Submit your post

Follow Us

वो फिल्म डायरेक्टर जो दंगाइयों के कब्ज़े से राम को वापस लाने निकला है

फिल्म 'मुल्क' के राइटर-डायरेक्टर अनुभव सिन्हा के interview के कुछ अंश.

‘रा.वन’, ‘तुम बिन’, ‘दस’ और इस हफ्ते आई फिल्म ‘मुल्क’ के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा से दी लल्लनटॉप के एडिटर सौरभ द्विवेदी ने हाल में विस्तृत बात की. पढ़ें उस इंटरव्यू के कुछ अंश जिसमें अनुभव ने बेबाकी से कई विषयों पर अपनी बात रखी है.

1. तीन बार करियर में बर्बाद हो गए थे
अनुभवः – “मैं लाइफ में तीन बार गिरकर उठा हूं. नेस्तनाबूद होकर उठा हूं. 1997-98 की बात है शायद. मेरा एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ किसी काम में. (एक करोड़) उस ज़माने में. मैं पहले जिनके पास असिस्टेंट था – पंकज पराशर (करमचंद, चालबाज़, जलवा, हिमालयपुत्र) साहब, उनको मिला. वहां मनोज बाजपेयी को मिलने गया था. वहां पंकज जी मिले तो बोले – ‘यार, मुझे तुम पर गर्व है.’ दरअसल उनको पता चला था कहीं से कि मुझे नुकसान हुआ है. तो मैंने कहा – ‘क्या हो गया?’ वो बोले – ‘अनुभव एक करोड़ रुपए का नुकसान कराना आसान काम है क्या? और उतना हो जाने के बाद खड़े रहना आसान काम है क्या? तू सीधा खड़ा हुआ है.’ उस समय एक करोड़ रुपया बहुत बड़ी बात होती थी. ऐसा मेरे करियर में 2-3 बार हुआ. और जब भी ऐसा होता है, दर्दनाक होता है.”

2. अब रामजी को बचाने की जरूरत आ गई है
अनुभवः – “मुल्क फिल्म की शूटिंग के दौरान शुरू किया था मैंने. ये (गले में भगवा कपड़ा) पहनना, जय श्री राम बोलना. अब मुझे लोग सच्चे मन से जय श्री राम बोलते हैं. मैं फोन करके बोलता हूं तो सामने से वो भी बोलते हैं. एक दिन मेरी कॉस्ट्यूम डिजाइनर ने मुझसे पूछा कि ‘सर आप पिक्चर जो बना रहे हैं वो ये है, और उसके उलट आप दिन भर जय श्री राम करते रहते हैं. तो आपका पोलिटिकल रुझान क्या है?’ मैंने कहा, इसमें पोलिटिकल कुछ नहीं है. मैं रामजी को वापस हासिल कर रहा हूं, reclaim कर रहा हूं. क्योंकि आज से कुछ समय बाद जब वो आतंकी दृश्य इतिहास का हिस्सा रह जाएंगे जिनमें लोगों के हाथ में डंडे और तलवारें हैं और वो जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं तो तो शायद आने वाली नस्ल के पास ये धारणा जाएगी कि जय श्री राम उन लोगों का नारा है. तो वो नारा उनसे छीनना है वापस. क्योंकि जय श्री राम और जय सियाराम तो हमारे बचपन का हिस्सा हैं और वो हिंसक नहीं है. हिंसा से जय श्री राम को कुछ समय से जो जोड़ा गया है, वहां से जय श्री राम को reclaim करना है. मैं हिंदू हूं. मां के साथ मंदिर जाता था. आज भी पूजा करता हूं रोज. उतना गहन भक्त नहीं हूं. मैं इसलिए भी करता हूं क्योंकि मेरी मां करती थीं, अब नहीं हैं इस दुनिया में तो उनकी ओर से करता हूं. लेकिन ऐसा कोई धर्मांध नहीं हूं. धर्म के जो ब्रैंड्स थे वो मलिन हो गए हैं तो उससे बचाने के लिए कर रहा हूं. और ये (गले का कपड़ा) तो मुझे मजबूरन पहनना पड़ रहा है. क्योंकि जैसे ही ‘मुल्क’ का ट्रेलर आया तो कुछ लोगों ने बोला ‘तू एंटी हिंदू है’ – तो मैंने कहा अच्छा ठीक है.”

