Submit your post

Follow Us

भूख मिटाने को धनुष उठाने वाली दीपिका अबकी बार तोड़ेंगी ओलंपिक्स का अभिशाप?

साल 2006 की बात है. भारतीय क्रिकेट टीम वेस्ट इंडीज़ की फजीहत और साउथ अफ्रीका की बादशाहत से लगभग साल भर दूर थी. क्रिकेट प्रेमी अभी 2003 की हार को भुलाने के चक्कर में थे. और बाहर-बाहर से देखें तो लगेगा कि पूरा देश ही इसमें शामिल था. लेकिन ऐसा नहीं है. इस देश में करोड़ों लोग ऐसे भी हैं जो क्रिकेट मैच वाले दिन भी छुट्टी नहीं मार सकते, क्योंकि उनकी माली हालत इसकी इजाज़त नहीं देती.

ये लोग किसी कवर ड्राइव या यॉर्कर से खुश नहीं होते, क्योंकि उससे इनके घर की रोटी नहीं आती. और अगर रोटी की गारंटी हो, तो ये कैसा भी काम करने को तैयार रहते हैं. कहते हैं कि भारत में ऐसे लोगों की संख्या तमाम देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है. और ये बात सच भी लगती है. क्योंकि अगर ये झूठ होती, तो भारत के ज्यादातर सफल लोगों की जीवनी की शुरुआत भूख से ना होती.

हमारी टोक्यो ओलंपिक्स स्पेशल सीरीज ‘उम्मीद’ में आज एक ऐसी ही एथलीट की बात करेंगे जिसने अपनी फील्ड इसलिए नहीं चुनी कि उसे ये काम पसंद था. बल्कि उसने धनुष इसलिए उठाया क्योंकि इससे उसे रोटी-कपड़ा-घर तीनों मिलते, और उसके ग़रीब परिवार का बोझ भी हल्का होता. हमारी आज की उम्मीद का नाम है- दीपिका कुमारी. और काम आपको पता ही है- तीर मारकर सोना जीतना.

# कौन हैं Deepika Kumari?

दीपिका कुमारी. सिर्फ 16 की उम्र में कॉमनवेल्थ चैंपियन और 18 साल की उम्र में वर्ल्ड नंबर वन आर्चर बनीं. झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली दीपिका के पिता ऑटो रिक्शा चलाते हैं जबकि मां नर्स हैं. दीपिका की मां भले ही नौकरी करती थीं लेकिन उनकी सैलरी कभी तीन तो कभी चार महीने पर आती थी. ऐसे में घर का खर्च चलाना मुश्किल होता था. कई बार तो ऐसा होता था कि घर में खाने के लिए कुछ नहीं होता था. इन हालातों से लड़ते हुए जब दीपिका 12 साल की हुईं तब उन्हें किसी ने आर्चरी के बारे में बताया.

बताने वाले ने साथ में ये भी बताया, कि पास में सराइकेला-खरसांवा नाम की जगह पर एक आर्चरी अकैडमी है. वहां सबकुछ फ्री है. ट्रेनिंग भी, खाना-कपड़ा भी और रहना भी. बस फिर क्या था. दीपिका ने सोचा कि इसमें तो फायदा ही फायदा है. घरवालों पर बोझ भी कम होगा और साथ में हम कुछ सीख भी लेंगे. यही सोचकर दीपिका ने अपने मम्मी-पापा से बात की और फिर तीनों लोग निकल पड़े सराइकेला के लिए. वो भी स्कूटर पर.

हालांकि दीपिका के लिए आर्चर बनने का रास्ता इतना आसान भी नहीं था. शुरू में वह इतनी दुबली-पतली थीं कि अकैडमी ने उन्हें रखने से लगभग मना ही कर दिया. लेकिन दीपिका जैसी लड़कियों की यही तो खासियत है, बिना लड़े हारतीं नहीं. अपना सपना टूटता देख दीपिका ने कोच से कहा,

‘मुझे तीन महीने का मौका दीजिए, ना सीख पाई तो बाहर कर दीजिएगा.’

