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50 रुपये के नोट के चक्कर में 4.5 लाख का बिल बना, लेकिन कोरोना से जीतने का मंत्र मिल गया

ये कहानी राजकुमार सिंघानिया की है. उम्र 22 साल. मुंबई के रहने वाले हैं. लॉ पढ़ते हैं. घर से ही कपड़ों का ऑनलाइन बिज़नेस चलाते हैं. लॉकडाउन हुआ तो कपड़ों का बिज़नेस मास्क और सैनिटाइज़र के बिज़नेस में तब्दील हो गया. दुकान-दुकान जाने लगे, अपने यहां के मास्क और सैनिटाइज़र की बिक्री सुनिश्चित करने. राजकुमार सिंघानिया दावा करते हैं कि इसी चक्कर में उन्हें कोरोना का संक्रमण हो गया.

“मैं दुकान-दुकान जाता था. फुटकर दुकानदारों से संपर्क बनाता था. उन्हें अपना प्रोडक्ट बेचता था. लेकिन आजकल सभी दुकानदार साफ़-सफ़ाई को लेकर उतने मुस्तैद नहीं हैं. मुझे याद है कि एक दुकान से कुछ सामान के लेनदेन के बाद मैंने पैसे फेरे. और दुकानदार ने मुझे 50 रुपये का एक नोट दिया. मैंने उसे रख लिया. और बिना सैनिटाइज किए या हाथ धोए अपना चेहरा छू लिया होगा.”

राजकुमार आगे बताते हैं,

“1 जून को मुझे सिरदर्द शुरू हुआ. फिर दम घुटने लगा. गले में भी हल्का दर्द था. मैंने बिना देर किए 2 जून को म्यूनिसिपैलिटी के अस्पताल में सम्पर्क किया. उन्होंने तुरंत मेरा सैम्पल लिया. और एक दिन बार जांच की रिपोर्ट पॉज़िटिव आ गयी. फिर उन्होंने मुझसे कहा कि मैं कुछ दिन के कपड़े ले लूं, और उनके साथ आइसोलेशन वार्ड में चलूं. मैं चला गया. 5-6 जून तक मेरी तबीयत ज़्यादा ख़राब होने लगी. मुझे वार्ड से निकालकर अस्पताल भेज दिया गया. वहां मेरा इलाज शुरू हुआ. रोज डॉक्टर आते थे. दवाओं का एक डोज़ देकर चले जाते थे. नाम नहीं पता दवाओं का. सुबह-सुबह जगाकर योग करवाया जाता था. मेरी मम्मी ने भी कुछ आयुर्वेदिक दवा लाकर दी. उससे भी मुझे फ़ायदा मिलने लगा. धीरे-धीरे स्थिति सुधरी. बाद में 16 जून को हुई जांच में मेरी रिपोर्ट निगेटिव आयी. और 25 तारीख़ को मुझे घर जाने के लिए डिस्चार्ज कर दिया गया.”

राजकुमार बताते हैं कि अस्पताल का बिल बना लगभग 4.5 लाख. वो भी 50 रुपए के नोट को लेकर उनकी असावधानी के चलते. लेकिन कहते हैं कि कोरोना से इस पूरी लड़ाई में उन्हें बहुत सीख मिली.

“शुरुआत में मेरी जो तबीयत ख़राब हो रही थी, वो इस वजह से हो रही थी कि मैं घबरा गया था. कोरोना हो गया तो लोगों को लगता है कि अब सब ख़त्म. अब मर ही जायेंगे. लेकिन अस्पताल में गया. डॉक्टरों ने कहा कि कोरोना हुआ है, ज़िंदगी नहीं ख़त्म हो जाएगी. ऐसा कुछ गम्भीर नहीं है. आप एकदम ठीक हो जायेंगे. फिर धीरे-धीरे हिम्मत आयी तो तबीयत भी ठीक होने लगी. और फिर एकदम ठीक हो गयी.”

राजकुमार बताते हैं कि वे अपने घर में अलग कमरे में रहते थे, इस वजह से उनके साथ रहने वाले उनके मम्मी और पापा की रिपोर्ट निगेटिव आयी. सलाह देते हैं कि सबसे अच्छा है कि कोरोना न हो, और अगर हो ही जाए तो कोई दिक़्क़त नहीं. घबराना छोड़िए. घबराने से तबीयत और ख़राब होगी. हिम्मत बनाए रखिए. इम्यूनिटी बढ़ाए रखिए. सब मस्त रहेगा. 


कोरोना ट्रैकर :

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