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सऊदी अरब बम बरसा रहा है, अमेरिका क्यों नजरंदाज कर रहा है?

यमन में जंग चल रही है. सऊदी अरब वहां हवाई बमबारी कर रहा है. सवाल ये उठ रहा है कि क्या हथियार सौदों की वजह से US और ब्रिटेन इस मामले पर सऊदी का साथ दे रहे हैं.

मान लो किसी ने किसी को गोली मार दी. पुलिस गोली मारने वाले को पकड़ेगी. मान लो कि उसके पास बंदूक का लाइसेंस नहीं है. फिर पुलिस उससे पूछेगी, तेरे पास लाइसेंस तो है नहीं. तो बंदूक कहां से आई? फिर उस आदमी ने जहां से बंदूक खरीदी/ली होगी, वो भी अंदर होगा. कानून ऐसे काम करता है.

लेकिन इन कानूनों को बनाने वाले देश किस तरह काम करते हैं?

हथियार बनाते हैं. किसी और देश को वो हथियार बेचते हैं. वो देश उन्हीं हथियारों से किसी दूसरे देश में जंग लड़ता है. बम गिराता है. हजारों मरते हैं. हथियार बेचने वाले को ये सब पता है. वो क्या करता है? खुश होता है. तारीफ भी करता है.

सऊदी अरब के राजकुमार हैं प्रिंस सलमान. अमेरिका के दौरे पर गए हैं. वाइट हाउस में कैमरों की चमक और क्लिक-क्लिक के बीच राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से मिले. ट्रंप ने दिल खोलकर स्वागत किया उनका. और बड़े गर्व से बताया. कि सऊदी अमेरिका से खूब हथियार खरीदता है. और इसकी वजह से बहुत सारे लोगों को नौकरी मिलती है. इसी रौ में आगे बात बढ़ी. साढ़े 34 अरब रुपये की एक आर्म्स डील का जिक्र आया. इस पर ट्रंप ने कहा:

इतने पैसे तो आपके लिए चिल्लर जैसे हैं.

हमें पुरानी हिंदी फिल्में याद आ गईं. नौकर सेठ से कुछ रुपये मांगते हुए कहता है- माई-बाप, इतने पैसे तो आपके हाथ का मैल हैं.

पूरी प्रेजेंटेशन दी गई. कि सऊदी के कौन से हथियार खरीदे. कौन से हथियार खरीदेगा. कितने का सौदा हुआ है. खरीदे गए हथियारों की खासियत क्या है.
पूरी प्रेजेंटेशन दी गई. कि सऊदी ने कौन से हथियार खरीदे. कौन से हथियार खरीदेगा. कितने का सौदा हुआ है. खरीदे गए हथियारों की खासियत क्या है.

सऊदी जो पैसा देता है, उसकी वजह से चुप हैं अमेरिका-ब्रिटेन?
इससे पहले भी ट्रंप ने ऐसा ही कुछ कहा था. नवंबर 2017 की बात है. यमन विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर एक मिसाइल छोड़ी. इसके बाद ट्रंप का बयान आया:

सऊदी अरब को निशाना बनाया गया. लेकिन हमारे सिस्टम (ऐंटी मिसाइल) ने उसे बेकार कर दिया. हम बहुत अच्छे हथियार बनाते हैं. जो हम बनाते हैं, वो कोई और नहीं बनाता. अब हम पूरी दुनिया को हथियार बेच रहे हैं.

उस समय भी ट्रंप की बहुत आलोचना हुई थी. कि उन्हें ये बोलना याद रहा. लेकिन यमन में मर रहे लोगों पर बोलने की फुर्सत नहीं मिली.

UN और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लगातार यमन की हालत पर बोलते रहते हैं. इनका कहना है कि सऊदी यमन में जो जंग लड़ रहा है, उसमें हजारों निर्दोष मारे जा रहे हैं. कि अमेरिका और ब्रिटेन हथियार बेच-बेचकर यमन की लड़ाई और भड़का रहे हैं. इधर ट्रंप ने ये बोला. उधर ब्रिटेन में भी ये ही हाल है. 2017 में ब्रिटेन के तत्कालीन रक्षा मंत्री माइकल फैलोन ने सऊदी को लड़ाकू विमान बेचे जाने की डील का समर्थन किया था. अमेरिका और ब्रिटेन, दोनों ने ही सऊदी को खूब हथियार बेचे हैं. खूब कमाया है. मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सऊदी ने हथियार ही नहीं खरीदा, बल्कि उनकी आवाज भी खरीद ली है. कि इसी पैसे की बदौलत सऊदी जो कर रहा है, उस पर अमेरिका-ब्रिटेन चुप रहकर मुहर लगा देते हैं.

