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इरफ़ान के अनमोल किस्से, जो सिनेमा में भी थिएटर करने का जादू किया करते थे

Devendra Ahirwar

एक्टर इरफ़ान का 53 साल की उम्र में निधन हो गया. मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके जाने पर पूरा फिल्म जगत उदास है. देवेंद्र अहिरवार ने उन्हें याद करते हुए भावुक पोस्ट लिखा है. उन्होंने इरफान से जुड़े किस्से भी बताए. देवेंद्र मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड एरिया के छतरपुर शहर से आते हैं. मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा के पहले बैच के पासआउट हैं. देवेंद्र दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में हैं. 


अंदर ही अंदर बहुत कुछ टूट गया है. मैं अपनी ही सांसों का बोझ नहीं उठा पा रहा हूं. सिर गरम है. आंखें इस हद तक भरी हैं कि सैलाब आ जाए. फिर भी सब कुछ संभाले मैं यहां लिख रहा हूं. कायदे से मुझे आपके बारे में कल लिखना था, थोड़ा लिखा भी, पर फिर आपके ही इंटरव्यू देखने लग गया. उसके बाद आपकी ही फ़िल्म क़रीब क़रीब सिंगल का गाना सुनने लगा “तू जान लेले मेरी” और आपने जान ही लेली.

कल मैं आपके लिए दुआ लिख रहा था. आज शांति लिखना पड़ रहा है. नहीं सर ग़लत है. मुझे नहीं पता था कि कुछ घंटों में आप अपनी कहानी का प्लॉट पूरी तरह से बदल देंगे. हममें से कोई भी इसके लिए तैयार नहीं था, एक बात साफ़ कहूं तो हमें ये अंत पसंद नहीं आया. और आज इस धरती की करोड़ों आंखें इसी अंत से डबडबाई हुई हैं.

माना कि आप भारतीय सिनेमा में वो कर गए जो पिछले 100 सालों में कोई नहीं कर पाया और ना कोई कर पाएगा, फिर भी इतनी जल्दी जाने की क्या ज़रूरत थी. आज आपके दोस्त, आपके बैचमेट, आपके चाहने वाले आपके उन दिनों की कहानियां बता रहे हैं, जब आप द इरफ़ान नहीं थे सिर्फ इरफ़ान थे. और उन्होंने ये जादू होते देखा है, पर जादू देखने वालों को शायद ये मालूम नहीं था की जादूगर जादू दिखा कर अपना सामान समेट कर दूसरे सफ़र पर कहीं और निकल जाता है. आज सभी यही महसूस कर रहे हैं.

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अपने थिएटर ग्रुप के साथ इरफ़ान. (फोटो- शरत कुमार)

थिएटर के महान निर्देशक बी.वी. कारंत जी ने सिद्धि और प्रसिद्धि के बारे में बताया था. प्रसिद्धि आप कुछ भी करके पा सकते हैं पर सिद्धि आपको अथाह परिश्रम से और देर से ही मिलेगी. वो सिद्धि पाने वालों में आपका नाम बहुत ऊपर है, इसलिए आज पूरी पूरी दुनिया आपके जाने का शोक मना रही है.

जब टीचर ने इरफ़ान से पूछा कि क्या तुम सो रहे हो और…

आपके बहुत अच्छे दोस्त दिनेश खन्ना सर, हमें क्लास में आपके क़िस्से सुनाते थे. किसी टीचर ने सभी को कोई भी जानवर बनने के लिए कहा. कोई बंदर, कोई भालू, कोई बकरी, कोई गाय और कोई शेर की एक्टिंग करने लगा था. और आप उलटे लेटकर सो गए थे. बहुत देर बाद जब आपने कोई हरकत नहीं की तो टीचर ने आपको जगाया. पूछा, ”इरफ़ान क्या तुम सो रहे हो?”
आपने कहा, ”नहीं सर”
”तो क्या कर रहे थे, कौन सा जानवर बने थे?”
तब आपने कहा था, ”मैं मगरमच्छ बना था. रेत पर धूप सेंक रहा था.”
ये सुनकर सभी लोग हंसने लगे थे.
पर बाद में आपके एक्टिंग को देख कर सभी ने माना की आप कितने रियलिस्टिक एक्टिंग करते थे.

