्यकता पड़े तो?

…और ये बात मेरे पिताजी जानते हैं!


‘पापा क्या हो पा’

चाहता हूं कि उनके जूते के फीते खोल के धीरे से उनके जूते उतार दूं, इससे ज़्यादा आसान काम और क्या हो सकता है दुनिया में?

यकीन कीजिये इससे ज़्यादा मुश्किल काम और कुछ हो ही नहीं सकता…

…इस वक्त!

तीन बजे उनका एमआरआई टेस्ट है. लेकिन वो साढ़े ग्यारह बजे ही तैयार हो चुके हैं. दिल्ली के ट्रैफिक में उनको यकीन नहीं है. वो चारपाई में लेटे लेटे मेरा कंफर्मेशन लैटर शायद तीसरी या चौथी बार पढ़ रहे हैं. जब आपके लाडले ने ज़्यादा कुछ अपनी ज़िन्दगी में एचिव नहीं किया हो तो आप उसकी ‘कंफर्मेशन लैटर’ जैसी तुच्छ वस्तु को भी माइक्रॉस्कॉपिक नज़रों से देखते हैं.

अपनी नज़रों में उसके सो कॉल्ड एचीवमेंट बड़े बनाने के लिए.

जब ज़्यादा कुछ ढूंढने पर भी नहीं मिला उनको तो उन्होंने मेरा चार पन्ने का ‘कंफर्मेशन लैटर’ सिरहाने में रखी साईड टेबल में रख दिया. वो जूते पहने हुए पांव चारपाई से नीचे लटकाकर सो गए हैं. ऊंघते ऊंघते. फाइनली!

Father - 1

चाहता हूं छोटा बच्चा बन जाऊं.

स्साला ये शेव बनाने कि जरूरत ही ना पड़े, ना ऑफिस जाने की. एमआरआई जैसे बड़े बड़े डरावने टेस्ट ही ना हों, ना सर्वाइकल स्पोंडलाईटिस जैसी सॉफेसटिकेटेड बीमारियां. सिंपल यूरिन टेस्ट हो, वो भी पापा का नहीं मेरा. सिंपल सर्दी – ज़ुकाम या लूज़ मोशन हों, वो भी पापा के नहीं मेरे.

शेव पापा बना रहे हों, मुझे हॉस्पिटल ले जाने के लिए. मैं दो तीन बार वॉमिट-आउट कर के स्कूल से घर भेज दिया गया होऊं. और घर आते ही स्कूल ड्रेस में ही बिस्तर में लेट गया होऊं.

जूते पहने हुए…

पैरों को नीचे लटकाकर…

…या बिमारी की कोई बात ही क्यूं हो? कोई शाम पापा ताश के पत्तों से कोई जादू दिखा रहे हों, मैं और मेरी बहन सोफे पे, बिस्तर पे या नीचे ज़मीन पर उछल उछल के मज़े ले रहे हों. क्यूंकि पापा कभी कभी मूड में होते हैं, और जब ताश हाथों में हो तो मतलब कि वो सबसे ज़्यादा मूड में हैं. हर जादू कर चुकने के बाद हम हतप्रभ होकर उन्हें देख रहे हों.

Father - 2

हर जादू के बाद उनका वही सवाल,

‘पापा क्या हो पा?’

और हमारा वही उत्तर, ‘भगवान.’

‘ये देखो चारों इक्के एक साथ आ गए.’

‘वाऊ’

‘पापा क्या हो पा?’

‘भगवान.’

…या मम्मी से मार खाकर हम दोनों भाई बहन उनके ऑफिस से आने का इंतज़ार जब कर रहे हों, तो वो आते ही हमें उदास देख कर मम्मी को झूठ -मूठ डांठना शुरू कर दें. ‘उन्हें कैसे पता लगा आज मम्मी को डांठा जाना चाहिए?’ इस बात पे हमें आश्चर्यचकित होने का मौका देने से पहले ही वो हमसे पूछ बैठें,’पापा क्या हो पा?’

हम मम्मी को माफ़ करते हुए कहें, ‘भगवान!’


Father - 3

अल्मोड़ा में कराए गए इलाजों से संतुष्ट ना होकर उन्हें दिल्ली ले आया हूं. दिल्ली से अल्मोड़ा के भी पूरे रास्ते भर हमारी इतनी बात नहीं हुई जितनी दो अनजान लोगों की हो सकती थी उन परिस्थितियों में.

