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मंदिर-मस्जिद में अस्पताल, कोरोना मरीजों की मदद के लिए गाड़ी बेची, ये 9 कहानियां दिल जीत लेंगी

जब सारे युद्ध समाप्त हो जाएंगे, एक तितली तब भी खूबसूरत बनी रहेगी.

युद्ध क्या है, किससे है, ये तो आपको, हमको सबको पता है. तो अभी बात करेंगे सिर्फ़ तितली की. सिर्फ़ उम्मीद की. उम्मीद की खबरों की, जो थोक के भाव में मिली हमें. उन खबरों के बारे में बताएंगे जो इस अंधियारे में उम्मीद बांधती हैं.

# 1) पहली ख़बर महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर से है. औरंगाबाद के सिटी चौक सर्राफा इलाके में रहने वाले दलाल हार्डी के बेटे सुबोध का निधन हो गया. जिन लोगों ने उसकी अर्थी को सहारा दिया उन्हें आप  ‘कपड़ों से ही’ पहचान जाएंगे. जी! पंद्रह साल के सुबोध का अंतिम संस्कार मुसलमानों ने किया. जन्म से विकलांग सुबोध के माता-पिता ने उसका बहुत इलाज करवाया, लेकिन सुबोध बच न सका. सुबोध की मौत की ख़बर जैसे ही मुस्लिम पड़ोसियों को पता चली सब ने मिलकर सुबोध के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की. पूरे हिंदू रीति रिवाज के साथ सुबोध को शमशान भूमि तक ले गए और वहां पर उसका अंतिम संस्कार किया.

Corona News In Aurangabad
प्रधानमंत्री की भाषा में कहें तो आप इन्हें ‘कपड़ों से पहचान’ ही जाएंगे.

# 2) दूसरी ख़बर, फ़्रंटलाइन वर्कर को लेकर है. मध्य प्रदेश के बालाघाट की रहने वाली डॉ. प्रज्ञा महाराष्ट्र के नागपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में RMO के पद पर कार्यरत हैं. इसके अलावा प्रतिदिन शाम की पाली में भी एक अन्य अस्पताल में भी काम करती हैं. जिसके कारण उन्हें लगभग रोज 12 घंटे से अधिक समय तक PPE किट पहनकर काम करना पड़ता है. इन दिनों छुट्टियों पर अपने घर आई हुई थीं. इसी बीच कोरोना वायरस से जुड़े मामले बढ़ने लगे. देखते ही देखते रोज़ाना दर्ज होने वाले मामलों का आंकड़ा लाखों में पहुंच गया. ऐसे में छुट्टी के बीच ही डॉ. प्रज्ञा को हॉस्पिटल में रिपोर्ट करने का ऑर्डर मिला. लेकिन एक समस्या थी. लॉकडाउन के चलते नागपुर जाने के तमाम साधन ठप्प पड़े थे. फिर भी हालात की गंभीरता को समझते हुए डॉ. प्रज्ञा ने वक्त बर्बाद नहीं किया. अपनी स्कूटी निकाली और निकल पड़ीं नागपुर के लिए.

Dr. Pragya
डॉ. प्रज्ञा, जो अपनी ड्यूटी के लिए बालाघाट से नागपुर स्कूटी पर पहुंच गईं.

बालाघाट से नागपुर का सफर कोई छोटा नहीं. डॉ. प्रज्ञा के घरवालों ने इस पर आपत्ति जताई. कहा कि इतना लंबा सफर अकेले कैसे तय करोगी. लेकिन बेटी की इच्छाशक्ति देखकर घरवालों को भी अपनी सहमति देनी ही पड़ी. 19 अप्रैल की सुबह निकलीं डॉ. प्रज्ञा उसी दोपहर नागपुर पहुंच गईं. यहां तक कि पहुंचने के थोड़ी देर बाद ही उन्होंने ड्यूटी भी जॉइन कर ली. स्कूटी से लगभग 180 किमी तक का सफर तय करने में उन्हें करीब 7 घंटे का समय लगा. प्रज्ञा ने बताया कि तेज धूप और गर्मी के साथ में अधिक सामान होने से थोड़ी असुविधा जरूर हुई. रास्ते में भी कुछ खाने पीने को नहीं मिला. लेकिन वो दोबारा अपने काम पर लौट गईं, इस बात की उन्हें संतुष्टि है.