करीब-करीब सिंगल की शूटिंग के दौरान फिल्म डायरेक्टर तनुजा चंद्रा इरफान को कुछ समझाती हुईं. फोटो साभार- तनुजा चंद्रा के इंस्टाग्राम से.
करीब-करीब सिंगल की शूटिंग के दौरान फिल्म डायरेक्टर तनुजा चंद्रा इरफान को कुछ समझाती हुईं. फोटो साभार- तनुजा चंद्रा के इंस्टाग्राम से.

‘मैंने शराब नहीं पी, मेरे कैरेक्टर ने पी थी’

एक और किस्सा थियेटर के महान निर्देशक देवेंद्र राज अंकुर सर सुनाते हैं. एक दिन एक्टिंग क्लास में सभी को दिहाड़ी पर काम करने वाला मज़दूर बनने को कहा गया. सभी कुछ न कुछ कर रहे थे. इनमे इरफ़ान भी थे. तभी शाम 6:30 बजे इरफ़ान ने अपना बैग और कुछ सामान उठाया और क्लास से बाहर चले गए.

टीचर ने पूछा सभी हैं?
किसी ने बोला कि इरफ़ान नहीं हैं.

अगले दिन क्लास में किसी अति अनुशासित छात्र ने सर को बताया की रात को इरफान हॉस्टल में शराब पी रहा था.क्लास शुरू हुई सर ने इरफ़ान से पूछा, ”तुम 6:30 बजे ही कहां चले गए थे, क्लास तो 8 बजे तक थी?”
तब इरफान ने कहा था, ”सर मैं मज़दूर था और मज़दूर 6 बजे तक ही काम करते हैं. इसलिए चला गया था.”
टीचर बोले, ”अच्छा और कल रात को शराब किस ख़ुशी में पी थी?”
इरफ़ान बड़ी ही गंभीरता से बोले, ”सर मज़दूर दिन भर काम करके थक गया था, इसलिए शराब मैंने नहीं पी थी. मेरे कैरेक्टर ने पी थी.”
एक बार फिर यहां इरफान की बातों पर सभी हंसने लगे. पर उनकी बात में सच्चाई थी जो हमेशा बनी रही.

इरफ़ान ने 1988 में सलाम बॉम्बे में एक बेहद छोटे से रोल से अपने करियर की शुरुआत की थी. इससे पहले उन्होंने कई टीवी सीरियल्स किए, जिनमें चाणक्य, भारत एक खोज, चंद्रकांता, सारा जहां हमारा शामिल हैं. फोटो: India Today
इरफ़ान ने 1988 में सलाम बॉम्बे में एक बेहद छोटे से रोल से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. इससे पहले उन्होंने कई टीवी सीरियल्स किए, जिनमें चाणक्य, भारत एक खोज, चंद्रकांता, सारा जहां हमारा शामिल हैं. फोटो: India Today

जब इरफ़ान की वजह से नियम बदलना पड़ा

इरफ़ान के 1987 के नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के बैचमेट थियेटर के कमाल के एक्टर आलोक चटर्जी ने मेरे दोस्त अतिशय मिश्रा से आज फोन पर बताया कि उन्होंने भी एक क़िस्सा शेयर किया. सेकेंड ईयर में आप फ़ोक इनपुट के लिए किसी दूसरे राज्य में गए थे. उस समय के NSD के निदेशक मोहन महर्षि सर ने सभी को डेढ़ महीने तक सिगरेट पीने से मना कर दिया था. ये फरमान उस छोटे से गांव में सभी जगह फैला दिया गया कि कोई भी NSD के छात्रों को सिगरेट बीड़ी और शराब नहीं देगा.

