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'प्रजा प्रिया हो, प्रिया प्रजा हो' के संदेश के साथ शुरू हुआ 19वां भारंगम

”वस्तुस्थिति यह है कि—
जब तक विद्वानों का परितोष न हो
तब तक अपनी प्रयोग-कुशलता का
कुछ भी अर्थ नहीं
जो बहुत शिक्षित हैं
उनका भी विश्वासी हृदय
अपने को लेकर कभी निश्चिंत नहीं होता”

ये वचन कालिदास के नाटक ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ में नटी से सूत्रधार ने कहे हैं. लेकिन ये वचन कल शाम बहुत याद आ रहे थे. मौका था 19वें भारत रंग महोत्सव (भारंगम) के उद्घाटन समारोह के उपरांत हुई प्रस्तुति ‘उत्तर राम चरितम्’ के मंचन का.

कावलम नारायण पणिक्कर के निर्देशन में सोपानम्, तिरुअनंतपुरम की इस प्रस्तुति ने विद्वानों को बहुत परितोष दिया, यानी खुशी दी.

गौरतलब है कि यह प्रस्तुति कावलम नारायण पणिक्कर को एक श्रद्धांजलि भी थी. प्रस्तुति से पूर्व उनकी स्मृति में एक मिनट का मौन भी हुआ.

1 घंटा 30 मिनट की अवधि वाले इस नाटक के रचनाकार संस्कृत के महाकवि भवभूति हैं. संस्कृत से इसका हिंदी काव्य-पाठ या कहें नाट्यालेख हिंदी के कवि उदयन वाजपेयी ने तैयार किया.

बकौल उदयन : ‘‘मूल नाटक में मूलतः तीन रसों का प्राधान्य है – करुण, श्रृंगार और वीर. बेशक हम इस नाटक को करुण के संदर्भ में ही जानते हैं, लेकिन बाकी दोनों रस भी इसमें विद्यमान हैं जो प्रस्तुति में एक सार्थक प्रस्फुटन पाने के लिए निष्क्रिय पड़े रहते हैं. हमने इन तीन रसों के त्रिकोण को साकार करने पर जोर दिया.’’

भरपूर भरे कमानी ऑडीटोरियम में मंचित इस नाटक में राम का ईश्वरीय रूप कम, मानवीय रूप ज्यादा जाहिर हुआ. जैसा कि नाम से ही जाहिर है यह कथा रावण-वध और लंका-विजय करके अयोध्या लौट आए राम की है. वनवास के कठिन दिन अब अतीत हो चुके हैं. राम अब महाराज हैं. लेकिन फिर भी उनके संघर्षों का अंत नहीं है. उन्हें प्रजा और उसके विश्वासों की रक्षा करनी है. प्रजा की तरफ से सीता के चरित्र पर आक्षेप लगने शुरू हो गए हैं.

यहां पीड़ा से गुजरते हुए राम, प्रेम करते हुए राम, सब कुछ जीत कर भी पराजित-से राम नजर आते हैं. गति और प्रकाश अद्भुत संतुलन में पणिक्कर की परिकल्पना और अनिल पलावीडु का गायन इस नाटक को एक संगीतात्मक शास्त्रीयता में बरतते हैं.

बहुत सूक्ष्म ढंग से यह प्रस्तुति लोकतंत्र और स्त्री-विमर्श को भी अपने में समोए चलती है. यह भी उल्लेखनीय है कि यह इसके लिए मूल नाटक से कोई छेड़खानी नहीं करती. सीता के साहस और प्रेम की जीत नाटक को अंतत: उस बिंदु पर लाकर छोड़ देते हैं जहां प्रजा प्रिया हो, प्रिया प्रजा हो…

नाटक से पूर्व मुख्य अतिथि मशहूर नृत्यांगना सोनल मानसिंह, सम्माननीय अतिथि संस्कृति मंत्रालय के सचिव नरेंद्र कुमार सिन्हा, विशिष्ट अतिथि रंगकर्मी और फिल्मकार फीरोज अब्बास खान, इजरायली नाट्य निर्देशिका वेरा बर्जाक श्नाइडर, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष रतन थियम और निदेशक वामन केंद्रे ने दीप प्रज्ज्वलन कर 19वें भारंगम का शुभारंभ किया. धन्यवाद ज्ञापन त्रिपुरारि शर्मा ने किया.

इसके साथ ही जैसा कि हर भारंगम में होता है कि भारंगम को लेकर चर्चाओं-कुचर्चाओं का भी शुभारंभ हो जाता है. सो इस प्रकार के वाद-विवाद-संवाद भी जारी हैं. कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सारे पदाधिकारियों के नाटक इस बार के भारंगम में लगे हुए हैं— रतन थियम से लेकर वामन केंद्रे तक. कुछ के तो दो-दो नाटक हैं. जैसा कि ऐसे नाजुक मौकों पर सूत्रों से ही पता चलता है, तो सूत्रों के ही मुताबिक अब इस तथ्य पर ध्यान दीजिए कि जब भारंगम की चयन समिति बैठती है तो समिति के सदस्यों से लिखित हलफनामा लिया जाता है कि आपके ग्रुप का या आपका लिखा या निर्देशित किया कोई नाटक इस भारंगम में नहीं भेजा गया है. तब एक तरफ तो यह नियम है तो वहीं दूसरी तरफ इस बार के भारंगम में इस नियम का उल्लंघन. इस लेकर कोई स्पष्टीकरण अब तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तरफ से जारी नहीं हुआ है.

बहरहाल, दिल्ली चले आए कलाकारों का मक्का यानी मंडी हाउस सज चुका है. नाटकों की बौछार हो रही है. आगामी 21 दिनों तक पूरा मंडी हाउस भीगेगा— भारत रंग महोत्सव के रंग में. एनएसडी कैंपस के अभिमंच, ओपन एयर थिएटर, बहुमुख और सम्मुख के अलावा एलटीजी, कमानी और श्रीराम सेंटर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स जैसे सभागार भी नाटकों के मंचन के लिए एकदम तैयार हैं.

मंडी हाउस का गोल चक्कर काट कर घूमती हुईं बसें इस महोत्सव का होना भांप रही हैं. उबली हुई शकरकंद और खड़ी मूंग बेचने वाले भी खुश हैं और खुश हैं बहुत सही दाम पर सब कुछ बेचने वाले सात-आठ चाय-पकौड़ी वाले भी.

सारे सांस्कृतिक हादसे श्रीराम सेंटर के आस-पास ही होते हैं… यों एक कवि ने अपनी एक कविता में कहा है. सो ऐसे हादसों के लिए तैयार है श्रीराम सेंटर के बाहर वाली कैंटीन भी.

विद्वानों के परितोष के लिए अपनी प्रयोग-कुशलता आजमाने को तैयार हैं देश-दुनिया से आए रंगकर्मी. लिहाजा भाषणों से बचिए और नाटकों को देखिए… क्योंकि भारंगम दुनिया के कुछ बड़े थिएटर फेस्टिवल्स में से एक हैं.
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