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13 साल में सिर्फ 32 मैच खेलने वाला खिलाड़ी, जो ठीक से खेलता तो इंडिया को धोनी न मिलता

कार्तिक को जगह मिली टीम में. दूसरी एंट्री भुवनेश्वर की.

18 मार्च 2018. निदाहस ट्रॉफी का फाइनल. बांग्लादेश को इंडिया ने नहीं, दिनेश कार्तिक ने हराया. आखिरी बॉल पर छक्का लगाकर. सिर्फ आठ गेंदों में 29 रन मारकर. तब, जब भारत मैच लगभग हार चुका था. उस बल्लेबाज़ी की बात करने के लिए बड़े-बड़े लिक्खाड़ों को ढंग के विशेषण नहीं मिल रहे थे.

दिनेश कार्तिक 11 साल से टीम इंडिया का हिस्सा रहे हैं. लेकिन उनके हिस्से बेहद कम मैच आए.

13 साल में 32 मैच. सिर्फ 32 मैच. उसमें से भी एक वर्ल्ड इलेवन वाला. ये संख्या चौंकाती है. पहले क्लियर कर दें कि हम यहां T2o क्रिकेट मैचों की बात कर रहे हैं. इंडिया की 20-20 टीम में एक ऐसा खिलाड़ी भी है, जिसने 13 साल में सिर्फ 32 मैच खेले हैं. दिलचस्प बात ये कि इंडियन टीम के पहले 20-20 मैच में वो ‘मैन ऑफ़ दी मैच’ रहा था.

जिसके बारे में ये ये कानाफूसी आम है कि अगर वो ठीक से परफॉर्म करता, तो इंडियन टीम में महेंद्र सिंह धोनी की एंट्री मुश्किल हो जाती. हां, हम दिनेश कार्तिक की ही बात कर रहे हैं. वही दिनेश कार्तिक जो शाहरुख ख़ान की आईपीएल टीम कोलकाता नाईट राइडर्स से खेलते हैं.

कार्तिक का टीम में आना-जाना लगा रहता है.

1 दिसंबर 2006. इंडिया और साउथ अफ्रीका के बीच जोहान्सबर्ग में हो रहा T20 मैच. ये भारत का पहला T20 मैच था. विरेंदर सहवाग कप्तान थे. साउथ अफ्रीका ने पहले बैटिंग करते हुए 126 रन बनाए. अब आतिशी बल्लेबाज़ी के दौर में ये रन बेहद मामूली भले ही लग रहे हो, उस वक़्त ‘रन-अ-बॉल’ से ज़्यादा का स्कोर अच्छा ही माना जाता था.

चेज़ करने उतरी भारतीय टीम को सहवाग ने थोड़ी सधी शुरुआत दी. लेकिन जल्दी-जल्दी 2 विकेट गिर जाने से थोड़ी टेंशन हो गई थी. आगे चलकर भारत का कोहिनूर साबित हुए महेंद्र सिंह धोनी भी ज़ीरो रन पर अपने स्टंप्स उखड़वा चुके थे. ऐसे में कमान संभाली दिनेश कार्तिक ने. 28 गेंदों में 31 रनों की शॉर्ट लेकिन ज़रूरी पारी खेलकर मैच जिता ले गए. उनको ‘मैन ऑफ़ दी मैच’ आंका गया.

कार्तिक आजकल टीम में विशुद्ध बैट्समैन की तरह खेलते हैं.

11 साल 3 महीने 17 दिन बाद, 18 मार्च 2018 को दिनेश कार्तिक ने वो कर दिया, जिसे दशकों तक याद रखा जाएगा. एक हारा हुआ मैच अकेले जिता दिया. 8 गेंदों में 29 रन मारकर. आखिरी बॉल पर सिक्स मारकर मैच जिताया. ये अकल्पनीय प्रदर्शन था. कोई हैरानी नहीं कि 18 मार्च की रात और 19 मार्च की सुबह दिनेश कार्तिक इंडिया में सबसे ज़्यादा सर्च किए गए होंगे.

हैरानी की बात ये कि ये उनका सिर्फ 19वां मैच था. जबकि इंडिया की टीम तब तक 99 T20 मैच खेल चुकी थी. 11 साल तक एक्टिव रहने के बावजूद किसी खिलाड़ी द्वारा इतने कम मैच खेल पाना थोड़ा अटपटा ज़रूर लगता है लेकिन वजह जगज़ाहिर है. महेंद्र सिंह धोनी.

ये बात कई बार कही जा चुकी है कि दिनेश कार्तिक कभी अपनी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर पाए. अगर वो सही से परफॉर्म करते, तो महेंद्र सिंह धोनी की इंडियन टीम में एंट्री शर्तिया डिले होती. उन्हें महेंद्र सिंह धोनी से पहले मौक़ा मिला था.

कार्तिक ने अपना टेस्ट डेब्यू 3 नवंबर 2004 को किया था और वन डे डेब्यू उससे भी पहले. 5 सितंबर 2004 को. अपने पहले वन डे मैच में वो महज़ एक रन बनाकर आउट हो गए थे. टेस्ट डेब्यू भी उनका कोई ख़ास नहीं रहा था. पहली पारी में 10 और दूसरी पारी में सिर्फ 4 रन बने थे उनसे. उनके फ्लॉप शो के बाद ही टीम इंडिया के दरवाज़े महेंद्र सिंह धोनी के लिए खुल गए.

23 दिसंबर 2004 को उन्होंने अपना पहला वन डे मैच खेला. बांग्लादेश के खिलाफ चिटगांव में. हालांकि धोनी का डेब्यू भी कोई ख़ास नहीं रहा. पहले मैच में वो ज़ीरो पर रन आउट हो गए. अगले दो मैच में मिलाकर सिर्फ 19 रन मार सके. बावजूद इसके उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ वन डे सीरीज़ के लिए चुन लिया गया. आगे सब इतिहास है.

महेंद्र सिंह धोनी, सूरज के आगे तमाम सितारों की चमक फीकी पड़ गई.

सीरीज़ के दूसरे ही मैच में, जो कि धोनी का महज़ पांचवां मैच था, उन्होंने 148 रन ठोक डाले. वो दिन है और आज का दिन, इस आदमी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 90 टेस्ट, 350 वन डे और 98 T20 मैच खेलकर रिटायर भी हो गए. जबकि कार्तिक टीम में आते-जाते रहते हैं.

शानदार बैटिंग के अलावा असाधारण विकेटकीपिंग के बलबूते महेंद्र सिंह धोनी इंडिया की पहली ज़रूरत बन गए. बाकी किसी विकेट-कीपर बैट्समैन के लिए स्कोप ही न बचा. दिनेश कार्तिक, पार्थिव पटेल जैसे खिलाड़ी टैलेंट के बावजूद टीम से बाहर रहने पर मजबूर हो गए. यही देखिए न कि धोनी से पहले टीम में आए कार्तिक के खाते में सिर्फ 26 टेस्ट, 94 वन डे और 32 T20 मैच हैं. हां ये भी है कि टेस्ट में उनकी सिर्फ एक सेंचुरी है और वन डे में एक भी नहीं. चढ़ते सूरज को ही सलाम किया जाता है. यही दस्तूर है.

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