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अरविंद केजरीवाल, आतंकवादी हैं या अराजकतावादी?

शाहरुख खान. सदी का सितारा. DDLJ. दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे. शाहरुख की सितारा फ़िल्म. इस फ़िल्म का एक सीन. राज को लगी तड़ बियर की. दुकान सिमरन के बाप की. राज पहुंचा दुकान पर. मांगी बियर. दुकान हो रही थी बंद. दुकानदार कड़क अमरीश पुरी. भारी आवाज़ में मना किया. राज का मन भारी हो गया. राज ने खेली ट्रिक. बोला ‘सिर दर्द की दवा तो दे सकते हो?’. विदेश में इंडियन ही इंडियन के काम आता है. ऐसा सिमरन के बाप को लगता था. सिमरन का बाप जब तक सिर दर्द की दवा निकालता, राज ने काउंटर पे फेंके पईसे, उठाई बियर और मिल्खा हो गया. मतलब फुर्र.

यहीं पर राज हो गया अराजक. क़ायदे से क़ायदा तोड़ कर. सिमरन के बाप की नज़र में लुच्चा राज. कबूतर को हुर-हुराते हुए जो राज ने दाना डाला ना होता तो सिमरन के बाप का राज की अराजकता में विश्वास अखण्ड रहता. लेकिन पिच्चर थी. तो अराजक को राज दिखाना ही था. दिखाया. पूरी स्टोरी यहां डिस्कस नहीं कर सकते. बाद में आप लोग गरियाते हो कि ‘स्पोईलर’ दे दिया. बीस साल तक मराठा मंदिर में चलने के बाद भी अब तक ना देखी हो तो टीवी ऑन कल्लो, कहीं ना कहीं आ रही होगी.

अब तक नहीं देखी तो अब क्या ही देखेंगे फ़िल्म! फ़िलहाल ये सीन तो देख ही लीजिए, एक झलक ही सही (तस्वीर इसी फ़िल्म का यूट्यूब ग्रैब)
अब तक नहीं देखी तो अब क्या ही देखेंगे फ़िल्म! फ़िलहाल ये सीन तो देख ही लीजिए, एक झलक ही सही (तस्वीर इसी फ़िल्म का यूट्यूब ग्रैब)

तो ये वाला सीन क्यों डिस्कस किया? वजह है अराजकता. माने ‘जहां राज ना हो’. लेकिन राज का फोकस था बियर पे. आजकल जनता का फोकस है ‘अराजकता’ पर. ख़ूब बात हो रही है इस पर. देश में अभी एक ही पिच्चर हिट है. दिल्ली चुनाव. अब आप कहेंगे दिल्ली चुनाव से अराजकता का क्या लेना-देना? तो हम आपको सारा गुणा गणित समझाए देते हैं.

# कहां से शुरुआत हुई ‘अराजकता’ की

प्रकाश जावड़ेकर. भाजपा की ओर से दिल्ली चुनाव प्रभारी हैं. चुनाव प्रचार में रमे हैं. 3 फरवरी को भाषण दिया. और केजरीवाल पर हल्ला बोला. कहा –

केजरीवाल अब एकदम मासूम चेहरा करके पूछ रहे हैं कि क्या मैं आतंकवादी हूं? तो मैं कहना चाहता हूं कि आप आतंकवादी हो इसके बहुत सबूत हैं. आपने ख़ुद कहा था कि मैं अराजकवादी हूं. अराजकवादी और आतंकवादी में बहुत ज़्यादा अंतर नहीं होता. आज केजरीवाल की पार्टी शाहीन बाग़ का समर्थन करती है. हम पूछना चाहते हैं कि क्या समर्थन कर रहे हो? असम की आज़ादी, जिन्ना वाली आज़ादी, भारत तोड़ने के जहां नारे लग रहे हैं ऐसे शाहीन बाग़ का समर्थन करना भी आतंकवाद है.

भाषण में दो चीज़ें फोकस करने लायक़ हैं. पहली कि ‘आपने ख़ुद कहा था कि मैं अराजकवादी हूं…’ मतलब प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि केजरीवाल ने ख़ुद ही अपने आपको अराजक कहा. और दूसरी कि ‘अराजकवादी और आतंकवादी में बहुत ज़्यादा अंतर नहीं होता…’ पहली पे पहले बात करेंगे. तो सवाल बनता है कि ये बात ठीक है क्या? जवाब जानने के लिए चलिए साल 2014 में.

