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कोरोना डायरीज़: 'टीवी से धार्मिक नफरत का ज़हर पी रहे अपने पिता को कैसे समझाऊं?'

Krishna Solo Pic Copy
कृष्ण ताखर

नाम – कृष्ण ताखर

काम – पी.एच.डी. स्कॉलर

जगह – चिड़ावा, राजस्थान

सब दोस्तों को नमस्कार. लॉकडाउन में घर बैठा हुआ नॉवल पढ़ रहा हूं. अल्बर्ट कामु का नॉवल ‘द प्लेग’. कोरोना महामारी के समय में इस नॉवल की अलग ही सार्थकता है. घर वालों के साथ बैठकर हर रोज़ एक कहानी भी पढ़ता हूं. सुबह झाड़ू-पोंछा करवा देता हूं. लॉकडाउन में मुझे कोई ऐसी प्रॉब्लम नहीं है. हां, थोड़ा रैस्ट्रिक्टेड महसूस कर रहा हूं. शाम के समय तो मन करता ही है कि बाहर का एक चक्कर लगा पाते. लेकिन अब क्या करें. सब बंद है, तो कोई बात नहीं. हम तो फिर भी अपने घर में बैठे हैं. उन मज़दूरों का सोचो, जो बेचारे अपने घर पहुंचने के लिए तरस रहे हैं. भूख-प्यास से लड़ रहे हैं. अब उनकी प्रॉब्लम के आगे अपनी बोर होने की प्रॉब्लम का क्या रोना रोएं. अच्छा नहीं लगता है.

# घर की औरतें लॉकडाउन से खुश हैं

मेरे परिवार वालों का अलग ही हिसाब-किताब है. मेरी पत्नी और मां तो खुश हैं लॉकडाउन से. बताइए! कह रही हैं कि पहले भी ऐसा कितना क्या बाहर जाना होता था. अपने घर में ही रहते थे. देखिए, हमारे घर में कोई बंदिश नहीं है. लेकिन यहां कस्बे का माहौल ही ऐसा है कि औरतों के लिए ज़्यादा ऑप्शन होते नहीं हैं. यहां शहर की तरह कोई मॉल कल्चर तो है नहीं. मेरी पत्नी कह रही हैं कि इस बहाने आप यूनिवर्सिटी के बजाए घर पर हो इतने लंबे टाइम के लिए. मेरी मां भी मेरे पिताजी के और मेरे घर पर होने से खुश है. मैं कल शाम को बैठा हुआ सोच रहा था कि यह कितना अजीब है. अपने इंडिया में औरत इसी में ही खुश हो जाती है कि परिवार साथ है. खुद का कोई इंट्रेस्ट, कोई पर्सनल स्पेस, कोई ख़ुशी, कोई ख़्वाब, कोई एस्पिरेशन, उनकी कुछ भी होती नहीं. फिर औरतों को इस ‘त्याग की देवी’  के खिताब में ही अच्छा लगने लगता है.

Krishna Family Photo
अपनी पत्नी पूनम और बेटे सरल के साथ कृष्ण

# पिताजी अफ़ीम ले रहे हैं

मेरे पिताजी पहले दोस्तों के साथ पूरा दिन ताश खेल रहते थे. घर में रहकर अब वे क्या करें? पढ़ने का शौक उनको है नहीं. प्राइम वीडियो, नेटफ्लिक्स पर उनके लिए कोई फिल्म लगा दूं, तो वो भी नहीं देखते. उनको टीवी देखने की आदत पड़ गई है. पूरा दिन खबरें देखते रहते हैं. और ख़बरों का तो आप लोगों को पता ही है आजकल. जो धार्मिक नफ़रत की अफ़ीम दी जा रही है जनता को.

टीवी देखते हुए मुझे आवाज़ लगाते हैं कि अरे कृष्ण, देख. ये इन मुस्लिमों ने ये क्या साजिश रच दी. ये लोग कोरोना जिहाद क्यों फैला रहे हैं. समझ नहीं आता कि उनको कहां से समझाना शुरू करूं. फिर भी बताया कि पापा, ये तब्लीग़ी जमात वाले एक नंबर के बेवकूफ हैं. लेकिन बेवकूफ़ी का कोई धर्म नहीं होता. अहमदाबाद के इस्कॉन मंदिर में 12,000 लोग इकट्ठे हो गए. थिरुवनंतपुरम में ‘अतुकल पोंगाला’ मनाने के लिए हज़ारों लोग भगवती मंदिर में आ गए. पहले मजनूं का टीला वाले गुरुद्वारे में, और फिर नांदेड़ वाले गुरुद्वारे में कितने सारे लोग जमा हो गए. मोरेना डिस्ट्रिक्ट में 1,500 लोग तेरहंवी के भोज में शामिल हो गए. लेकिन मीडिया क्या करती है? सिख गुरुद्वारे में ‘फंसे हुए’ होते हैं, और मुस्लिम दरगाह पर ‘छुपे हुए’ होते हैं.

