Submit your post

Follow Us

यूपी की 'ऑक्सीजन गर्ल' जैसे कोविड सुपरहीरोज़ की कहानियां, जिन्हें पढ़कर कहेंगे - I Love You 3000

# जब तक दुनिया में एक मिल्ट्री टैंक एसेंबल हो रहा होता है, तब तक 1 लाख 31 हज़ार सॉफ़्ट टॉयज़ का बन चुकते हैं.

# जब तक किसी एक जगह तारबाड़ी की जाती है, तब तक 15 लाख सुस्वागतम् वाली पायदानें बिछाई जा चुकती हैं.

# इंटरनेट पर प्रेम और उम्मीद, भय और घृणा से ज़्यादा सर्च किए जाते हैं.

# और उस दौरान जब कुछ गिनती के लोग ‘दुनिया का अंत’ डिस्कस कर रहे होते हैं, तब क़रीब 50 लाख लोग नववर्ष की शुभकामनाओं वाले मैसेज भेजने में व्यस्त होते हैं.

एक दशक पहले कोका-कोला का एक विज्ञापन आया था, ‘उम्मीदों वाली धूप, सनशाईन वाली आशा.’ उसमें ऐसे ही कुछ उम्मीदों से लबरेज़ फ़ैक्ट्स थे. इस महमारी जैसे बुरे दौर के बीच उम्मीदों की बात करते ऐसे ही कुछ फ़ैक्ट्स हम भी जुटाते आ रहे हैं. लेकिन वो फ़ैक्ट्स हम आपको स्टेटिस्टिक्स के माध्यम से नहीं स्टोरीज़ के माध्यम से बताते हैं. आज़ फिर से हम आपके साथ ऐसे ही कुछ फ़ैक्ट्स शेयर करेंगे. उन लोगों और संस्थाओं से जुड़े, जो इकलौती तारबाड़ी के बीच लाखों सुस्वागतम् वाली पायदानें हैं. क्यूंकि अगर कोविड, थानोस सरीखा सुपरविलेन है तो उसके एंडगेम के वास्ते सारे सुपरहीरोज़ लगेंगे. और शो शुरू करने से पहले इन लाखों सुपरहीरोज़ से हमें कहना है: लव यू थ्री थाउजेंड…

#1. पहली उम्मीद की बात महराष्ट्र से. कोविड तो लोगों की जिंदगियां ले ही रहा है, लेकिन अब इसका बाई प्रोडक्ट ‘म्यूकर माइकोसिस’ यानी ब्लैक फ़ंगस भी लोगों को डरा रहा है. ऐसे में पहली उम्मीद की बात इसी ब्लैक फ़ंगस के इर्द गिर्द. और ये बात है बारामती के डोर्लेवाडी गांव की. यहां के संतोष हरिहर कुछ दिन पहले कोरोना संक्रमित पाए गए. इलाज के दौरान उन्हें ब्लैक फंगस के लक्षण भी दिखने लगे और उनकी नज़र कमज़ोर होने लगी. तुरंत ऑपरेशन करके संतोष की आंख बचाई जा सकती थी और ऑपरेशन के लिए चाहिए थे तकरीबन पांच लाख रुपये. कई लोगों को ‘आंखों की रोशनी’ की तुलना में ये पाँच लाख रुपए बहुत छोटी रक़म लग सकती है. लेकिन संतोष के गरीब परिवार के लिए ये पैसे जुटाना, वो भी बहुत कम समय के भीतर, लगभग असंभव था. इसलिए उन्होंने ऑपरेशन के लिए अपनी असमर्थता जताई.

Santosh's Friends
संतोष के दोस्तों ने एक दिन में रकम जुटा ली. फोटो – आज तक

ये बात संतोष के दोस्तों को मालूम पड़ी तो उन्होंने तुरंत अस्पताल जाकर डॉक्टर से मुलाकात की और उन्हें ऑपरेशन की तैयारी करने के लिए कहा. लेकिन फिर पता चला कि ऑपरेशन बारामती में नहीं हो सकता था. तो उधर संतोष को पुणे ले जाकर वहां के सह्याद्री अस्पताल में भर्ती कराया गया. और इधर उसके दोस्तों और परिवार वालों ने गांव के एक व्हाट्सएप ग्रुप में ऑपरेशन के लिए चंदे की अपील कर डाली. इस अपील का असर ये हुआ कि संतोष के दोस्तों के पास सिर्फ़ एक दिन के भीतर ही ऑपरेशन के वास्ते पर्याप्त रक़म इकट्ठा हो गई.