हम दोनों के बीच कोई अलगाव फिलवक्त तो नहीं है, कोई ऐसी बात या मुद्दा भी नहीं जिस पर हम खुलकर बात ना कर सकें या कभी की ना हो. हम एक दूसरे से कुछ एक्सपेक्ट भी नहीं करते.

पता नहीं ये सब कुछ जान लेने का मौन है एक दूसरे के विषय में, या ना जान सकने का, या ना जानने का. मानो हम वो सब कुछ कहना ही ना चाहते हों, जो बातें अन्यथा संजोकर रखी जा सकती हैं. बिना कहे.

अनजान लोग सफ़र की परेशानियों के विषय में बात कर सकते हैं. या बदलते मौसम के, पर हम दोनों ने सफ़र और मौसम में से कुछ भी नहीं चुना. क्यूंकि दो लोग एक ही समय में झूठा बर्ताव नहीं कर सकते, ये जानते हुए कि दोनों को एक दूसरे का झूठ पता है.

मौन एक सच्चाई है, और दोनों ही उसे तोड़ने का प्रयास नहीं करते, बस किसी स्टॉप में रुके तो एक दूसरे की खाने की चिंता, और अपने सामान की चिंता भी एक दूसरे से नज़र बचाकर कनखियों से गोया,’हो गया फ़िर तू नहीं खाएगा पकौड़ीयां तो मैंने खाकर क्या करना. तेरी मां ने आलू- पूड़ियां बांधी ही हैं.’

मेरे होते हुए मम्मी कभी उनकी पत्नी नहीं रही. हमेशा मेरी मां बनी रहीं. उनकी पत्नी और मेरी मां के बीच में मेरी रेखा थी, और जब भी वो ‘तेरी मां’ कहकर पुकारते हैं तो रिश्ते से अपने को अलग हटा रहे हों माना. हम पकौड़ीयां खाते हुए भी उतने ही मौन थे जितना पूड़ियां खाते हुए होते.

बात करने के लिए किसी विषय की ज़रूरत नहीं पड़ती. और इच्छा से लिया हुए मौन को कोई भी विषय मुश्किल से तोड़ सकता है.

Father - 4

पहले नहीं पर आजकल डर लगता है कि धीरे धीरे दूरियां आयीं है. सामने से देखने में ये दूरियां अच्छी लगती हैं कि कम से कम हम झगड़ते नहीं, वो मुझे नहीं डांटते, पर जब ताश खेलते हुए या दुकानदार से लड़ते हुए हमारे बीच सामंजस्य का अभाव दिखता है, ये दूरियां मुखरित हो जाती है. ‘सीप’ का खेल हम जीत भी जाएं मिलकर तो भी हम जीत अलग अलग इंजॉय करते हैं.

…मिलकर करना चाहते हैं, पर करते अलग अलग हैं.

चिंता दोनों को एक दूसरे की है, गर्व(अकारण) दोनों को एक दूसरे पर है, एक दूसरे का कहा (जो कभी-कभी ही होता है आजकल) हमारे लिए पत्थर की लकीर भी है.

पहले उनका कहा भी उनका आदेश सरीखा होता था, फ़िर उनका आदेश भी बस कहा सरीखा रह गया था, अब दोनों ही नहीं हैं. उनके कहने का मैं कोई भी मायने निकाल सकता हूं और इसके लिए मैं उनकी ओर से स्वतंत्रत हूं.

यही बात अच्छी लगती है शुरुआत में पर है सबसे बुरी. क्यूंकि जब तक अगले को पता नहीं है कि आप उसकी बातों का अर्थ अपने हिसाब से निकाल रहे हो (जबकि आप हमेशा ऐसा करते हो) तब तक ठीक है. लेकिन एक दिन कहने वाला जान लेता है कि बातें वो नहीं है जो उसने कही बल्कि वो हैं जो दूसरे ने सुनी. तब एक वाक्य आखिर में और जुड़ जाता है, ‘बाकी तेरी मर्ज़ी.’

पिताजी से रिश्ता भावनात्मक कम होता है.

कम से कम मेरे मामले में तो ऐसा ही है. और मैं उसे खींच के उस स्तर लाना भी नहीं चाहता…

जैसा मां के केस मैं है, मां के केस में आप आंख मूंद के काम करते हो, क्यूंकि उन्होंने आपको ऐसा सिखाया है, क्यूंकि उन्होंने आपके साथ ऐसा किया है, पिताजी से आप प्रश्न करते हो, कारण उसका भी समान है.