# 3) अगली ख़बर कॉर्पोरेट्स को लेकर है. कॉर्पोरेट्स के बारे में लोगों की आम धारणा यही रहती है कि इन्हें सिर्फ़ प्रॉफ़िट से मतलब है. लेकिन कुछ संस्थाएं इस पूर्वाग्रह को झुठला रही हैं. कुछ ऐसी ही संस्थाओं के बारे में बताते हैं. जहां एक तरफ़ MI इंडिया ने तीन करोड़ रुपए से ज़्यादा दान में देने का फ़ैसला लिया है, ताकि ज़रूरतमंदों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर्स का इंतज़ाम हो पाए. वहीं स्पाइस जेट ने एक कोविड टेस्टिंग वेबसाइट ‘स्पाइस हेल्थ डॉट कॉम’ लॉन्च की है. इस वेबसाइट का लिंक आपको यहां मिलेगा. इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, BPCL, इफ्को, जिंदल स्टील एंड पावल लिमिटेड, SAIL और आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया देश भर की ऑक्सीजन  की ज़रूरतों को पूरा करने में कई दिनों से लगी हुई हैं.

Mi India
MI इंडिया का स्टेटमेंट.

# 4) कुछ इंडिविजुअल्स भी अपनी कैपिसिटी के हिसाब से, और कभी-कभी उससे बढ़कर हेल्प करने में जुटे हैं. जैसे दिल्ली के मायापुरी इलाक़े में विनायक ऑक्सीजन प्लांट के मालिक अभिषेक के पास जो भी ऑक्सिजन की गुहार लेकर आ रहा है, अभिषेक उसे निराश नहीं कर रहे हैं. बस आपको ख़ाली सिलेंडर लेकर इनके पास जाना है. मायापुरी के SHO मनोज कुमार के माध्यम से आप इन्हें संपर्क कर सकते हैं. मनोज कुमार का नम्बर है: 8750871121. सबसे अच्छी बात ये है कि अभिषेक का ये प्लांट, ऑक्सीजन की कमर्शियल सप्लाई के वास्ते है. लेकिन इन दिनों वो अस्पतालों को ऑक्सीजन सप्लाई करने में लगे हुए हैं, और साथ ही कोई अगर निजी रूप से उनके पास ख़ाली सिलेंडर लेकर आ रहा है, तो अभिषेक उसे भी सिलेंडर भर के दे रहे हैं. उन्होंने इस सेवा के कोई वर्किंग आवर्स भी नहीं रखे हैं. मतलब आप उनके पास 24 घंटे में कभी भी जा सकते हैं.

इसी तरह के एक शख़्स हैं शाहनवाज़. मुंबई के मलाड इलाक़े में रहते हैं. उन्होंने अपनी 22 लाख की गाड़ी बेच दी. किसलिए? ताकि उसके बदले मिले पैसों से मरीज़ों को ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचा सकें. भास्कर न्यूज़ के अनुसार गाड़ी बेचकर मिले पैसों से उन्होंने 160 ऑक्सीजन सिलेंडर ख़रीदकर ज़रूरतमंदों की हेल्प की. अब तक वो 4,000 के क़रीब लोगों की हेल्प कर चुके हैं.