कोच मान गए और दीपिका मारे खुशी के उछल पड़ीं. लेकिन एक बात है, दीपिका को ये खुशी आर्चरी की ट्रेनिंग का मौका मिलने पर नहीं थी. इस बारे में पूरी ईमानदारी के साथ उन्होंने नेटफ्लिक्स की एक डॉक्यूमेंट्री में कहा था,

‘मैं बहुत खुश हो गई. लेकिन उस वक्त भी मुझे आर्चरी में इतना इंट्रेस्ट नहीं था. मैं यहां आई थी क्योंकि मेरे परिवार की हालत बहुत ज्यादा खराब थी. मैंने सोचा था कि मैं घर से चली गई तो कम से कम एक इंसान का बोझ कम हो जाएगा.’

# खास क्यों हैं Deepika?

सराइकेला में लगभग डेढ़ साल का वक्त बिताने के बाद ही दीपिका का सेलेक्शन टाटा आर्चरी अकैडमी जमशेदपुर में हो गया. ये कुछ ऐसा ही था कि जैसे डेली सोप में भी अनमने ढंग से कोने का कैरेक्टर पा रहे इंसान को किसी फिल्म में हीरो का रोल मिल जाए. और अगर ये हादसा टैलेंटेड इंसान के साथ हो तो तो उसे और क्या ही चाहिए?

बस दीपिका ने इस सीढ़ी पर चढ़ना नहीं, दौड़ना शुरू कर दिया. साल 2009 में कैडेट वर्ल्ड चैंपियन बनने समेत जूनियर लेवल पर तमाम कमाल करने के बाद उन्होंने साल 2010 में सीनियर लेवल पर भी खुद को अनाउंस कर दिया. साल 2010 में उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के रिकर्व सिंगल्स और रिकर्व टीम दोनों का गोल्ड जीत लिया. इतना ही नहीं, उन्होंने इसी साल के एशियन गेम्स में भी ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.

फिर कैलेंडर में साल बदलते रहे और दीपिका आगे बढ़ती रहीं. हर रोज खुद में सुधार करते हुए दीपिका ने पूरी दुनिया से मेडल्स बटोरना जारी रखा. वर्ल्ड कप, वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स. आप नाम लीजिए, दीपिका उस इवेंट का मेडल दिखा देंगी.

# Deepika से उम्मीद क्यों?

अपने 15 साल के आर्चरी के सफर में दीपिका कई बार वर्ल्ड नंबर वन भी बनीं. हालांकि इस दौरान वह ओलंपिक्स में कभी मेडल नहीं जीत पाईं. 2012 लंदन ओलंपिक्स में वर्ल्ड नंबर वन रहीं दीपिका पहले ही राउंड में हार गईं. तो साल 2016 के रियो ओलंपिक्स में उन्हें अंतिम-16 में हार मिली. पूर्व भारतीय आर्चर और दीपिका के साथ लंबे वक्त तक खेलीं डोला बनर्जी की मानें तो दीपिका के बेहद खूबसूरत सफर के ये स्पीड ब्रेकर भी इस बार टूट जाएंगे.

दीपिका ने जून 2021 में पेरिस में हुए वर्ल्ड कप में तीन गोल्ड मेडल जीतकर टोक्यो2020 की तैयारी का परिचय दे दिया है. इन मेडल्स को मिलाकर दीपिका अब तक वर्ल्ड कप में नौ गोल्ड, 12 सिल्वर और सात ब्रॉन्ज़ मेडल्स जीत चुकी हैं. हालांकि दीपिका के हालिया गोल्ड मेडल्स को ओलंपिक्स मेडल की गारंटी नहीं माना जा सकता.

क्योंकि ओलंपिक्स में दीपिका के सामने कोरिया, चाइना और चाइनीज ताइपे के आर्चर भी होंगे. और इन तीन देशों के आर्चर हर बार ओलंपिक्स में कमाल करते हैं. इन्हें पूरी दुनिया में बेस्ट माना जाता है और दीपिका के लिए इन्हें हराना आसान नहीं होगा. ऐसा हम नहीं, दीपिका के आलोचक कहते हैं. और आलोचकों के लिए दीपिका का संदेश साफ है,

‘आप किसी को मुंह से बोलोगे तो वो भूल भी जाएंगे, लेकिन अगर आप अपने तीर से जवाब दोगे तो लोग हमेशा याद रखेंगे.’


 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

जब ट्रेलर आया था, तबसे लगातार विरोध जारी है.

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

माधुरी से डायरेक्ट बोलो 'हम आपके हैं फैन'

आज जानते हो किसका हैप्पी बड्डे है? माधुरी दीक्षित का. अपन आपका फैन मीटर जांचेंगे. ये क्विज खेलो.