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हाथ पर लकीरें ही न हों तो कैसे बनेगा आधार कार्ड?

हाथ की लकीरें नहीं मतलब कोई नौकरी नहीं, कोई पहचान नहीं. बात किस्मत की लकीरों की नहीं, फिंगर प्रिंट्स की हो रही है. दिल्ली के मंगोलपुरी में ललित कुमार नाम का एक एेसा इंसान भी रहता है जिसे एक अनोखी बीमारी है. बीमारी ये कि उसके दोनों हाथों में लकीरें ही नहीं है. यानी कोई फिंगर प्रिंट्स नहीं. इसी के चलते उसे गृह मंत्रालय में डाटा एंट्री की नौकरी से निकाल दिया गया. कारण ये कि वो अपने फिंगर प्रिंट्स न होने की वजह से बायोमैट्रिक सिस्टम में अपनी अटैंडेंस दर्ज नहीं करवा पाता था. नौकरी चली गई तो आधार कार्ड के लिए अप्लाई किया मगर यहां भी यही दिक्कत आई. जब सरकार ने आधार कार्ड लगभग हर जगह जरूरी कर दिया है तो 27 साल के इस लड़के के सामने अपनी आइडेंटिटी साबित करने का भी चैलेंज आ गया है. लगातार कई कोशिशों के बाद भी UIDAI के पास ललित की इस समस्या का कोई समाधान नहीं है.

ललित कुमार
ललित कुमार
दुनिया भर में सिर्फ 5 लोगों को है ये बीमारी

ललित को बचपन से ये बीमारी है. बीमारी भी इतनी अलग है कि दुनिया में ललित 5वें एेसे इंसान हैं जिनके फिंगर प्रिंट्स ही नहीं हैं. बीमारी का नाम है- ‘ऐडरमैटोग्लीफिया’ (Adermatoglyphia). इसे रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर केस में गिना जाता है. इस बीमारी में आदमी की दोनों हथेलियों पर एक मोती खुरदरी परत बन जाती है, जिससे  हाथ की लकीरें खत्म हो जाती हैं. एेसे लोगों के फिंगर प्रिंट्स स्कैन नहीं हो पाते हैं. ये बीमारी जन्मजात होती है या माता-पिता से बच्चों में आती है. हालांकि इससे शरीर पर और कोई असर नहीं पड़ता.

ललित के हाथ की तस्वीर
ललित के हाथ की तस्वीर

ललित ने दी लल्लनटॉप को बताया कि जैसे ही उसे इस बीमारी के बारे में पता चला, फौरन इलाज के लिए दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल गया. वहां मेडिसिन डिपार्टमेंट की हेड डॉक्टर रति मक्कड़ ने उन्हें इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने ने ही ललित को बताया की उनका फिंगर प्रिंट स्कैन नहीं किया जा सकता. और ये भी बताया कि ये ललित के अलावा दुनिया भर में चार  ही एेसे केस सामने आए हैं. इस बात को अस्पताल ने लिख कर भी दिया.

दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल की पर्ची
दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल की पर्ची

इसी के चलते नौकरी गई और पिछले 6 महीनों से बेरोजगार हैं. ललित ने बताया कि वो किस तरह पिछले साल से ही आधार कार्ड अपडेट करवाने के लिए दौड़ रहे हैं. वो कई बार प्रगति मैदान में UIDAI के ऑफिस भी गए.  लेकिन किसी भी ऑफिशियल के पास इनकी प्रॉब्लम का कोई सॉल्यूशन नहीं है.  ललित का आधार कार्ड काफी साल पहले बन गया था मगर अब आधार अपडेट करवाने के लिए फिंगर प्रिंट्स मांगे जा रहे हैं. “मैं फिजिकली फिट हूं. मगर इस तरह की ट्रीटमेट से एेसा महसूस करने लगा हूं जैसे मुझ में कोई कमी है. इससे मेरा कॉन्फिडेंस कम हुआ है. कम से कम दिव्यांगों के लिए सरकार की तरफ से कई सुविधाएं तो हैं, मैं तो इन सबसे भी बाहर हूं. न नौकरी है और न पहचान के लिए जरूरी हो चुका आधार कार्ड. अब तो बैंकों अकाउंट खुलवाने के लिए भी आधार जरूरी हो गया है.”

प्रधानमंत्री मोदी को लिखा लेटर

ललित ने अपनी इस बीमारी और सरकार की अनदेखी से परेशान होकर प्रधानमंत्री को लेटर लिखा है. इसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. इसमें ललित ने प्रधानमंत्री से रिक्वेस्ट की है कि उसे 125 करोड़ भारतीयों में न गिना जाए. क्योंकि उसे आधार कार्ड नहीं दिया जा रहा है और न ही कोई नौकरी. साथ ही इस मामले में सहयोग की भी अपील की है.

ललित द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र का पहला पन्ना
प्रधानमंत्री को लिखे  गए पत्र का पहला पन्ना

 

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