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पेट्रोल बम की 81 साल पुरानी हिस्ट्री जानकर कहेंगे 'ओह माय गॉड'!

दर्जनों मौतें. ख़ूब आग और राख. भीड़, गुस्सा और नारे. हर दिन बढ़ते मौत के आंकड़े. ये पढ़कर दिमाग़ में हालिया दिल्ली का चेहरा आता है. लेकिन हम 81 साल पहले की बात कर रहे हैं. क्यों? क्योंकि आजकल ख़बरों में ‘पेट्रोल बम’ है. मोलोतोव कॉकटेल. नाम से ऐसा लगता है जैसे कोई कूल सी पार्टी ड्रिंक हो. लेकिन इस नाम की भी अपनी कहानी, अपना इतिहास है. बोतल के मुंह में ठूंसा कोई चीथड़ा और आग. दिल्ली हिंसा में टीवी अखबारों में ये शब्द ख़ूब देखा पढ़ा गया. इस सस्ते बम का इतिहास पुराना है. 81 साल पुराना.

# क्या है ये मोलोतोव कॉकटेल?

दूसरा विश्वयुद्ध. साल 1939. सोवियत रूस लगातार हावी होता हुआ. फिनलैंड पर चढ़ाई की. फिनलैंड के पास ज़्यादा ताक़त नहीं थी. बल्कि रूस के मुकाबले कुछ भी नहीं थी. बस दिन गिनने बाक़ी थे. फिनलैंड के लोगों समेत लड़ाके भी ‘फ़ीनिश’ कहलाते थे. फीनिश लड़ाकों का इम्तेहान रूस के T-26 और T-28 टैंक लेने वाले थे. तब तक दुनिया भर में गिनती के मुल्क थे जिसके पास इन टैंकों का कोई जवाब था. फिनलैंड के सिपाहियों के पास एंटी-टैंक हथियारों के नाम पर वो गोलियां थीं जिन्हें रूसी टैंक हंसते-हंसते झेल जाते.

रशियन टैंकों के जवाब में अपनी वर्दी में पिस्तौल की जगह पेट्रोल बम खोंसे हुए. इस बोतल ने विश्वयुद्ध का पूरा खाका बदल के रख दिया था (तस्वीर Renuix साभार)
रशियन टैंकों के जवाब में अपनी वर्दी में पिस्तौल की जगह पेट्रोल बम खोंसे हुए फीनिस लड़ाके. इस बोतल ने विश्वयुद्ध का पूरा खाका बदल के रख दिया था (तस्वीर Renuix साभार)

# और फिर एक बयान

फिनलैंड को रूस के टैंकों से ही नहीं बल्कि हवा में उड़ते लड़ाकू जहाज़ों से भी लोहा लेना था. जब फिनलैंड पर लगातार हवाई बमबारी की बात उठी तो रूस की तरफ़ से अजीब सा बयान आया. रूस के विदेश मंत्री Vyacheslav Molotov (व्याशेला मोलोतोव) ने रेडियो मॉस्को पर एक बयान दिया. मोलोतोव ने कहा कि हम फिनलैंड पर बम नहीं बल्कि आलू और ब्रेड बरसा रहे हैं. फीनिश लोगों को ग़लत फहमी है कि रूसी जहाज़ों से बम गिराए जा रहे हैं. फिनलैंड के लोगों ने तब मज़ाक में ही रूसी हवाई बमों को Molotov bread baskets कहना शुरू कर दिया. फीनिश आपस में मज़ा लेते हुए कहते थे कि रूस उनके यहां रोटी की टोकरियां बरसा रहा है. Molotov का रशियन मतलब होता है ‘हथौड़ा’. रूसी विदेश मंत्री के बारे में कहा जाता था कि आप सिर्फ़ अपने ताबूत में इस्तेमाल होने वाली कीलों की फ़िक्र करो. हथौड़ा रूस के पास है.

मोलोतोव और स्टालिन दोनों ने मिलकर फीनिश लड़ाकों पर जम के आग बरसाई (तस्वीर Russian cob mag साभार)
मोलोतोव और स्टालिन दोनों ने मिलकर फीनिश लड़ाकों पर जम के आग बरसाई (तस्वीर Russian cob mag साभार)

# और फिर स्वागत

रूस के हिसाब से वो फिनलैंड को आज़ाद कर रहे थे. रूस का कहना था कि उनकी रेड आर्मी फिनलैंड को आज़ाद कर रही है. जो एक बड़ा एहसान जैसा था. हिटलर और मुसोलिनी के इंतज़ार में फीनिश लड़ाके कब तक बैठते. कुछ दिन तक उन्होंने रूसी टैंकों को बारीकी से देखा. और दैत्याकार टैंकों की एक बड़ी कमी उन्हें दिख गई. उस वक़्त तक सारे टैंक डीज़ल से चला करते थे. और उनका सामना उनके आगे आकर नहीं किया जा सकता था. टैंक का जवाब एंटी टैंक या टैंक ही हो सकता था.

