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कोरोना : इंडिया ने साउथ कोरिया वाला तरीका न अपनाकर चीन का तरीका क्यों अपनाया?

भारत में लॉकडाउन चल रहा है. कल नरेंद्र मोदी ने ख़ुद बताया. 21 दिन. ये ख़बर आप तक पहुंचते-पहुंचते पहला दिन बीत गया. और ये ख़बर भी इसी लॉकडाउन पर बात करने के लिए. क्या बात? कहा जा रहा है कि साहब, भारत ने चीन को कॉपी कर लिया. भारत चाहता तो लॉकडाउन रोक सकता था. लॉकडाउन के पहले ही मामला सलट सकता था. लेकिन भारत ने चीन वाला मॉडल चुना. जबकि भारत चुन सकता था साउथ कोरिया वाला मॉडल. क्यों नहीं चुना और क्यों चुना वाली थुक्काफ़ज़ीहत में जाने के लिए समझते हैं दोनों देशों के मॉडल को, फिर जानेंगे भारत की मजबूरी.

साउथ कोरिया : नो लॉकडाउन, जाबड़ टेस्ट

सबहेड पढ़कर समझ गए होंगे. साउथ कोरिया में लॉकडाउन का हिसाब-किताब बहुत कम रखा गया. लोग घर से बाहर निकल रहे थे, सरकार ने यहीं आइडिया लपक लिया. कोरोना वायरस के कुछ ही केस आए थे. एक हफ़्ता बीता था. सरकार ने दावा कम्पनियों के साथ बवाल मीटिंग की. सबको कहा कि टेस्टिंग किट बनाइए. और जमकर बनाइए. इधर मामला दूसरे हफ़्ते में पहुंचा. और हज़ारोंहज़ार टेस्टिंग किट बनकर तैयार. अब शुरू हुआ टेस्टिंग का फ़ेज़. घरों-घरों में जाकर टेस्टिंग शुरू हुई. सड़कों के किनारे अलग लेन में टेस्टिंग का हिसाब बनाया गया. लोग कार लेकर उस लेन में जाते. टाइम लगता 10 मिनट. उनके सैम्पल लिए जाते और रवाना कर दिया जाता. कुछ घंटे में रिज़ल्ट. छोटे-छोटे टेस्टिंग सेंटर बनाए गए. सड़कों के किनारे टेलीफ़ोन बूथ जैसे टेस्टिंग स्टेशन बनाए गए. इसके साथ ही जिन लोगों में कोरोनावायरस की मौजूदगी मिलती थी, उन्हें पूरी तरह से अलग-थलग किया जाता था. उनके फ़ोन की लोकेशन के माध्यम से लगातार उन पर रखी जाती थी. ज़्यादा गंभीर मामलों के लिए अस्पताल बनाए गए. अस्पताल में ज़्यादा गम्भीर रोगियों के लिए बेड बचे रहे. कोरोना के मरीजों की जिन-जिन लोगों से मुलाक़ात हुई, उन्हें खोज निकाला जाता था. उनकी जांच होती थी. और ये सब बहुत तरीक़े से हुआ. 

दक्षिण कोरिया के दिएगो के अस्पताल में कोरोना के मरीज़ों का इलाज करने जाते लोग. कोरिया के टेस्टिंग मेथड की ख़ूब चर्चा हो रही है. कहा गया है कि बिना लॉक्डाउन के कोरिया ने कोरोना पर एक हद तक नियंत्रण पा लिया.

क्या फ़ायदा? दक्षिणी कोरिया ने अपने यहां आने वाले केसों को एक हफ़्ता में आधा कर दिया. उसके अगले हफ़्ते में उसका आधा. और ऐसे ही मामले गिरते गए. Worldometer के मुताबिक़ दक्षिणी कोरिया में कोरोना के अबतक 9,137 मामले आए, जिनमें से 126 लोगों की मौत हुई. कोरोनावायरस के इंफ़ेक्शन को लेकर भी कहा जा रहा है कि जो ग्राफ़ अबतक चढ़ता जा रहा है, वो अब सीधा और फ़्लैट हो चुका है. 

