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कोरोना संक्रमित लोगों का आइसोलेशन पीरियड घटा देना कितना खतरनाक है?

भारत समेत कई देशों में कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. कई देशों में रोज आने वाले मामलों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है. महामारी की शुरुआत के बाद से ये सबसे अधिक मामले हैं. इसे कोरोना वायरस की तीसरी लहर कहा जा रहा है. और इस लहर के लिए कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को जिम्मेदार माना जा रहा है. कई अध्ययनों में सामने आया है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट कोरोना वायरस के पहले के वेरिएंट के मुकाबले कई गुना तेजी से फैल रहा है. दूसरी तरफ, कई अध्ययनों में यह बात भी सामने आई है कि यह नया वेरिएंट लोगों को गंभीर रूप से बीमार भी नहीं कर रहा है और इसके लक्षण माइल्ड हैं.

आइसोलेशन पीरियड घटाया गया

इस बीच भारत समेत कई देशों ने कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के लिए आइसोलेशन पीरियड घटा दिया है. ऐसा करने के पीछे साइंटफिक स्टडी का हवाला दिया गया है. हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से कोरोना मामलों की सुनामी आने के कारण वर्कफोर्स की कमी हो गई है. ऐसे में लोगों को काम पर वापस भेजने और अर्थव्यवस्था को चलाए रखने के लिए इस आइसोलेशन पीरियड को घटाया गया है. एक तरफ जहां ओमिक्रॉन से गंभीर बीमारी का खतरा ना होने का दावा कर आइसोलेशन पीरियड की इस कटौती को जायज ठहराया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर चिंता भी जताई जा रही है.

सबसे पहले अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन संस्थान ने पिछले साल दिसंबर में कोविड संक्रमित व्यक्तियों का आइसोलेशन पीरियड दस दिन से घटाकर पांच दिन कर दिया. हालांकि, यह भी कहा कि पांच दिन का आइसोलेशन पीरियड तभी खत्म माना जाएगा, जब पॉजिटिव पाए गए व्यक्ति को आखिरी दिन बुखार ना आया हो. अमेरिका के इस फैसले के बाद यूनाइटेड किंगडम ने भी आइसोलेशन पीरियड को दस दिन से घटाकर सात दिन कर दिया. हालांकि, आइसोलेशन पीरियड की समाप्ति के लिए दो रैपिड टेस्ट के नेगेटिव आने को जरूरी कर दिया.

अमेरिका और यूरोप में कोरोना वायरस के मामले बड़ी तेजी से बढ़े हैं. (फोटो: एसोसिएट प्रेस)
अमेरिका और यूरोप में कोरोना वायरस के मामले बड़ी तेजी से बढ़े हैं. (फोटो: एसोसिएट प्रेस)

भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी आइसोलेशन पीरियड को घटा दिया. मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि कोविड पॉजिटिव पाए गए जिन लोगों को लक्षण नहीं हैं या फिर हल्के लक्षण हैं, उनका आइसोलेशन अब सात दिन में समाप्त माना जाएगा. हालांकि, आखिरी के तीन दिनों में मरीज को बुखार नहीं आया होना चाहिए. इसी के साथ मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस सात दिन के आइसोलेशन पीरियड के पूरे होने के बाद पॉजिटिव पाए गए व्यक्ति को दोबारा से टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. इससे पहले भारत में ऐसे कोविड मरीजों के लिए आइसोलेशन पीरियड 10 दिन का था.

भारत में आइसोलेशन पीरियड घटाने पर महाराष्ट्र कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉक्टर शशांक जोशी ने अपनी बात रखी. उन्होंने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

“ओमिक्रॉन वेरिएंट का क्लिनिकल डेटा बताता है कि ये ज्यादा गंभीर नहीं है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने आइसोलेशन पीरियड को आधा कर दिया है. टेस्ट की भी जरूरत नहीं बताई है. बस मास्क लगाने को कहा है. हमारे प्रोटोकॉल भी उसी लाइन पर हैं.”

इस बीच कई दूसरे देशों ने भी आइसोलेशन पीरियड को घटा दिया. मसलन जर्मनी ने भी इसे सात दिन का कर दिया. इजरायल ने भी ऐसा ही किया. चेक रिपब्लिक में जहां आइसोलेशन पीरियड पहले 14 दिन का था, उसे पांच दिन का कर दिया गया. इसी तरह ग्रीस यूरोप में पहला ऐसा देश बना, जिसने आइसोलेशन पीरियड को घटाकर पांच दिन का कर दिया. पुर्तगाल में भी कटौती की गई. यूनाइटेड किंगडम ने पहले आईसोलेशन पीरियड को घटाकर सात दिन का किया और अब इसे पांच दिन का करने पर विचार किया जा रहा है.