कुछ दिन में दिल्ली से साथ लाई गई सिगरेट बीड़ी ख़त्म हो गई. अब सभी बेचैन थे. इनमे इरफ़ान भी थे. इरफ़ान ने एक शाम क्लास ख़त्म करके गांव के किसी व्यक्ति को ज़्यादा पैसे देकर बीड़ी के बंडल का इंतजाम किया. रात को अपनी गर्लफ्रेंड सुतपा (जो उनकी पत्नी हैं) के साथ खड़े होकर बीड़ी पीते हुए बात कर रहे थे, तभी अचानक किसी ने देख लिया और शोर मचा दिया. तब सारे बैचमेट ने उनका साथ दिया. सिगरेट, बीड़ी की पाबंदी को लेकर हड़ताल कर दी. और दो दिन में ही निदेशक ने नियम बदल दिए.

Irrfan Khan Wifh Sutapa Sikdar In Nsd Play
एनएसडी के दिनों में एक प्ले में अभिनय करते हुए इरफान और सुतपा. (फोटोः सुतपा)

कई नाटकों में डबल कास्ट हुए

इरफ़ान के कोलकाता के बैचमेट अमित बनर्जी ने बताया कि वो और इरफ़ान कई नाटकों में डबल कास्ट हुए हैं (डबल कास्ट मतलब एक ही कैरेक्टर को दो एक्टर्स अलग-अलग दिन परफॉर्म करते हैं) जैसे नाटक ‘डम्ब वेटर’ और ‘एसेंस ऑफ फ्यूजियामा’

‘एसेंस ऑफ फ्यूजियामा’ का निर्देशन कर्नाटक के बहुत बड़े रंगकर्मी, समाजसेवी प्रसन्ना जी ने किया था. अमित जी बताते हैं कि इस नाटक से हमारे बैच का बहुत नाम हुआ. निर्देशक प्रसन्ना भी रातों-रात रंगमंच में संभावना की तरह उभरकर आए और साथ-साथ इरफ़ान भी. 2013 में प्रसन्ना जी की किताब इंडियन मेथड ऑफ़ एक्टिंग के विमोचन के दिन NSD में खुद इरफ़ान ने ये माना था कि उस नाटक ने मेरी ज़िंदगी बदल दी थी. प्रसन्ना जी ही मेरे एक्टिंग गुरू हैं.

नाटक लोअर डेप्थ में एक्टिंग करते इरफान (फोटो स्पेशल अरेंजमेंट)
नाटक लोअर डेप्थ में एक्टिंग करते इरफान (फोटो स्पेशल अरेंजमेंट)

पुस्तक विमोचन के बाद के कश्मीर के बैचमेट भवानी बशीर जी को मैंने खुद इरफ़ान से गले मिलते देखा. पांच मिनट दोनों ने एक दूसरे को गले लगाए रखा. भारंगम चल रहा था. इसलिए बहुत भीड़ थी. वो बुक लॉन्च के बाद NSD के रिसेप्शन से निकलकर गाड़ी में बैठने जा रहे थे, तभी किसी ने सवाल किया, ”सर, ये आपका हाथ कैसे टूट गया?” हंसते हुए उनका जवाब था, ”अरे यार, वो घोड़े को मैं पसंद नहीं आया तो उसने पटक दिया. अब दोस्ती करके जाऊंगा. ”(उस समय वो दिल्ली में साहब बीवी और गैंगस्टर पार्ट-2 की शूटिंग कर रहे थे)

ऐसे हज़ारों किस्से हैं जो लोगों के ज़ेहन में हैं. बहुत लोग आज इस दुःख की घड़ी में इस बारे में बात ही नहीं करना चाहते. अमित बनर्जी जी की आवाज़ में अपने दोस्त को, साथी कलाकार को खो देने का दुःख साफ़ नज़र आ रहा था. ये बहुत कठिन समय है.

