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ट्रंप वाला एंटीबॉडी कॉकटेल अब भारत आ रहा है, इसमें खास क्या है?

साल 2020 कोरोना की तगड़ी मार दुनिया के शक्तिशाली देश अमेरिका पर पड़ी. संक्रमण के आंकड़े आसमान छू रहे थे. हेल्थ सर्विसेज मरीजों के बोझ से दबी जा रही थीं. ऐसे में भी तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बिना मास्क के ही नजर आते थे. उनके समर्थक भी मास्क का विरोध करते थे. अक्टूबर 2020 में डॉनल्ड ट्रंप खुद कोरोना संक्रमित हो गए. हालांकि कुछ दिन बाद ठीक होकर दुनिया के सामने भी आ गए. उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने एंटीबॉडीज़ का एक ऐसा तगड़ा कॉकटेल लिया है कि कोरोना हार गया. इसकी तब काफी चर्चा हुई थी. अब स्विट्जरलैंड की दवा कंपनी रोश (Roche) का ये एंटीबॉडी कॉकटेल भारत में भी इमरजेंसी ट्रायल के लिए मंजूरी पा चुका है. आखिर क्या है ये एंटीबॉडी कॉकटेल और कैसे कोरोना के मरीजों की मदद करता है.

भारत में मिला अप्रूवल

भारत की सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने स्विटजरलैंड की दवा कंपनी रोश द्वारा बनाई एक दवा को इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति  दे दी है. ये दवा कोरोना के मरीजों के इलाज में सहायक होती है. यह एक खास तरह की एंटीबॉडी कॉकटेल या दो एंटीबॉडीज़ का मिक्सचर है. अमेरिका में इसे रिजेनरॉन कॉकटेल कहा गया, क्योंकि इसे वहां की कंपनी रिजेनरॉन फार्मा (Regeneron Pharmaceuticals) ने बनाया था. इसे इन्वेस्टिगेशनल ड्रग की श्रेणी में रखा गया है. मतलब लैब में इस दवा के केमिकल को अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने सुरक्षित पाया है. लेकिन अभी इनका क्लीनिकल ट्रायल होना बाकी है. इस खास इलाज की चर्चा पहली बार अक्टूबर 2020 में तब आई थी, जब इसका डोज़ तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने लिया था.

ये कॉकटेल है क्या?

ये कॉकटेल एंटीबॉडीज़ का है. इसे कैसिरिविमैब (casirivimab) और इम्डिविमैब (imdevimab) को मिला कर बनाया गया है. इसका इस्तेमाल कोरोना के कम और मध्यम लक्षण वाले ऐसे कोरोना मरीजों के लिए किया जाता है जो हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं. मतलब उम्रदराज या पहले से किसी बीमारी से ग्रसित आदि.

लगे हाथों एंटीबॉडी भी समझ लीजिए. जब कोई वायरस या बैक्टिरिया हमारे शरीर में आता है, तो वो नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है. उस दौरान हमारे शरीर के अंदर कुछ प्रोटीन बनते हैं, जिनका आकार Y शेप का होता है, यही प्रोटीन वायरस और बैक्टीरिया के प्रभाव को कम करने के लिए लड़ते हैं. इसी प्रोटीन को एंटीबॉडी या इम्युनोग्लोबुलिन (Ig) कहा जाता है.

इस एंटीबॉडी को ही स्विटजरलैंड की कंपनी ने लैब में बना लिया है. लैब में बनी ये एंटीबॉडी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता की नकल करते हुए वायरस आदि से भिड़ जाती है. कैसिरिविमैब और इम्डिविमैब नाम की ये एंटीबॉडी खासतौर पर कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन पर हमला करते हैं. वही स्पाइक प्रोटीन जो कोरोना वायरस पर कांटे की तरह नजर आते हैं. इनके जरिए ही वायरस मानव कोशिकाओं से चिपकता है. ये एंटीबॉडी इस स्पाइक को चिपकने से रोकता है.