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# भड़काऊ खबरें और फ़र्ज़ी वीडियो का जाल

उसके बाद इतनी सारी फ़र्ज़ी वीडियो फैला दी गईं. मुंबई की पुलिस वैन का पिछले साल का वीडियो है जहां एक वहशी मुजरिम ने पुलिस वाले पर थूक दिया था. उसको यह कहकर फैलाया कि मुस्लिम कोरोना फैलाने के लिए थूक रहे हैं. कोई पाकिस्तान का पुराना वीडियो था जिसमें कोई दिमागी रूप से बीमार व्यक्ति नंगा घूम रहा था. उसको यह कहकर फैलाया कि तब्लीग़ी जमात वाले अस्पताल में अश्लीलता का आतंक फैला रहे हैं. मैं पढ़ा-लिखा हूं. मेरे जैसे लोग गूगल पर सब चैक कर लेते हैं. जैसे ‘लल्लनटॉप’ का ‘पड़ताल’ सेक्शन है, या ऑल्ट न्यूज़ वाले भी जांच करते हैं. लेकिन मेरे पिताजी जैसे करोड़ों लोग तो इस सबको सच मान लेते हैं. ये धार्मिक नफरत का वायरस कोरोना की तरह फैलता जा रहा है.

कुछ दिन पहले फिर से पिताजी ने आवाज़ लगाई कि अरे कृष्णा, देख. हिंदू साधुओं को मार दिया गया. हिंदू खतरे में हैं. अब  देखिए, पहले झूठ फैला कि मुस्लिमों के गांव में हत्या हुई. फिर झूठ फैला कि शोएब नाम का मुस्लिम उसमें मुख्य आरोपी है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को यह साफ़ करना पड़ा कि आरोपियों में कोई मुस्लिम नहीं है. इसके बावजूद इन चैनल वालों ने उसमें हिंदू-मुस्लिम, हिंदू-मुस्लिम करना शुरु कर दिया. अभी कुछ महीने पहले दिल्ली में हिंसा हुई थी. जाने कितने दंगे होने के बाद इन लोगों को चैन आएगा? इसी वजह से इंडिया की इकॉनमी नीचे जा रही है. इंटरनेशनल इंवेस्टमेंट नीचे गिरती जा रही हैं. क्योंकि कोई भी कंपनी भाईचारे, शांति और अच्छी कानून व्यवस्था वाली जगह पर ही बिज़नेस करना चाहती है.

Krishna Parents
कोरोना वॉरियर्स को शुक्रिया कहने के लिए तालियां बजाते हुए कृष्ण के माता-पिता

# छतरी मोड़ो, देश जोड़ो

मैं पूछता हूं कि क्या केवल जर्नलिस्ट होने से किसी को झूठ फैलाने का और देश में आग लगाने का अधिकार मिल जाता है? प्रधानमंत्री भी कह रहे हैं कि देश में सब लोग एकजुट रहो. एकता बनाए रखो. लेकिन ये ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने वाले एंकर मान नहीं रहे. अपनी टीआरपी के लिए और चंद रुपयों के लिए ये देश में आग लगाते हैं. इन लोगों को रात को नींद कैसे आती है? अपने बीवी-बच्चों से नज़रें कैसे मिला पाते हैं ये लोग?

मेरे पिताजी दिल से बहुत अच्छे इंसान हैं. उनके मन में सबके लिए दया भावना है. उनको यह सब समझाता हूं, तो वे समझ जाते हैं. लेकिन अगले दिन फिर से चैनल वाले नई स्पेशल रिपोर्ट के साथ नई अफ़ीम देते हैं. मैं तो थक गया हूं. निराश भी हूं कि देश की छोड़ो, खुद मेरे घर में ये नफरत के कीटाणु फैल रहे हैं. इसलिए कल शाम को मैं छत पर गया. चुपचाप से टीवी की छतरी को दूसरी तरफ मोड़ दिया. सिग्नल बंद हो गए. पिताजी बोले कि पता नहीं, टीवी क्यों नहीं चल रहा. तो मैंने कह दिया कि लॉकडाउन खुलने के बाद रिपेयर करवाएंगे. मैं तो आप लोगों को भी यही कहूंगा कि ‘छतरी मोड़ो, देश जोड़ो’. जय हिंद.

Krishna Takhar
कृष्ण की छत पर मुड़ी हुई टीवी डिश और टीवी पर गायब सिग्नल

वीडियो देखें: कोरोना डायरीज़: लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए इसल लड़की के काम के आप फ़ैन हो जाएंगे   

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