तीसरे शख़्स हैं वाराणसी के अमन कबीर. ‘वाराणसी के कबीर’ और उनका वो दोहा तो मुंह ज़ुबानी याद होगा आपको, ‘परमारथ के कारणे, साधुन धरा शरीर’. ये इस 23 साल के शख़्स पर बिलकुल फ़िट बैठता है. अमन कबीर, जो बाइक से चलते हैं. अपनी बाइक को उन्होंने  एंबुलेंस बना लिया है. अजीब लगता है न? ‘बाइक एंबुलेंस’. कभी कभी उम्मीदों की पैकेजिंग वाक़ई बड़ी अजीब होती है. अमन कबीर का काम इस कोविड काल में बेशक बढ़ गया हो, लेकिन उनका परमार्थ, कोविड से कहीं पहले से चालू था. इंडिया टाइम्स के अनुसार कबीर रोड एक्सिडेंट में घायल हुए लोगों को हॉस्पिटल पहुंचाते हैं, मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार लोगों की मदद करते हैं. जबसे कक्षा 7 में थे, तबसे लोगों की हेल्प करते हैं. अपनी ‘बाइक एंबुलेंस’ के माध्यम से हज़ारों लोगों को हॉस्पिटल पहुंचा चुके कबीर बताते हैं,

मैंने शवगृह में एक दिन लाशों को पड़ा देखा. कोई भी उन्हें छूना नहीं चाहता था. मेरे लिए ये जीवन बदलने वाला क्षण था. तब से मैंने अपने जीवन का लक्ष्य जरूरतमंद और गरीबों की मदद करना बना लिया.

#5) पांचवी ख़बर उम्मीद के सबसे सुंदर घर की है. उम्मीद का सबसे सुंदर घर, जिसे देखना हो तो किसी नवजात की निश्चल आंखों में झांककर देखिए. नवजात, जो ‘महत्तम जीवन’ है. सुमन (परिवर्तित नाम) साढ़े सात महीने की प्रेग्नेंट थीं. वो 5 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हो गईं. परिजनों ने 9 अप्रैल को सुमन को भोपाल के चिरायु हॉस्पिटल में भर्ती कराया. 11 अप्रैल को सुमन की सिजेरियन डिलीवरी हुई. बेटी हुई. उसकी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई. लेकिन उधर कोरोना से सुमन की हालत बिगड़ने लगी. 15 अप्रैल को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. बच्ची प्री-मैच्योर थी. इस वजह से अस्पताल ने उसे ऑब्ज़र्वेशन में रखा. करीब एक हफ्ते तक उसे पाउडर वाला दूध पिलाया गया. पर डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को मां के दूध की ज़रूरत है. काफी खोजने के बाद, परिवार के एक शख्स ने पूरी बात बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला. पोस्ट वायरल हो गया, कई लोगों ने मां का दूध पहुंचाने की पोस्ट की. करीब 26 औरतों ने बच्ची को ब्रेस्ट फीड कराने की पेशकश की. कुछ महिलाओं ने ये पेशकश भी की जब तक बच्ची को दूध की ज़रूरत है तब तक वो उसे अपने पास भी रख सकती हैं. बाद में परिवार ने बताया कि बच्ची के लिए पर्याप्त दूध की व्यवस्था हो गई है.

# 6) ’बैर कराते मंदिर मस्जिद, मेल कराती मधुशाला.’ हरिवंश राय बच्चन अगर इस छठीं ख़बर को सुन लेते तो शायद मंदिर-मस्जिद को लेकर अपनी धारणा और कविता की ये लाइन दोनों बदल लेते. क्यूं? वजह बताते हैं. श्री स्वामीनारायण मंदिर. श्री ज्ञान जीवनदास जी स्वामी (कुंडलधाम) की प्रेरणा से श्री स्वामिनारायण मंदिर कारेलीबाग़, वडोदरा में कोरोना मरीजों की देखभाल और इलाज के लिए 50 बेड का कोविड केयर सेंटर चलाया जा रहा है.

Covid Facility At Temple
श्री स्वामीनारायण मंदिर, जिसे कोविड फेसिलिटी में तब्दील कर दिया गया.

