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मिशन PSLV-C48 और RISAT-2BR1 की खूबी जानकर मोदी जी का बादल-रडार याद आ जाएगा

दिनभर टीवी पर संसद के नज़ारे रहे. संसद में सिटीज़नशिप अमेंडमेंट बिल पर बहस चल रही है. इसी बीच 3:25 पर नागरिकों और नागरिकताओं को पीछे छोड़ एक सैटेलाइट स्पेस में निकल गई. ISRO की सैटेलाइट – RISAT-2BR1.

हर सैटेलाइट को एक रॉकेट में बिठाकर स्पेस में भेजा जाता है. जो रॉकेट का नाम होता है, वही उस लॉन्च मिशन का नाम भी होता है. इस रॉकेट और मिशन का है PSLV-C48.

10 से उल्टी गिनती 24:34 पर देखिए. मजा आएगा.

PSLV-C48 को ISRO के गर्भगृह श्रीहरिकोटा में मौजूद सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया. 14 दिन पहले 27 नवंबर को यहीं से CartoSAT 3 ले जाने वाला PSLV-C47 लॉन्च हुआ था.

जैसा कि ISRO का पिछले कुछ मिशन्स से रिकॉर्ड रहा है – इस रॉकेट से अपनी RISAT-2BR1 के अलावा 9 विदेशी सैटेलाइट्स भी भेजी गई हैं.

अमेरिका – 6 सैटेलाइट्स
इज़राइल – 1 सैटेलाइट
इटली – 1 सैटेलाइट
जापान – 1 सैटेलाइट

PSLV मतलब अपना देसी रॉकेट. पूरा नाम है Polar Satellite Launch Vehicle. ISRO इतनी सारी सैटेलाइट इसलिए ले जाता है क्योंकि PSLV की पेलोड कैपेसिटी अच्छी खासी है. पेलोड मतलब सैटेलाइट्स, जो रॉकेट के सबसे ऊपरी हिस्से में भरी होती हैं. पेलोड कैपेसिटी मतलब कितने वज़न की सैटेलाइट्स ले जाई जा सकती हैं.

चार सेपेरेशन स्टेज हैं. धीरे-धीरे करके अलग होता है. मेन मटेरियल(सैटेलाइट्स) ऊपर भरा है.
चार सेपेरेशन स्टेज हैं. धीरे-धीरे करके अलग होता है. मेन मटेरियल(सैटेलाइट्स) ऊपर भरा है.

PSLV-C48 से टोटल 10 सैटेलाइट्स भेजी गईं. इनमें से सबसे भारी सैटेलाइट है 628 किलोग्राम की RISAT-2BR1.

RISAT-2BR1 का नाम बहुत देर से बताए जा रहे हैं. अब इसका मतलब और काम बताएंगे.

मोदी जी की फेवरेट सैटेलाइट – RISAT-2BR1

RISAT. इस नाम को तोड़कर देखिए. इसमें SAT का मतलब है सैटेलाइट. और RI का मतलब है Radar Imaging.

ये सैटेलाइट RISAT 1 का रेंडर मॉडल है. RISAT 2 BR1 की ऐसी ही है. (सोर्स - ISRO)
ये सैटेलाइट RISAT 1 का रेंडर मॉडल है. RISAT2BR1 की ऐसी ही है. (सोर्स – ISRO)

RISAT ISRO की रडार इमेजिंग सैटेलाइट्स की एक सीरीज़ है. RISAT-2BR1 इस सीरीज़ की चौथी सैटेलाइट है. इससे पहले जाने वाली सैटेलाइट्स के नाम हैं –

RISAT 1
RISAT 2
RISAT 2B

ये सारी रडार इमेजिंग सैटेलाइट्स हैं.

रडार इमेजिंग क्या होता है?

सैटेलाइट से किसी पृथ्वी की जानकारी लेने का एक तरीका तो ये होता है कि फोटो खींच ली जाए. हाई रिजॉल्यूशन कैमरों से. लेकिन मौसम खराब हुआ तो फोटो कैसे लेंगे? कितने भी हाई रिज़ॉल्यूशन का कैमरा हो, उसके बीचे में बादल आ गए तो किसी काम का नहीं. यहां काम आती है रडार इमेजिंग.