Santosh
संतोष का ऑपरेशन सफल रहा. फोटो – आज तक

पुणे से भी अच्छी ख़बर आई. संतोष का आंखों का ऑपरेशन सफल हो गया था. दोस्तों को तो लल्लनटॉप का सलाम है ही. साथ ही FB, ट्विटर के बाद अब व्हाट्सऐप से भी जिंदगियों के बचने की ख़बर आना एक और खूबसूरत फ़ैक्ट की ताकीद करता है. कि व्हाट्सएप के माध्यम से जितने हेट मैसेज में फ़ॉर्वर्ड किए जाते हैं, शायद उससे हज़ारों गुना मैसेज़ेस, गुड मॉर्निंग, गुड नाइट और त्योहारों की शुभकामनाओं वाले होते हैं. यक़ीन न आए तो अपने फ़ैमली और फ़्रेंड्स वाले ग्रुप को स्क्रॉल करके देख लीजिए. और वो ग्रुप भी, जिसके सामने हर रंग से लिखा है 449 अनरीड मैसेज़ेस.


#2. दूसरी स्टोरी राजस्थान से. यहां के धौलपुर जिले में कई ऐसे मंदिर हैं जिसके आसपास बड़ी संख्या में बंदर हैं. इन जगहों में मचकुंड मंदिर, वन विहार, तलाबशाही, निभी का ताल जैसे इलाक़े शामिल हैं. इसके अलावा यहां के डांग क्षेत्र में जंगली जानवर भी रहते हैं. इन सभी की खाने-पीने व्यवस्था श्रद्धालुओं के माध्यम से होती आई थी, लेकिन अब लॉकडाउन के चलते इनके सामने भूखमरी की स्थिति बन सकती थी.

Dhaulpur Rajasthan
श्रद्धालु बंदरों और अन्य जानवरों के लिए खान पहुंचा रहे हैं. फोटो – आज तक

बन सकती थी, लेकिन बनी नहीं. क्यूंकि यहां के समाजसेवी इन जानवरों के लिए रोज़ केला, चना और बिस्कुट के साथ बाकी खाने-पीने के सामानों की व्यवस्था कर रहे हैं. ये समाजसेवी हर रोज़, बिला नागा, अपने-अपने वाहनों में पशु-पक्षियों के लिए खाद्य सामग्री लेकर जाते हैं और पशु-पक्षियों को बड़े प्यार से खिलाते हैं. धौलपुर के ये समाजसेवी शहरी पशु-पक्षियों के साथ-साथ बीहड़ क्षेत्र में विचरण कर रहे जंगली जानवरों का भी पेट भरने का काम कर रहे हैं. उम्मीद की बात में दूसरा फ़ैक्ट ये कि जहां हमेशा न्यूज़ में रहने वाली कंगना जैसी सैलिब्रिटी तक के इंस्टाग्राम पर 7.6 मिलियन फ़ॉलोवर्स हैं वहीं एक ‘बेज़ुबान’ पपी, ‘जिफ़’ को 10 मिलियन से ज़्यादा लोग फ़ॉलो करते हैं.


#3.  मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में युवाओं के कई टोलिया उम्मीद की बात बन रही हैं. इनके बारे में कंपाइल करके स्टोरी भेजी है टीवी टुडे नेटवर्क के संवाददाता धर्मेन्द कुमार शर्मा ने. इनमें से कई युवाओं ने तो अपनी पूरी जमा पूंजी तक इस कार्य में लगा दी है. ये युवा इन दिनों या तो किसी मरीज़ के सिलेंडर में ऑक्सीजन भरवाने में मदद करते हुए दिख जाएंगे या हॉस्पिटल्स में मरीज़ के परिजनों को भोजन खिलाते. कोई होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज़ के घर में खाना पहुंचा रहा है तो कोई उनके लिए दवाओं की व्यवस्था करने में लगा है.