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ प्रकाश जावड़ेकर. इनका कहना था कि केजरीवाल को अब जनता आतंकवादी साबित करेगी
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ प्रकाश जावड़ेकर. इनका कहना था कि केजरीवाल को अब जनता आतंकवादी साबित करेगी

# धरने पर मुख्यमंत्री

सुशील कुमार शिंदे गृहमंत्री थे. गृहमंत्रालय जाकर धरना देना चाहते थे अरविंद केजरीवाल. मुख्यमंत्री केजरीवाल. पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया. केजरीवाल रेल भवन के पास ही धरने पर बैठ गए. उन्होंने ट्वीट किया कि ‘मैं चाहता हूं आप सब आएं और इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनें. धरना देने निकले थे सीएम केजरीवाल.

पुलिस ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को वहां से भी हटने का आदेश दिया. पुलिस का कहना था कि मुख्यमंत्री को जंतर-मंतर पर धरना देना चाहिए. जो कि धरने और विरोध प्रदर्शन के लिए ही बना है. केजरीवाल ने हटने से मना कर दिया. तब केजरीवाल ने कहा ‘वो मुझे अराजकतावादी कहते हैं. हां, मैं हूं अराजकतावादी. आज मैं शिंदे साहब को अपनी अराजकता दिखाऊंगा’

नए बने मुख्यमंत्री ने हफ़्ते भर के अंदर ही सड़क का रास्ता चुन लिया व्यवस्था ठीक करने के लिए. और ख़ुद को 'अराजकतावादी' कहा. साथ में हैं मनीष सिसोदिया
नए बने मुख्यमंत्री ने हफ़्ते भर के अंदर ही सड़क का रास्ता चुन लिया व्यवस्था ठीक करने के लिए. और ख़ुद को ‘अराजकतावादी’ कहा. साथ में हैं मनीष सिसोदिया

लेकिन ऐसा क्या था कि नए नवेले मुख्यमंत्री को ख़ुद को ही अराजक कहना पड़ा. वजह थी पुलिस. वही दिल्ली पुलिस जो केजरीवाल के धरने को रेल भवन से हटाने की कोशिश कर रही थी. कर तो वो और भी कुछ चुकी थी. इसी किए धरे से पैदा हुआ था ये धरना. केजरीवाल का कहना था कि दिल्ली पुलिस राज्य सरकार के मंत्रियों का आदेश मानने से साफ़ मना कर रही है. अगर राज्य सरकार के आदेश दिल्ली पुलिस को नहीं मानने तो फिर व्यवस्था कैसे काम करेगी?

व्यवस्था. ये शब्द याद रखिएगा. आगे काम आएगा. अराजकता तभी समझ आएगी.

पुलिस अधिकारी के साथ बकझक करते तब दिल्ली के क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती
पुलिस अधिकारी के साथ बकझक करते तब दिल्ली के क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती

असल में व्यवस्था जांचने निकले थे नए क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती. एक जगह जाकर दिल्ली पुलिस से मंत्री जी भिड़ लिए. वजह थी कि सोमनाथ भारती कुछ विदेशियों को गिरफ़्तार करने की मांग कर रहे थे. दिल्ली पुलिस मना कर रही थी. सोमनाथ भारती का कहना था कि उन्होंने ख़ुद छापा मार के युगांडा के इन नागरिकों को सेक्स और ड्रग्स से जुड़ी हुई अवैध गतिविधियों में लिप्त पाया है. बहरहाल, वहां जो हुआ सो हुआ. बाद में नई ‘आप सरकार’ की एक और मंत्री राखी बिडलान ने भी दिल्ली पुलिस पर ये आरोप लगाया था कि पुलिस आदेश नहीं मान रही. योगेंद्र यादव ने तब जवाब में कहा था ‘एक व्यक्ति था मोहनदास करमचंद गांधी, जो अराजकतावादी था’.  इससे पहले अगस्त 2013 में भी ‘अराजक’ शब्द इस्तेमाल हुआ था. उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राज्यसभा में व्यवधान डाल रहे सदस्यों से हताशा में कहा ‘क्या सदस्य सदन को अराजकतावादियों का संघ बनाना चाहते हैं?’

# अब दूसरा सवाल

क्या अराजकता, अराजकतावाद, अराजकतावादी और ‘आतंकवाद’ एक जैसी चीज़ें हैं? उसका जवाब सुनने से पहले चलिए साल 1929 में. गुलाम भारत. आज़ादी का आन्दोलन. नरम-गरम दल. अगस्त का महीना. 8 अगस्त 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने दिल्ली के असैम्ब्ली हॉल में जनता विरोधी बिलों ‘ट्रेड डिस्प्यूट बिल’ और ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ के ख़िलाफ़ 2 बम धमाके किए. बम तो फोड़ा ही पर्चे भी बांटे. असल में बम धमाके का इस्तेमाल ही इसलिए हुआ कि पर्चे बांटे जा सकें. उस पर्चे में एक संदेश था. लंबा संदेश. लेकिन आप फ़िलहाल उसकी पहली लाइन पढ़िए.

