Submit your post

Follow Us

लखीमपुर में किसानों का दावा- हमारे एक साथी के सिर में लगी थी गोली

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को जो कुछ भी घटा, 4 अक्टूबर आते-आते वो वर्ज़न की लड़ाई में तब्दील हो गया. सत्य है तो सही, लेकिन वो आइसक्रीम की तरह अलग-अलग फ्लेवर में उपलब्ध है. संयुक्त किसान मोर्चा और उसके बैनर तले आंदोलनरत किसानों का सच ये है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष उर्फ मोनू मिश्रा ने किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी, जिसके चलते 4 किसानों की मौत हो गई. इसके बाद बवाल हुआ जिसमें चार और लोगों की मौत हो गई – एक ड्राइवर और मिश्रा से जुड़े तीन लोग.

अजय मिश्रा टेनी का सच वही है, जो सलमान का था – भाई गाड़ी नहीं चला रहे थे. अजय मिश्रा कह रहे हैं कि मोनू मिश्रा गाड़ी में ही नहीं थे. किसानों ने गाड़ी पर पथराव किया, इससे चालक का संतुलन बिगड़ा और हादसा हुआ. इसके बाद किसानों के बलवे ने लोगों की जान ली.
अब इन दोनों में से कौन सा वर्ज़न वाकई सच है, उसे ही पुलिसिया भाषा में जांच का विषय कहा जाता है. वैसे ये बात तो सच है ही कि अब तक कुल आठ लोगों की मौत हो चुकी है. चार किसान, अजय मिश्रा से जुड़े चार लोग और एक पत्रकार. चुनाव की दहलीज़ पर खड़े उत्तर प्रदेश में हर सूचना का सियासी मतलब निकाला जा सकता है. घटना के कई वीडियो चल रहे हैं. हम तह तक जाकर बारीकी से पूरी घटना आपको बताएंगे. सबसे पहले ये वीडियो देखिए.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का ये वीडियो 25 सितंबर का बताया जा रहा है. वे कह रहे हैं –

“आप भी किसान हैं. यहां आंदोलन क्यों नहीं फैल गया? ये 10-15 लोग हैं. अगर मैं गाड़ी से उतर जाता तो उनको भागने का रास्ता नहीं मिलता. पीठ पीछे काम करने वाले 10-15 लोग यहां पर शोर मचाते हैं. ऐसे तो अगर कृषि कानून ख़राब होते तो पूरे देश में आंदोलन फैल जाना चाहिए था. क्यों नहीं फैला? मैं ऐसे लोगों को कहना चाहता हूं सुधर जाओ. नहीं तो हम आपको सुधार देंगे. दो मिनट लगेगा केवल.

मैं केवल मंत्री, सांसद या विधायक नहीं हूं. जो लोग विधायक या मंत्री बनने से पहले मेरे बारे में जानते होंगे, वे जानते हैं कि मैं किसी चुनौती से भागता नहीं हूं. जिस दिन मैंने उस चुनौती को स्वीकार करके काम कर लिया, उस दिन बलिया क्या, लखीमपुर तक छोड़ना पड़ जाएगा. ये याद रखिएगा.”

पीछे पोस्टर में जगह का नाम संपूर्णानगर लिखा है. ये लखीमपुर खीरी का कस्बा है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, इसकी सत्यता की हम पुष्टि नहीं करते हैं. मंत्री जी अपने पुराने वर्ज़न की बात कर रहे हैं. इसके लिए हमने सोचा कि थोड़ी रिसर्च कर लें. 2014 के चुनाव में दिए हलफनामे के मुताबिक उन पर दो केस दर्ज हुए थे. एक IPC 302 यानी हत्या का मामला. दूसरा 323, 504 जैसी IPC की धाराओं के तहत यानी मारपीट और जान से मारने की धमकी का केस. दोनों पुराने मामले हैं.

ये भाषा एक मंत्री की है!