चीन : कंप्लीट लॉकडाउन, मतलब कंप्लीट लॉकडाउन

चीन के वुहान शहर के सीफ़ूड मार्केट से कोरोनावायरस के मामले सामने आने शुरू हुए थे. मामले शुरू हुए तो चीन ने मूड बना लिया. नो इन. नो आउट. वुहान को पूरे लॉकडाउन में रगड़ दिया. जनता घरों में बंद. ताबड़तोड़ गति से बना दिया हॉस्पिटल. केस आ रहे थे. लोगों को घरों से पकड़-पकड़कर अस्पतालों में डाल दिया. ख़बरें चलीं कि चीन ने मानवाधिकार का उल्लंघन किया. कई दुधमुंहे और अपंग बच्चों की मौत हो गयी. क्योंकि उनके अभिभावकों को कोरोना के चलते आइसोलेट कर दिया गया था. और उनका ख़याल न सरकार ने रखा, न किसी क़रीबी को रखने दिया गया. मामला आगे बढ़ा. कम्पनी अली बाबा के साथ मिलकर ऐप बना दिया. लोगों पर कड़ी निगरानी. ड्रोन उड़ा दिए गए. ड्रोन से नज़र रखी गयी. ड्रोन से ही निर्देश. ड्रोन से ही दवा, दूध और बाक़ी ज़रूरी सामानों की डिलीवरी. 

चीन ने कोरोना से लड़ने के लिए 10 दिन में दो बड़े अस्पताल बना दिए थे.
चीन ने कोरोना से लड़ने के लिए 10 दिन में दो बड़े अस्पताल बना दिए थे. साथ ही चीन ने किया था कंप्लीट लॉकडाउन. इसकी वजह से भी हीं को कोरोना के केसों से निबटने में मदद मिली.

क्या फ़ायदा? चीन ने भी अपना ग्राफ़ फ़्लैट कर दिया. किसी भी देश की तुलना में कोरोना के सबसे याद केस चीन में ही मिले हैं.  Worldometer के मुताबिक़ 81,218. इनमें से 3,281 लोगों की जान जा चुकी है. और लगभग 4,287 केसों में अब भी इलाज चल रहा है. ख़बरें हैं कि चीन में अब नए लोकल मामले नहीं मिल रहे हैं. जो लोग बाहर से यात्रा करके चीन में आ रहे हैं, सिर्फ़ उनमें ही कोरोना के केस मिल रहे हैं. 

अब भारत की बारी

भारत ने किया है लॉकडाउन. 21 दिन का. ये तो पता है आपको. ऐसा क्यों? कहा जा रहा है कि जिस समय भारत में कोरोनावायरस का फैलाव शुरू हुआ, उस समय तक भारत में टेस्ट किट को बड़े स्तर पर बनाने और टेस्टिंग करने की कोई बात नहीं हो रही थी. प्राइवेट लैबों को धीरे-धीरे कोरोना की जांच कराने की अनुमति दी गयी. और लॉकडाउन शुरू होने के आसपास ही ख़बर आयी. थोड़ी सेहतमंद ख़बर. थोड़ी सेहतपसंद ख़बर. पुणे में मौजूद स्टार्टअप “माईलैब” ने बताया कि वो हर हफ़्ते 1 लाख से ज़्यादा टेस्टिंग किट बना सकती है. इसे सरकार से अनुमति भी मिल गयी. लेकिन ये क़दम आते-आते भारत में लगभग 600 केस आ चुके थे. 11 लोगों के मौत की ख़बर भी. मतलब? मतलब ये कि देर हो चुकी थी. मजबूरी सामने. तरीक़ा था लॉकडाउन. गांव-गिरात-बियाबान में रह रहे लोगों से और लोगों तक कोरोना का फैलाव बचाने से रोकने की ज़रूरत थी. इसलिए 22 मार्च को एक टेस्ट रन हुआ ‘जनता कर्फ़्यू’ के नाम से. 25 से कंप्लीट लॉकडाउन. लेकिन भारत के बारे में और भी बातें हैं. कहा जा रहा है कि भारत पूरी तरह से चीन वाले मॉडल पर नहीं जाएगा. लॉकडाउन तो रहेगा रहेगा. साथ में टेस्टिंग भी बढ़ेगी. रोगी जल्दी पकड़ में आयेंगे. आशा है कि भारत वाला ग्राफ़ भी जल्दी सीधा और फ़्लैट हो जाए. 


लल्लनटॉप वीडियो : कोरोना वायरस: चीन के वुहान शहर से जो ख़बर आई है वो आपको राहत देगी

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