Father - 5

अगर कोई आपसे कहे कि इस ऊंचाई से कूद जा और आप कूद जाते हैं तो यकीन करिए वो आपके पिता या माता ही हो सकते हैं.

मां इसलिए कि आप उनके लिए कुछ भी कर सकते हैं,

और पिताजी ?

इसलिए नहीं कि आप उनके लिए अपनी जान दे सकते हैं…

…अपितु इसलिए कि आप निश्चित हैं कि उन्होंने कहा होगा तो निश्चित ही इसमें आपका कोई हित निहित होगा.

…नहीं तो क्या था मौन तो मौसम और सफ़र की बात करके भी तोड़ा जा सकता है!


अपनी प्रेमिका को प्रथम बार आई लव यू कहने में कितना वक्त लगता है और वो ‘दौर’ कितना कठिन होता होगा, मुझे इसका एक्सपीरियंस नहीं है. क्यूंकि मेरी पूर्व प्रेमिकाओं ने इसका मौका ही नहीं दिया कभी. वो खुद ही आईं और आई लव यू कहकर चलती बनीं और फ़िर चलती बनीं.

Father - 6

मुझे करना बस इतना है कि उनके जूते के फीते खोलने हैं और कहना है ‘पापा आराम से सो जाइए. अभी बहुत वक्त है.’ आज तक कभी इतनी तीक्ष्ण इच्छा नहीं हुई ऐसा करने की.

मैं इतना ज़्यादा ऑबसेस्ड इतना ज़्यादा कंसर्नड हो गया हूं इस चीज़ को लेकर अभी अभी की मानो मेरे पिछले सारे पापों का प्रायश्चित है ‘सफलतापूर्वक’ उनके जूते के फीते खोलना.

मुझे दरअसल शेव बनामे में काफी समय लगता है, मुझे आज भी याद है, और ये याद करते हुए गालों में कहीं कुछ नहीं छिलता (मेक थ्री से शेव बनाने का यही फ़ायदा है की कितना ही बेतकल्लुफ होकर शेव बना लो) छिलता कहीं और है, अंतस में कहीं, उनका कहना ,‘तेरा बाप अभी मरा नहीं. तू क्यूं चिंता करता है?’

उस वक्त भी मुझे अपने घर से भाग जाने पर और हरिद्वार के किसी फ़ोन बूथ से उन्हें फ़ोन करने पर गर्व ही हुआ था अपने ऊपर कि देखो, मैं कैसे परेशान कर सकता हूं इन्हें.

बड़ी देर में जाना कि ये सबसे आसान काम है. अपनों को परेशान करना, बस आप खुद को थोड़ा कष्ट पहुंचा दो वो परेशान.

‘तेरा बाप अभी मरा नहीं. तू क्यूं चिंता करता है?’

क्यूंकि जब तक उनके लाडले का बाप ज़िंदा है उसे किसी भी बात की चिंता करने कि ज़रूरत नहीं सिवा ज़िंदा रहने के.

‘तेरा बाप अभी मरा नहीं. तू क्यूं चिंता करता है? तेरे बाप को तुझसे कोई एक्स्पेक्टेशन नहीं सिवाय इसके कि तू उनसे अधिक जिए. एक दिन ही सही पर उनसे अधिक!’


‘दर्शन’

पापा ने पीछे से आवाज़ लगाई,

‘ज़रा जूते के फीते खोल दे यार ! धोफरी-झूम (दोपहर की नींद) जैसी क्या लग रही ठहरी फ़िर कहा मुझे?’

लल्लनटॉप में पढ़िये एक कविता रोज़:

‘मेरी मां मुझे अपने गर्भ में पालते हुए मज़दूरी करती थी, मैं तब से ही एक मज़दूर हूं’
बड़े लोग इसी काम के लिए बेदांता नाम के हस्पताल में जाते हैं
किन पहाड़ों से आ रहा है ये किस समन्दर को जा रहा है, ये वक़्त क्या है?
‘पंच बना बैठा है घर में फूट डालने वाला’
पाब्लो नेरुदा की कविता का अनुवाद: अगर तू मुझे भूल जाए
एक कविता रोज़: इसीलिए खड़ा रहा कि तुम मुझे पुकार लो
सुनो परम ! पैदल चलना, हाथ से लिखना और सादा पानी पीना…


Video देखें: कुंवर नारायण की कविता ‘बात सीधी थी, पर…’

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.