खैर, इतने परिचय के बाद वीडियो पर लौटते हैं. इस वीडियो को किस कैटेगरी में रखा जाए, ये आप तय कर लीजिए. क्या एक केंद्रीय मंत्री की इस तरह की भाषा होनी चाहिए?. क्या वो किसानों के खिलाफ गुंडागर्दी की धमकी दे रहे हैं. मंत्री के इस वीडियो को हिंसा भड़काने वाला क्यों नहीं माना जाना चाहिए. इसी देश में और इसी उत्तर प्रदेश में हिंसा भड़काने वाले बयान के आधार पर लोगों पर UAPA लगाई गई है, कई लोगों को सिर्फ इस आशंका के आधार पर जेल में डाला गया है कि वो हिंसा भड़का सकते हैं. सिर्फ आशंका के आधार पर. लेकिन यहां तो मंत्री जी सीधे-सीधे धमकाने वाली बात कह रहे हैं.

मंत्री के इस बयान के विरोध में किसान संगठनों ने काले झंडे दिखाने और प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा था. 3 अक्टूबर का. 3 अक्टूबर को ही क्यों. इस दिन लखीमपुर खीरी के बनबीरपुर में अजय मिश्रा का कार्यक्रम था. बनबीरपुर की प्राथमिक पाठशाला में दंगल का आयोजन था. इसके अध्यक्ष थे अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ऊर्फ मोनू. कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के अलावा यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को भी शामिल होना था. इसलिए लखीमपुर खीरी और आसपास के और जिलों के किसान प्रदर्शन के लिए जुटे. जब किसानों को पता चला कि डिप्टी सीएम हेलिकॉप्टर के बजाय सड़क के रास्ते से आएंगे तो इन्होंने तिकुनिया इलाके में सड़क पर ही काले झंडे दिखाने की योजना रखी. हालांकि प्रदर्शनों को देखते हुए केशव प्रसाद मौर्या और अजय मिश्रा इस रूट से नहीं आए.

घटना के दो वर्जन

यहां तक तो सब ठीक था. आगे जो घटना हुई उसके दो वर्जन हैं. किसानों का कहना है कि जब उन्हें लग गया कि डिप्टी सीएम उस रास्ते से नहीं आएंगे तो उन्होंने प्रदर्शन को खत्म करने का ऐलान कर दिया था. किसान नेता गुरमीत सिंह ने कहा –

“जब जानकारी मिली कि मौर्या जी दूसरे गांव से चले गए हैं तो 3 बजे करीब यहां से स्पीकर पर बताया गया कि गुरुद्वारे से चाय आ गई है तो सभी किसान चाय पीकर अपनी-अपनी जगह प्रस्थान करें. इतने में मैं किसी से बात करने लगा, तब तक मेरे एक साथी ने मुझे धक्का देकर रोड से किनारे गिराया. पलटकर देखा तो गाड़ियां लोगों को उड़ाते हुए चली जा रही थीं.”

 

गुरमीत सिंह का ये भी कहना है कि एक किसान के सिर पर गोली भी लगी है. मरने वाले किसानों में दलजीत भी थे. प्रदर्शन में दलजीत का बेटा भी उनके साथ था. बेटे ने बताया कि कैसे उनके पापा पर गाड़ी चढ़ाई गई. कहा –

“मैं अपने पिता के साथ तिकुनिया में आंदोलन में शामिल होने के लिए गया था. नानपारा से करीब 30 लोग मोटर साइकिल से आंदोलन में शामिल होने गए थे. जब किसान वहां थे, तभी तीन गाड़ियां आईं और मेरे पिता समेत कई किसानों को कुचल दिया. वहां एंबुलेंस न होने पर मैं मोटर साइकिल लेने गया. तब तक एंबुलेंस आई लेकिन रास्ते में ही पिता की मौत हो गई.”

अब बात आती है कि इन तीन गाड़ियों में था कौन. किसानों का आरोप है कि अजय मिश्रा के बेटे मोनू खुद गाड़ी में थे. स्थानीय किसानों ने उसे पहचान लिया था. अब आरोपी मोनू मिश्रा के पक्ष पर आते हैं. इनका कहना है कि गाड़ी तो इनकी ही थी और कार्यकर्ता भी इनके ही थे, लेकिन ये खुद गाड़ी में नहीं थे. उन्होंने कहा –

“4 से 5 कार्यकर्ता लापता हैं. हम वहां जाएंगे, किसानों को रौंद देंगे और फिर आपके सामने सुरक्षित खड़े रहेंगे? वहां गाड़ी हमारी जला दी गई लेकिन हम वहां से टनाटन आ गए? असल में मैं वहां से आया ही नहीं, मैं वहां गया ही नहीं. परसों मैं बनवीरपुर गया था. तब से वहीं था.”