Indore Mp
लोगों को अब इन युवाओं का इंतज़ार रहता है. फोटो – आज तक

अनुराग प्रताप ठाकुर, राज ठाकुर और महिपाल सिंह ने इन युवाओं को एकत्रित किया और लोगों के बीच मास्क, सेनेटाइजर वग़ैरह का वितरण करवाया. साथ ही जिन लोगों को ऑक्सीजन की कमी पड़ी रही थी उन्हें ऑक्सीजन भी मुहैया करवाई. पिछले क़रीब एक महीने से इन युवाओं की दिनचर्या ऐसी हो चुकी है कि निश्चित समय में निश्चित अस्पतालों और स्थानों पर जरूरतमंदो को अब इन युवाओं का इंतजार रहने लगा है. ये युवा कोविड मरीज़ के परिजनों और ग़रीबों को वितरित किया जाने वाला भोजन शहर के अलग-अलग स्थानों से बनाकर लाते हैं.
ये सभी युवा कोविड की पहली वेव के दौरान भी इंदौर बायपास पर सेवा करते नजर आते थे.

उम्मीद की बात का तीसरा फ़ैक्ट युवाओं की टोलियों को बदनाम करने वालों के लिए. फ़ैक्ट जिसमें सांख्यिकी नहीं है. और फ़ैक्ट ये कि इतिहास खंगाल कर देख लीजिए, लगभग सभी क्रांतियों, सभी शांतियों और सभी नए विचारों का जन्म युवाओं के माध्यम से ही हुआ है. और ये वाली स्टोरी ही नहीं, अगली स्टोरी भी इसी पॉईंट को सिद्ध करती है.


#4. चौथी स्टोरी है जम्मू कश्मीर से. यहां कोरोना कर्फ़्यू के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. ऐसे में उधमपुर के एक युवक राकेश कुमार अपने एक और दोस्त के साथ गांव-गांव जाकर फल और सब्ज़िया बेच रहे हैं. ‘नो लॉस- नो प्रॉफ़िट’ बेसिस पर. और उनका सब्ज़ी का ठेला बनी है, उनकी ऑल्टो कार. जिसे उन्होंने हाल ही में ख़रीदा था. राकेश कुमार पहले मंडी से ताजे फल और सब्जियां खरीदते हैं और फिर अपनी कार में सब्जियां और फल लोड करके उसे गांव-गांव बेचने को निकल पड़ते हैं. राकेश और उनके दोस्त एक दिन में लगभग 20 गांवों को कवर करते हैं. इस डोरस्टेप डिलीवरी सिस्टम से पहले गांव के लोगों को ताजी सब्जियों और फलों की ख़ातिर कोरोना कर्फ़्यू की अवहेलना करके बाजारों में जाना पड़ रहा था.

Rakesh Kumar
नो लॉस- नो प्रॉफ़िट बेसिस पर सब्जियां बेच रहे हैं. फोटो – आज तक

#5.  पांचवी स्टोरी अर्शी की. जिनको उनके इस नाम से कम ही लोग जानते हीं. उनका अब एक दूसरा नाम है, एक दूसरी उपाधि है, ‘ऑक्सीजन सिलेंडर वाली बेटी’. अर्शी की स्टोरी के बारे में आगे जानने से पहले याद कीजिए गोर्की की ‘मां’. उसमें एक व्यक्ति की पीड़ा अंत में पूरे समाज का आइन बन जाती है. या ‘मां’ नहीं तो याद कीजिए कोई भी विश्व प्रसिद्ध नॉवेल या कहानी. हर महान कहानी में एक चीज़ कॉमन होती है, निजी का सामाजिक हो जाना. अर्शी की इस स्टोरी में भी यही हुआ, स्टोरी उत्तर प्रदेश के शाहजहापुर की है. अर्शी के पिता कोविड पॉज़िटिव हुए तो उनके लिए ऑक्सीजन सिलेंडर्स का इंताज़ाम करते हुए अर्शी ने काफ़ी दिक़्क़तों का सामना किया. लेकिन इस दौरान सारे ताम-झाम को भी समझ लिया. और अब अर्शी ने ऑक्सीजन सिलेंडर्स की व्यवस्था करना ही अपना मिशन बना लिया है. अपने या अपने पिता के लिए नहीं, बाकी अंजान कोविड पेशेंट्स के लिए. अपने स्कूटर पर दौड़ भाग करने वाली ये लड़की अब तक 20 लोगों की जिंदगियां बचा चुकी हैं. और इनकी मदद का दायरा सीमा के उस पास उत्तराखंड तक फैला हुआ है. अब ‘ऑक्सीजन सिलेंडर वाली बेटी’ के इस मिशन में उनके दो भाई और कुछ और लोग भी जुड़ गए हैं.