इस स्टडी का हवाला दिया गया

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने आइसोलेशन पीरियड घटाने के लिए एक बड़े अध्ययन का हवाला दिया. यह अध्ययन जामा इंटर्नल मेडिसिन द्वारा पिछले साल किया गया था. इसमें पाया गया था कि कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके लोग लक्षणों के आने से दो दिन पहले और तीन दिन बाद तक सबसे अधिक संक्रामक होते हैं. यानी उनके द्वारा दूसरों को संक्रमित करने का खतरा सबसे अधिक होता है. ऐसे में CDC ने आइसोलेशन पीरियड को पांच दिन का करने का फैसला लिया. साथ ही साथ टेस्ट ना करने की बात पर भी जोर दिया. क्योंकि CDC के मुताबिक, व्यक्ति के कोविड से उबर जाने के कई दिन के बाद भी टेस्ट में उसका रिजल्ट पॉजिटिव आ सकता है.

दूसरे देशों में इसी आधार पर फैसले लिए गए. सरकारों ने ओमिक्रॉन वेरिएंट के कम खतरनाक होने को भी अपने फैसलों का आधार बनाया. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया,

“कोरोना वायरस का नया ओमिक्रॉन वेरिएंट भारत समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस मामलों की सुनामी के लिए जिम्मेदार है. यह वेरिएंट बहुत अधिक संक्रामक है. हांलाकि, इसे डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले कमजोर माना जा रहा है. स्टडीज में यह भी सामने आया है कि ओमिक्रॉन से संक्रमित लोग जल्दी रिकवर हो रहे हैं. वायरल लोड भी कम है.”

आइसोलेशन पीरियड घटाने से खतरा!

एक तरफ जहां कई देशों ने आइसोलेशन पीरियड को घटाया है, वहीं दूसरी तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है. संगठन के मुताबिक, अभी भी कोविड संक्रमित लोगों के लिए 14 दिन आइसोलेट रहना जरूरी है. ऐसे में कई हेल्थ एक्सपर्ट्स आइसोलेशन पीरियड को कम करने के फैसले को सही नहीं मान रहे हैं.

इन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अचानक से कोरोना वायरस मामलों की सुनामी आ जाने के कारण वर्कफोर्स की कमी हो गई है. ऐसे में सरकारों के ऊपर अर्थव्यवस्था को चलाए रखने का दबाव है. जिसकी वजह से आइसोलेशन पीरियड को घटाने के फैसले लिए जा रहे हैं. ये फैसले साइंटिफिक नहीं हैं. एक ऐसे ही हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर आमिर खान. यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) से जुड़े डॉक्टर आमिर खान कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत से बेहद जरूरी जानकारियां साझा करते आए हैं. उन्होंने आइसोलेशन पीरियड को कम करने पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अलजजीरा में लिखे गए एक आर्टिकल में सवाल उठाए हैं. उनके मुताबिक,

“आइसोलेशन पीरियड घटाने के लिए CDC ने जिस स्टडी का हवाला दिया है, उसका डेटा बहुत सीमित है. यह सभी के ऊपर लागू नहीं होता. हम यह भी जानते हैं कि कोविड सबके शरीर में एक जैसा व्यवहार नहीं करता. ऐसे में इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि जो लोग पांच या सात दिन में आइसोलेशन से बाहर निकलने जा रहे हैं, वो दूसरे स्वस्थ लोगों को संक्रमित कर सकते हैं. सरकारों ने यहां पर रिस्क लिया है. अर्थव्यवस्था और समाज को लेकर जुआ खेला है. लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि स्वस्थ लोगों से ही स्वस्थ अर्थव्यवस्था का निर्माण होता है.”

दो रैपिड नेगेटिव टेस्ट के बाद सात दिन का Covid Isolation Period खत्म करने के यूके सरकार के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. (फोटो: एसोसिएट प्रेस)
दो रैपिड नेगेटिव टेस्ट के बाद सात दिन का Covid Isolation Period खत्म करने के यूके सरकार के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. (फोटो: एसोसिएट प्रेस)

डॉक्टर आमिर खान ने यूनाइटेड किंगडम सरकार द्वारा सात दिन के आइसोलेशन पीरियड को खत्म करने के लिए दो नेगेटिव रैपिड टेस्ट की जरूरत पर भी सवाल उठाए. उन्होंने इस संबंध में की गईं 64 स्टडीज के एक रिव्यू का हवाला देते हुए बताया कि रैपिड टेस्ट कोरोना वायरस को डिटेक्ट करने में पूरी तरह से सक्षम नहीं हैं. डॉक्टर आमिर खान ने बताया कि कोरोना वायरस से संक्रमित जिन लोगों में बीमारी के लक्षण नहीं होते, रैपिड टेस्ट ऐसे केवल 58 फीसदी लोगों की रिपोर्ट ही पॉजिटिव बता पाता है. ऐसे में सिर्फ रैपिड टेस्ट के सहारे संक्रमित पाए गए लोगों का आइसोलेशन पीरियड खत्म कर देना सही नहीं है.

डॉक्टर आमिर खान ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन कोविड वैक्सीन की क्षमता को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है. ऐसे में सावधानी ना बरतना खतरनाक हो सकता है. डॉक्टर आमिर खान ने आगे कहा कि इस महामारी ने हमें यही तो सिखाया है कि जिन देशों ने सावधानी नहीं बरती, वहां के लोगों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा और अर्थव्यवस्था को भी.


वीडियो- ओमिक्रॉन के बाद आए ‘फ्लोरोना’ और ‘डेल्टाक्रॉन’ से ना घबराने की सलाह क्यों दी जा रही है?

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