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कोरोना काल के हाहाकार के बीच उम्मीद देती ये कहानियां

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार,

किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार.

किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार,

जीना इसी का नाम है!

ये है भारत के बेहतरीन गीतकारों में से एक शैलेंद्र के सबसे ज़िंदा गीत का मुखड़ा. क्या आज जैसी परिस्थितियों में जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य, बल्कि एक मात्र उद्देश्य, किसी का दर्द उधार ले लेने की भावना ही नहीं हो जाना चाहिए चाहिए? जो हो सके, जितना हो सके, करने की लालसा ही नहीं हो जाना चाहिए? देश के अलग-अलग कोनों से कुछ ऐसी कहानियां लाए हैं जो पूंजीपतियों की नहीं, धरा की पूंजी बन रहे लोगों की बात करती हैं. अन्यथा तो हम धरा के वास्ते लायबिल्टी ही हैं:

ते मृत्युलोके भुवि भारभूतः, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति.

# 1. पहली उम्मीद की बात, बालघाट से. जहां, कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा में कुछ युवा आगे आए हैं. इन्होंने एक 100 बेड का आइसोलेशन सेंटर स्थापित किया है. जिसमें वे एसिंप्टोमेटिक मरीजों को क्वारंटाइन करते हैं. इसके अलावा ये युवा सरकारी अस्पताल में भी भर्ती मरीजों को तीन टाइम निशुल्क भोजन उपलब्ध कराने के काम में तत्परता से जुटे हैं.

Balaghat Corona Patients Food
सरकारी अस्पतालों में खाना भी पहुंचा रहे हैं.

#2.  दूसरी उम्मीद की बात गुरुग्राम के इस्कॉन टेंपल से. जो कोविड प्रभावित लोगों और परिवारों को घर-घर भोजन वितरित कर रहा है. और इस सुविधा के लिए कोई शुल्क भी नहीं ले रहा. ये सब ‘कोविड फूड एड’ नाम की पहल के तहत हो रहा है, जो गुरुग्राम में अपनी तरह का एकमात्र कार्यक्रम है. इसकी शुरुआत 22 अप्रैल को हुई थी. इस्कॉन गुरुग्राम के अनुसार,

हर बीतते दिन के साथ डिमांड में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है. 26 अप्रैल को, 520 जगहों पर भोजन वितरित किए गए थे.

सोहना रोड पर सेक्टर 67 पर स्थित इस मंदिर के 10 किमी के दायरे में इस्कॉन के सदस्यों द्वारा ख़ुद भोजन डिलिवर किया जा रहा है. मंदिर के अनुसार, ‘इस पहल की प्रतिक्रिया दिल को छूने वाली और बहुत उत्साहजनक रही है.’

सेक्टर 65 में रहने वालीं श्रीमती श्वेता सिंह बताती हैं,

ये पहल एक वरदान सरीखा है. कोविड के कारण घर पर खाना बनाना संभव नहीं था. हमें घर पर ही पौष्टिक भोजन प्राप्त हो गया. हम अब पर्याप्त आराम कर सकते हैं और सिर्फ कोविड के इलाज पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं.

इस पहल का नेतृत्व इस्कॉन गुरुग्राम के मंदिर अध्यक्ष रामभद्र दास कर रहे हैं. कुल 20 स्वयंसेवक इसमें शामिल हैं, जिनमें 10 युवा भिक्षु शामिल हैं, जिनमें से तीन इंजीनियरिंग स्नातक हैं. प्रोफेशनल जगत से आने वाले इन स्वयंसेवकों के चलते प्रचार सामग्री, वेबपृष्ठ, भोजन अनुरोध फ़ॉर्म, प्रतिक्रिया फ़ॉर्म और भोजन वितरण का प्रारूप: सभी बहुत ही पेशेवर रूप से प्रबंधित किया जा रहा है. टीम में एक प्रमाणित आहार विशेषज्ञ भी है, जो कोविड रोगियों के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन सुनिश्चित करने के लिए मेनू का निर्माण कर रहीं हैं.

#3. रिश्ता दिल से दिल के ऐतबार का,  ज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार का. तीसरी उम्मीद की बात कुछ इंडीविजुअल्स से जुड़ी. यूं कि, जोदि तोर दक शुने केऊ ना ऐसे तबे एकला चलो रे.