ये तो हुई मंदिर की ख़बर. ठीक इतने ही यानी 50 बेड के हॉस्पिटल का निर्माण एक मस्जिद को भी ट्रांसफ़ॉर्म करके किया गया है. संयोग से ये मस्जिद भी गुजरात के वडोदरा शहर का ही है. जहांगीरपुरी इलाक़े के इस मस्जिद के ट्रस्टी इरफ़ान शेख़ ने ANI को बताया,

पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस के मामले काफ़ी बढ़ रहे हैं. ऑक्सीजन और बेड की भारी कमी हो रही है. इसी के चलते हमने इस मस्जिद को 50 बेड के COVID-19 सुविधा केंद्र में बदलने का फैसला किया है. ऐसा करने के लिए रमजान के महीने से बेहतर और कौन सा अवसर हो सकता था?

# 7) मुन्नाभाई MBBS के गीत की एक लाइन है:

जीवन है बर्फ़ की नैया. नैया पिघले हौले-हौले, चाहे हंस ले, चाहे रो ले. मरने से पहले जीना…

…सीख ले.

ये जो मरने से पहले जीना सीखने की कला है, यही तो उम्मीद है. और इसी बात की पुरज़ोर ताकीद कर रही हैं, भारत भर की ढेर सारी संस्थाएं ढेर सारे लोग. जिनके लिए जीवन देने से, जीवन बचाने से बड़ा, कम से कम इस वक्त तो, कोई और उद्देश्य नहीं है. ऐसी ही एक संस्था है. इंडिया केयर्स. संस्था या फिर एक ट्विटर हेंडल कह लीजिए.

ये हैंडल पिछले साल बना था. क्राउड सोर्सिंग मॉडल पर. कोविड की पहली वेव के दौरान. और उम्मीद थी कि एक बार कोविड केस कम हुए तो आगे काम न आएगा. और बीच में ऐसा हुआ भी. लेकिन दुखद रूप से 2021 में अप्रैल के आते-आते इस हैंडल को फिर से एक्टिव होना पड़ गया है. ‘इंडिया केयर्स’ कोविड केयर के मामले में डिमांड और सप्लाई दोनों ज़रूरतों का ख़्याल रख रहा है. 21 अप्रैल, 2021 को. ‘सिविल सर्विस डे’ के अवसर पर, ओडिशा के IPS अधिकारी अरुण बोथरा ने ट्वीट करते हुए सिविल सर्वेंट्स से इंडिया केयर के साथ जुड़ने का अनुरोध किया. इस विषय को लेकर 22 अप्रैल को जब लल्लनटॉप से उनकी बात हुई तो उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि अपनी कैपिसिटी के हिसाब से जितना हो सके लोगों की हेल्प करें. ज़रूरी नहीं कि ‘इंडिया केयर्स’ से ही जुड़ें. बस ज़रूरी है कि, यथोचित हेल्प करें. मास्क पहनें, वैक्सीन लगाएं.

इस पूरी स्टोरी को अमेरिकी कवियत्री लिंडा पास्तन की कविता के एक अंश से बांधने की कोशिश करेंगे. पढिए:

दुनिया में कहीं न कहीं

कुछ न कुछ घट रहा है ऐसा

जो खरामा-खरामा पहुंच ही जाएगा यहां तक.

बिना कागजात, बिना पासपोर्ट आ जाएगा कोई वायरस

और धर दबोचेगा मुझे, जब मैं मिला रही होऊंगी किसी से हाथ

या चूम रही होऊंगी कोई गाल.

मगर कहीं न कहीं, कुछ न कुछ घट रहा है ऐसा

जिसके खिलाफ नहीं है कोई तैयारी,

सिर्फ वही दोनों बुढ़ाते साज़िशकर्ता:

उम्मीद और किस्मत.


वीडियो: उम्मीद की बात: गुुजरात में चार महीने की ये प्रेग्नेंट नर्स लगातार कोरोना मरीजों की देखभाल कर रही हैं

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