इरफ़ान के जाने पर देश-दुनिया से प्रतिक्रियाओं का तांता लगा रहा, जिससे पता चला कि वो कितनी मोहब्बत कमाकर गए हैं. फोटो: Twitter@brahmatmajay/IrrfaK
इरफ़ान के जाने पर देश-दुनिया से प्रतिक्रियाओं का तांता लगा रहा, जिससे पता चला कि वो कितनी मोहब्बत कमाकर गए हैं. फोटो: Twitter@brahmatmajay/IrrfaK

‘इतनी पास से उनकी आंखों को देखना समदर को देखना था’

2015 के जश्न-ए-रेख़्ता में मेरी इरफ़ान सर से एक छोटी सी लेकिन यादगार मुलाक़ात हुई थी. मंच पर शायर शायरी सुना रहे थे. भीड़ बहुत थी, इसलिए कई लोग दूसरे मैदान में लगी स्क्रीन पर इसका आनंद ले रहे थे. उन्हीं लोगों में एक मैं था, तभी अचानक भीड़ आने लगी, शोर होने लगा. कुछ सुरक्षाकर्मी भीड़ को हटा रहे थे. तभी मैंने आपको देखा. बीच की तीन कुर्सियां ख़ाली कराईं गईं. उन तीन लोगों में मैं भी हो सकता था, लेकिन मुझे नहीं हटाया गया. अब मेरे बगल में इरफ़ान साहब बैठे थे. दूसरी बगल में उनका बॉय लकी. अब मुशायरा मेरे हाथ से निकल गया था. मैं पत्थर सा जम गया था. पर लगभग तीस मिनट बाद हिम्मत करके मैंने उनके बॉय से बात करनी शुरू की. हमने एक दूसरे को नाम बताया, ”मैंने पूछा सर कितने दिनों के लिए दिल्ली आए हैं?”

'आपने अपने अंतिम शब्द में कहा- Wait for me सर आपका इंतजार रहेगा हो सके तो थोड़ी जल्दी आना, प्लीज़'.
‘आपने अपने अंतिम शब्द में कहा- Wait for me सर आपका इंतजार रहेगा हो सके तो थोड़ी जल्दी आना, प्लीज़’.

उसने जवाब दिया दो दिन. और बात ख़त्म हो गई. इरफ़ान साहब सिगरेट रोल कर रहे थे. उन्होंने मेरी तरफ़ झुककर लकी से लाइटर मांगा. उसने कहा सर मैंने आपको ही दिया था, शायद आप गाड़ी में छोड़ आए. तब तक मैं सिगरेट पीने लगा था. मैंने जेब में हाथ डाला और बिना कुछ बोले लाइटर उन्हें थमा दिया. तब उन्होंने पहली बार मुझे देखा. इतने पास से उनकी आंखों को देखना समंदर को देखना था.

सिगरेट जलाने के बाद वो मुझे लाइटर वापस करने लगे तो मैंने कहा, ”सर आप रखिए ज़रूरत पड़गी आपको. वो तिरछी मुस्कान से मुस्कराए. मैंने इसी बीच कहा कि वैसे सर मैं स्कूल से हूं. और अब जो हुआ मुझे इसका बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था. वो मेरी तरफ़ पूरी तरह मुड़े. मुझे देखा और मेरे सर पर हाथ रख दिया और बोले, ‘God bless you.’

उस पाक हाथ की गर्मी मुझे आज वापस महसूस हो रही है. अंतर इतना है कि तब आप इतने क़रीब थे और आज इतने दूर.

उस दिन मैं वापस NSD उड़ते-उड़ते आया था.
मुझे उड़ते-उड़ते वापस भेजकर आप इतनी दूर उड़ जाओगे पता नहीं था.
मैंने सुना आपने अपने अंतिम शब्द में कहा- Wait for me
सर आपका इंतजार रहेगा हो सके तो थोड़ी जल्दी आना, प्लीज़.

दूर जाना तो एक बहाना था,
सच तो ये है कि उसे और करीब आना था.


इरफ़ान का वो इंटरव्यू जिसमें पत्नी, बच्चे और उनके बचपन का प्यारा किस्सा मौजूद है

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