‘बहरों को सुनाने के लिए बहुत उंची आवाज़ की आवश्यकता होती है, प्रसिद्ध फ्रांसीसी अराजकतावादी शहीद वैलियां के ये अमर शब्द हमारे काम के औचित्य के साक्षी हैं.’

अब आप सोचिए कि इसमें अराजकतावादी शब्द क्यों आया? क्यों शहीद भगत सिंह ने एक मशहूर अराजकतावादी के शब्दों को साक्षी रखा. वजह है इस शब्द का अर्थ. इसकी परिभाषा.

# और वो क्या है?

अराजकतावाद असल में राजनीति का एक दर्शन है. जहां किसी संस्था या व्यवस्था से भरोसा उठ जाता है. आम बोलचाल में इसे कहेंगे अव्यवस्था. जहां व्यवस्था नहीं होती. जहां राज नहीं होता. राज का मतलब राजा का राज नहीं. व्यवस्था, नियम, क़ायदे का राज. जिसे चंद बियर की बोतलों के लिए राज ने तोड़ा. सिमरन के बाप के सामने. तो इससे एक बात तो ज़ाहिर है कि अराकता या अराजकतावाद या आतंकवाद एक जैसे नहीं हैं. इनमें बुनियादी फ़र्क है.

फ्रांस के अराजक कहे जाने वाले नेता पियरे जोसेफ प्रूडन ने सबसे पहले इस शब्द का इस्तेमाल किया था. Anarchy. इसका हिंदी अर्थ हमने निकाला अराजकता. प्रूडन ने जहां ये शब्द इस्तेमाल किया था वो बात थी –”अराजकता-किसी स्वामी या सार्वभौम का न होना-ऐसा ही सरकार का स्वरूप है जिसके निकट हम हर दिन बढ़ रहे हैं, और जो मनुष्य को अपने शासक तथा उसकी इच्छा को कानून के रूप में लेने की हमारी आदत के बीच हमें यह सोचने की ओर ले जाती है कि यह अव्यवस्था की पराकाष्ठा एवं अराजकता की अभिव्यक्ति है.’

प्रूडन ने ये बात 1848 में कही थी. प्रूडन को पहला नेता माना जाता है जिसने ख़ुद को Anarchist घोषित किया.

प्रूडन ने सबसे पहले कहा था 'हां मैं अराजकतावादी हूं'
प्रूडन ने सबसे पहले कहा था ‘हां मैं अराजकतावादी हूं’

# और अंत में प्रार्थना

जयशंकर प्रसाद की एक कहानी है ‘गुंडा’. उस शख्स की कहानी जिसे पूरा शहर गुंडा कहता था. गुंडे की बिच्छू के डंक सी चढ़ी मूंछें. देखने वाले की आंख में डंक मारती सी मूंछें. नागपुरी धोती. ऊपर नंगे बदन रहने वाला नन्हकू सिंह. एक कान में अनमोल मोती और दूसरे कान में जूते का फटा तल्ला लटकाकर चलने वाला गुंडा नन्हकू सिंह. बनारसी गुंडा. नन्हकू बनारस की बांह था इस कहानी में. बनारस उसे बाबू नन्हकू सिंह पुकारता था. गुलाम भारत की आज़ाद गंगा के घाट पर विराजता गुंडा. इस गुंडे को पूरा शहर ‘अराजक तत्व’ कहता था. जैसी अखबारों में हेडिंग पढ़ते हैं न ‘अराजक तत्वों को चोरी की योजना बनाते पुलिया से पुलिस ने दबोचा’. वैसा ही अराजक नन्हकू. 1781 में राजा चेतसिंह को कैद करने जब अंग्रेज़ अफ़सर आए. राजा के सिपाही हारे. लेकिन आख़िर में राजा और अंग्रेज़ों के बीच गुंडा खड़ा था. छाती अड़ाए. शहर का गुंडा नन्हकू सिंह. अपने खून की आख़िरी बूंद तक ‘व्यवस्था’ बचाता गुंडा.

तो ये था अराजकता का सारा विज्ञान. आख़िर में ‘व्यवस्था’ की सिमरन को चलती ट्रेन में चढ़ाने के लिए हाथ बढाती अराजकता. अब आप ख़ुद तय कर लीजिए कि क्या किसी शख्स को एक साथ ‘अराजकतावादी’ और ‘आतंकवादी’ कहा जा सकता है? सवाल ही जवाब है.


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