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विधायकों की सैलरी का ये 'हिसाब' देख लेंगे तो कपार चकरा जाएगा

जब विधानसभा चुनाव होते हैं, तो बहुतेरे चुने गिने जाते हैं और पहुँचते हैं विधानसभा. गाड़ी और घर के आगे प्लेटें लगती हैं. लिखा होता है ‘विधायक’. इन विधायकों को काम करने के लिए सैलरी भी मिलती है और भत्ते भी. क्षेत्र में काम कराने वास्ते विधायक निधि भी मिलती है. इस पूरे गणित पर तफ़सील से बात करेंगे लेकिन पहले बहाना बता देते हैं कि बात क्यों करेंगे. दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने विधायकों की सैलरी बढ़ाई है. लगभग 60 परसेंट तक. पहले  54 हजार रुपए मिलते थे, अब मिलेंगे लगभग 90 हज़ार रुपये.कैबिनेट ने 3 अगस्त को इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी.

दिल्ली में विधायकों की बेसिक सैलरी अब 30 हज़ार रुपये होगी, पहले ये 12 हज़ार रुपये तक थी. वहीं, वेतन-भत्ता मिलाकर ये सैलरी 90 हज़ार रुपये हो जाएगी, जो अभी तक 54 हज़ार रुपये थी. साल 2015 में दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने सभी विधायकों की सैलरी बढ़ा कर लगभग 2 लाख रुपए करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था. लेकिन सैलरी को इतना बढ़ाने से केंद्र सरकार ने मना कर दिया था. केंद्र सरकार ने ये सुझाव भी दिया था कि सैलरी को बढ़ा कर 90 हजार रुपए कर सकते हैं. अब दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने इसी सुझाव पर मुहर लगा दी है.

दिल्ली के विधायकों का नया सैलरी स्ट्रक्चर कुछ ऐसा होगा

– बेसिक वेतन- 30 हज़ार रुपए प्रति माह
– चुनाव क्षेत्र भत्ता- 25 हज़ार रुपए प्रति माह
– सचिवालय भत्ता- 15 हज़ार रुपए प्रति माह
– वाहन भत्ता- 10 हज़ार रुपए प्रति माह
– टेलीफोन- 10 हज़ार रुपए प्रति माह

कुल सैलरी- 90 हज़ार रुपए

बाकी राज्यों में विधायकों की सैलरी का क्या हाल है?

देश भर में कई राज्य ऐसे हैं जहां पर विधायकों को दिल्ली के मुकाबले ज्यादा सैलरी मिल रही है. हालांकि कई ऐसे राज्य भी हैं जहां दिल्ली के मुकाबले विधायकों को काफी कम सैलरी मिल रही है. तेलंगाना एक ऐसा राज्य है जहां विधायकों को सबसे ज्यादा यानी 2 लाख 50 हजार रुपए महीने की सैलरी मिल रही है. दूसरी तरफ पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा के विधायकों को देश में सबसे कम यानी 25 हजार 890 रुपए की सैलरी मिल रही है.

दिल्ली के मुकाबले ज्यादा सैलरी पाने वाले 5 राज्य ये हैं

तेलंगाना- 2 लाख 50 हज़ार रुपए
राजस्थान- 1 लाख 42 हज़ार 500 रुपए
आंध्र प्रदेश- 1 लाख 25 हज़ार रुपए
गुजरात- 1 लाख 5 हज़ार रुपए
यूपी – 95 हज़ार रुपए

दिल्ली के विधायकों से कम सैलरी पाने वाले विधायक

मिजोरम – 65 हजार रुपए
नागालैंड – 35 हजार रुपए
त्रिपुरा – 25 हज़ार 890 रुपए

लेकिन कहानी और भी है

अब आपको लगेगा कि चुनाव तो इतना भारी भरकम होता है. कई सौ करोड़ खप जाते हैं. केवल इसी लाख पचास हज़ार की सैलरी के लिए? लेकिन नहीं. अब दिल्ली में विधायकों की 90 हजार की सैलरी में भले ही सभी मद जुड़े हों, लेकिन अन्य राज्यों के मामले में ऐसा नहीं है. ज्यादातर राज्यों में मूल सैलरी के अलावा मद में काफी कुछ मिलता है. इसके अलावा दूसरी सुविधाएं अलग से. विधायकों को प्रमुख रूप से जो सुविधाएं मिलती हैं उसमें शामिल हैं.

