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लिफ़ाफ़े से ये लोग पैसेंजर्स को जैसे ठगते थे, वो टेक्निक जानकर कहोगे, 'अच्छा हुआ बता दिया'

तारीख- दस फरवरी. दिन- सोमवार. सुबह के पांच बजे. रविंदर सिंह मुंबई से ट्रेन पकड़कर दिल्ली आए. हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन पर उतरे. रविंदर रेलवे पुलिस फोर्स (RPF) में कॉन्सटेबल हैं. मुंबई में पोस्टेड हैं. होमटाउन मेरठ जाना था, इसलिए निज़ामुद्दीन स्टेशन से आनंद विहार टर्मिनल पहुंचे. यहां से मेरठ की कोई गाड़ी पकड़नी थी.

दो लोग आते हैं. बातों-बातों में बताते हैं कि उन्हें भी मेरठ जाना है. बातें चल ही रही थीं कि एक सेंट्रो कार आकर रुकती है. ड्राइवर बताता है कि सवारी गाड़ी है, मेरठ तक जाएगी. जो दो लोग पैसेंजर बनके आए थे, वो गाड़ी में बैठ जाते हैं और रविंदर को भी इसी गाड़ी से मेरठ चलने के लिए तैयार कर लेते हैं.

ये दो पैसेंजर और ड्राइवर दिल्ली-एनसीआर रीज़न के हाईवे पर लूट-पाट करने वाले दुलारे गैंग के लोग थे. रास्ते में रविंदर सिंह से चलती गाड़ी में मारपीट की. जो भी सामान था, सब लूट लिया. उनके डेबिट कार्ड्स छीन लिए. रविंदर को कार में ही बैठाए रखा और उनके कार्ड से दिल्ली के अलग-अलग एटीएम से पैसे निकालते रहे. क्रेडिट कार्ड भी ले लिया और गहने की शॉपिंग कर डाली.

रात में रविंदर को कार से फेंककर चले गए. रविंदर ने पुलिस से शिकायत की. जांच हुई तो वही दुलारे गैंग वाली बात पता चली. गैंग के तीनों मेंबर दुलारे, आमिर और सुनील को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है.

100 से ज्यादा लूट कर चुका है दुलारे गैंग

दुलारे गैंग से पूछताछ की गई तो पता चला कि अब तक वो सौ से ज्यादा लूटपाट कर चुके हैं. ज्यादातर वक्त ये लोग तड़के सुबह लोगों को निशाना बनाते हैं. उन लोगों पर नज़र रखते थे जो किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इंतज़ार में खड़े हों. इनके एक्टिव रहने के कुछ तय ठिकाने थे- दिल्ला का कश्मीरी गेट बस स्टैंड, आनंद विहार बस स्टैंड, पानीपत और गुरुग्राम. लूट का मॉडल यही था. एक मेंबर ड्राइवर बनता, बाकी दो पैसेंजर बनते. ये दोनों किसी पैसेंजर को कन्विंस कर कार में लाते थे. बीच में बैठाते थे और फिर कुछ दूर चलकर लूट शुरू कर देते थे.

लिफाफा गैंग

दुलारे गैंग के मेंबर्स ने ही हाईवे पर ठगी करने वाले लिफाफा गैंग के बारे में भी बताया. ये लोग भी पहले लिफाफा गैंग में थे. लिफाफा गैंग के लोग पैसेंजर को कार में लिफ्ट देते थे. कार में पहले से गैंग के कुछ लोग पैसेंजर बनकर बैठे रहते थे. जैसे ही नया आदमी आया, वैसे ही ये लोग सेफ्टी का हवाला देते हुए अपने जरूरी सामान वगैरह एक लिफाफे में डालकर किनारे रखने लगते थे. साथ वाले पैसेंजर को भी ऐसा करने के लिए उकसाते. जैसे ही वो लिफाफे में अपना कीमती सामान रखता, लिफाफा गैंग के लोग लिफाफा बदल देते.

आशू गैंग ने हाईवे पर गौरव चंदेल की हत्या की थी

ग्रेटर नोएडा के रहने वाले गौरव चंदेल की सात जनवरी को उनके घर के पास ही लूट के बाद हत्या कर दी गई थी. हाईवे पर लूटपाट करने वाले आशू गैंग के लोगों ने पुलिस के गेटअप में चंदेल की गाड़ी को रात में रोका. लूटपाट करनी चाही तो गौरव ने उनके एक साथी को पकड़ लिया. इसके बाद बाकियों ने गौरव पर गोली चला दी. बाद में नोएडा और हापुड़ पुलिस ने मिलकर हत्यारों को पकड़ा था.

ये तीन गैंग हैं. ऐसे और भी हो सकते हैं, होंगे. गौरव चंदेल मर्डर केस के बाद आशु गैंग और अब दुलारे गैंग के पकड़े जाने से पुलिस को कई जानकारियां मिल रही हैं. इनका इस्तेमाल बाकी हाईवे रॉबर्स तक पहुंचने के लिए किया जा सकता है. तो अगली बार सावधान रहिए.


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