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कहानी फर्टिलाइजर स्कैम में गिरफ्तार अमरेंद्र धारी सिंह की, जिन्हें लालू 'साहेब' कह कर बुलाते हैं

साल 2020. मार्च का महीना. बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ वक्त ही बचा था. आरजेडी ने कांग्रेस की ना के बावजूद अपने दो कैंडिडेट राज्यसभा भेजने का फैसला कर लिया. इन दो लोगों में एक नाम ने बिहार के राजनीतिक विश्लेषकों के साथ-साथ आरजेडी के भीतर भी लोगों को चौंकाया. यह नाम था अमरेंद्र धारी सिंह का. पार्टी में ज्यादातर लोग राबड़ी देवी को राज्यसभा भेज जाने के कयास लगा रहे थे. लेकिन जेल में बंद लालू प्रसाद यादव ने अमरेंद्र धारी सिंह को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया. अमरेंद्र धारी सिंह के नॉमिनेशन के दिन मौके पर मौजूद आरजेडी विधायक मुनेश्वर राय ने कहा था,

 मैं उन्हें नहीं जानता. लेकिन पार्टी ने मुझे अमरेंद्र धारी सिंह के परचा दाखिल करते वक्त मौजूद रहने को कहा है इसलिए यहां आया हूं.

सवाल ये भी उठा कि खुद को पिछड़ों और दबे-कुचलों का पार्टी बताने वाली आरजेडी आखिर एक सवर्ण भूमिहर को राज्यसभा क्यों भेज रही है. इस पर लालू प्रसाद के बेटे और फिलहाल बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जवाब दिया था. कहा था,

 आरजेडी सिर्फ मुस्लिम और यादवों की पार्टी नहीं है, हम सभी जाति-संप्रदाय को प्रतिनिधित्व देते हैं.

वक्ता का पहिया लगभग एक साल आगे घुमाते हैं. साल 2021. 2 जून की रात ED यानी एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी के घर से अमरेंद्र धारी सिंह को गिरफ्तार कर लिया. मामला है फर्टिलाइज़र घोटाला में पैसों की हेराफेरी का. क्या है ये घोटाला और कौन हैं अमरेंद्र धारी सिंह जो पिछले साल सांसद बने और इस साल जेल चले गए.

पहले जानिए कि फर्टिलाइज़र घोटाला क्या है?

फर्टिलाइजर घोटाले को समझने के लिए हमें 10 साल पीछे जाना पड़ेगा. साल 2011. इफको के तत्कालीन अध्यक्ष सुरिंदर जाखड़ की पंजाब के अबोहर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है. उन्हें गोली लगी थी. पुलिस ने इसे एक्सिडेंटल फायरिंग का मामला करार दिया. कहा गया कि बंदूक साफ करते हुए गोली चल गई. जाखड़ कांग्रेस के बड़े नेता बलराम जाखड़ के बेटे थे. इस मामले के बाद से ही इफको की गतिविधियां केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आ गईं.

केंद्रीय एजेंसियों की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि इफको के उच्चाधिकारियों से मिलीभगत के जरिए सरकारी खजाने को चपत लगाई जा रही है. विदेशों से ऊंचे दाम पर फर्टिलाइजर खरीदा कर किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है. चूंकि सरकार खाद पर सब्सीडी देती है तो वह पैसा ये कंपनियां डकार रही हैं. धंधा करने वाली कंपनियां मोटा कमीशन भी खा रही हैं. मतलब 5 रुपए का माल 10 रुपए में सरकार को उपलब्ध कराओ. सरकार किसानों को सब्सीडी देकर जब वही माल 2 रुपए में उपलब्ध कराए तो 8 रुपए की सब्सीडी अपनी जेब में रख लो. साल 2018 में मोदी सरकार ने लोकसभा को बतायाकि साल 2013 से 2017 के बीच हुई अनियमितताओं की जांच सरकार सीबीआई से कराएगी. इसमें सबसे बड़ा नाम इफको के एमडी और सीईओ यू.एस. अवस्थी का आया. सीबीआई ने 17 मई 2021 को इफको के एमडी और सीईओ यू.एस. अवस्थी को मामले में आरोपी बनाया. सीबीआई ने अवस्थी के अलावा 9 और लोगों को आरोपियों की फेहरिस्त में रखा है. ये हैं

# यू.एस. अवस्थी के बेटे अनुपम अवस्थी और अमोल अवस्थी. ये दोनों कैटलिस्ट बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी के प्रमोटर हैं.

