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कोरोना डायरीज: जब शादी करने जा रहे बंदे ने मोदी को चिट्ठी लिखी, ‘मेरे घरवालों को समझाएं.’

रोहित कुमार
रोहित कुमार

नाम- रोहित कुमार

काम- मीडिया मैनेजर, ग्राम विकास स्कूल

पता- ओडिशा

शादी भारत में सिर्फ़ शादी नहीं होती. पर्सनल से कहीं आगे जाकर समाज का संस्कार और उत्सव हो जाती है. हमारे यहां शादी मतलब कई घरों का उत्सव. और उत्सवों के लिए ये समय सबसे मुश्किल है. पूरे देश में कर्फ्यू लगा हुआ है. पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर कहा है घर की लक्ष्मण रेखा ना लांघें. लेकिन शादी ऐसा सोने के हिरन जैसा आयोजन है कि इसके लिए कोई रेखा बेमानी है.

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मेरी शादी इसी साल 1 मई को तय हुई है. जब शादी तय हुई थी तब कोरोना का कहीं अता-पता था नहीं. हमारे यहां शादी की तैयारी महीनों पहले से शुरू हो जाती है. तो परिवार शादी की तैयारियों के बीच था, जब दुनिया और देश के दरवाज़े पर कोरोना ने दस्तक दी.

मैं एक जॉइंट फ़ैमिली में रहता हूं. चाचा परिवार के मुखिया हैं. सब तैयारियां ठप्प हैं. लेकिन मन में तो कोई कर्फ्यू होता नहीं. तो लिस्ट बनाई जा रही है कि बारात में कितनी गाड़ियां जाएंगी. कितने लोगों को बुलाना है. मैंने इस बात का विरोध किया. क्योंकि मुझे नहीं लगता कि इस महामारी के बीच सैकड़ों लोगों को इकठ्ठा करना कोई बहुत अच्छा आईडिया है. लेकिन एक मेरे कहने से कहां कुछ होता है. हमारे यहां शादियों में हिसाब बराबर किया जाता है. अच्छा, फलाने की शादी में दस गाड़ियां गई थीं, तो हमारे यहां से ग्यारह जाएंगी. नौ नहीं हो सकतीं.

घरवालों ने मेरी बात नहीं मानी. कहने लगे कि शादी में सबको बुलाना तो होगा ही. मेरा कहना ये था कि अभी एक छोटे से मंदिर में बिना भीड़ की शादी कर ली जाए.


फिर बयाने की बात आ गई. हमारे यहां अडवांस को बयाना कहा जाता है. गाड़ी, हलवाई, शामियाना, बैण्ड बाजा सबको बयाना दे दिया गया है. शादी का बयाना वापस नहीं होता.

तो मैंने कहा कि मेरे समझाए ना समझो, लेकिन मोदी जी के समझाए तो समझोगे. घर में सब लोग पुराने संघी हैं. चाचा भी मोदी जी को मानते हैं. इसलिए मैंने मोदी जी को चिट्ठी लिखी. और कहा कि ‘प्लीज़ मेरे घरवालों को समझाएं कि शादी में भीड़ करना ठीक नहीं है’

डाक ऑफ़िस भी बंद है. बताया गया कि दस दिन तो चिट्ठी यहां से हिलेगी नहीं. इसलिए मैंने पीएमओ की वेबसाइट पर भी चिट्ठी पोस्ट कर दी है. देखते हैं मोदी जी का क्या जवाब आता है.

घरवाले कह रहे हैं कि अब तक लाख रुपए का खर्चा वो कर चुके हैं. लड़की के घरवाले भी बयाना बट्टा सब दे चुके हैं. इसलिए शादी को टालना भी ठीक नहीं. पिछले साल मई में दादी गुज़र गई थीं. इसलिए शादी एक बार पहले ही टल चुकी है. लेकिन फिर भी मेरा मानना है कि कोरोना एक महीने में कमज़ोर नहीं होने वाला. और अगर हो भी गया तो भीड़ जुटाकर ख़तरा ही मोल लेंगे हम सब लोग. आप अपनी शादी को कैसे याद करते हैं? अच्छी याद के तौर पर. लेकिन मैं अपनी शादी को बुरे सपने की तरह याद नहीं करना चाहता. जहां हर कोई डरा सहमा हो. जहां हर कोई बीमारी से महज़ एक मीटर की दूरी पर हो.

# कोट-

देखना है कि किसकी चलती है? देश के मुखिया की, या परिवार के मुखिया की.


कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं. है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें. corona.diaries.LT@gmail.com


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