#1.)पहले हैं शेफ सारांश गोइला. इन्होंने एक वेबसाइट चालू की है. covidmealsforindia.com.  इस वेबसाइट पर आप अपने शहर में कोविड मरीज़ तक घर का खाना पहुंचाने वाले होम शेफ या टिफ़िन सर्विस के बारे में जानकारी निकाल सकते हैं. यहीं से आप इन्हें वॉट्सऐप पर संपर्क भी कर सकते हैं. ये रेस्त्रां वग़ैरह को ऑनलाइन लाकर इनका फूड डिलिवरी बिज़नेस चालू करवाती है.

इस वक़्त covidmealsforindia.com 40 से ज़्यादा शहरों में फूड डिलिवरी सर्विस दे रहा है. इनके मुताबिक़ इस पोर्टल पर 900 से ज़्यादा खाना पहुंचाने वाले मौजूद हैं. अगर कोई टिफ़िन सर्विस या शेफ इसका हिस्सा बनना चाहते हैं तो वो इस पोर्टल पर खुद को रजिस्टर भी कर सकते हैं. हमें इस पोर्टल पर फ़्री खाना पहुंचाने वालों के साथ-साथ पेड सर्विस देने वाले भी मिले. खाना फ़्री है या नहीं, ये पता करने के लिए आपको टिफ़िन वाले से बात करनी पड़ेगी.

#2.)दूसरे इंडीविजुअल हैं मनोज कुमार. मध्य प्रदेश के भिंड के एसपी. इन्होंने घोषणा की है कि जो भी शादी 10 या 10 से कम लोगों की उपस्थिति में संपन्न होगी, ऐसी शादी के दूल्हा-दुल्हन को वो ना सिर्फ डिनर करवाएंगे, बल्कि उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा. एसपी मनोज कुमार के मुताबिक वह इस तरीके से शादियों में भीड़ को रोकने में काफी सफल रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई है कि भिंड की जनता इस प्रयास में और सहयोग करेगी.

#3.)उम्मीद की बात में तीसरे शख़्स हैं, अमित कुमार. पटना में निःशुल्क ऑक्सीजन रिफिलिंग की सेवा मुहैया करवा रहे हैं. इनका व्हाट्सएप नम्बर 7488029777 है. अमित कुमार अपने फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल में लिखते हैं कि उन्हें एक घंटे के 680 फोन आ रहे हैं और ये अपनी क्षमता के मुताबिक काम कर रहे हैं.

#4.)प्यारे खान. अब तक नागपुर और उसके आसपास के सरकारी अस्पतालों में 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचा चुके हैं. उनका कहना है कि वे रमज़ान के पवित्र महीने में ‘ऑक्सीजन ज़कात’ कर रहे हैं. प्यारे खान की कंपनी के पास 300 ट्रांसपोर्ट ट्रक हैं. खान ने अपने ही कई सारे ट्रकों के जरिए अलग-अलग अस्पतालों में प्राणवायु पहुंचाई. लिक्विड ऑक्सीजन दान देने के साथ ही प्यारे खान एम्स, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज को 116 ऑक्सीजन कन्सट्रेटर देने की योजना भी बना रहे हैं. इनकी कीमत करीब 50 लाख रुपए है. प्यारे खान ने 1995 में नागपुर रेलवे स्टेशन के बाहर संतरे बेचने के साथ अपने काम शुरुआत की थी. उन्होंने रिक्शा भी चलाया. आज 400 करोड़ रुपये स्टेक वाली कंपनी के मालिक हैं.

#5.)पांचवे शख़्स की जानकारी हमें भेजी आजतक के पत्रकार, प्रमोद कारपेंटर ने. राकेश ठाकुर मध्यप्रदेश के आगर शहर में अपने छोटे भाई सब इंस्पेक्टर संजय ठाकुर के साथ रहते हैं. पेशे से अध्यापक राकेश को जब पता चला कि वे कोरोना से संक्रमित हो गए हैं तो सेल्फ़ आइसोलेशन के दौरान नकारात्मकता दूर करने का अनोखा इलाज खोजा. पेड़-पौधों के प्रति हमेशा से प्रेम रखने वाले राकेश ने अपने पास बने एक बगीचे में पेड़-पौधों की देख रेख करना शुरू कर दिया.वो कहते हैं कि उन्हें इससे पॉज़िटिव एनर्जी के साथ साथ अपने ऑक्सीजन लेवल को बरकरार रखने में काफी सहायता मिली. खाली समय में वे योग करके भी खुद को तंदुरुस्त रखने का प्रयास किया करते हैं. पर्यावरण प्रेमी, अध्यापक अब कोरोना की लड़ाई जीतकर पूरी तरह स्वस्थ है.