रडार इमेजिंग में रेडियो वेब्स का इस्तेमाल किया जाता है. रडार में एक ट्रांस्मिटर होता है जो रेडियो वेव छोड़ता है. ये रेडियो वेव जाकर ज़मीन से टकराती है और लौटकर रडार तक आती है. इन्हें पकड़ने के लिए एक रिसीवर लगा होता है. इन वापस लौटती रेडियो वेव्स से ज़मीन की डीटेल्स पता चलती हैं.

बहुत सारी जगहों पर यही टेक्नीक यूज़ होती है. समुद्र में गहराई में झांकने के लिए भी. (सोर्स - विकिमीडिया)
बहुत सारी जगहों पर यही टेक्नीक यूज़ होती है. समुद्र में गहराई में झांकने के लिए भी. (सोर्स – विकिमीडिया)

RISAT-2BR1 में सिंथेटिक अपर्चर रडार लगाया गया है. इस रडार का रिज़ॉल्यूशन है – 35 सेंटीमीटर. रिज़ॉल्यूशन 35 सेंटीमीटर होने का मतलब है कि अगर दो चीज़ें 35 सेंटीमीटर की दूरी पर रखी हुई हैं तो ये रडार उनमें फर्क पहचान सकता है. ISRO की ये सैटेलाइट खराब मौसम में बादलों के होते हुए भी पूरी जानकारी लेता रहेगा. ये सुनकर मोदी जी के चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी.

बालाकोट स्ट्राइक के बाद मोदी जी बादलों और रडार पर बहुत चर्चित बयान दिया था. (सोर्स - बिज़नेस टुडे)
बालाकोट स्ट्राइक के बाद मोदी जी बादलों और रडार पर बहुत चर्चित बयान दिया था. (सोर्स – बिज़नेस टुडे)

RISAT-2BR1 क्या करेगी?

RISAT-2BR1 को पृथ्वी की सतह से 576 किलोमीटर ऊपर एक ऑर्बिट में छोड़ा गया है. ये ऑर्बिट पृथ्वी के इक्वेटर(भूमध्य रेखा) से 37 डिग्री का कोण बनाएगा.

ISRO के मुताबिक इसका इस्तेमाल तीन जगहों पर किया जाएगा –

Agriculture – खेती
Forestry – वन विज्ञान
Disaster Management – आपदा प्रबंधन

ये टीडी ज्वालामुखी की रडार इमेज है. इसे खींचा है नासा के SIR-C/X-SAR रडार ने. कुछ टेक्नीक्स का इस्तेमाल कर रेडियो वाले डेटा को फोटोज़ में कनवर्ट कर लिया जाता है.
ये टीडी ज्वालामुखी की रडार इमेज है. इसे खींचा है नासा के SIR-C/X-SAR रडार ने. कुछ टेक्नीक्स का इस्तेमाल कर रेडियो वाले डेटा को फोटोज़ में कनवर्ट कर लिया जाता है.

हालांकि कुछ अनऑफिशियल सोर्सेज़ बताते हैं कि डिफेंस और मिलिट्री स्ट्रेटेजी में भी इसका काम लिया जाएगा. ऐसी चीज़ों को ऑफिशियली बताया भी नहीं जाता. ये अनुमान ही होते हैं. टीवी पर इन अनुमानों को एग्ज़ेजेरेट करके इसे दुश्मन पर नज़र रखने वाली सैटेलाइट करार दिया जाता है. CartoSAT 3 के साथ भी यही हुआ था. RISAT-2BR1 के साथ भी यही हुआ.

आगे क्या करेगा ISRO?

जितनी ज़्यादा सैटेलाइट्स होती हैं, उतने ज़्यादा इलाके पर नज़र रखी जा सकती है. RISAT सीरीज़ की दो सैटेलाइट्स अभी बाकी हैं – RISAT-2BR2 और RISAT-1A. इन्हें अगले साल लॉन्च किया जाएगा. ISRO चीफ के सिवन ने कहा – ये इस साल का आखिरी लॉन्च था. हम आशा करते हैं कि अगला साल और सफलता लेकर आएगा.


वीडियो – जानिए CartoSAT 3 समेत 14 सैटेलाइट्स लॉन्च करने वाले PSLV-C47 मिशन के बारे में

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