Arshi Khan
अब तक 20 लोगों की जान बच चुकी हैं अर्शी. फोटो – आज तक

रमज़ान के दौरान जब अर्शी के अब्बू के लिए सिलेंडर की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी तब वो व्हाट्सऐप के माध्यम से उत्तराखंड स्थित एक सामाजिक संगठन के संपर्क में आई. इसी संगठन ने उनके पिता को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई. इस घटना के बाद अर्शी को एहसास हुआ कि कोविड रोगियों के परिवार वालों को ऑक्सीजन के लिए क्या-क्या झेलना पड़ रहा होगा.

तब से ही वो भी शाहबाद, हरदोई और उत्तराखंड के कई मरीज़ों को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाने में लग गईं. वो ये सारी सेवा निःशुल्क कर रही हैं. शाहजहांपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एसपी गौतम से लेकर समाजवादी पार्टी के शाहजहांपुर जिलाध्यक्ष तनवीर खान तक अर्शी को एप्रीशिएट कर चुके हैं. वैसे स्टोरी के अंत में एक और अच्छी बात जान लीजिए कि अर्शी के पिताजी अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और आज का चौथा फ़ैक्ट ये कि अब भी भारत में कोविड के 100 रोगियों में से 99 के क़रीब रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं. पेन इंडिया के अलावा कोविड हब कहे जाने वाले राज्य जैसे, दिल्ली, महाराष्ट्र और यूपी में कोविड के केसेज़ तेज़ी से घट रहे हैं. हालांकि कोविड के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई अब भी ख़त्म नहीं हुई है. बल्कि गावों और क़स्बों में तो ये और भी इंटेंस होती जा रही है. इसलिए उम्मीद और सावधानी दोनों को अपना दोस्त बनाकर चलिए.


#6. अगली स्टोरी पंजाब के अमृतसर शहर से. ‘मिशन कोविड कैंटीन’ के अंतर्गत यहां जंडियाला गुरु के डीएसपी सुखविंदर पाल सिंह की ओर से होम आइसोलेटेड मरीज़ों के लिए खाना तैयार किया गया और इसे घर-घर जाकर बांटा गया. इसके अलावा अमृतसर पुलिस ने भी कोविड मरीजों के लिए खाना बनाने की शुरुआत की है. पंजाब पुलिस द्वारा दी जा रही भोजन की निःशुल्क होम डिलीवरी की ये सुविधा लोगों को 112 और 181 पर कॉल करने पर मिल रही है.

Punjab Police
होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीजों तक खाना पहुंचा रही है पुलिस. फोटो – आज तक

#7.  अगली उम्मीद की बात धारावी की शाहीन जमादार के बारे में. शाहीन मुंबई के स्लम एरिया धारावी में पिछले 20 सालों से रह रही हैं. वैसे तो 6 साल पहले उन्होंने लोगों की हेल्प करने के वास्ते एक NGO जॉईन किया था लेकिन लोगों की निजी तौर पर हेल्प वो उससे पहले से ही करती आ रही हैं. कोविड महामारी की शुरुआत, यानी पिछले साल, से ही शाहीन ‘एनरिच लाइव्स फाउंडेशन’ के साथ काम कर रही हैं. ये संगठन लॉकडाउन के पहले सप्ताह के दौरान शुरू हुआ था. तब, जब लाखों प्रवासी श्रमिकों और मजदूरों को नौकरियों से निकाल दिया गया था. पूरी तरह से क्राउडफंडेड ये संगठन, तब से अब तक 35 हज़ार से अधिक परिवारों को राशन, 10 लाख लोगों को पका हुआ भोजन और 50 हज़ार सैनिटरी पैड और मास्क सहित 5 करोड़ रूपये के क़रीब की राहत सामग्री वितरित कर चुका है.

