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लॉकडाउन 3: जिन लोगों को काम पर जाना पड़ रहा है, उन्हें क्या दिक्कत आ रही है?

भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. एक हफ्ते में 15 हज़ार से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आए हैं. बढ़ते केसेस को देखते हुए भारत में लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ा दिया गया है. हालांकि, तीसरे चरण के लॉकडाउन में केंद्र और राज्य सरकारों ने थोड़ी ढील दी है. जिलों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन में बांटकर अलग-अलग जोन में हालत देखकर छूट दी गई है. आइए जानते हैं कि लॉकडाउन के तीसरे चरण में ऑफिस जाने वाले लोगों को क्या दिक्कत आ रही है?

अफवाह ने जिंदगी मुश्किल कर दी
दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक, औरंगाबाद, बिहार

यहां काम करने वाले विकास बताते हैं-

बैंक में भीड़ बहुत बढ़ गई है. सरकार ने लोगों के जनधन खाते में पैसे भेजे. गांव में किसी ने अफवाह फैला दी कि इस महीने पैसे नहीं निकाले तो पैसे वापस चले जाएंगे. आगे से नहीं आएंगे. बैंक में लोगों की भीड़ जुट गई, पैसे निकालने के लिए. हमने बैंक के गेट पर, नोटिस बोर्ड पर जानकारी दी है कि ऐसा कुछ नहीं है. लेकिन लोग नहीं मान रहे. हमें लोगों को संभालने में दिक्कत होती है. यहां कोई सिक्योरिटी स्टाफ भी नहीं है. हमने साफ़ कह रखा है कि बिना चेहरा ढके बैंक में आने वालों का काम नहीं होगा. हमने लाइन में लगने के लिए 1-1 मीटर पर गोले बनाए हुए हैं.

खुद की और ग्राहकों की सुरक्षा के सवाल पर विकास बताते हैं कि बैंक ने हमें मास्क और सैनिटाइजर के लिए मार्च में 500 रुपये दिए थे. अभी हाल में फिर से 500 रुपये दिए हैं. ग्राहकों के लिए बैंक में सैनिटाइजर रहते हैं. हमें सबसे ज्यादा चिंता नोटों को लेकर रहती है. यहां नोट गिनने वाली मशीन ठीक से काम नहीं करती. कई बार उस मशीन में नोट फट गए हैं. ऐसे में ग्लव्स लगाकर काम करना पड़ता है. फिर भी डर बना रहता है.

India Lockdown Bank
ग्रामीण क्षेत्रों के बैंक में लोगों का जाना बढ़ा है. (प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

कोरोना से लड़ने के लिए 1 दिन की सैलरी दी
RMS, दुर्ग, छतीसगढ़

यहां पर काम करने वाले जितेंद्र बताते हैं-

शुरुआत में आने-जाने को लेकर, सेफ्टी को लेकर काफी दिक्कतें थीं. विभाग से पास मिल गए हैं तो अब दिक्कत कुछ कम हुई है. अब ऑफिस में पैकेज भी काफी आने लगे हैं. शुरुआत में कम आ रहे थे. सेफ्टी के लिए ऑफिस की तरफ से हमें मास्क, ग्लव्स और सैनिटाइजर दिए गए हैं. कोरोना से लड़ने के लिए हमने पीएम केयर्स फंड में 1 दिन की सैलरी दी है. अभी कम लोग आ रहे हैं लेकिन जो भी आ रहे हैं उन्हें सबसे पहले अपना हाथ सैनिटाइज करना होता है. हमारे ऑफिस में जो दूर से आते हैं उन्हें ऑल्टरनेट दिन पर आने के लिए कहा गया है.

जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, वो भी पहुंच रहे हैं
खाद्य एवं रसद विभाग, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

यहां काम करने आशुतोष बताते हैं कि वे चाहकर भी सोशल डिस्टेंसिंग का सही तरीके से पालन नहीं कर पा रहे हैं. कई लोग जिनके पास राशन कार्ड तक नहीं हैं, वो भी राशन लेने पहुंच रहे हैं. उन्हें समझाकर वापस भेजना पड़ता है. कई बार एक साथ कई लोग पहुंच जाते हैं, ऐसे में दिक्कत होती है. सरकार की ओर से वक्त पर राशन आ रहा है तो हम समय पर बांट रहे हैं. पेपरवर्क को लेकर डर रहता है.

Lockdown Construction India
लॉकडाउन 3 में सरकार ने ढील देते हुए कंस्ट्रक्शन के काम को शुरू करने की इजाज़त दी थी. (प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

खोजते नहीं मिल रहे मजदूर
दिल्ली

अमन, दिल्ली में कंस्ट्रक्शन मैनेजर हैं. लॉकडाउन 3 को लेकर बताते हैं-

लॉकडाउन के कारण काम पर असर पड़ा है. 4 मई से हम लोग कंस्ट्रक्शन साइट पर जा रहे हैं. चूंकि हम लोग कंस्ट्रक्शन साइट पर रहते हैं तो पहले ही बहुत अलर्ट रहते हैं. अभी कोरोना के कारण और ज्यादा अलर्ट रहना पड़ रहा है. साइट पर जितने भी लोग रहे हैं वो सभी मास्क-ग्लव्स लगाए होते हैं. जितने भी मजदूर काम के लिए आते हैं, सबसे पहले उनके हाथ सैनिटाइज किए जाते हैं. फिर स्क्रीनिंग होती है. उसके बाद ही वे काम करते हैं.

मजदूर कम हो गए हैं या मिलने मुश्किल हो गए के सवाल पर अमन बताते हैं कि साइट पर मजदूर आधे रह गए हैं. कई मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार वापस चले गए हैं. उन्होंने बताया, ‘5 मई को कुछ मजदूर दिखे तो हमने उनसे कहा कि काम करना चाहते हो तो आ जाओ. लेकिन वो बस घर जाना चाहते हैं. उन्हें डर है कि लॉकडाउन अभी और बढ़ेगा.’ लॉकडाउन से हुए नुकसान को लेकर अमन कहते हैं कि महीने भर से ज्यादा काम ठप रहने से नुकसान तो हुआ है. लेकिन अभी तक किसी कर्मचारी को कोई दिक्कत नहीं हुई है. लेकिन अगर हालात आगे ऐसे ही रहे तो सीनियर लोगों की सैलरी काटी जा सकती है.


विडियो- कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन में देश के किसान इतने चिंतित क्यों हैं?

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