# प्रदेश की राजधानी में रहने के लिए मकान

# विधानसभा सेशन के दौरान सदन करने पर अलग से भत्ता

# प्रदेश में आने-जाने के लिए रेल-बस के किराए में छूट

इस पूरे सिस्टम को समझने के लिए उदाहरण के तौर पर एक और प्रदेश के विधायकों का उदाहरण लेते हैं. छत्तीसगढ़  ने 2020 में अपने विधायकों की सैलरी और भत्तों का ब्योरा कुछ इस प्रकार दिया है.

मूल वेतन – 20 हजार रुपए प्रति माह
चुनाव क्षेत्र भत्ता – 30 हजार रुपए प्रति माह
टेलिफोन भत्ता – 5 हजार रुपए प्रति माह
ऑर्डरील भत्ता – 15 हजार रुपए
डेली भत्ता – 1000 रुपए प्रति दिन
मेडिकल भत्ता – 10 हजार रुपए प्रति माह

# इसमें से डेली भत्ता हर विधायक को विधानसभा की कार्यवाही अटेंड करने और किसी कमेटी की मीटिंग अटेंड करने पर मिलता है. ये भत्ता सिर्फ उस दिन के लिए नहीं मिलता जिस दिन वह ऐसा करता है. मीटिंग या कार्यवाही के एक दिन पहले और एक दिन बाद की तारीख जोड़ कर भत्ता दिया जाता है.

# विधायक अगर अपने वाहन से विधानसभा की कार्यवाही या मीटिंग अटेंड करने जाता है तो उसे 10 रुपए प्रतिकिलोमीटर के हिसाब से गाड़ी भत्ता दिया जाता है.

# 10 लाख रुपए का एक्सीडेंट बीमा भी मिलता है.

# हर विधायक को साल भर में 8 लाख रुपए के यात्रा कूपन मिलते हैं. इनके जरिए रेल और हवाई यात्रा की जा सकती है. इसमें विधायक के साथ एक सहायक भी जा सकता है.

# राज्य सरकार की बसों में चलने के लिए फ्री पास. अगर किसी दूसरी बस में यात्रा की है तो भाड़े की रसीद लगा कर उसका खर्च वापिस मिल सकता जाता है.

# राजधानी में विधायकों के लिए बना मकान अलॉट होता है. अगर मकान नहीं मिल पाता तो हर महीने मकान के किराए के तौर पर 30 हजार रुपए रुपए मिलते हैं.

# 5 साल के कार्यकाल में कार खरीदने के लिए लोन पर सब्सिडी मिलती है. 20 लाख रुपए की गाड़ी खरीदने के बाद सिर्फ 3 फीसदी के दर से रकम विधायक को भरनी होगी. इसके ऊपर के ब्याज की रकम सरकार भरेगी. अमूमन कार पर बैंक 8-9 फीसदी ब्याज लेती हैं.

# हर साल के हिसाब से 15 लाख रुपए मकान के लिए लोन ले सकते हैं. मतलब 5 साल के कार्यकाल में 75 लाख रुपए का होम लोन कोई भी विधायक ले सकता है. लोन पर विधायक को 2 फीसदी ब्याज ही देना होता है. इसके ऊपर के ब्याज का पैसा सरकार भरेगी

बेसिक सैलरी इतनी कम क्यों?

उदाहरणों की फ़ेहरिस्त देख लीजिए. बेसिक सैलरी बहुत कम है, भत्ते जोड़जाड़कर बहुत ज़्यादा. लगभग सभी राज्यों ने बेसिक सैलरी काफी कम रखी है. इसका कारण ये है कि इस बेसिक सैलरी पर टैक्स देना पड़ता है. मूल वेतन कम होगा तो टैक्स भी कम देना होगा. केरल के एमएलए की बेसिक सैलरी सिर्फ 2 हजार रुपए ही है. कुल सैलरी लगभग 70 हजार रुपए है.

तो ये है बेसिक मामला. हर राज्य में अलग. कहीं ज़्यादा तो कहीं कम.


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