यमन के एक अस्पताल में भर्ती कुपोषित बच्चा. UNICEF के मुताबिक, यमन में 18 लाख से ज्यादा बच्चों को सबसे गंभीर किस्म का कुपोषण है. इतना गंभीर कि ये जानलेवा स्थिति है.
यमन के एक अस्पताल में भर्ती कुपोषित बच्चा. UNICEF के मुताबिक, यमन में 18 लाख से ज्यादा बच्चों को सबसे गंभीर किस्म का कुपोषण है. इतना गंभीर कि ये जानलेवा स्थिति है.

यमन में क्या लड़ाई है?
2011 में अरब स्प्रिंग शुरू हुआ. इसका असर यमन में भी आया. तब राष्ट्रपति थे अली अब्दुल्लाह सालेह. लंबे समय से सत्ता उनके ही पास थी. विद्रोह के बाद सालेह को सत्ता अपने सहयोगी अब्द्राबुह मंसूर हादी को सत्ता सौंपनी पड़ी. लेकिन ये पावर ट्रांसफर ठीक से हो नहीं पाया. कई तरह की दिक्कतें थीं. अल-कायदा. अलगाववाद. गरीबी-भुखमरी वगैरह-वगैरह. फिर यहां शुरू हुआ शिया-सुन्नी. शिया अल्पसंख्यक हूती विद्रोहियों ने बगावत कर दी. संघर्ष शुरू हुआ. ऐसा नहीं कि बस शिया ही सपोर्ट कर रहे थे हूतियों को. यमन के अंदर कई सुन्नी भी उनके साथ थे. विद्रोहियों ने 2015 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया.

प्रिंस सलमान सऊदी के सुल्तान सलमान के बेटे हैं. गद्दी के वारिस हैं. उनके पिता बस नाम के शासक हैं. असलियत में प्रिंस सलमान ही सारे अहम फैसले लेते हैं. यमन में जंग शुरू करने का फैसला भी प्रिंस का ही था. ये जो पोस्टर नजर आ रहे हैं, वो ब्रिटेन में लगे थे. जब प्रिंस सलमान ब्रिटेन पहुंचे थे.
प्रिंस सलमान सऊदी के सुल्तान सलमान के बेटे हैं. गद्दी के वारिस हैं. उनके पिता बस नाम के शासक हैं. असलियत में प्रिंस सलमान ही सारे अहम फैसले लेते हैं. यमन में जंग शुरू करने का फैसला भी प्रिंस का ही था. ये जो पोस्टर नजर आ रहे हैं, वो ब्रिटेन में लगे थे. जब प्रिंस सलमान ब्रिटेन पहुंचे थे.

अमेरिका के हथियारों का इस्तेमाल कहां होता है?
सऊदी को यकीन था कि इतना कुछ करना अकेले हूती विद्रोहियों के बस की बात नहीं है. कि उसकी मदद ईरान कर रहा है. इसके बाद सऊदी ने हादी को सपोर्ट करना शुरू किया. सऊदी और उसके सहयोगियों ने यमन पर हवाई बमबारी शुरू कर दी. इनकी मदद की अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने. नवंबर 2017 में हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर मिसाइल छोड़ दी. इसके बाद लड़ाई और उग्र हो गई. सऊदी अमेरिका से खूब हथियार खरीद रहा है. इस लड़ाई की वजह से हथियारों की खरीद बढ़ी है. इन हथियारों का इस्तेमाल कहां होता है? अभी फिर सऊदी ने अमेरिका से 8 खरब रुपयों की एक डील की है. इस रकम के बदले अमेरिका सऊदी को लड़ाकू विमान और मिसाइल देगा. हम पढ़ते आए हैं कि हथियार सौदों से रिश्ते बनते-बिगड़ते हैं. कि हथियारों की खरीद विदेश नीति भी तय कर देती है. तो क्या अब ये भी मान लेना चाहिए कि हथियारों की खरीद-फरोख्त से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तय होते हैं? लग तो यही रहा है.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टरीजा मे के साथ प्रिंस सलमान. ब्रिटेन में विपक्ष, खासतौर पर विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरमी कोर्बिन सऊदी को हथियार बेचे जाने का विरोध करते हैं.
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टरीजा मे के साथ प्रिंस सलमान. ब्रिटेन में विपक्ष, खासतौर पर विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरमी कोर्बिन सऊदी को हथियार बेचे जाने का विरोध करते हैं. लेकिन सरकार सऊदी के साथ आर्म्स डील का बचाव करती है.