3. हिंदु-मुसलमान को प्रेम से साथ रहने नहीं दिया जा रहा
अनुभवः – “दरअसल, हिंदुस्तान जो है वो ज़ातों में बंटा हुआ है. ज्यादा टकराव ज़ातों का हैं. लेकिन जब चुनाव आता है जो सारी ज़ातें जुड़ जाती हैं और फिर वो हिंदु-मुसलमान हो जाता है. उस समय सारे हिंदु एक हो जाते हैं. मतलब 2017-18 में अगर पांच-पांच, छह-छह आदमी दो-तीन दलित लोगों को बांध दें और बेंतों में मारने लगें तो ये 2017-18 की बात तो नहीं है यार. ये सारी चीजें बहुत डिस्टर्बिंग रही हैं और मैं सच बताऊं तो ट्रोल या दूसरे लोग जो भी बात कर लें हिंदु-मुसलमान की, मेरी फिल्म ‘मुल्क’ असल में हिंदु-मुसलमान के बारे में है ही नहीं. ये संयोग है कि फिल्म में मुख्य परिवार मुसलमानों का है. ये फिल्म और इसकी कहानी इस बारे में है कि साथ में कैसा रहा जाए, coexist कैसे किया जाए? एक दूसरे को जगह कैसे दी जाए, accommodate कैसे किया जाए? मां से झगड़ा हो जाता है यार! तीन-तीन दिन मां से बात नहीं होती! बाप से झगड़ा हो जाता है, भाई से झगड़ा हो जाता है. पर रहना तो उसी घर में है. परिवार तो वही है ना. तो घुमा-फिरा के हम रास्ते निकाल लेते हैं कि चलो यार ये रात को देर से ही आएगा. माफ करो इसको. उसी परिवार में अगर एक बाहर का आदमी बैठा हो और मुसलसल बार-बार बताता रहे कि यार तु्म्हारा भाई रात को देर से आता है, तो एक दिन तुम्हे भी लगेगा कि यार ये तो बहुत गलत बात है, वो रात को देर से क्यों आता है? तो तुम झगड़ा करने लगोगे. हमको साथ में रहने ही नहीं दिया जाता. और ये चार साल पुरानी खबर नहीं है, ये बहुत पुरानी बात है. ये सत्तर साल से भी पुरानी बात है.”

4. सिखों से सीख लेनी चाहिए सभी को
अनुभवः – “लोग वॉट्सएप पर कोई खबर पढ़ते हैं जो अफवाह होती है और उसके आधार पर दलीलें देते हैं. ‘देखते ही शेयर करें’ जैसे मैसेज आते हैं और उनमें सिर्फ बकवास लिखी होती है. पिछले चार-छह दिन से मेरे दिमाग में ये बात आई और मैं बराबर लोगों से बोल रहा हूं कि सिखों से सीखो. और सिख शब्द असल में सीखने से आया है. जो शिष्य थे वो सिख कहलाए. वो लोग यूं फटाक से निकल गए आगे, 1984 बहुत पुरानी बात नहीं है. उनके साथ अत्याचार हुआ था. बाकायदा अत्याचार हुआ था. और जितनी मेरी जानकारी है, जब दिल्ली में सिलसिला शुरू हुआ तो पंजाब में भी जवाबी कार्रवाही हुई थी लेकिन उसको रोक दिया था बड़े-बुजुर्गों ने कि ये नहीं होगा. और देख लो सिख हमेशा आगे बढ़ जाते हैं. आज की तारीख में सिखों का मुसलमानों से कोई झगड़ा नहीं है. जबकि पहले भयंकर लड़ाई हुई है उनके बीच. हिंदुओं से भी सिखों की भयंकर लड़ाई रही है. पर आज सिखों के मन में कुछ नहीं है.”

5. कितना पैसा कमाते थे कि पापा सुनकर घबरा गए
अनुभवः – “ये बात है 1992-93 की. पिताजी ने पूछा था कि कित्ता पैसा कमा रहे हो? तो मैंने कहा – पापा, कुछ 50-60 हजार रुपए महीना. तो वो घबरा गए थे. मुझे सुनाई दिया कि उनके हाथ से फोन छूट गया. क्योंकि वो तो 12-15 हज़ार रुपया महीने पर अकाउंटेंट जनरल ऑफ इंडिया ऑफिस इलाहाबाद से रिटायर हुए थे. वो बोले – 50-60 हजार रुपये कैसे कमा रहा है वो. कोई गलत काम तो नहीं कर रहा है.”

6. बच्चे इस देश को क्यों गलत दिशा में ले जा सकते हैं
अनुभवः – “जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है तो वो सवाल पूछता है. मेरा भी बेटा है अब 16 साल का. आज कल के बच्चों के साथ ये है कि जनरेशन गैप तीन-चार हो गए हैं. जब वो पूछता है तो उसे बड़ा संभल के जवाब देना पड़ता है. हिंदु-मुसलमान को लेकर सवाल पूछता है. तो उसका स्पष्टीकरण बड़ा कठिन है क्योंकि वो उसकी सोच बनाएगा भविष्य के लिए. इसलिए उसको सस्ते में नहीं बताया जा सकता. उसको फिर बताना पड़ता है पूरा सही से. और वो बहुत ज़रूरी है क्योंकि हमारी जो नई नस्ल तैयार हो रही है, अगर वो वॉट्सएप पर तैयार हुई और अगर मां-बापों ने छोड़ दी वॉट्सएप पर ही उनकी जानकारी, तो अगले पांच-छह साल में जो लोग 24 बरस के होंगे, वो इस देश को बहुत गलत दिशा में ले जा सकते हैं. जो इस वक्त 18-19 साल के हैं मुझे उन लोगों की बहुत चिंता है. क्योंकि अब वो पुराना तरीका खत्म हो गया है कि किसी युवा को कोई बात पता नहीं तो वो ये सोचे कि पढ़कर पता करता हूं. वो खत्म हो गया है. (अब सीखने वाले कहते हैं) जल्दी से बता दो, कैप्स्यूल साइज में.”

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

विधायक विजय मिश्रा, जिन्हें यूपी पुलिस लाने लगी तो बेटियां बोलीं- गाड़ी नहीं पलटनी चाहिए

चलिए, विधायक जी की कन्नी-काटी जानते हैं.

नेशनल हैंडलूम डे: और ये है चित्र देखो, साड़ी पहचानो वाली क्विज

कभी सोचा नहीं होगा कि लल्लन साड़ियों पर भी क्विज बना सकता है. खेलो औऱ स्कोर करो.

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.