Shaheen
पिछले साल से शाहीन लोगों की मदद कर रही हैं. फोटो – इंडिया टुडे

पिछले कुछ हफ्तों से शाहीन ‘7 हिल्स’ हास्पिटल में थीं. कोविड की दूसरी लहर ने उन्हें भी अपनी चपेट में ले लिया था. लेकिन अस्पताल के बिस्तर पर बैठकर भी वो धारावी के ज़रूरतमंद लोगों के साथ लगातर संपर्क में थी. उनको फ़ोन पर ही एसिस्ट करतीं, उनका आधार कार्ड लेतीं और डिटेल्स भरतीं. उनके फ़ील्ड वर्क को उनके 15 साल के बेटे और पति ने संभाला हुआ था.

हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद भी उनकी रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आई है. चूंकि धारावी के उनके घर में एक ही कमरे में 5 लोग रहते हैं, इसलिए उन्होंने अपने भाई के घर, डोंबिवली जाकर रहने का फैसला किया है. इस दौरान वो सारे ऐसे काम वहीं से निपटाएंगी, जिसमें उन्हें फ़िज़िकली उपस्थित होने की ज़रूरत नहीं होगी. और बाकी काम के लिए अब उनके पास उनके पति और बेटे हैं हीं. हालांकि वो कहती हैं कि,“मैं बेहतर महसूस कर रही हूं और पूरी तरह से ठीक होते ही फिर काम पर लग जाऊंगी.”


#8. अंतिम उम्मीद की बात झारखंड से. ‘सिर्फ़ जागरूकता’ लोगों को बोरिंग लग सकती है. ‘सिर्फ़ इंटरटेनमेंट’ लोगों को उद्देशहीन लग सकता है. इसलिए ही जागरूकता और इंटरटेनमेंट का कॉकटेल ख़ूब पसंद किया जाता है. याद है न पंचतंत्र की वो रोचक कहानियां जिसे पूरी क्लास ध्यान से सुनती थी और अंत में दोहराती भी थी कि “इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है…”

ऐसा ही ‘एंटरटेनमेंट और अवेयरनेस’ का कॉम्बो तैयार किया है रांची के इंटरनेशनल पपेट आर्टिस्ट चंद्रदेव सिंह ने अपने पपेट शोज़ के माध्यम से. जिसमें वो लोगों को रुचिकर तरीक़े से कोरोना वायरस से बचाव और कोविड के दुष्परिणामों को लेकर जागरूक कर रहे हैं.

Puppet Show
आर्टिस्ट चंद्रदेव सिंह पपेट शोज़ के जरिए जागरूकता फैला रहे हैं. फोटो – आज तक

याद रखिए, दुनिया का सबसे कमजोर इंसान दरअसल दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान है, क्यूंकि वो अपनी समस्त कमज़ोरियों के बीच भी सर्वाइव करता है. बाकी हिंदुस्तान के सरवाइवल इंस्टिक्ट के बारे में तो मुहम्मद इक़बाल 1905 में जो लिख गए थे वो आज एक सदी बाद भी उतना ही मौजू है, उतना ही रेलेवेंट हैं, और देखना सदियों बाद भी रहेगा:

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहां से,
अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशां हमारा
कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी,
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़मां हमारा.


वीडियो: शाहजहांपुर की ‘ऑक्सीजन सिलेंडर वाली बेटी’ बचा रही है कई ज़िंदगियां

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

तमिल जनता आखिर क्यों कर रही है 'फैमिली मैन-2' का विरोध, क्या है LTTE की पूरी कहानी?

जब ट्रेलर आया था, तबसे लगातार विरोध जारी है.