# और फिर तबाही

फीनिश लड़ाकों ने ये समझ लिया कि इन टैंकों के पीछे इनका इंजन होता है. ठीक पीछे. और इंजन के पास ही डीज़ल की मेन सप्लाई लाइन होती है. पहली बार फीनिश लड़ाकों में से ये किसने किया इसका रिकॉर्ड तो इतिहास में नहीं है. लेकिन अचानक से एक रूसी टैंक फ्रंट लाइन पर भभक उठा. रूसी हैरान रह गए. न तो सामने कोई सिपाही था. न कहीं कोई दुश्मन का टैंक और एंटी टैंक का तो सवाल ही नहीं था. लेकिन फिर रूसी टैंक तबाह कैसे हुआ.

इसका सिंपल जवाब था कि उस वक़्त टैंक का दुश्मन आग या चिंगारी नहीं थी. बल्कि टैंक के पिछवाड़े की वो पाइप लाइन थी जो मेन डीज़ल टैंक को इंजन से जोड़ती थी. इन लड़ाकों ने उस पाइपलाइन पर पेट्रोल बम फेंके. इस पाइप लाइन का जलना मतलब टैंक का काम पैंतीस होना. इसके बाद फीनिश लड़ाकों ने रूस के टैंकों की वो लंका लगाई कि रूस के टैंक पटाखा बन गए और फीनिश सैनिकों ने एक के बाद एक दर्जनों पटाखे छुड़ाए.

एक फीनिश लड़ाका अपनी कमर में एंटी टैंक बम के तौर पर सस्ते पेट्रोल बम बांधे हुए (तस्वीर NYT साभार)
एक फीनिश लड़ाका अपनी कमर में एंटी टैंक बम के तौर पर सस्ते पेट्रोल बम बांधे हुए (तस्वीर NYT साभार)

फिनलैंड के अखबारों में छपा कि रूस के विदेश मंत्री आलू बरसा रहे थे और रेड आर्मी हमें आज़ादी देने आई थी तो मेहमानों का स्वागत भी करना था. इसलिए उन्हें वही दिया गया जो हमें मिला था. molotov basket के जवाब में Molotov Cocktail.

अब सवाल उठता है कि cocktail क्यों? क्योंकि शराब तो ज्वलनशील है ही. भभक के आग पकड़ती है. लेकिन फीनिश लड़ाकों ने एक और प्रयोग किया. बोतल में पेट्रोल और शराब दोनों भर के इसे बम बना दिया. तो Molotov के नाम पर दुनिया भर में कुख्यात पेट्रोल बम का नाम पड़ा Molotov Cocktail.

# और फिर दुनिया ने एक आविष्कार देखा

ये देसी नुस्खा विश्व युद्ध से निकला. दुनिया भर में सबसे सस्ता लेकिन सबसे मारक हथियार बनकर इस आविष्कार ने अपनी पहचान बनाई. आविष्कार होते ही इस हथियार ने 115 दिन में 350 टैंक तबाह कर दिए. ऐसा कभी नहीं हुआ कि बिना गोली और एंटी टैंक के इतने सारे टैंक मार गिराए गए हों.

पेट्रोल बम जैसा सस्ता सुविस्ता लेकिन मारक हथियार दुनिया ने अब तक नहीं देखा है (तस्वीर AFP)
पेट्रोल बम जैसा सस्ता सुविस्ता लेकिन मारक हथियार दुनिया ने अब तक नहीं देखा है (तस्वीर AFP)

# और अंत में प्रार्थना

शराब की बोतल को आग लगाकर दुनिया ने एक हथियार बनाया. एक झूठ की वजह से इसका नामकरण हुआ. अब मुंह ढंके लोग एक हाथ में फास्ट बोलर वाले ऐक्शन के साथ इसे फेंकते अखबारों की तस्वीर बनते हैं. किसने सोचा था कि बोतलें ख़ाली होने के बाद भी किसी का घर जला सकती हैं. लेकिन Molotov Cocktail उर्फ़ पेट्रोल बम यही करता है. न करे. इसकी कोशिश होनी चाहिए.


वीडियो देखें: 

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