# इंडियन पोटाश लिमिटेड के तत्कालीन एमडी परविंदर सिंह गहलोत और उनके बेटे विवेक गहलोत.

# पंकज जैन और संजय जैन. दुबई के ज्योति ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के कर्ताधर्ता.

# अमरेंद्र धारी सिंह, वाइस प्रेसिडेंट, ज्योति ग्रुप कॉर्पोरेशन दुबई.

# राजीव सक्सेना, चार्टर्ड अकाउंटेंट मिडास मेटल इंटरनेशनल एलएलसी

# सुशील कुमार पसरीचा, पंकज जैन की कंपनी का एक कर्मचारी

मामले की जानकारी रखने वाले एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक यूसी अवस्थी की मिली भगत से यह पूरा प्लान रचा गया. उनके बेटों की कंपनियों के जरिए ही इफको को फर्टिलाइजर उपलब्ध कराया गया. दुबई के ज्योति ग्रुप ने बढ़े हुए दामों पर फर्टिलाइजर उपलब्ध कराया. आरजेडी सांसद अमरेंद्र धारी सिंह भी ज्योति ग्रुप कॉर्पोरेशन के वाइस प्रेसिडेंट हैं. इसलिए उन पर आंच आई है.

मई 2021 को सीबीआई ने दिल्ली, गुड़गांव और मुंबई के तकरीबन 12 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया जिसमें यूसी अवस्थी का घर और ऑफिस भी शामिल है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सीबीआई को छापे में यूएस अवस्थी के घर से 8.80 लाख रुपये कैश मिले. वहीं परविंदर सिंह गहलोत के घर से सीबीआई को उनके परिवार के नाम पर 5.5 करोड़ एफडीआर के डॉक्युमेंट्स भी मिले. इसके अलावा 14 बैंक की डिटेल्स और 19 प्रॉपर्टीज़ के डॉक्युमेंट भी मिले हैं.

सीबीआई ने एक बयान जारी करते हुए कहा,

ज़्यादा सब्सिडी हासिल करने के लिए इफको और इंडियन पोटाश लिमिटेड के ये अधिकारी दुबई के किसान इंटरनेशनल ट्रेडिंग (इफको की सहायक कंपनी) और दूसरे बिचौलियों के माध्यम से उर्वरकों और कच्चे माल का आयात कर रहे हैं. जिनसे नकली लेनदेन के माध्यम से सरकार से सब्सिडी और कमीशन भी लिया है. इस मामले में इफको के और इंडियन पोटाश लिमिटेड के तत्कालीन एमडी शामिल हैं.

साल 2020 अक्टूबर में ईडी ने इफको के एमडी और सीईओ यू.एस. अवस्थी पर FEMA यानी फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के उल्लंघन का मामला भी दर्ज किया. ईडी को छापे के दौरान विदेशों से पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी मिली थी. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ही 3 जून को अमरेंद्र धारी सिंह को गिरफ्तार किया.

पिछले साल अक्टूबर में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी यू. एस. अवस्थी पर जांच चलाई थी. फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के तहत उनके कई ऑफिस पर छापे भी मारे थे.
पिछले साल अक्टूबर में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी यू. एस. अवस्थी पर जांच चलाई थी. फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के तहत उनके कई ऑफिस पर छापे भी मारे थे.

कौन हैं अमरेंद्र धारी सिंह?

अमरेंद्र धारी सिंह को जानने वाले लोग उन्हें एडी सिंह के नाम से बुलाते हैं. अमरेंद्र धारी सिंह बिहार में पालीगंज के एनइखा गांव के रहने वाले हैं. भूमिहार परिवार में पैदा हुए जिसके पास सैकड़ों बीघा जमीन थी. चार भाई और एक बहन के साथ पले बड़े अमरेंद्र धारी सिंह दिल्ली आए किरोड़ी मल कॉलेज से ग्रेजुएशन करने. उसके बाद यहीं के हो गए. साल में एक-दो बार बिहार आना जाना रहता. अमरेंद्र धारी सिंह अविवाहित हैं. उनके एक करीबी कहते हैं कि पटना से दिल्ली आकर उन्होंने सबकुछ अपने दम पर खड़ा किया. वह जल्दी किसी के करीब नहीं आते, लेकिन जिसके साथ दोस्ती हो गई तो जम के निभाते हैं. दोस्तों की मदद करने में हमेशा आगे, फिर चाहें बेटी की शादी हो या बीमारी-परेशानी. उनके एक करीबी बताते हैं.

अमरेंद्र धारी सिंह एक सेल्फ मेड इंसान हैं. वह दिल्ली आने के बाद भी सेंट माइकल स्कूल, पटना में साथ पढ़े दोस्तों को अब भी नहीं भूले हैं. जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करने पहुंच जाते हैं. साल 1990 के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

साल 1991 में दिल्ली में उनकी दोस्ती एक प्रभावशाली अधिकारी से हो गई. उन्होंने एडी सिंह को फर्टिलाइजर इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का लाइसेंस दिलवा दिया. सिंह ने प्राइवेट कंपनियों से फर्टिलाइजर आयात करके मिडिल ईस्ट के देशों में भेजना शुरू किया. देखते-देखते बिजनेस खूब चमका और 13 देशों तक फैल गया.