यमन की लड़ाई के नुकसान?
दुनिया के मानचित्र पर यमन जहां है, वो बहुत अहम है. बाब अल-मंडाब जलसंधि. ये एक पतला रास्ता है, जो कि रेड सी को अदन की खाड़ी से जोड़ता है.

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ये स्वेज नहर और हिंद महासागर के बीच का लिंक है. दुनिया में समंदर के रास्ते कच्चे तेल का जो कारोबार होता है, उसका एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता-जाता है. हूती विद्रोहियों ने कई बार इस पर हमला किया. इस रास्ते को कोई नुकसान हुआ या ये बंद हुआ, तो सबके ऊपर असर पड़ेगा. ये तो आर्थिक पहलू है. इससे ज्यादा बड़ा है राजनैतिक और मानवीय पहलू. मिडिल-ईस्ट में पिछले लंबे समय से लगातार हिंसा जारी है. मिस्र, लीबिया, लेबनन, सीरिया, इराक, यमन सब डिस्टर्ब हैं. कहीं आतंकवाद, कहीं गृह युद्ध, कहीं युद्ध. सबका अपना-अपना रोना है. इस सब में सबसे ज्यादा पिस रहे हैं आम लोग. यमन से कई सारी तस्वीरें आती हैं. सूखे-सूखे कुपोषित बच्चे. ऐसी हालत में कि पोषण न मिला, तो मर जाएंगे. वहां से खबर आ रही थी. कि पैसे के लिए लोग बच्चे बेच रहे हैं. जबर्दस्त भुखमरी है. बीमारी है. जिनको खाना नहीं मिलता, उनको दवाएं क्या मिलेंगी. संयुक्त राष्ट्र ने इसे सबसे बड़ी मानवीय आपदाओं में से एक बताया था.

खाना नहीं है. पानी नहीं है. दवाएं नहीं हैं. यमन गंभीर अभाव से गुजर रहा है. ये गैस सिलिंडर के लिए लगी कतार है. जगह है राजधानी सना.
खाना नहीं है. पानी नहीं है. दवाएं नहीं हैं. यमन गंभीर अभाव से गुजर रहा है. ये गैस सिलिंडर के लिए लगी कतार है. जगह है राजधानी सना. सऊदी जब घेराबंदी कर देता है, तब बुनियादी चीजों का और अकाल पड़ जाता है.

दोस्ती की वजह- ईरान और आर्म्स डील?
इतना कुछ हो रहा है. लेकिन खुद को ‘मानवाधिकार दूत’ बताने वाले अमेरिका पर कोई असर नहीं पड़ रहा. ट्रंप खुश हैं कि हथियारों की बिक्री से अमेरिका में पैसा आ रहा है. लेकिन उन हथियारों के इस्तेमाल की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जाती है. ट्रंप जब से राष्ट्रपति बने हैं, तब से अमेरिका और सऊदी की दोस्ती बढ़ी है. इसकी एक बड़ी वजह ईरान है. ईरान को न तो ट्रंप पसंद करते हैं और न सऊदी. पसंद-नापसंद से ऊपर ईरान से इनकी दुश्मनी है. पुरानी कहावत है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है. इस गहराती दुश्मनी के पीछे भी ये एक वजह है. दूसरी बड़ी वजह क्या है, इसके ऊपर तो आपने पूरी खबर पढ़ ली.

सिलिंडर के इंतजार में लोग कई किलोमीटर लंबी कतारें लगा रहे हैं. इस शख्स को देखिए. जाने कब मिले सिलिंडर. इसीलिए वो कंबल साथ लेकर आया, ताकि वहीं सो जाए.
सिलिंडर के इंतजार में लोग कई किलोमीटर लंबी कतारें लगा रहे हैं. इस शख्स को देखिए. जाने कब मिले सिलिंडर. इसीलिए वो कंबल साथ लेकर आया, ताकि वहीं सो जाए.

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