#6.)छठे शख़्स हैं, पैट कमिंस. ऑस्ट्रेलिया के पेस बोलर है. मौजूदा ICC टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक पर हैं. ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के वाइस कैप्टन हैं. पिछले ऑक्शन में कोलकाता नाइट राइडर्स ने साढ़े 15 करोड़ में खरीदा था. इस बार भी KKR के लिए ही खेल रहे हैं. भारत के PM केयर फंड में 50,000 डॉलर्स का दान कर रहे हैं. मतलब क़रीब सैंतीस लाख रुपए. इस बात की जानकारी पैट ने एक ट्वीट के माध्यम से दी. पैट ने अपने ट्वीट में बाकी खिलाड़ियों से भी ऐसा करने का अनुरोध किया है.

#7.)सातवें शख़्स हैं रवि. रांची में ऑटो चलाते हैं. ANI के अनुसार, 15 अप्रैल से कोविड मरीज़ों को हॉस्पिटल तक फ़्री में राईड उपलब्ध करवा रहे हैं. रवि बताते हैं कि 15 अप्रैल को एक कोविड रोगी को कोई RIMS (रांची इन्स्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़) हॉस्पिटल छोड़ने के लिए जब कोई तैयार नहीं हुआ तो उन्होंने उस रोगी को छोड़ा. तबसे ही वो रोगियों को हॉस्पिटल लाने ले जाने का कार्य कर रह हैं. वो भी फ़्री में. मुंबई पुलिस का ‘ट्विटर चेहरा’ कही जाने वाली संचिका पांडेय ट्वीट के माध्यम से लिखती हैं कि अगली बार अगर वो रांची गईं तो इस शख़्स, रवि के अलावा किसी और से राइड नहीं लेंगी.

#8.)आठवें शख़्स हैं एक बीड़ी वर्कर. इनका नाम अभी तक कोई नहीं जानता. इंडिया टुडे की एक ख़बर के अनुसार, ‘हालांकि इनकी पहचान अभी तक पता नहीं चल पाई है, लेकिन इनकी कहानी इंटरनेट और सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हो रही है.’ ऐसा क्या है इनकी कहानी में? केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के एक ट्वीट से पता चल जाता है. विजयन लिखते हैं-

CMDRF (राज्य का राहत कोश) को दान मिलने की कई भावुक करने वाली कहानियां सामने आ रही हैं. एक बुजुर्ग व्यक्ति के बैंक खाते में 200,850 रूपये थे, जिसमें से उन्होंने दो लाख रूपये दान कर दिए हैं. एक दूसरे के प्रति ये प्रेम ही हमें बाक़ियों से अलग करता है. एक बार फिर, आप में से हरेक को शुक्रिया!

जिन बुजुर्ग व्यक्ति की बात CM अपने ट्वीट में कर रहे हैं, वही ये अनाम शख़्स हैं. इन बुजुर्ग के बारे में ये भी पता चला है कि जब ये बैंक में पैसे ट्रांसफ़र करवाने के वास्ते आए तो बैंक के कर्मचारी भी आश्चर्यचकित थे और पैसे ट्रांसफ़र करने से हिचकिचा रहे थे. लेकिन इन बुजुर्ग ने जोर देकर कहा कि उनके पैसे को CMDRF को हस्तांतरित किया जाए. वो तो अभी भी बीड़ियां बनाकर अपना जीविकोपार्जन कर सकते हैं.

कहते हैं कि बुद्ध अब भी मोक्ष के बाहर वाले द्वार में बैठे हैं. कि, “जब तक एक-एक जीव की उस द्वार से अंदर एंट्री नहीं हो जाती, मैं अंदर नहीं जा सकता.” ये बात लक्षणा में कही गई है, पर इसके मायने स्पष्ट हैं. मोक्ष तो बहुतों को मिला है, इनलाइटेंड तो हर क्षण हज़ारों हो रहे हैं. कोई आश्रम में, कोई हिमालय में, कोई जंगल में. लेकिन जिसने औरों को इनलाइटेंड किया, जिसने औरों के साथ मोक्ष शेयर किया, उसे ही ईश्वर की उपाधि मिली है. फिर चाहे वो कृष्ण हों, महावीर हों या बुद्ध. सिद्ध है कि करुणा, परोपकार, और दया, किसी भी मोक्ष से भी बढ़कर है.


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