उनके इलेक्शन एफिडेविट  के अनुसार वह दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी के मकान में रहते हैं. उनकी अचल संपत्ति 188.57 करोड़ रुपए और चल संपत्ति 49.6 करोड़ रुपए है. उनके पास राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और मुंबई में जमीन, मकान और ऑफिस हैं. उन्होंने 2019-20 के 24 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनकम टैक्स रिटर्न भरा.

अमरेंद्र धारी सिंह का बिहार में किया एक काम और याद किया जाता है. बिहार में आईआईटी की तैयारी कराने की मशहूर कोचिंग है सुपर 30. इसे पहले आनंद कुमार और बिहार के पूर्व डीजीपी अभ्यानंद चलाते थे. कुछ मनमुटाव की वजह से इनकी जोड़ी टूटी गई तो अभयानंद ने अपनी अलग ‘अभयानंद सुपर 30’ खोली. इसकी शुरुआत कराने का बीड़ा अमरेंद्र धारी सिंह ने उठाया था. हालांकि जब अमरेंद्र धारी सिंह ने राजनीति में जाने का फैसला लिया तो अभयानंद ने अपने ही संचालन में चलने वाली कोचिंग ‘अभयानंद सुपर 30’ से नाता तोड़ लिया. उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि ‘अभयानंद सुपर 30’ के कर्ताधर्ता एक राजनीतिक दल से जुड़ गए हैं, इसलिए मैं अब अपना नाम हटा रहा हूं.

दुनिया के लिए एडी सिंह, लालू के लिए ‘साहेब’

एक सीनियर पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लालू प्रसाद यादव से उनके पुराने और करीबी रिश्ते हैं. वह कहते हैं,

लोगों को लग सकता है कि लालू प्रसाद यादव ने उन्हें राज्यसभा पैसों के लिए भेजा, लेकिन सिर्फ यही एक कारण नहीं है. एडी सिंह के हर पार्टी में अच्छे संबंध हैं. लालू प्रसाद यादव और अमरेंद्र धारी सिंह के रिश्तों को ऐसे समझा जा सकता है कि लालू प्रसाद यादव उन्हें ‘साहेब’ कह कर बुलाते हैं. वह लालू प्रसाद यादव के घर के सदस्य जैसे हैं. परिवार का हर सदस्य उनको करीब से जानता है.

इस बात में जरूर दम है कि लालू प्रसाद यादव एडी सिंह को पार्टी में अगड़ों को साधने के लिए लाए. सवर्ण आरक्षण का विरोध करने के बाद वह सवर्णों की नाराजगी कम करना चाहते थे. उन्हें इसके लिए एडी सिंह से अच्छा कैंडिडेट कोई मिल भी नहीं सकता था. जहां तक बात पैसे की है तो एडी सिंह ने सिर्फ आरजेडी ही नहीं दूसरी पार्टियों को भी वक्त-वक्त पर खूब चंदा दिया है.

Lalu Yadav
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और अमरेंद्र धारी सिंह के करीबी पारिवारिक रिश्ते हैं. लालू प्रसाद यादव अमरेंद्र धारी सिंह को साहेब कह कर बुलाते हैं. (फाइल फोटो: पीटीआई)

RJD पर हमलावर BJP और JDU

बिहार में जेडीयू और बीजेपी की मिलीजुली सरकार को हर मुद्दे पर घेरने वाली आरजेडी अमरेंद्र धारी सिंह के मामले में बैकफुट पर नजर आ रही है. इधर बीजेपी के नेता सुशील मोदी ने मौका मिलते ही निशाना लगाया. गिरफ्तारी की खबर मिलते ही उन्होंने धड़ाधड़ चार ट्वीट किए.

जेडीयू के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने कहा,

खाद घोटाला के अभियुक्त को राज्यसभा भेजने के बदले राजनीतिक खाद किसको मिली? उच्च सदन में नामांकित करने में क्या धन की भी महिमा रही है? खाद घोटाला के अभियुक्त को राज्य सभा भेजकर कलंकित किया गया है. किसानों के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले खाद घोटाला वाले को उच्च सदन भेजते हैं. जांच हो कि आर्थिक लेनदेन में कि उच्च सदन जाने में कहीं धन की महिमा की भूमिका तो नहीं है.

आरजेडी सांसद अमरेंद्र धारी सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब देखने वाली बात यह होगी कि एजेंसियां कितनी जल्दी इस मामले में पुख्ता सबूत जुटा पाती हैं.


वीडियो – IFFCO के एमडी ने खाद में ऐसा घपला किया कि सीधे CBI ने रसीद काट दी!

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