गाड़ी में कौन था?

किसान कह रहे हैं कि मोनू मिश्रा गाड़ी में था, उसने ही गोली चलाई, लेकिन पुलिस ने उसे भगा दिया था. किसान उस वीडियो का भी जिक्र कह रहे हैं जिसमें रविवार की सुबह मोनू मिश्रा पिस्तौल के साथ दिख रहे हैं. हालांकि मंत्री अजय मिश्रा कह रहे हैं कि पिस्तौल रखने में क्या गलत है. अजय मिश्रा ये भी बता रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों ने उनके कार्यकर्ताओं को पीटकर मार दिया, लेकिन किसानों की मौत कैसे हुई, इस पर कह रहे हैं कि वे वहां मौजूद नहीं थे तो कैसे बता पाएंगे.

कुल 8 लोगों की मौत

इस घटना में कुल 8 लोगों की मौत हुई. इनमें 4 किसान, 2 बीजेपी कार्यकर्ता, मोनू मिश्रा का ड्राइवर और स्थानीय पत्रकार शामिल हैं. मृतक किसानों में 20 साल के लवप्रीत सिंह, 35 साल के दलजीत सिंह, 60 साल के छत्तर सिंह और 19 साल के गुरविंदर सिंह शामिल हैं. किसान नेता तेजिंदर सिंह विर्क को गंभीर चोट आईं. उनका इलाज चल रहा है. रमन कश्यप नाम के स्थानीय न्यूज चैनल के पत्रकार की भी मौत हुई है. परिजनों ने दी लल्लनटॉप को बताया कि रमन घटनास्थल पर कवरेज के लिए गए हुए थे. परिजनों का आरोप है कि उनके हाथ में पहले गोली लगी और फिर किसानों के साथ उन्हें भी गाड़ी से कुचल दिया गया.

इनके अलावा मारे गए लोगों में मोनू मिश्रा के ड्राइवर हरिओम मिश्र, लखीमपुर के गढ़ी गांव में बीजेपी के बूथ अध्यक्ष शुभम मिश्र और सिंघावा गांव के बीजेपी कार्यकर्ता श्याम सुंदर की मौत हुई है. इस घटना के बाद किसानों ने रातभर शवों के साथ धरना दिया. मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे मोनू की गिरफ्तारी की मांग की. आज सुबह जाकर मोनू मिश्रा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा 13 और लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ.

किसी को पहुंचने नहीं दिया जा रहा

कल जब इस घटना की खबर आई तो विपक्षी पार्टियों के कई नेताओं ने लखीमपुर खीरी जाने का ऐलान किया. लेकिन यूपी पुलिस ये पुख्ता करने में लग गई कि कोई भी वहां ना पहुंच पाए. नेताओं के घरों के बाहर रात में पहरा बैठा दिया. कांग्रेस महासचिव रविवार रात में ही लखीमपुर के लिए निकली. रात 12 भर वो पुलिस को चकमा देकर आगे बढ़ती रहीं. लेकिन फिर सुबह करीब साढ़े 5 बजे सीतापुर के हरगांव थाना इलाके में प्रियंका को हिरासत में ले लिया गया. उनकी पुलिस से बहस भी हुई. अभी प्रियंका गांधी सीतापुर की पीएसी छावनी में है. उन्होंने भूख हड़ताल का ऐलान किया है.

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी सुबह अपने आवास से निकले, लेकिन पुलिस ने उनको घर से बाहर 100 मीटर दूर ही रोक लिया. उसके बाद अखिलेश वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए. अखिलेश के आवास के बाहर भारी संख्या में मौजूद SP कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया. इस दौरान पुलिस की एक जीप में आग लगा दी गई.

अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव ने भी लखीमपुर जाने का ऐलान किया था. पुलिस उनके घर के सामने थी तो दीवार कूदकर निकल गए. लेकिन वो भी ज्यादा आगे जा नहीं पाए. पुलिस ने हिरासत में ले लिया. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को भी सीतापुर में पुलिस हिरासत में लिया गया. आरएलडी के नेता जयंत चौधरी भी लखीमपुर खीरी के लिए निकले थे. उनके काफिले को भी रोका गया. उनके काफिले को भी रोका गया. लेकिन उन्होंने पुलिस को चकमा दिया. एक वीडियो आया जिसमें वो पैदल जाते दिख रहे हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी लखीमपुर खीरी जाने का ऐलान किया था. लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन की तरफ से उन्हें अनुमति मिली. इस बीच देश के और हिस्सों से भी प्रदर्शन की तस्वीरें वीडियो आए. पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने चंडीगढ़ में राजभवन के बाहर धरना दिया. उन्होंने ट्विटर पर गिरफ्तार किए जाने की बात भी लिखी.

किसान नेता भी रोके गए

अब ये तो हुई राजनेताओं की बात. अब किसान नेताओं की बात करते हैं. भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी को मेरठ में पुलिस ने रोक लिया. खबरें ये भी आईं कि चढूनी को छुड़ाने के लिए हिसार में किसानों ने प्रदर्शन किया. और हरियाणा सरकार में मंत्री कमल गुप्ता को बंधक बना लिया. इसका वीडियो भी ट्विटर पर आया.

हालांकि यूपी में किसान आंदोलन के सबसे बड़े नेता राकेश टिकैत को लखीमपुर खीरी जाने से नहीं रोका गया. बल्कि राकेश टिकैत ने तो यूपी सरकार को इस संकट से निकलने में मदद की. सूत्रों से खबर आई है कि कल राकेश टिकैत ने लखीमपुर खीरी जाने का ऐलान किया था, तब से यूपी के बड़े अधिकारी उनके संपर्क में थे. अधिकारियों ने राकेश टिकैत को सुलह के लिए मनाया. जब किसानों के परिजन शवों को पोस्टम मार्टम के लिए नहीं ले जाने दे रहे थे, तब राकेश टिकैत ने ही मध्यस्तता की. इसके अलावा मुआवजे और जांच की बात पर भी टिकैत ने सरकार और परिजनों में सहमति कराई. मृतकों के लिए सरकार की तरफ से क्या ऐलान हुआ है. एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा –

“न्यायिक जांच हाई कोर्ट के वरिष्ठ रिटायर्ड जज के द्वारा कराई जाएगी. मृतकों के परिजनों को 45 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. घायलों को 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा. मृतकों के घर के एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी.”

बाद में राकेश टिकैत को राजी करके योगी सरकार ने 24 घंटे के भीतर इस मामले को संभाल लिया है. हांलाकि अभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई. इसलिए ये सवाल भी पूछे जा रहे हैं कि टिकैत कैसे यूपी सरकार की बात मान गए. अभी लखीमपुर खीरी में भारी तादाद में फोर्स तैनात है. रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां लगाई गई हैं. वहां इंटरनेट भी कल से बंद ही है.

आखिर में किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भी आपको बता देते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब कृषि कानूनों पर स्टे लगाया जा चुका है, तो किसान क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं. जस्टिस एम खानविलकर और सीटी रवि कुमार की बेंच ने किसान संगठनों से पूछा कि आप किसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हो, सरकार इस तरह के आंदोलनों की इजाजत कैसे दे सकती है. और जब ये कानून लागू ही नहीं हैं तो ऐसे प्रदर्शनों का क्या औचित्य है. सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें किसान संगठनों की तरफ से ही दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहीं. किसान संगठनों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत के लिए याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मार्च में कृषि कानूनों पर स्टे लगा दिया था. प्रदर्शन करना संविधान से मिला बुनियादी अधिकार है. अगर सुप्रीम कोर्ट किसी प्रदर्शन पर सवाल उठाता है तो कोर्ट को ये भी साफ करना चाहिए कि किन परिस्थितियों में प्रदर्शन किया जाना चाहिए और कब नहीं.


लखीमपुर में मंत्री अजय मिश्रा के बेटे ने किसानों पर गोली चलाई?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.