रोश कंपनी ने अपने स्टेटमेंट में बताया है कि

एंटीबॉडीज़ को खास इंजीनियरिंग के जरिए ऐसा बनाया गया है कि वो कोरोना वायरस के स्पाइक्स को अपने में बांध लेते हैं. इससे ये कॉकटेल, वायरस के असर को कम करके संक्रमण को काबू में कर लेता है.

Roche Company
अमेरिका में रेजेनरॉन नाम की कंपनी ने एंटीबॉडी कॉकटेल का उत्पादन किया. (फोटो-रिजेनरॉन)

ये किन लोगों के लिए है?

एंटीबॉडी का ये कॉकटेल कोरोना के सभी मरीजों के लिए नहीं है. इसे कोरोना के कम या मध्यम लक्षण वाले कोरोना मरीजों को शुरुआती लक्षण दिखने के 10 दिनों के भीतर दिया जा सकता है. इसे वयस्क या 12 साल या उससे ऊपर के बच्चों को भी दिया जा सकता है. इसे उन मरीजों को देने की सलाह दी गई है जिनमेंं कोरोना के गंभीर संक्रमण होने का खतरा बना रहता है. इसमें शामिल हैं, 60 साल से ऊपर के लोग और ऐसे जो पहले ही डायबीटीज, किडनी-फेफड़ों की बीमारी, बीपी या हार्ट से जुड़ी बीमारी से ग्रसित हैं. गंभीर रूप से अस्पताल में भर्ती कोरोना के मरीजों को यह नहीं दी जा सकती.

इसकी डोज कितनी और कैसे दी जाती है?

कैसिरिविमैब और इम्डिविमैब दोनों को मिलाकर 1200 एमजी की एक डोज़ दी जाती है. मतलब 600 एमजी कैसिरिविमैब और 600 एमजी  इम्डिविमैब. इसे इंजेक्शन के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है. इसे 2 डिग्री से लेकर 8 डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया जाता है.

Johnson And Johnson Corona Vaccine
इस एंटीबॉडी के डोज़ को एक इंजेक्शन के जरिए मरीज को दिया जाता है. (फोटो-AP)

ये कितनी कारगर है?

एंटीबॉडी का कॉकटेल बनाने वाली कंपनी रोश ने अपने क्लीनिकल ट्रायल  के दम पर इसके कारगर होने का दावा किया है. कंपनी का दावा है कि यह कोरोना के मरीजों में हॉस्पिटल में भर्ती होने का खतरा 70 फीसदी तक कम कर देती है. कैसिरिविमैब और इम्डिविमैब का कॉकटेल कोरोना के लक्षणों को भी 4 दिन तक सीमित कर देता है.

कब और कितने में मिलेगी?

इसकी उपलब्धता के लिए स्विटरलैंड की कंपनी ने भारतीय में सिप्ला को अपना मार्केटिंग पार्टनर बनाया है. रोश फार्मा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ने अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को ईमेल पर दिए एक जवाब में बताया कि

हम दवा की सप्लाई को जल्दी से जल्दी सुनिश्चित करने पर काम कर रहे हैं. कंपनी इसे भारत में आयात करेगी और सिप्ला के साथ मिल कर मार्केट में बेचेगी. यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी कि कितनी डोज़ के लिए कितनी कीमत अदा करनी होगी. हमारी सिप्ला के साथ बात चल रही है. जैसे ही वो लॉन्च प्लान के साथ आएंगे, इसके बारे में जानकारी दी जाएगी.

फिलहाल इसकी भारत में कीमत कितनी होगी और यह कहां और किस चैनल के जरिए उपलब्ध होगी, इसका जवाब मिलना बाकी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पहले से उपलब्ध इलाज को लेकर लोगों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है तो इसे मरीजों तक आसानी से कैसे पहुंचाया जा सकेगा?


वीडियो – NCDC के सर्वे में कोरोना पॉजिटिव लोगों के भीतर एंटीबॉडी को लेकर ये पता चला है

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